Class 10 geography Notes in hindI Chapter - 4
Chapter 4: कृषि / Agriculture
Chapter Introduction:
इस अध्याय में आप भारत में कृषि के महत्व तथा विभिन्न कृषि प्रणालियों के बारे में समझेंगे। साथ ही प्रमुख फसलों, कृषि विकास, तकनीकी सुधार, कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल भाषा में पढ़ेंगे।
नीचे अध्याय 4 कृषि के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
CLASS 10 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 4 : कृषि
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DETAILS |
INFORMATION |
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Textbook |
NCERT |
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Class |
Class 10 |
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Subject |
Geography |
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Chapter |
Chapter 4 |
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Chapter Name |
कृषि |
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Medium |
Hindi |
क्या आप Class 10 Geography Chapter 4 Notes in Hindi ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको कृषि अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप कृषि के प्रकार, प्रमुख फसलें, खाद्य एवं नगदी फसलें, कृषि सुधार तथा भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के महत्व के बारे में विस्तार से समझेंगे।
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
4.1 कृषि के प्रकार कौन-कौन से हैं?
4.1.1 प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि क्या है?
4.1.2 गहन जीविका कृषि क्या है?
4.1.3 वाणिज्यिक कृषि क्या है?
4.2 शस्य प्रारूप क्या है?
4.3 भारत की प्रमुख फसलें कौन-कौन सी हैं?
4.4 खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें कौन-सी हैं?
4.5 अखाद्य फसलें कौन-कौन सी हैं?
4.6 कृषि का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और उत्पादन में क्या योगदान है?
4.7 वैश्वीकरण का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ा है?
4.8 प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार क्या हैं?
Chapter Summary
इस अध्याय में आप भारत की कृषि व्यवस्था तथा उसके महत्व के बारे में समझेंगे। आप जानेंगे कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत गतिविधियों में से एक है और देश की बड़ी आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
आप कृषि के विभिन्न प्रकारों के बारे में पढ़ेंगे, जिनमें प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि, गहन जीविका कृषि तथा वाणिज्यिक कृषि प्रमुख हैं। प्रत्येक कृषि प्रणाली की अपनी विशेषताएँ और उपयोगिता होती है।
इस अध्याय में आप भारत की प्रमुख फसलों जैसे चावल, गेहूँ, मोटे अनाज, दालें, गन्ना, चाय, कॉफी, रबर, कपास और जूट आदि के बारे में भी समझेंगे। साथ ही खाद्य और अखाद्य फसलों के महत्व को जानेंगे।
आप शस्य प्रारूप तथा विभिन्न कृषि क्षेत्रों की विशेषताओं का अध्ययन करेंगे। इसके अतिरिक्त कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनाए गए प्रौद्योगिकीय एवं संस्थागत सुधारों के बारे में भी पढ़ेंगे।
अध्याय में कृषि के राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा उत्पादन में योगदान को भी समझाया गया है। कृषि न केवल खाद्यान्न उपलब्ध कराती है बल्कि अनेक उद्योगों के लिए कच्चा माल भी प्रदान करती है।
अंत में आप वैश्वीकरण के कृषि पर प्रभावों के बारे में जानेंगे। वैश्वीकरण के कारण कृषि क्षेत्र में नए अवसर उत्पन्न हुए हैं, लेकिन इसके साथ किसानों को कई नई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। यह अध्याय कृषि के महत्व और उसके विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायता करता है।
4.1 कृषि के प्रकार कौन-कौन से हैं?
कृषि क्या है? समझाइए :-
कृषि :- मानव की एक प्रमुख प्राथमिक आर्थिक क्रिया है, जिसके अंतर्गत फसलों की खेती और पशुपालन किया जाता है।
कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. कृषि से हमें अधिकांश खाद्यान्न प्राप्त होते हैं।
2. यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
3. चाय, कॉफी, मसाले जैसे कुछ कृषि उत्पादों का निर्यात भी किया जाता है।
4. कृषि पर देश की बड़ी आबादी की आजीविका निर्भर करती है।
उदाहरण :-
गेहूँ, चावल और दालें खाद्यान्न फसलें हैं, जबकि कपास उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करती है।
कृषि प्रक्रिया क्या है? इसके विभिन्न चरणों को समझाइए :-
कृषि प्रक्रिया :- वह क्रम है, जिसके द्वारा फसल उगाई जाती है। इसमें खेत तैयार करने से लेकर फसल प्राप्त करने तक के सभी चरण शामिल होते हैं।
कृषि प्रक्रिया के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं :-
1. जुताई :- खेत को जोतकर मिट्टी को भुरभुरा किया जाता है। इससे मिट्टी में हवा का संचार होता है।
2. बुवाई :- खेत में उपयुक्त बीज बोए जाते हैं। अच्छी उपज के लिए स्वस्थ बीज आवश्यक होते हैं।
3. निराई :- खेत से खरपतवार (अनचाहे पौधे) हटाए जाते हैं। इससे फसल को पोषक तत्व मिलते हैं।
4. सिंचाई :- फसल को समय-समय पर पानी दिया जाता है। पानी पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक है।
5. खाद या उर्वरक डालना :- मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए खाद या उर्वरक डाले जाते हैं।
6. कीटनाशक का प्रयोग :- फसल को कीटों और रोगों से बचाने के लिए दवाइयाँ छिड़की जाती हैं।
7. कटाई :- फसल पकने पर उसे काटा जाता है।
8. दलाई / गहाई :- कटाई के बाद बालियों से दाने अलग किए जाते हैं।
उदाहरण :-
गेहूँ की खेती में पहले खेत की जुताई की जाती है, फिर बीज बोए जाते हैं, सिंचाई व खाद दी जाती है और अंत में पकने पर फसल काटी जाती है।
कृषि प्रणाली क्या है? इसके प्रमुख प्रकार लिखिए :-
कृषि प्रणाली :- से तात्पर्य उस तरीके से है, जिसके अनुसार कृषि की जाती है। फसलों की प्रकृति, उद्देश्य, तकनीक और क्षेत्र के आधार पर कृषि प्रणाली के विभिन्न प्रकार होते हैं।
कृषि प्रणाली के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं :-
1. निर्वाह कृषि :- किसान अपने और परिवार की आवश्यकताओं के लिए खेती करता है। इसमें कम पूँजी और पारंपरिक साधनों का उपयोग होता है।
2. गहन कृषि :- सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन के लिए श्रम, खाद और सिंचाई का अधिक प्रयोग किया जाता है। यह अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में प्रचलित है।
3. वाणिज्यिक कृषि :- फसलों का उत्पादन बाजार में बेचने के उद्देश्य से किया जाता है। इसमें आधुनिक तकनीक, मशीनों और उर्वरकों का प्रयोग होता है।
4. रोपण कृषि :- बड़े क्षेत्र में एक ही फसल उगाई जाती है। अधिक पूँजी और श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
उदाहरण :-
भारत में चाय, कॉफी और रबर की खेती रोपण कृषि के अंतर्गत की जाती है।
4.1.1 प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि क्या है?
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि क्या है? समझाइए :-
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि :- वह कृषि प्रणाली है जिसमें किसान केवल अपने और अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खेती करता है।
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इसमें उत्पादन बहुत कम होता है।
2. किसान पारंपरिक कृषि उपकरणों जैसे हल, कुदाल आदि का प्रयोग करते हैं।
3. उन्नत तकनीक और आधुनिक मशीनों का उपयोग नहीं होता।
4. वर्षा पर अधिक निर्भरता होती है।
5. श्रम अधिक और पूँजी कम लगती है।
6. यह कृषि मुख्यतः ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में की जाती है।
उदाहरण :-
भारत के आदिवासी क्षेत्रों में छोटे किसान अपने परिवार के लिए धान, मक्का या बाजरा उगाते हैं, जो प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि का उदाहरण है।
कर्तन दहन प्रणाली / स्थानांतरित कृषि क्या है? समझाइए :-
कर्तन दहन प्रणाली :- को स्थानांतरित कृषि भी कहा जाता है। यह एक पारंपरिक कृषि प्रणाली है, जिसमें किसान भूमि को अस्थायी रूप से उपयोग करते हैं।
कर्तन दहन प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. किसान जंगल के एक भाग में पेड़ काटकर (कर्तन) भूमि साफ करते हैं।
2. कटे हुए पेड़ों और झाड़ियों को जला दिया जाता है (दहन)।
3. जली हुई राख मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है।
4. इस भूमि पर कुछ वर्षों तक खेती की जाती है।
5. जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान नई भूमि पर चले जाते हैं।
6. पुरानी भूमि को कुछ समय के लिए खाली छोड़ दिया जाता है ताकि वह फिर से उपजाऊ बन सके।
उदाहरण :-
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों (असम, मिज़ोरम, नागालैंड) में इस कृषि प्रणाली को झूम खेती कहा जाता है।
4.1.2 गहन जीविका कृषि क्या है?
गहन निर्वाह कृषि क्या है? समझाइए :-
गहन निर्वाह कृषि :- वह कृषि प्रणाली है जिसमें सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अधिक श्रम और आधुनिक साधनों का प्रयोग किया जाता है।
गहन निर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करना मुख्य उद्देश्य होता है।
2. अधिक पूँजी निवेश किया जाता है।
3. आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग होता है।
4. उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई की सुविधाओं का अधिक प्रयोग किया जाता है।
5. भूमि का उपयोग बार-बार किया जाता है।
6. यह कृषि प्रणाली प्रायः घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।
उदाहरण :-
भारत के पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में धान की खेती गहन निर्वाह कृषि का अच्छा उदाहरण है।
4.1.3 वाणिज्यिक कृषि क्या है?
वाणिज्यिक कृषि क्या है :-
वाणिज्यिक कृषि :- वह कृषि प्रणाली है जिसमें फसलों का उत्पादन बाजार में बेचने और लाभ कमाने के उद्देश्य से किया जाता है।
वाणिज्यिक कृषि के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं :-
1. इसमें आधुनिक कृषि निवेशों का प्रयोग किया जाता है।
2. अधिक पैदावार देने वाले बीजों का उपयोग किया जाता है।
3. रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक बड़े पैमाने पर प्रयोग होते हैं।
4. उत्पादन का उद्देश्य व्यापार और लाभ होता है, न कि केवल परिवार की जरूरतें।
5. वाणिज्यीकरण का स्तर प्रदेशों के अनुसार भिन्न होता है।
उदाहरण :-
हरियाणा और पंजाब में चावल एक वाणिज्यिक फसल है, जबकि ओडिशा में चावल को जीविका फसल के रूप में उगाया जाता है।
रोपण कृषि क्या है? समझाइए :-
रोपण कृषि :- वाणिज्यिक कृषि का एक प्रमुख रूप है, जिसमें बड़े क्षेत्र में एक ही फसल उगाई जाती है।
रोपण कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह वाणिज्यिक कृषि का प्रकार है।
2. इसमें विस्तृत क्षेत्र में एकल फसल उगाई जाती है।
3. इसमें अधिक पूँजी निवेश किया जाता है।
4. अधिक श्रम और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग होता है।
5. उत्पादन मुख्यतः बिक्री और निर्यात के लिए किया जाता है।
उदाहरण :-
भारत में चाय, कॉफी, रबर, गन्ना और केला प्रमुख रोपण फसलें हैं।
गहन निर्वाह खेती और वाणिज्यिक खेती के बीच अंतर बताइए :-
गहन निर्वाह खेती और वाणिज्यिक खेती के बीच निम्नलिखित अंतर हैं :-
आधार | गहन निर्वाह खेती | वाणिज्यिक खेती |
उद्देश्य | परिवार की आजीविका के लिए उत्पादन | लाभ कमाने व व्यापार के लिए उत्पादन |
भूमि जोत | छोटी और सीमित | बड़ी भूमि जोत |
तकनीक व उपकरण | पारंपरिक उपकरण (कुदाल, डाओ, खुदाई की छड़ी) | आधुनिक मशीनें और तकनीक |
उत्पादन का उपयोग | स्थानीय उपभोग/स्थानीय बाजार | निर्यात व दूरस्थ बाजार |
फसल चक्र | एक वर्ष में 2–3 फसलें | प्रायः एक ही फसल पर ध्यान |
प्रमुख फसलें | धान, गेहूँ | गन्ना, चाय, कॉफी |
4.2 शस्य प्रारूप क्या है?
भारत में कृषि ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं? समझाइए :-
भारत में कृषि कार्य मौसम के अनुसार किए जाते हैं। देश में मुख्यतः तीन कृषि (शस्य) ऋतुएँ पाई जाती हैं।
1. खरीफ ऋतु
2. रबी ऋतु
3. जायद ऋतु
खरीफ फसलें क्या हैं? समझाइए :-
खरीफ फसलें :- वे फसलें होती हैं जिन्हें मानसून ऋतु के साथ बोया जाता है।
खरीफ फसलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इन फसलों की बुवाई जून–जुलाई में मानसून के आगमन पर की जाती है।
2. इनकी कटाई सितंबर–अक्टूबर में की जाती है।
3. खरीफ फसलें वर्षा पर अधिक निर्भर होती हैं।
मुख्य खरीफ फसलें निम्नलिखित हैं :-
चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली, सोयाबीन
उदाहरण :-
चावल भारत की एक प्रमुख खरीफ फसल है, जिसे मानसून की वर्षा में बोया जाता है।
रबी फसलें क्या हैं? समझाइए :-
रबी फसलें :- वे फसलें होती हैं जो शीत ऋतु में बोई जाती हैं और ग्रीष्म ऋतु में काटी जाती हैं।
रबी फसलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इनकी बुवाई अक्टूबर से दिसंबर के बीच की जाती है।
2. इनकी कटाई अप्रैल से जून के बीच होती है।
3. इन फसलों को ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है।
4. सिंचाई की सुविधा इन फसलों के लिए बहुत आवश्यक होती है।
मुख्य रबी फसलें निम्नलिखित हैं :-
गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों
उदाहरण :-
गेहूँ भारत की एक प्रमुख रबी फसल है, जिसे सर्दियों में बोया जाता है और गर्मियों में काटा जाता है।
जायद फसलें क्या हैं? समझाइए :-
जायद फसलें :- वे फसलें होती हैं जो रबी और खरीफ ऋतु के बीच ग्रीष्म ऋतु में उगाई जाती हैं।
जायद फसलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये फसलें मार्च से जून के बीच बोई जाती हैं।
2. इन्हें उगाने के लिए सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है।
3. यह फसलें कम अवधि में तैयार हो जाती हैं।
4. जायद फसलें मुख्यतः सब्जियाँ और फल होती हैं।
उदाहरण :-
तरबूज, खरबूजा, खीरा, सब्जियाँ तथा चारे की फसलें जायद फसलों के प्रमुख उदाहरण हैं।
कृषि की मुख्य फसलें कौन-कौन सी हैं? समझाइए :-
कृषि में उगाई जाने वाली फसलों को उनके उपयोग के आधार पर तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है।
कृषि की मुख्य फसलें निम्नलिखित हैं :-
1. खाद्य फसलें :- ये फसलें लोगों के भोजन की आवश्यकता पूरी करती हैं। इनमें अनाज, दालें और तिलहन शामिल हैं।
उदाहरण :-
गेहूँ, चावल, मक्का, दलहन, तिलहन
2. नकदी फसलें :- ये फसलें बाजार में बेचकर आय प्राप्त करने के लिए उगाई जाती हैं। उद्योगों के लिए कच्चा माल भी प्रदान करती हैं।
उदाहरण :-
चाय, कॉफी, रबर, जूट, कपास
3. बागवानी फसलें :- इन फसलों में फल, फूल और सब्जियाँ शामिल होती हैं। ये पोषण और आय दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उदाहरण :- आम, केला, सेब, फूल, टमाटर, आलू
4.3 भारत की प्रमुख फसलें कौन-कौन सी हैं?
भारत में मुख्य फसलें कौन-कौन सी हैं :-
भारत में कृषि अत्यंत विविध है।
यहाँ मुख्य रूप से निम्नलिखित फसलें उगाई जाती हैं :-
खाद्य फसलें :- चावल, गेहूँ, मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, मक्का), दालें (अरहर, मूँग, उड़द, चना)
नकदी (वाणिज्यिक) फसलें :- चाय, कॉफी, गन्ना, तिलहन (सरसों, तिल), कपास, जूट,
बागवानी फसलें :- फल, फूल, सब्जियाँ
उदाहरण :-
उत्तर भारत में गेहूँ और चावल प्रमुख हैं, जबकि पश्चिम बंगाल और असम में चाय की खेती होती है।
चावल की खेती के लिए आवश्यक जलवायु, तापमान, वर्षा और क्षेत्र कौन से हैं :-
चावल भारत में प्रमुख खाद्य फसल है और दुनिया में चीन के बाद भारत इसका दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
चावल की खेती के लिए आवश्यक जलवायु, तापमान, वर्षा और क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
1. जलवायु :- यह एक उष्णकटिबंधीय फसल है। इसकी गीले मानसून में अच्छी वृद्धि होती है।
2. तापमान :- 25°C से ऊपर और अपेक्षित भारी आर्द्रता की आवश्यकता।
3. वर्षा :- 100 सेमी. से अधिक और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता।
4. खेती के क्षेत्र :- उत्तर और उत्तर-पूर्वी भारत के मैदान, तटीय क्षेत्र और डेल्टा क्षेत्र, सिंचाई के माध्यम से पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्से।
उदाहरण :-
पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र चावल की प्रमुख खेती वाले क्षेत्र हैं।
गेहूँ की खेती के लिए आवश्यक मृदा, तापमान, वर्षा और क्षेत्र कौन से हैं :-
गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। यह मुख्य रूप से उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भाग में उगाई जाती है।
गेहूँ की खेती के लिए आवश्यक मृदा, तापमान, वर्षा और क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
1. मृदा प्रकार :- जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी
2. तापमान :- वृद्धि के समय ठंडा मौसम कटाई के समय तेज धूप
3. वर्षा :- 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा
4. खेती के क्षेत्र :- दक्कन का उत्तर-पश्चिमी भाग, काली मिट्टी वाले क्षेत्र, गंगा-सतलुज का मैदान
मुख्य गेहूँ उत्पादक राज्य :- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान
उदाहरण :-
पंजाब और हरियाणा का पठारी क्षेत्र गेहूँ की प्रमुख खेती वाला क्षेत्र है।
भारत में मोटे अनाज और उनके महत्व के बारे में बताइए :-
भारत में उगाए जाने वाले प्रमुख मोटे अनाज निम्नलिखित हैं :-
ज्वार, बाजरा और रागी।
1. विशेषताएँ :- पोषक तत्वों की मात्रा इन अनाजों में अधिक होती है। ज्वार भारत में क्षेत्रफल और उत्पादन के हिसाब से तीसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है।
2. उपयोग :- मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में भोजन के लिए। पौष्टिकता के कारण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी।
उदाहरण :-
राजस्थान और महाराष्ट्र में बाजरा, कर्नाटक में रागी और महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में ज्वार की प्रमुख खेती होती है।
बाजरा की कृषि और उत्पादक राज्यों के बारे में बताइए :-
बाजरा :- भारत का एक महत्वपूर्ण मोटा अनाज है।
बाजरा की कृषि और उत्पादक राज्य के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. मृदा प्रकार :- बलुआ मिट्टी, उथली काली मिट्टी
2. मुख्य उत्पादक राज्य :- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा
उपयोग :-
1. मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में भोजन के लिए।
2. पोषक तत्वों से भरपूर, स्वास्थ्य के लिए लाभकारी।
रागी की कृषि और प्रमुख उत्पादक राज्यों के बारे में बताइए :-
रागी :- एक प्रमुख मोटा अनाज है जो विशेष रूप से शुष्क क्षेत्रों में उगाया जाता है।
रागी की कृषि और उत्पादक राज्य के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. मृदा प्रकार :- लाल मिट्टी, काली मिट्टी, बलुआ मिट्टी, दोमट मिट्टी, उथली काली मिट्टी
2. मुख्य उत्पादक राज्य :- कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश
उपयोग :-
1. रोटी और दलिया बनाने में उपयोग।
2. पोषण से भरपूर और स्वास्थ्यवर्धक।
मक्का की कृषि और प्रमुख उत्पादक राज्यों के बारे में बताइए :-
मक्का :- एक खरीफ फसल है जिसका उपयोग भोजन और चारे दोनों के लिए किया जाता है।
मक्का की कृषि और उत्पादक राज्य के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. तापमान :- 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस
2. मृदा प्रकार :- पुरानी जलोढ़ मिट्टी पर अच्छी तरह उगाई जाती है।
3. खेती के क्षेत्र :- बिहार में मक्का रबी में भी उगाई जाती है अन्य उपयुक्त क्षेत्र है गंगा-सतलज मैदान और कुछ मध्य भारत के भाग।
4. मुख्य उत्पादक राज्य :- कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना,
5. विशेषताएँ :- आधुनिक तकनीक, उच्च पैदावार वाले बीज, उर्वरक और सिंचाई से उत्पादन में वृद्धि हुई है।
भारत में दालों की खेती और प्रमुख उत्पादक राज्यों के बारे में बताइए :-
दालें भारत में सबसे अधिक उगाई जाने वाली और सबसे ज्यादा खाई जाने वाली प्रोटीन युक्त फसलें हैं।
दालों की खेती और प्रमुख उत्पादक राज्य के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. मुख्य दालें :- तुर (अरहर), उड़द, मूग, मसूर, मटर, चना
2. जलवायु और मिट्टी :- 1. कम नमी की आवश्यकता, शुष्क परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती हैं, अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।
खेती की विशेषताएँ :- फलीदार होने के कारण अन्य फसलों के साथ आवर्तन (rotation) में बोयी जाती हैं भूमि की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती हैं।
मुख्य उत्पादक राज्य :- मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक
भारत में गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ और उत्पादक राज्य कौन से हैं :-
गन्ना भारत की प्रमुख नकदी फसल है।
भारत में गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ और उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं :-
1. विशेषता :- भारत गन्ने का ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
2. जलवायु: गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है।
3. मृदा प्रकार: विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उग सकता है।
4. तापमान: 21°C से 27°C
5. वर्षा: 75 से 100 सेमी वार्षिक
6. मुख्य उत्पादक राज्य :- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु
भारत में तिलहन की खेती और मुख्य तिलहन कौन-कौन से हैं :-
भारत तिलहन का एक बड़ा उत्पादक देश है।
भारत में मुख्य तिलहन निम्नलिखित हैं :-
मूंगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी, सूरजमुखी
वैश्विक स्थिति :-
1. मूंगफली: चीन सबसे बड़ा उत्पादक, भारत दूसरा।
2. रेपसीड/सरसों: कनाडा प्रथम, चीन दूसरा, भारत तीसरा।
4.4 खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें कौन-सी हैं?
भारत में चाय की खेती और प्रमुख चाय उत्पादक राज्य कौन-कौन से हैं :-
चाय भारत की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है।
भारत में चाय की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ और उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं :-
1. जलवायु: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय (गर्म और आर्द्र)।
2. मृदा प्रकार: गहरी, उपजाऊ, ह्यूमस और कार्बनिक पदार्थों में समृद्ध मिट्टी।
3. वर्षा: 150 से 300 सेमी वार्षिक; उच्च आर्द्रता और पूरे वर्ष समान रूप से वर्षा।
4. प्रमुख उत्पादक राज्य: असम और पश्चिम बंगाल।
नोट :-
विश्व स्थिति: 2020 में चाय उत्पादन में चीन प्रथम, भारत दूसरा।
भारत में कॉफी की खेती के बारे में बताइए :-
कॉफी भारत की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है।
भारत में कॉफी की खेती के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. खेती का तरीका: चाय की तरह कॉफी भी बागानों में उगाई जाती है।
2. प्रथम किस्म: यमन से अरेबिका किस्म की कॉफी।
3. प्रारंभिक क्षेत्र: शुरुआत में बाबा बूदन पहाड़ियों में उगाई गई।
भारत में बागवानी फसलों के बारे में बताइए :-
बागवानी फसलें :- भारत में फल और सब्जियों की खेती को कहते हैं।
भारत में बागवानी फसलों की खेती के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. उत्पादन में स्थिति: 2017 में भारत विश्व में फलों और सब्जियों के उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान।
2. प्रकार: भारत उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों प्रकार के फलों का उत्पादक।
3. सब्जियों में प्रमुखता: मटर, फूलगोभी, प्याज, बंदगोभी, टमाटर, बैंगन और आलू।
4.5 अखाद्य फसलें कौन-कौन सी हैं?
भारत में रबड़ फसल के बारे में बताइए :-
रबड़ :- एक महत्वपूर्ण कच्चा माल देने वाली फसल है जो मुख्यतः उद्योगों में उपयोग होती है।
भारत में रबड़ की खेती के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. क्षेत्र: भूमध्यरेखीय क्षेत्र की फसल, विशेष परिस्थितियों में उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी उगाई जाती है।
2. जलवायु: 200 सेमी से अधिक वर्षा और 25°C से अधिक तापमान वाली नम और आर्द्र जलवायु।
3. उत्पादक राज्य: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और मेघालय के गारो पहाड़।
भारत में कपास फसल के बारे में जानकारी दीजिए :-
कपास :- सूती कपड़ा उद्योग का मुख्य कच्चा माल है और भारत इसका मूल स्थल माना जाता है।
भारत में कपास की खेती के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. उत्पादन में स्थिति: भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक (2017)।
2. मृदा प्रकार: दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी उपयुक्त।
3. तापमान एवं जलवायु: उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप आवश्यक।
4. उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश।
5. फसल अवधि: खरीफ फसल, पकने में 6–8 महीने।
भारत में कपास फसल के बारे में जानकारी दीजिए :-
कपास :- सूती कपड़ा उद्योग का मुख्य कच्चा माल है और भारत इसका मूल स्थल माना जाता है।
भारत में कपास की खेती के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. उत्पादन में स्थिति: भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक (2017)।
2. मृदा प्रकार: दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी उपयुक्त।
3. तापमान एवं जलवायु: उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप आवश्यक।
4. उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश।
5. फसल अवधि: खरीफ फसल, पकने में 6–8 महीने।
भारत में जूट फसल के बारे में बताइए :-
जूट :- जूट का उत्पादन मुख्यतः उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में किया जाता है।
भारत में जूट की खेती के विषय में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं :-
1. मृदा आवश्यकताएँ: अच्छी जल निकासी वाली बाढ़ के मैदान की उपजाऊ मिट्टी।
2. मुख्य उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, उड़ीसा, मेघालय।
3. उपयोग: जूट का उपयोग बैग, रस्सी, चटाई आदि बनाने में होता है।
शस्यावर्तन क्या है? समझाइए :-
शस्यावर्तन :- शस्यावर्तन का अर्थ है भूमि की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किसी खेत में फसलें बदल-बदल कर बोना।
शस्यावर्तन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. भूमि को थकने से बचाने के लिए विभिन्न फसलों का उपयोग।
2. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद।
3. फसलों की विविधता के कारण कीट और रोगों का प्रकोप कम होता है।
उदाहरण :-
एक साल धान, अगले साल गेहूँ या दाल।
चकबंदी क्या है? समझाइए :-
चकबंदी :- बिखरी हुई कृषि जोतों या खेतों को एक साथ मिलाकर आर्थिक रूप से लाभप्रद बनाना।
चकबंदी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. खेतों को संगठित रूप में एकत्र करना।
2. सिंचाई और मशीनरी के प्रयोग में सुविधा।
3. भूमि का अधिकतम और प्रभावी उपयोग।
4. किसानों की उत्पादन लागत कम और लाभ अधिक।
उदाहरण :-
अलग-अलग मालिकों के छोटे-छोटे खेतों को जोड़कर एक बड़ा खेत बनाना।
हरित क्रांति क्या है? समझाइए :-
हरित क्रांति :- कृषि क्षेत्र में कुछ फसलों विशेषकर गेहूँ और चावल की पैदावार बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, उच्च उपज वाले बीज और उर्वरकों का प्रयोग करना।
हरित क्रांति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. उच्च उपज देने वाले बीजों का उपयोग।
2. उर्वरक और कीटनाशकों का सही प्रयोग।
3. सिंचाई और मशीनरी का आधुनिक इस्तेमाल।
4. कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि।
उदाहरण :-
पंजाब और हरियाणा में गेहूँ की पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी।
हरित क्रांति की हानियाँ क्या हैं :-
हरित क्रांति से कृषि उत्पादन बढ़ा, लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हुए।
हरित क्रांति से निम्नलिखित हानियाँ हुईं :-
1. अत्यधिक रसायनों और उर्वरकों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता घट गई।
2. अधिक सिंचाई के कारण भूमिगत जल स्तर नीचा हो गया।
3. जैव विविधता में कमी आई, कुछ पारंपरिक फसलें और स्थानीय जातियाँ लुप्त हुईं।
4. अमीर और गरीब किसानों के बीच आर्थिक अंतर बढ़ गया।
5. पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव, जैसे मृदा और जल प्रदूषण।
श्वेत क्रांति क्या है :-
श्वेत क्रांति :- श्वेत क्रांति का अर्थ है दूध के उत्पादन में वृद्धि।
श्वेत क्रांति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. पशुओं की नस्लों में सुधार करके दूध उत्पादन बढ़ाया गया।
2. आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया।
3. इससे देश में दूध की उपलब्धता और डेयरी उद्योग का विकास हुआ।
4. किसानों की आय में वृद्धि हुई।
उदाहरण :-
अमूल (Amul) और अन्य डेयरी समितियाँ इस क्रांति का हिस्सा रही हैं।
4.6 कृषि का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और उत्पादन में क्या योगदान है?
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व क्या है :-
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व :- भारत में कृषि का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका से सीधे जुड़ी हुई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व निम्नलिखित हैं :-
1. भारत कृषि प्रधान देश है।
2. लगभग दो-तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
3. कृषि देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य भाग है।
4. यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 26% है।
5. कृषि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है और उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती है।
उदाहरण :-
गेहूँ, चावल, कपास, जूट, गन्ना आदि फसलें देश के लिए भोजन और उद्योगों के कच्चे माल के रूप में महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं :-
भारतीय कृषि की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं जो इसे अन्य देशों की कृषि से अलग बनाती हैं।
भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. छोटे खेत: किसानों के पास आमतौर पर छोटा सा भूखंड होता है और वे मुख्य रूप से अपने परिवार के लिए फसल उगाते हैं।
2. पशु आधारित कार्य: पशु कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे हल चलाना और ढुलाई।
3. मानसून पर निर्भर: भारतीय किसान मुख्य रूप से मानसून की वर्षा पर निर्भर रहते हैं।
उदाहरण :-
उत्तर भारत में छोटे किसान अपने खेत में गेहूँ और चावल उगाते हैं और हल चलाने के लिए बैल का प्रयोग करते हैं।
4.7 वैश्वीकरण का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ा है?
भारतीय कृषि पर वैश्विक/भूमंडलीय प्रभाव कैसे पड़ते हैं :-
भारतीय कृषि पर वैश्विक परिस्थितियाँ और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के फैसले महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
भारतीय कृषि पर वैश्विक/भूमंडलीय प्रभाव निम्नलिखित हैं :-
1. अस्थिर कीमतें: किसानों को कृषि उत्पादों की साल-दर-साल बदलती कीमतों का सामना करना पड़ता है।
2. व्यापार उदारीकरण: अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर व्यापार उदारीकरण कृषि उत्पादों की कीमतों को प्रभावित करता है।
3. निर्यात प्रोत्साहन: कुछ प्रमुख कृषि वस्तुओं के निर्यात को उदार बनाया गया है।
4. उच्च उपज वाली फसलें: उच्च उपज देने वाली फसलों की शुरूआत से कृषि में बड़ा परिवर्तन आया है।
5. आधुनिक तकनीक और निवेश: नवाचार, बुनियादी ढांचे में निवेश, क्रेडिट, विपणन और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार से आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग बढ़ा है।
उदाहरण :-
चावल और गेहूँ के निर्यात के कारण अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे छोटे और बड़े किसानों को प्रभावित करते हैं।
भारत में खाद्य उत्पादन घटने के मुख्य कारण क्या हैं :-
भारत में खाद्य उत्पादन में गिरावट के कई कारण हैं जो कृषि प्रणाली और संसाधनों से जुड़े हैं।
भारत में खाद्य उत्पादन घटने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :-
1. कृषि भूमि की कमी :- गैर-कृषि उपयोग (उद्योग, आवास, सड़कों) के लिए भूमि लेने से खेती के लिए उपलब्ध भूमि घट गई।
2. उर्वरक और कीटनाशकों का अधिक उपयोग :- इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम हुई।
3. असक्षम जल प्रबंधन :- अनुचित सिंचाई से जलाक्रांतता और लवणता जैसी समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
4. भूजल का अत्यधिक दोहन :- भूमिगत जल स्तर गिरने से सिंचाई की लागत बढ़ी।
5. भंडारण और बाजार की कमी :- पर्याप्त भंडारण और प्रभावी बाज़ार न होने से उत्पादन का लाभ किसानों तक नहीं पहुँचता।
उदाहरण :-
कई क्षेत्रों में जल संसाधनों की कमी और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में गिरावट के कारण गेहूँ और चावल की पैदावार में लगातार कमी देखी गई है।
भारत के किसानों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं :-
भारत में किसान विभिन्न प्राकृतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करते हैं।
भारत के किसानों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं :-
1. मानसून की अनिश्चितता: वर्षा का असमान या असमय होना फसल को प्रभावित करता है।
2. गरीबी और ऋण का दुष्चक्र: कम आय और उच्च लागत के कारण किसान अक्सर कर्ज़ के जाल में फंस जाते हैं।
3. शहरों की ओर पलायन: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी के कारण लोग शहरों की ओर जाते हैं।
4. सरकारी सुविधाओं तक पहुँच में कठिनाई और बिचौलियों का प्रभाव: किसान सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते और बिचौलियों के कारण मूल्य कम मिलता है।
5. अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता: वैश्विक बाजार में अन्य देशों के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता है।
उदाहरण :-
मानसून में अनियमित वर्षा के कारण कई किसानों की खरीफ फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे उन्हें ऋण लेकर फसल बोनी पड़ती है।
भारत में कृषिगत सुधारों के मुख्य उपाय क्या हैं :-
भारत में कृषि सुधार किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और उनकी आय में सुधार लाने के लिए कई उपाय किए गए हैं।
भारत में कृषिगत सुधारों के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं :-
1. सिंचाई और उर्वरक: अच्छी सिंचाई व्यवस्था, जैविक खाद और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग।
2. प्रत्यक्ष सहायता: किसानों को सीधे बैंक खातों में सहायता राशि पहुंचाना।
3. सरकारी सहायता और ऋण: सस्ते ऋण, बिजली और पानी की सुलभता।
4. बाजार तक पहुँच: कृषि उत्पादों को आसानी से बाजार तक पहुँचाना।
5. फसल बीमा: बाढ़, सूखा, चक्रवात, आग, कीट आदि से बचाव।
6. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): फसलों के लिए सुनिश्चित मूल्य।
7. शिक्षा और जानकारी: कृषि शिक्षा, मौसम संबंधी जानकारी, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कृषि सेमिनारों का आयोजन।
8. अनुसंधान और प्रशिक्षण: कृषि विद्यालय, विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्रों की स्थापना और उनका उपयोग।
उदाहरण :-
किसान कार्ड और ग्रामीण बैंक के माध्यम से छोटे किसानों को ऋण और बीमा की सुविधा दी जाती है, जिससे उनकी आय और सुरक्षा बढ़ती है।
4.8 प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार क्या हैं?
सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार क्या हैं :-
सरकार ने किसानों की सुरक्षा, आय और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई संस्थागत सुधार किए हैं।
सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार निम्नलिखित हैं :-
1. फसल बीमा: प्राकृतिक आपदाओं और कीटों से होने वाले नुकसान के लिए फसल बीमा की सुविधा।
2. सहकारी बैंक: किसानों को सस्ते ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए सहकारी बैंकों का विकास।
3. समर्थन मूल्य (MSP): फसलों के लिए उचित मूल्य तय करना और किसानों को प्रोत्साहित करना।
4. मौसम जानकारी: किसानों को समय-समय पर मौसम संबंधी सूचनाएं प्रदान करना।
5. कृषि शिक्षा और तकनीक: नवीन कृषि तकनीक, औजार, उर्वरक आदि की जानकारी रेडियो और दूरदर्शन के माध्यम से प्रसारित करना।
उदाहरण :-
किसानों को फसल बीमा और MSP की सुविधा मिलने से उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है और जोखिम कम होता है।