Class 10 geography Notes in hindI Chapter - 5
Chapter 5: Minerals and Energy Resources
Chapter Introduction:
This chapter explains different types of minerals and energy resources, their distribution, and uses in daily life and industries.
FAQ
Ques. Is this chapter important for map-based questions?
Ans. Yes, map-based questions are often asked.
CLASS 10 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 5 : खनिज तथा ऊर्जा संसाधन
प्रश्न :- खनिज़ क्या हैं?
उत्तर :- खनिज़ :- हमारे जीवन का एक अति आवश्यक भाग हैं। इनके बिना दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण संभव नहीं है।
खनिजों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. खनिज़ प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ होते हैं।
2. ये अकार्बनिक पदार्थ होते हैं।
3. इनमें निश्चित रासायनिक संरचना होती है।
4. खनिजों में कठोरता, रंग और निश्चित आकार पाया जाता है।
5. सभी प्रकार की वस्तुओं (जैसे मशीनें, औजार, भवन आदि) का निर्माण खनिजों से होता है।
उदाहरण :-
लोहा, तांबा और एल्यूमिनियम ऐसे खनिज़ हैं जिनका उपयोग औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है।
प्रश्न :- अयस्क क्या है?
उत्तर :- अयस्क :- वह प्राकृतिक पदार्थ है जिसमें खनिज अशुद्धियों के साथ पाए जाते हैं।
खनिजों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. अयस्क खनिजों का मिश्रित रूप होता है।
2. खनिज अयस्कों में ही पाए जाते हैं।
3. अयस्क प्राकृतिक अवस्था में विभिन्न अशुद्धियों के साथ होते हैं।
4. अयस्क से खनिज निकालना आर्थिक रूप से लाभदायक होता है।
उदाहरण :-
1. लौह अयस्क से लोहा
2. बॉक्साइट से एल्युमिनियम
3. मैंगनीज अयस्क से मैंगनीज प्राप्त किया जाता है।
प्रश्न :- खनिजों का हमारे लिए क्या महत्व है?
उत्तर :- खनिज हमारे जीवन का एक अत्यंत आवश्यक हिस्सा हैं। इनके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
खनिजों का हमारे लिए महत्व निम्नलिखित हैं :-
1. दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली सुई से लेकर बड़े जहाज तक खनिजों से बनाए जाते हैं।
2. इमारतें, पुल, सड़कें आदि के निर्माण में खनिजों का प्रयोग होता है।
3. भोजन में भी अनेक प्रकार के खनिज तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए आवश्यक होते हैं।
4. मशीनें और औज़ार खनिजों से निर्मित होते हैं।
5. परिवहन के साधन जैसे रेल, गाड़ी, हवाई जहाज आदि खनिजों पर निर्भर हैं।
6. बर्तन, बिजली के उपकरण और घरेलू सामान खनिजों से बनाए जाते हैं।
उदाहरण :-
लोहे से मशीनें और औज़ार बनते हैं, तांबे से बिजली के तार बनाए जाते हैं और एल्युमिनियम से बर्तन तथा हवाई जहाज के भाग बनाए जाते हैं।
प्रश्न :- खनिजों के प्राप्ति स्थल कौन-कौन से हैं?
उत्तर :- खनिज विभिन्न प्राकृतिक स्थानों से प्राप्त होते हैं, जो निम्नलिखित हैं :-
1. आग्नेय और कायांतरित चट्टानें :- इन चट्टानों से जस्ता, तांबा, जिंक और सीसा जैसे खनिज प्राप्त होते हैं।
2. अवसादी चट्टानों की परतें :- कोयला, पोटाश और सोडियम नमक जैसी खनिज संपदा इन चट्टानों में पाई जाती है।
3. धरातलीय चट्टानों का अपघटन :- चट्टानों के टूटने-फूटने की प्रक्रिया से भी कुछ खनिज प्राप्त होते हैं।
4. जलोढ़ जमाव (प्लेसर निक्षेप) :- नदियों द्वारा लाई गई रेत और मिट्टी में सोना, चाँदी, टिन और प्लैटिनम जैसे खनिज मिलते हैं।
5. महासागरीय जल :- समुद्र के जल से नमक, मैग्नीशियम और ब्रोमाइन जैसे खनिज प्राप्त किए जाते हैं।
उदाहरण :-
सोना प्रायः नदियों के किनारे जलोढ़ जमाव में पाया जाता है, जबकि नमक समुद्र के जल से प्राप्त किया जाता है।
प्रश्न :- आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर :- आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण निम्नलिखित प्रकार से होता है :-
1. इन चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों और विदरों में पाए जाते हैं।
2. छोटे खनिज जमाव शिराओं (Veins) के रूप में मिलते हैं।
3. बड़े खनिज जमाव परतों (Lodes) के रूप में पाए जाते हैं।
4. जब खनिज तरल या गैसीय अवस्था में होते हैं, तो वे दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर ऊपर उठते हैं।
5. ऊपर आते समय ठंडा होकर जम जाते हैं, जिससे खनिजों का निर्माण होता है।
6. इस प्रकार बनने वाले खनिजों को धात्विक खनिज कहा जाता है।
उदाहरण : –
जस्ता, तांबा, सीसा और जिंक जैसे खनिज आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में इसी प्रक्रिया से पाए जाते हैं।
प्रश्न :- भूगर्भशास्त्री किसे कहते हैं?
उत्तर :- भूगर्भशास्त्री :- वे वैज्ञानिक होते हैं जो पृथ्वी की चट्टानों की प्रकृति का अध्ययन करते हैं। चट्टानों के निर्माण की प्रक्रिया को समझते हैं तथा खनिजों, भूकंप, ज्वालामुखी आदि से संबंधित जानकारियाँ प्राप्त करते हैं।
प्रश्न :- खनन किसे कहते हैं?
उत्तर :- खनन :- वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी के गर्भ से धातुओं, विभिन्न अयस्कों तथा अन्य उपयोगी खनिजों को जमीन के अंदर से निकाला जाता है।
प्रश्न :- खनिजों के वर्गीकरण का आधार क्या है?
उत्तर :- खनिजों का वर्गीकरण निम्नलिखित गुणों के आधार पर किया जाता है :-
रंग, चमक, कठोरता, घनत्व, क्रिस्टल (स्फटिक) की संरचना
उदाहरण :-
हीरा और ग्रेफाइट दोनों कार्बन से बने हैं, लेकिन उनकी कठोरता और संरचना अलग होने के कारण उनका वर्गीकरण अलग-अलग किया जाता है।
प्रश्न :- खनिज के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर :- खनिज मुख्यतः निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं :-
1. धात्विक खनिज
2. अधात्विक खनिज
3. ऊर्जा खनिज
उदाहरण :-
लोहा और तांबा → धात्विक, नमक और कैल्शियम → अधात्विक, कोयला और यूरेनियम → ऊर्जा खनिज।
प्रश्न :- धात्विक खनिज क्या होते हैं और उनके प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर :- धात्विक खनिज :- वे खनिज होते हैं जिनमें धातु का अंश अधिक होता है।
यह मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं :-
1. लौह खनिज :- जिनमें लोहे का अंश होता है।
उदाहरण :- लौह अयस्क, मैग्नीज, निकल, कोबाल्ट।
2. अलौह खनिज :- जिनमें लौहे का अंश नहीं होता है।
उदाहरण :- तांबा, सीसा, जस्ता, बाक्साइट।
3. बहुमूल्य खनिज :- जिनका मूल्य उच्च होता है।
उदाहरण :- सोना, चाँदी, प्लैटिनम।
प्रश्न :- लौह खनिज क्या हैं?
उत्तर :- लौह खनिज :- ऐसे खनिज जिनमें लौह अंश पाया जाता है। ये खनिज धातु उद्योग और औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में अत्यंत उपयोगी हैं।
लौह खनिजों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ होते हैं।
2. ये ठोस और अकार्बनिक पदार्थ होते हैं।
3. इनमें निश्चित रासायनिक संरचना पाई जाती है।
4. इनका रंग, कठोरता और निश्चित आकार होता है।
5. ये मुख्य रूप से औद्योगिक वस्तुओं (जैसे मशीन, औजार, भवन आदि) के निर्माण में प्रयोग होते हैं।
उदाहरण :-
1. लोहा (Hematite, Magnetite) → स्टील बनाने में मुख्य स्रोत।
2. मैंगनीज़ (Pyrolusite) → लोहे और स्टील की गुणवत्ता बढ़ाने में उपयोग।
प्रश्न :- लौह अयस्क क्या है?
उत्तर :- लौह अयस्क :- लौह अयस्क एक आधारभूत खनिज है, जिसे औद्योगिक विकास की रीढ़ माना जाता है। इससे लोहा प्राप्त किया जाता है, जिसका उपयोग अनेक उद्योगों में होता है। भारत में लौह अयस्क के विपुल संसाधन पाए जाते हैं तथा देश उच्च कोटि के लोहांशयुक्त लौह अयस्क में समृद्ध है।
लौह अयस्क की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह एक आधारभूत खनिज है।
2. इससे लोहा प्राप्त किया जाता है।
3. यह औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
4. भारत में इसके प्रचुर भंडार उपलब्ध हैं।
5. भारतीय लौह अयस्क में लोहांश की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह उच्च कोटि का माना जाता है।
उदाहरण :-
1. मैग्नेटाइट (Magnetite) → उच्च लोहांश वाला लौह अयस्क।
2. हेमेटाइट (Hematite) → भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला लौह अयस्क।
प्रश्न :- मैग्नेटाइट क्या है?
उत्तर :- मैग्नेटाइट :- मैग्नेटाइट एक उच्च कोटि का लौह अयस्क है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत लौह अंश पाया जाता है। इसमें सर्वश्रेष्ठ चुंबकीय गुण होते हैं, इसलिए यह विद्युत उद्योगों में विशेष रूप से उपयोगी होता है।
मैग्नेटाइट की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह एक उच्च कोटि का लौह अयस्क है।
2. इसमें लगभग 70% लौह अंश पाया जाता है।
3. इसमें उत्कृष्ट चुंबकीय गुण होते हैं।
4. यह विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में उपयोगी है।
5. इससे प्राप्त लौह उद्योगों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है।
उदाहरण :-
विद्युत मोटर, जनरेटर और ट्रांसफॉर्मर के निर्माण में मैग्नेटाइट का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न :- हेमेटाइट क्या है?
उत्तर :- हेमेटाइट उद्योगों में प्रयोग होने वाला सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण लौह अयस्क है, जिसमें लगभग 50–60 प्रतिशत लौह अंश पाया जाता है।
हेमेटाइट की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह उद्योगों में प्रयोग होने वाला सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लौह अयस्क है।
2. इसमें 50–60% लौह अंश पाया जाता है।
3. इससे बड़ी मात्रा में लोहा प्राप्त किया जाता है।
4. यह इस्पात उद्योग का मुख्य आधार है।
5. भारत में यह व्यापक रूप से पाया जाने वाला लौह अयस्क है।
उदाहरण :-
इस्पात कारखानों में हेमेटाइट से लोहा निकालकर रेल, मशीनें और औजार बनाए जाते हैं।
प्रश्न :- भारत में लौह अयस्क की प्रमुख पेटियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर :- भारत में लौह अयस्क का वितरण कुछ प्रमुख पेटियों (Belts) में केंद्रित है, जहाँ बड़े पैमाने पर लौह अयस्क पाया जाता है।
भारत में लौह अयस्क की प्रमुख पेटियाँ निम्नलिखित हैं :-
1. उड़ीसा–झारखण्ड पेटी :- यह पेटी उड़ीसा और झारखण्ड राज्यों में फैली हुई है। यहाँ उच्च कोटि का लौह अयस्क पाया जाता है।
2. महाराष्ट्र–गोआ पेटी :- यह पेटी महाराष्ट्र और गोआ में स्थित है। यहाँ का लौह अयस्क निर्यात के लिए प्रसिद्ध है।
3. बेलारी–चित्रदुर्ग–चिकमंगलूर–तुमकुर पेटी :- यह पेटी कर्नाटक राज्य में स्थित है। यहाँ प्राचीन और समृद्ध लौह अयस्क के भंडार पाए जाते हैं।
4. दुर्ग–बस्तर–चन्द्रपुर पेटी :- यह पेटी छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के भागों में फैली है। यहाँ से इस्पात उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है।
उदाहरण :-
भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क मुख्य रूप से दुर्ग–बस्तर–चन्द्रपुर पेटी से प्राप्त होता है।
प्रश्न :- मैंगनीज़ क्या है तथा इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर :- मैंगनीज़ :- मैंगनीज़ एक महत्त्वपूर्ण लौह खनिज है, जिसका प्रयोग मुख्य रूप से इस्पात (स्टील) के विनिर्माण में किया जाता है। यह इस्पात को मजबूत और टिकाऊ बनाने में सहायक होता है।
मैंगनीज़ की प्रमुख विशेषताएँ एवं उपयोग निम्नलिखित हैं :-
1. इसका प्रयोग मुख्य रूप से इस्पात उद्योग में किया जाता है।
2. एक टन इस्पात को बनाने के लिए लगभग 10 किलोग्राम मैंगनीज़ की आवश्यकता पड़ती है।
3. यह इस्पात की मजबूती और गुणवत्ता बढ़ाता है।
4. इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर बनाने में किया जाता है।
5. इसका प्रयोग कीटनाशक दवाएँ एवं पेंट के निर्माण में भी होता है।
उदाहरण :-
इस्पात कारखानों में मैंगनीज़ का उपयोग रेल की पटरियाँ, मशीनों के पुर्जे और औजार बनाने में किया जाता है।
प्रश्न :- अलौह खनिज क्या होते हैं?
उत्तर :- अलौह खनिज :- वे खनिज जिनमें लोहा शामिल नहीं होता, अलौह खनिज कहलाते हैं। यद्यपि इनमें ताँबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना जैसे खनिज आते हैं, जो धातु शोधन, इंजीनियरिंग तथा विद्युत उद्योगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अलौह खनिजों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इनमें लौह (Iron) का अभाव होता है।
2. ये खनिज उद्योगों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं।
3. इनका उपयोग धातु शोधन में किया जाता है।
4. ये इंजीनियरिंग उद्योग के विकास में सहायक हैं।
5. विद्युत उद्योग में इनका विशेष महत्त्व होता है।
उदाहरण :-
1. ताँबा → विद्युत तार बनाने में उपयोग।
2. बॉक्साइट → एल्युमिनियम बनाने का प्रमुख अयस्क।
प्रश्न :- लौह और अलौह खनिज में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- लौह और अलौह खनिज में निम्नलिखित अंतर हैं :-
आधार | लौह खनिज | अलौह खनिज |
परिभाषा | जिन खनिजों में लोहे का अंश होता है। | जिन खनिजों में लोहे का अंश नहीं होता है। |
मुख्य तत्व | लौह (Iron) उपस्थित होता है। | लौह अनुपस्थित होता है। |
उदाहरण | लौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल, कोबाल्ट | ताँबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट |
उपयोग | इस्पात एवं भारी उद्योगों में उपयोग। | विद्युत, इंजीनियरिंग एवं धातु शोधन उद्योगों में उपयोग। |
उदाहरण | हेमेटाइट | ताँबा |
प्रश्न :- ताँबा क्या है तथा इसका उपयोग और उत्पादन कहाँ होता है?
उत्तर :- ताँबा :- ताँबा एक अलौह खनिज है। यह घातवर्ध्य, तन्य तथा ताप का अच्छा सुचालक होने के कारण अत्यंत उपयोगी धातु है। इसी कारण इसका उपयोग मुख्यतः बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रसायन उद्योगों में किया जाता है।
ताँबे की प्रमुख विशेषताएँ एवं उपयोग निम्नलिखित हैं :-
1. यह एक घातवर्ध्य धातु है, जिससे इसे आसानी से आकार दिया जा सकता है।
2. यह तन्य होता है, इसलिए इससे पतले तार बनाए जाते हैं।
3. यह ताप और विद्युत का अच्छा सुचालक है।
4. इसका उपयोग बिजली के तार बनाने में किया जाता है।
5. यह इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रसायन उद्योगों में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
भारत में ताँबे का उत्पादन :- देश का लगभग 52 प्रतिशत ताँबा मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानें उत्पन्न करती हैं।
उदाहरण :-
विद्युत तार और केबल ताँबे से बनाए जाते हैं, क्योंकि यह विद्युत का उत्तम सुचालक है।
प्रश्न :- बॉक्साइट क्या है तथा इसके गुण और वितरण बताइए।
उत्तर :- बॉक्साइट :- बॉक्साइट एल्यूमिनियम का प्रमुख अयस्क है। बॉक्साइट के निक्षेप उन चट्टानों के विघटन से बनते हैं, जो एल्यूमिनियम सिलिकेटों से समृद्ध होती हैं।
एल्यूमिनियम (बॉक्साइट से प्राप्त) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. एल्यूमिनियम एक महत्त्वपूर्ण धातु है।
2. इसमें लोहे जैसी शक्ति पाई जाती है।
3. यह अत्यधिक हल्की धातु होती है।
4. यह ताप एवं विद्युत का अच्छा सुचालक है।
5. इसमें अत्यधिक घातवर्ध्यता (Malleability) पाई जाती है।
भारत में बॉक्साइट का वितरण :-
1. अमरकंटक पठार
2. मैकाल पहाड़ियाँ
3. बिलासपुर–कटनी का पठारी प्रदेश
उदाहरण :-
बॉक्साइट से प्राप्त एल्यूमिनियम का उपयोग विमान, बर्तन और विद्युत तार बनाने में किया जाता है।
प्रश्न :- अधात्विक खनिज क्या होते हैं?
उत्तर :- अधात्विक खनिज :- वे खनिज जिनमें धातु का कोई अंश नहीं होता, अधात्विक खनिज कहलाते हैं। ये खनिज दैनिक जीवन तथा विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
अधात्विक खनिजों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इनमें धातु का अभाव होता है।
2. ये सामान्यतः निर्माण एवं रासायनिक उद्योगों में उपयोगी होते हैं।
3. ये धात्विक खनिजों की अपेक्षा कम कठोर होते हैं।
4. इनका उपयोग सीमेंट, काँच और रसायन बनाने में किया जाता है।
5. ये दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तुओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उदाहरण :-
अभ्रक, नमक, पोटाश, चूना पत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर आदि अधात्विक खनिज हैं।
प्रश्न :- अभ्रक क्या है तथा इसके निक्षेप और उपयोग बताइए।
उत्तर :- अभ्रक :- अभ्रक एक अधात्विक खनिज है, जो सामान्यतः प्लेटों या पतली परतों के रूप में पाया जाता है। इसमें ऊष्मा और विद्युत को रोकने की क्षमता होती है, इसलिए यह उद्योगों में अत्यंत उपयोगी है।
अभ्रक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह प्लेटों या परतों के रूप में पाया जाता है।
2. यह ताप एवं विद्युत का कुचालक होता है।
3. यह आसानी से पतली चादरों में विभाजित हो जाता है।
4. यह उच्च ताप सहन कर सकता है।
5. यह एक महत्त्वपूर्ण अधात्विक खनिज है।
अभ्रक के निक्षेप के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
1. छोटा नागपुर पठार के उत्तरी पठारी किनारे।
2. बिहार–झारखण्ड की कोडरमा–गया–हज़ारीबाग पेटी।
3. राजस्थान में अजमेर के पास।
4. आंध्र प्रदेश की नेल्लोर पेटी।
अभ्रक का उपयोग :- अभ्रक का प्रयोग विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में किया जाता है।
उदाहरण :-
इलेक्ट्रिक हीटर, ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अभ्रक का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न :- चूना पत्थर क्या है तथा इसका औद्योगिक महत्त्व बताइए।
उत्तर :- चूना पत्थर :- चूना पत्थर एक अधात्विक खनिज है, जो कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है। यह अधिकांशतः अवसादी चट्टानों में मिलता है।
चूना पत्थर की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह कैल्शियम एवं कैल्शियम कार्बोनेट से निर्मित होता है।
2. इसमें मैग्नीशियम कार्बोनेट भी पाया जाता है।
3. यह मुख्य रूप से अवसादी चट्टानों में मिलता है।
4. यह सीमेंट उद्योग का आधारभूत कच्चा माल है।
5. यह लौह-प्रगलन की भट्टियों के लिए अनिवार्य होता है।
चूना पत्थर का औद्योगिक उपयोग :- सीमेंट निर्माण, लौह एवं इस्पात उद्योग में प्रगलन भट्टियों में।
उदाहरण :-
सीमेंट कारखानों में चूना पत्थर से सीमेंट तैयार किया जाता है।
प्रश्न :- खनन उद्योग को घातक उद्योग क्यों कहा जाता है?
उत्तर :- खनन उद्योग को घातक उद्योग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इससे श्रमिकों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर गंभीर और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
खनन उद्योग को घातक कहने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :-
1. इस उद्योग में श्रमिकों को लगातार धूल एवं हानिकारक धुएँ में काम करना पड़ता है।
2. लंबे समय तक ऐसा वातावरण रहने से श्रमिकों को फेफड़ों से संबंधित बीमारियाँ हो जाती हैं।
3. खदानों में पानी भर जाने या आग लग जाने की संभावना बनी रहती है, जिससे श्रमिकों में भय रहता है।
4. कई बार खदानों की छत गिर जाने से गंभीर दुर्घटनाएँ होती हैं और श्रमिकों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
5. खनन के कारण नदियों का जल प्रदूषित हो जाता है।
6. इससे भूमि और मिट्टी का अपक्षय होता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।
उदाहरण :-
कोयला खदानों में धूल के कारण श्रमिकों को सिलिकोसिस जैसी फेफड़ों की बीमारी हो जाती है, इसलिए खनन उद्योग को घातक माना जाता है।
प्रश्न :- खनिज संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर :- खनिज संसाधनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये हमारे औद्योगिक विकास, कृषि तथा आर्थिक प्रगति के मूल आधार हैं और सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।
खनिज संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :-
1. खनिज हमारे उद्योग और कृषि के आधार हैं।
2. खनिज संसाधन नवीकरण योग्य नहीं होते हैं।
3. इनके निक्षेपों की कुल मात्रा सीमित है।
4. खनिजों के निर्माण में लाखों वर्ष लग जाते हैं।
5. वर्तमान समय में हम खनिजों का बहुत तेजी से उपयोग कर रहे हैं।
6. इन्हें आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।
उदाहरण :-
यदि आज हम कोयला और पेट्रोलियम जैसे खनिजों का अंधाधुंध उपयोग करेंगे, तो भविष्य में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है, इसलिए खनिज संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है।
प्रश्न :- खनिज संसाधनों के संरक्षण के उपाय क्या हैं?
उत्तर :- खनिज संसाधनों के संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं :-
1. खनन एवं परिष्करण के दौरान खनिज पदार्थों की बर्बादी कम की जानी चाहिए।
2. जहाँ तक संभव हो, खनिजों के स्थान पर प्रमाणित प्लास्टिक एवं लकड़ी का प्रयोग करना चाहिए।
3. खनन एवं खनिज सुधार प्रक्रिया में धातु बनने तक न्यूनतम अपव्यय किया जाना चाहिए।
4. रद्दी एवं पुराने माल का पुनः प्रयोग करना चाहिए।
5. योजनाबद्ध तरीके से पुनः चक्रण एवं पुनः उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
6. खनिज संसाधनों का नियोजित एवं सतत् पोषणीय तरीके से उपयोग करना चाहिए।
7. पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए खनिजों के वैकल्पिक स्रोत अपनाने चाहिए, जैसे सी.एन.जी.।
उदाहरण :-
पेट्रोल-डीज़ल के स्थान पर सी.एन.जी. का उपयोग करने से खनिज ईंधनों की बचत होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
प्रश्न :- ऊर्जा संसाधन क्या हैं?
उत्तर :- ऊर्जा संसाधन :- वे संसाधन जिनसे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है, ऊर्जा संसाधन कहलाते हैं। ऊर्जा का उपयोग खाना पकाने, रोशनी एवं ताप प्राप्त करने, गाड़ियों के संचालन तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन के लिए किया जाता है।
ऊर्जा संसाधनों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्य में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
2. ऊर्जा का उत्पादन ईंधन खनिजों से किया जाता है।
3. प्रमुख ईंधन खनिज हैं – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम।
4. विद्युत ऊर्जा भी ऊर्जा का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
5. ऊर्जा संसाधनों को परंपरागत एवं गैर-परंपरागत साधनों में वर्गीकृत किया जाता है।
उदाहरण :-
कोयले से विद्युत उत्पादन कर घरों में रोशनी और उद्योगों में मशीनें चलाई जाती हैं।
प्रश्न :- परंपरागत ऊर्जा के स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर :- परंपरागत ऊर्जा के स्रोत :- वे ऊर्जा स्रोत जिनका उपयोग मानव द्वारा लंबे समय से किया जा रहा है, परंपरागत ऊर्जा के स्रोत कहलाते हैं।
परंपरागत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं :-
1. लकड़ी – खाना पकाने और ताप प्राप्त करने में उपयोग।
2. उपले – ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन के रूप में प्रयोग।
2. कोयला – ताप विद्युत उत्पादन एवं उद्योगों में उपयोग।
3. पेट्रोलियम – वाहनों के संचालन एवं उद्योगों में प्रयोग।
4. प्राकृतिक गैस – घरेलू ईंधन एवं उर्वरक उद्योग में उपयोग।
5. विद्युत ऊर्जा – जल विद्युत, ताप विद्युत
परंपरागत ऊर्जा स्रोतों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये ऊर्जा स्रोत लंबे समय से प्रचलित हैं।
2. इनमें से अधिकांश अक्षय (नवीकरण योग्य नहीं) होते हैं।
3. इनके अधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण होता है।
उदाहरण :-
कोयले से ताप विद्युत बनाकर कारखानों में मशीनें चलाई जाती हैं।
प्रश्न :- गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर :- गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोत :- वे ऊर्जा स्रोत जिनका उपयोग नवीन तकनीकों द्वारा किया जाता है और जो पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोत कहलाते हैं।
गैर-परंपरागत ऊर्जा के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं :-
1. सौर ऊर्जा – सूर्य के प्रकाश से प्राप्त ऊर्जा।
2. पवन ऊर्जा – हवा की गति से प्राप्त ऊर्जा।
3. ज्वारीय ऊर्जा – समुद्र की ज्वार-भाटा से प्राप्त ऊर्जा।
4. भू-तापीय ऊर्जा – पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा से प्राप्त ऊर्जा।
5. बायोगैस ऊर्जा – जैविक अपशिष्ट से प्राप्त ऊर्जा।
6. परमाणु ऊर्जा – यूरेनियम जैसे खनिजों से प्राप्त ऊर्जा।
गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये ऊर्जा स्रोत अक्षय या दीर्घकाल तक उपलब्ध होते हैं।
2. इनसे प्रदूषण कम होता है।
3. ये भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त हैं।
उदाहरण :-
सौर ऊर्जा से सोलर पैनल द्वारा घरों में बिजली उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न :- कोयला क्या है तथा भारत में इसका क्या महत्त्व है?
उत्तर :- कोयला :- कोयला भारत में बहुतायत में पाया जाने वाला एक जीवाश्म ईंधन है। यह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक महत्त्वपूर्ण भाग प्रदान करता है।
कोयले का महत्त्व एवं उपयोग निम्नलिखित हैं :-
1. कोयला भारत का प्रमुख ऊर्जा स्रोत है।
2. इसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन (ताप विद्युत) में किया जाता है।
3. यह उद्योगों में ईंधन के रूप में प्रयोग होता है।
4. इसका उपयोग घरेलू आवश्यकताओं के लिए भी किया जाता है।
5. भारत अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मुख्यतः कोयले पर निर्भर है।
कोयले के प्रकार निम्नलिखित हैं :- संपीड़न की मात्रा, गहराई और समय के आधार पर कोयले को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
1. लिग्नाइट
2. बिटुमिनस कोयला
3. एंथ्रासाइट कोयला
उदाहरण :-
ताप विद्युत गृहों में कोयले से बिजली उत्पन्न कर घरों और उद्योगों को ऊर्जा उपलब्ध कराई जाती है।
प्रश्न :- लिग्नाइट क्या है तथा इसके गुण और उपयोग बताइए।
उत्तर :- लिग्नाइट :- लिग्नाइट एक निम्न कोटि का भूरा कोयला होता है। यह स्वभाव से मुलायम होता है तथा इसमें नमी की मात्रा अधिक पाई जाती है।
लिग्नाइट की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह एक निम्न कोटि का कोयला है।
2. इसका रंग भूरा होता है।
3. यह मुलायम होता है।
4. इसमें नमी की मात्रा अधिक होती है।
5. इसकी ऊष्मा क्षमता अन्य कोयलों की अपेक्षा कम होती है।
भारत में लिग्नाइट का वितरण एवं उपयोग निम्नलिखित हैं :-
1. तमिलनाडु के नैवेली क्षेत्र में इसके प्रमुख भंडार पाए जाते हैं।
2. इसका उपयोग मुख्य रूप से विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
उदाहरण :-
नैवेली ताप विद्युत संयंत्र में लिग्नाइट से बिजली उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न :- बिटुमिनस कोयला क्या है तथा इसका औद्योगिक महत्त्व बताइए।
उत्तर :- बिटुमिनस कोयला :- गहराई में दबे हुए तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कोयला कहा जाता है। यह वाणिज्यिक प्रयोग में सबसे अधिक लोकप्रिय कोयला है।
बिटुमिनस कोयले की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह गहराई में दबा हुआ कोयला होता है।
2. यह अधिक तापमान के प्रभाव से बनता है।
3. यह वाणिज्यिक उपयोग में सर्वाधिक प्रचलित है।
4. इसमें ऊष्मा उत्पादन क्षमता अधिक होती है।
5. इसकी गुणवत्ता लिग्नाइट से उच्च होती है।
बिटुमिनस कोयले का औद्योगिक महत्त्व निम्नलिखित हैं :-
1. उच्च श्रेणी के बिटुमिनस कोयले का उपयोग धातुशोधन में किया जाता है।
2. इसका लौह के प्रगलन में विशेष महत्त्व होता है।
उदाहरण :-
इस्पात कारखानों में बिटुमिनस कोयले का उपयोग लोहे को गलाने (प्रगलन) के लिए किया जाता है।
प्रश्न :- एंथ्रासाइट कोयला क्या है?
उत्तर :- एंथ्रासाइट कोयला :- एंथ्रासाइट सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला होता है। यह कोयले की सबसे उच्च श्रेणी मानी जाती है।
एंथ्रासाइट कोयले की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह सबसे उच्च कोटि का कोयला है।
2. यह कठोर होता है।
3. इसमें कार्बन की मात्रा अधिक होती है।
4. इससे अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है।
5. यह जलने पर कम धुआँ उत्पन्न करता है।
उदाहरण :-
उच्च ताप की आवश्यकता वाले उद्योगों में एंथ्रासाइट कोयले का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न :- भारत में कोयले का वितरण किन भूगर्भिक युगों में पाया जाता है?
उत्तर :- भारत में कोयला :- भारत में कोयला मुख्यतः दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैल क्रम में पाया जाता है :-
1. गोंडवाना युग – जिसकी आयु लगभग 200 लाख वर्ष से अधिक है।
2. टरशियरी युग – जिसके निक्षेप लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं।
1. गोंडवाना कोयले की प्रमुख विशेषताएँ एवं क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
(i) गोंडवाना कोयला धातुशोधन (Metallurgical) कोयला होता है।
(ii) इसके प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी में पाए जाते हैं। दामोदर घाटी के प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं – झरिया, रानीगंज, बोकारो
(iii) ये क्षेत्र पश्चिमी बंगाल और झारखंड में स्थित हैं।
(iv) इसके अतिरिक्त गोदावरी, महानदी, सोन और वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते हैं।
2. टरशियरी कोयले की प्रमुख विशेषताएँ एवं क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
(i) टरशियरी कोयला मुख्यतः उत्तर-पूर्वी भारत में पाया जाता है।
इसके प्रमुख राज्य हैं – मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड
उदाहरण :-
झरिया कोयला क्षेत्र (झारखंड) गोंडवाना कोयले का प्रमुख क्षेत्र है, जहाँ से इस्पात उद्योग के लिए कोयला प्राप्त किया जाता है।
प्रश्न :- पेट्रोलियम क्या है तथा भारत में इसका महत्त्व और वितरण बताइए।
उत्तर :- पेट्रोलियम :- पेट्रोलियम या खनिज तेल, भारत में कोयले के बाद ऊर्जा का दूसरा प्रमुख साधन है। यह आधुनिक उद्योगों और परिवहन व्यवस्था का आधार है।
पेट्रोलियम का महत्त्व निम्नलिखित है :-
1. इसका उपयोग ताप एवं प्रकाश के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है।
2. यह मशीनों के स्नेहक (Lubricant) के रूप में प्रयोग होता है।
3. यह अनेक विनिर्माण उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करता है।
4. तेल शोधन शालाएँ संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा अनेक रासायनिक उद्योगों के लिए एक नोडीय बिंदु का कार्य करती हैं।
5. पेट्रोलियम आधुनिक औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक संसाधन है।
भारत में पेट्रोलियम का उत्पादन निम्नलिखित है :-
1. भारत का लगभग 63% पेट्रोलियम मुम्बई हाई से प्राप्त होता है।
2. लगभग 18% पेट्रोलियम गुजरात से निकलता है।
3. लगभग 13% पेट्रोलियम असम से प्राप्त होता है।
उदाहरण :-
पेट्रोलियम से प्राप्त पेट्रोल और डीज़ल का उपयोग वाहनों के संचालन में किया जाता है, जिससे परिवहन व्यवस्था सुचारु रूप से चलती है।
प्रश्न :- प्राकृतिक गैस क्या है तथा इसका महत्त्व और वितरण बताइए।
उत्तर :- प्राकृतिक गैस :- प्राकृतिक गैस एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। इसका प्रयोग ऊर्जा के साधन के रूप में तथा पेट्रो-रासायन उद्योग के लिए एक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
प्राकृतिक गैस की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह स्वच्छ ईंधन है।
2. इसके उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है।
3. इसलिए इसे पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।
4. इसे वर्तमान शताब्दी का ईंधन कहा जाता है।
5. इसका उपयोग घरेलू, औद्योगिक एवं परिवहन क्षेत्रों में किया जाता है।
भारत में प्राकृतिक गैस का वितरण :-
1. कृष्णा–गोदावरी नदी बेसिन में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार पाए गए हैं।
2. अंडमान–निकोबार द्वीप समूह भी प्राकृतिक गैस के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
उदाहरण :-
सी.एन.जी. के रूप में प्राकृतिक गैस का उपयोग वाहनों में किया जाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है।
प्रश्न :- विद्युत क्या है तथा इसका उत्पादन कैसे किया जाता है?
उत्तर :- विद्युत :- विद्युत एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन है, जिसका उपयोग घरेलू कार्यों, उद्योगों, परिवहन तथा कृषि में किया जाता है।
विद्युत उत्पादन के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं :-
(क) जल विद्युत (Hydel Power) :-
1. यह प्रवाही एवं तेज बहते जल से उत्पन्न की जाती है।
2. जल से हाइड्रो टरबाइन चलाकर विद्युत बनाई जाती है।
3. यह एक नवीकरण योग्य संसाधन है।
4. इससे प्रदूषण कम होता है।
(ख) ताप विद्युत (Thermal Power) :-
1. यह कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों को जलाकर उत्पन्न की जाती है।
2. ईंधन जलाने से प्राप्त ऊष्मा से टरबाइन चलाई जाती है।
3. यह विद्युत उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
भारत में प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं :-
1. भाखड़ा नांगल परियोजना
2. दामोदर घाटी कारपोरेशन (DVC)
3. कोपिली हाइडल परियोजना
उदाहरण :-
भाखड़ा नांगल परियोजना से जल विद्युत उत्पन्न कर उत्तर भारत के कई राज्यों को बिजली उपलब्ध कराई जाती है।
प्रश्न :- ताप विद्युत क्या है?
उत्तर :- ताप विद्युत :- ताप विद्युत वह विद्युत है, जो कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्मी ईंधनों के प्रयोग से उत्पन्न की जाती है। ताप विद्युत गृह इन अनवीकरण योग्य संसाधनों का उपयोग करके विद्युत उत्पादन करते हैं।
ताप विद्युत की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इसका उत्पादन कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से किया जाता है।
2. यह जीवाश्मी ईंधनों पर आधारित होती है।
3. ताप विद्युत गृह अनवीकरण योग्य संसाधनों का उपयोग करते हैं।
4. इससे बड़ी मात्रा में विद्युत उत्पादन संभव होता है।
5. इसके उत्पादन से प्रदूषण भी होता है।
उदाहरण :-
कोयला आधारित ताप विद्युत गृह में कोयले को जलाकर बिजली उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न :- तापीय विद्युत और जल विद्युत ऊर्जा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- तापीय विद्युत और जल विद्युत ऊर्जा में निम्नलिखित अंतर हैं :-
आधार | तापीय विद्युत | जल विद्युत ऊर्जा |
उत्पादन का साधन | कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के प्रयोग से | गिरते हुए जल की शक्ति से टरबाइन चलाकर |
प्रदूषण | प्रदूषण युक्त | प्रदूषण रहित |
स्रोत की प्रकृति | स्थायी स्रोत नहीं | स्थायी स्रोत |
संसाधन का प्रकार | अनवीकरणीय स्रोतों पर आधारित | जल जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर आधारित |
भारत में स्थिति | भारत में 310 से अधिक ताप विद्युत केंद्र | भारत में अनेक बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ |
उदाहरण | तलचेर, पांकी, नामरूप, उरन, नैवेली | भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी, कोपिली |
प्रश्न :- परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा क्या है तथा इसका उत्पादन और वितरण बताइए।
उत्तर :- परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा :- परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना में परिवर्तन करके प्राप्त की जाती है। जब अणुओं की संरचना बदली जाती है, तो ऊष्मा के रूप में अत्यधिक ऊर्जा विमुक्त होती है, जिसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है।
परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह ऊर्जा अणुओं की संरचना में परिवर्तन से प्राप्त होती है।
2. इस प्रक्रिया में अधिक मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा निकलती है।
3. प्राप्त ऊष्मा से विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
4. यह ऊर्जा उत्पादन का एक उन्नत एवं शक्तिशाली स्रोत है।
भारत में परमाणु ऊर्जा के लिए खनिज संसाधन :-
1. यूरेनियम – झारखंड में पाया जाता है।
2. थोरियम – राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में पाया जाता है।
3. केरल की मोनाजाइट रेत में भी थोरियम की पर्याप्त मात्रा मिलती है।
उदाहरण :-
यूरेनियम से उत्पन्न परमाणु ऊर्जा का उपयोग परमाणु विद्युत गृहों में बिजली बनाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न :- आणविक शक्ति क्या है?
उत्तर :- आणविक शक्ति :- आणविक शक्ति वह ऊर्जा है, जो अणु के विखंडन से प्राप्त होती है। अणु के टूटने की प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा विमुक्त होती है, जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
आणविक शक्ति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह ऊर्जा अणु के विखंडन से प्राप्त होती है।
2. इस प्रक्रिया में अत्यधिक ऊर्जा निकलती है।
3. प्राप्त ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
4. यह ऊर्जा का एक शक्तिशाली स्रोत है।
उदाहरण :-
परमाणु विद्युत गृह में यूरेनियम के अणु के विखंडन से बिजली उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न :- आणविक खनिज क्या हैं?
उत्तर :- आणविक खनिज :- वे खनिज जिनमें परमाणु ऊर्जा धारण होती है, उन्हें आणविक खनिज कहते हैं।
आणविक खनिजों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये खनिज परमाणु ऊर्जा का स्रोत होते हैं।
2. इनका उपयोग परमाणु/आणविक ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है।
3. ये विशेष खनिज होते हैं जिनसे अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
प्रमुख आणविक खनिज निम्नलिखित हैं :-
1. यूरेनियम – विद्युत उत्पादन के लिए प्रमुख स्रोत।
2. थोरियम – राजस्थान और केरल में पाया जाता है।
3. बैरिलियम – परमाणु उद्योग में उपयोगी।
उदाहरण :-
यूरेनियम खदान (झारखंड) से प्राप्त खनिज का उपयोग परमाणु विद्युत गृहों में किया जाता है।
प्रश्न :- भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल क्यों है?
उत्तर :- सौर ऊर्जा :- भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है क्योंकि यह कई कारणों से उपयोगी और अनुकूल है।
भारत में सौर ऊर्जा के उज्ज्वल भविष्य के निम्नलिखित कारण हैं :-
1. भारत एक उष्ण कटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
2. यह प्रदूषण रहित ऊर्जा संसाधन है।
3. यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जिसे बार-बार उपयोग किया जा सकता है।
4. यह निम्नवर्ग के लोग भी आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
उदाहरण :-
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पैनल लगाकर घरों और पानी की पंपिंग के लिए बिजली उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न :- भारत में पवन ऊर्जा का वितरण और महत्त्व बताइए।
उत्तर :- पवन ऊर्जा :- पवन ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो हवा की गति से टरबाइन चलाकर प्राप्त की जाती है। यह एक स्वच्छ, नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
भारत में पवन ऊर्जा के वितरण और प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं :-
1. भारत में सबसे बड़े पवन ऊर्जा फार्म तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरई तक फैले हुए हैं।
2. इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र और लक्षद्वीप में भी महत्त्वपूर्ण पवन ऊर्जा फार्म हैं।
3. नागरकोइल और जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं।
पवन ऊर्जा के निम्नलिखित लाभ हैं :-
1. यह पर्यावरण प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत है।
2. यह नवीकरणीय है और कभी समाप्त नहीं होती।
3. यह ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में स्वतंत्र ऊर्जा आपूर्ति के लिए उपयोगी है।
उदाहरण :-
जैसलमेर पवन फार्म राजस्थान में सैकड़ों मेगावॉट विद्युत उत्पादन करता है।
प्रश्न :- बायोगैस क्या है?
उत्तर :- बायोगैस :- बायोगैस वह ऊर्जा है, जो घास–फूस, कृषि कचरा, जानवरों और मानव अपशिष्ट पदार्थों से प्राप्त की जाती है।
बायोगैस की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
2. यह पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा प्रदान करता है।
3. इसे घरेलू और कृषि कार्यों के लिए आसानी से उपयोग किया जा सकता है।
4. अपशिष्ट पदार्थों से उत्पन्न होने के कारण कचरे का निपटान भी होता है।
उदाहरण :-
ग्रामीण घरों में बायोगैस का उपयोग खाना पकाने और दीप जलाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न :- ज्वारीय ऊर्जा क्या है?
उत्तर :- ज्वारीय ऊर्जा :- ज्वारीय ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो महासागरीय जल की ज्वार-भाटा और तरंगों से उत्पन्न की जाती है। इसे विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जाता है।
ज्वारीय ऊर्जा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
2. महासागरीय तरंगों और ज्वार-भाटा की शक्ति से विद्युत उत्पन्न की जाती है।
3. इसे स्थायी रूप से उपयोग किया जा सकता है।
4. यह ऊर्जा स्रोत समुद्र तटों के निकट विशेष रूप से उपयोगी है।
उदाहरण :-
ज्वारीय ऊर्जा संयंत्र में समुद्र की लहरों और ज्वार की गति से टरबाइन घुमाकर बिजली बनाई जाती है।
प्रश्न :- ज्वारीय ऊर्जा कैसे उत्पन्न की जाती है?
उत्तर :- ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने की प्रक्रिया निम्नलिखित हैं :-
1. सँकरी खाड़ी के आर-पार बाढ़ द्वार बनाकर बाँध तैयार किए जाते हैं।
2. उच्च ज्वार के समय, इस सँकरी खाड़ी के प्रवेश द्वार से पानी बाँध के भीतर भर जाता है।
3. प्रवेश द्वार बंद कर दिया जाता है, जिससे पानी बाँध में ही सुरक्षित रहता है।
4. ज्वार उतरने पर, बाँध के पानी को पाइप के माध्यम से समुद्र की तरफ बहाया जाता है।
5. यह बहता हुआ पानी ऊर्जा उत्पादक टरबाइन को घुमाता है, जिससे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
उदाहरण :-
फ्रांस के रेंस (Rance) ज्वारीय ऊर्जा परियोजना इसी प्रक्रिया से विद्युत उत्पादन करती है।
प्रश्न :- भारत में ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने की आदर्श दशाएँ कहाँ पाई जाती हैं?
उत्तर :- भारत में ज्वारीय ऊर्जा उत्पन्न करने की आदर्श दशाएँ निम्नलिखित हैं :-
1. खम्भात की खाड़ी (गुजरात) – उच्च ज्वार और भारी समुद्री तरंगों के कारण।
2. कच्छ की खाड़ी (गुजरात) – समुद्र की गहराई और ज्वारीय प्रभाव के अनुकूल क्षेत्र।
3. पश्चिमी तट (गुजरात) – समुद्र की सतत गति और प्रवाह उपयुक्त।
4. संदरवन क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, गंगा डेल्टा) – ज्वारीय तरंगों और खाड़ी जैसी स्थितियों के कारण आदर्श।
उदाहरण :-
इन क्षेत्रों में ज्वारीय ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित की जा सकती हैं, जो स्थायी और प्रदूषण रहित ऊर्जा प्रदान करेंगी।
प्रश्न :- भू-तापीय ऊर्जा क्या है?
उत्तर :- भू-तापीय ऊर्जा :- भू-तापीय ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो पृथ्वी के आंतरिक भागों से निकलने वाले ताप का उपयोग करके उत्पन्न की जाती है। इसका उपयोग मुख्यतः विद्युत उत्पादन में किया जाता है।
भू-तापीय ऊर्जा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह ऊर्जा पृथ्वी की आंतरिक गर्मी से प्राप्त होती है।
2. इसे विद्युत उत्पादन में प्रयोग किया जाता है।
3. यह नवीकरणीय और प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत है।
4. यह स्थायी और लगातार उपलब्ध ऊर्जा है।
उदाहरण :-
पृथ्वी की गर्म पानी और भाप से चलने वाले भू-तापीय विद्युत गृह में टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है।
प्रश्न :- ऊर्जा का संरक्षण क्यों आवश्यक है और इसे कैसे किया जा सकता है?
उत्तर :- ऊर्जा का संरक्षण :- ऊर्जा संसाधन सीमित हैं और पर्यावरण पर उनके अधिक उपयोग से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए ऊर्जा का संरक्षण आवश्यक है।
ऊर्जा संरक्षण के उपाय निम्नलिखित हैं :-
1. जरूरत न होने पर बिजली बंद कर देनी चाहिए।
2. सार्वजनिक वाहनों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
3. परंपरागत ऊर्जा स्रोत सीमित हैं, इसलिए इनका प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।
4. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
5. विद्युत बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए।
6. कार-पूलिंग (एक कार में कई लोग यात्रा) का प्रयोग करना चाहिए।
उदाहरण :-
घरों में LED बल्ब का उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करके ऊर्जा बचाई जा सकती है।