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CLASS 10 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI CHAPTER - 5

खनिज तथा ऊर्जा संसाधन / Minerals and Energy Resources

TextbookNCERT
ClassClass 10
SubjectGeography
ChapterChapter 5
Chapter Nameखनिज तथा ऊर्जा संसाधन
MediumHindi

5.1 खनिज क्या है?

खनिज:-

हमारे जीवन का एक अत्यंत आवश्यक भाग, जिनके बिना दैनिक उपयोग की वस्तुओं का निर्माण संभव नहीं है।

  1. प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ; अकार्बनिक पदार्थ।
  2. निश्चित रासायनिक संरचना, कठोरता, रंग व निश्चित आकार।
  3. सभी प्रकार की वस्तुओं (मशीनें, औजार, भवन आदि) का निर्माण खनिजों से होता है।
उदाहरण:- लोहा, तांबा और एल्युमीनियम ऐसे खनिज हैं जिनका उपयोग औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है।

अयस्क:-

वह प्राकृतिक पदार्थ जिसमें खनिज अशुद्धियों के साथ पाए जाते हैं। अयस्क से खनिज निकालना आर्थिक रूप से लाभदायक होता है।

उदाहरण:- लौह अयस्क से लोहा, बॉक्साइट से एल्युमिनियम, मैंगनीज अयस्क से मैंगनीज प्राप्त किया जाता है।

खनिजों का महत्व:-

  1. दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली सुई से लेकर बड़े जहाज तक खनिजों से बनाए जाते हैं।
  2. इमारतें, पुल, सड़कें आदि के निर्माण में खनिजों का प्रयोग।
  3. मशीनें और औज़ार खनिजों से निर्मित होते हैं।
  4. परिवहन साधन (रेल, गाड़ी, हवाई जहाज) खनिजों पर निर्भर हैं।
उदाहरण:- लोहे से मशीनें और औज़ार बनते हैं, तांबे से बिजली के तार बनाए जाते हैं और एल्युमिनियम से बर्तन तथा हवाई जहाज के भाग बनाए जाते हैं।

5.2 खनिजों की उपलब्धता

खनिजों के प्राप्ति स्थल:-

  1. आग्नेय और कायांतरित चट्टानें — जस्ता, तांबा, टिन और सीसा जैसे खनिज।
  2. अवसादी चट्टानों की परतें — कोयला, पोटाश और सोडियम नमक जैसी खनिज संपदा।
  3. धरातलीय चट्टानों का अपघटन — कुछ खनिज इस प्रक्रिया से भी प्राप्त होते हैं।
  4. जलोढ़ जमाव (प्लेसर निक्षेप) — नदियों द्वारा लाई गई रेत-मिट्टी में सोना, चाँदी, टिन और प्लैटिनम जैसे खनिज।
  5. महासागरीय जल — नमक, मैग्नीशियम और ब्रोमिन जैसे खनिज।
उदाहरण:- सोना प्रायः नदियों के किनारे जलोढ़ जमाव में पाया जाता है, जबकि नमक समुद्र के जल से प्राप्त किया जाता है।

आग्नेय व कायांतरित चट्टानों में खनिज निर्माण:-

  1. खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों और दरारों में पाए जाते हैं।
  2. छोटे खनिज जमाव शिराओं (Veins) के रूप में और बड़े जमाव परतों (Lodes) के रूप में मिलते हैं।
  3. तरल या गैसीय अवस्था में खनिज दरारों के सहारे भू-पृष्ठ की ओर उठते हैं, ठंडा होकर जम जाते हैं — इसे धात्विक खनिज कहा जाता है।
उदाहरण:- जस्ता, तांबा, सीसा और टिन जैसे खनिज आग्नेय व कायांतरित चट्टानों में इसी प्रक्रिया से पाए जाते हैं।

खनिजों के प्रकार:-

खनिजों का वर्गीकरण रंग, चमक, कठोरता, घनत्व और क्रिस्टल संरचना के आधार पर किया जाता है। खनिज मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं।

  1. धात्विक खनिज — लौह खनिज (लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट), अलौह खनिज (तांबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट), बहुमूल्य खनिज (सोना, चाँदी, प्लैटिनम)।
  2. अधात्विक खनिज — नमक, कैल्शियम आदि।
  3. ऊर्जा खनिज — कोयला और यूरेनियम आदि।

5.3 लौह खनिज

लौह खनिज:-

ऐसे खनिज जिनमें लौह अंश पाया जाता है। ये धातु उद्योग और औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में अत्यंत उपयोगी हैं।

उदाहरण:- लोहा (Hematite, Magnetite) स्टील बनाने में मुख्य स्रोत; मैंगनीज़ (Pyrolusite) लोहे-स्टील की गुणवत्ता बढ़ाने में उपयोगी।

लौह अयस्क:-

एक आधारभूत खनिज, जिसे औद्योगिक विकास की रीढ़ माना जाता है। भारत में इसके विपुल संसाधन पाए जाते हैं और देश उच्च कोटि के लौहांशयुक्त लौह अयस्क में समृद्ध है।

  1. मैग्नेटाइट (Magnetite) — उच्च लौहांश वाला लौह अयस्क, लगभग 70% लौह अंश, उत्कृष्ट चुंबकीय गुण; विद्युत मोटर, जनरेटर व ट्रांसफॉर्मर में उपयोगी।
  2. हेमेटाइट (Hematite) — भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला लौह अयस्क, 50-60% लौह अंश; इस्पात उद्योग का मुख्य आधार।

भारत में लौह अयस्क की प्रमुख पेटियाँ:-

  1. उड़ीसा-झारखण्ड पेटी — उच्च कोटि का लौह अयस्क।
  2. महाराष्ट्र-गोआ पेटी — निर्यात के लिए प्रसिद्ध।
  3. बेल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमंगलूर-तुमकुर पेटी (कर्नाटक) — प्राचीन व समृद्ध भंडार।
  4. दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी (छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र) — इस्पात उद्योगों को कच्चा माल।
उदाहरण:- भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क मुख्य रूप से दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी से प्राप्त होता है।

5.3.1 मैंगनीज का महत्व

मैंगनीज़:-

एक महत्त्वपूर्ण लौह खनिज, जिसका प्रयोग मुख्यतः इस्पात (स्टील) के निर्माण में किया जाता है। यह इस्पात को मजबूत और टिकाऊ बनाने में सहायक होता है।

  1. एक टन इस्पात बनाने के लिए लगभग 10 किलोग्राम मैंगनीज़ की आवश्यकता।
  2. ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक दवाएँ और पेंट निर्माण में भी प्रयोग।
उदाहरण:- इस्पात कारखानों में मैंगनीज़ का उपयोग रेल की पटरियाँ, मशीनों के पुर्जे और औजार बनाने में किया जाता है।

5.4 अलौह खनिज

अलौह खनिज:-

वे खनिज जिनमें लोहा शामिल नहीं होता। तांबा, बॉक्साइट, सीसा और सोना जैसे खनिज धातु शोधन, इंजीनियरिंग तथा विद्युत उद्योगों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उदाहरण:- तांबा — विद्युत तार बनाने में उपयोग; बॉक्साइट — एल्युमिनियम बनाने का प्रमुख अयस्क।

लौह और अलौह खनिज में अंतर

आधारलौह खनिजअलौह खनिज
परिभाषालोहे का अंश होता हैलोहे का अंश नहीं होता
मुख्य तत्वलौह (Iron) उपस्थितलौह अनुपस्थित
उदाहरणलौह अयस्क, मैंगनीज़, निकल, कोबाल्टतांबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट
उपयोगइस्पात व भारी उद्योगों मेंविद्युत, इंजीनियरिंग व धातु शोधन उद्योगों में
उदाहरण स्रोतहेमेटाइटतांबा

5.4.1 ताँबे का महत्व

ताँबा:-

एक अलौह खनिज, घातवर्ध्य, तन्य तथा ताप का अच्छा सुचालक होने के कारण अत्यंत उपयोगी धातु। इसका उपयोग मुख्यतः बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रसायन उद्योगों में किया जाता है।

भारत में ताँबे का उत्पादन: देश का लगभग 52% ताँबा मध्य प्रदेश की बालाघाट खदानें उत्पन्न करती हैं।

उदाहरण:- विद्युत तार और केबल ताँबे से बनाए जाते हैं, क्योंकि यह विद्युत का उत्तम सुचालक है।

5.4.2 बॉक्साइट

बॉक्साइट:-

एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क। बॉक्साइट के निक्षेप उन चट्टानों के विघटन से बनते हैं, जो एल्युमिनियम सिलिकेटों से समृद्ध होती हैं।

  1. एल्युमिनियम अत्यधिक हल्की, घातवर्ध्य तथा ताप-विद्युत की अच्छी सुचालक धातु है।

भारत में बॉक्साइट का वितरण: अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियाँ, बिलासपुर-कटनी का पठारी प्रदेश।

उदाहरण:- बॉक्साइट से प्राप्त एल्युमिनियम का उपयोग विमान, बर्तन और विद्युत तार बनाने में किया जाता है।

5.5 अधात्विक खनिज

अधात्विक खनिज:-

वे खनिज जिनमें धातु का कोई अंश नहीं होता। ये दैनिक जीवन तथा विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

उदाहरण:- अभ्रक, नमक, पोटाश, चूनापत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर आदि अधात्विक खनिज हैं।

अभ्रक:-

एक अधात्विक खनिज, जो सामान्यतः प्लेटों या पतली परतों के रूप में पाया जाता है। इसमें ऊष्मा और विद्युत को रोकने की क्षमता होती है, इसलिए यह उद्योगों में अत्यंत उपयोगी है।

प्रमुख क्षेत्र: छोटा नागपुर पठार का उत्तरी किनारा, बिहार-झारखण्ड की कोडरमा-गया-हज़ारीबाग पेटी, राजस्थान (अजमेर के पास), आंध्र प्रदेश की नेल्लोर पेटी।

उदाहरण:- इलेक्ट्रिक हीटर, ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रिक उपकरणों में अभ्रक का उपयोग किया जाता है।

5.6 चूना खनिज

चूना पत्थर:-

एक अधात्विक खनिज, जो कैल्शियम या कैल्शियम कार्बोनेट तथा मैग्नीशियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है, अधिकांशतः अवसादी चट्टानों में मिलता है।

  1. सीमेंट उद्योग का आधारभूत कच्चा माल।
  2. लौह-प्रगलन की भट्टियों के लिए अनिवार्य।
उदाहरण:- सीमेंट कारखानों में चूना पत्थर से सीमेंट तैयार किया जाता है।

खनन उद्योग घातक उद्योग क्यों:-

खनन उद्योग को घातक इसलिए कहा जाता है क्योंकि इससे श्रमिकों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

  1. श्रमिकों को लगातार धूल एवं हानिकारक धुएँ में काम करना पड़ता है, जिससे फेफड़ों की बीमारियाँ होती हैं।
  2. खदानों में पानी भरने या आग लगने की संभावना; छत गिरने से गंभीर दुर्घटनाएँ।
  3. खनन से नदियों का जल प्रदूषित होता है और भूमि-मिट्टी का अपक्षय होता है।
उदाहरण:- कोयला खदानों में धूल के कारण श्रमिकों को न्यूमोकोनियोसिस जैसी फेफड़ों की बीमारी हो जाती है।

5.7 खनिजों का संरक्षण

खनिज संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता:-

  1. खनिज हमारे उद्योग और कृषि के आधार हैं, परंतु ये नवीकरणीय नहीं होते।
  2. निक्षेपों की कुल मात्रा सीमित है; निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं।
  3. वर्तमान में तेजी से उपयोग हो रहा है, इसलिए आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।
उदाहरण:- यदि आज हम कोयला और पेट्रोलियम जैसे खनिजों का अंधाधुंध उपयोग करेंगे, तो भविष्य में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है।

खनिज संरक्षण के उपाय:-

  1. खनन एवं परिष्करण के दौरान खनिज पदार्थों की बर्बादी कम करना।
  2. खनिजों के स्थान पर प्रमाणित प्लास्टिक एवं लकड़ी का प्रयोग जहाँ तक संभव हो।
  3. स्क्रैप व पुराने माल का पुनः प्रयोग; पुनः चक्रण को बढ़ावा।
  4. खनिज संसाधनों का नियोजित एवं सतत् पोषणीय उपयोग।
  5. पर्यावरण संरक्षण हेतु खनिजों के वैकल्पिक स्रोत अपनाना, जैसे CNG।
उदाहरण:- पेट्रोल-डीज़ल के स्थान पर CNG का उपयोग करने से खनिज ईंधनों की बचत होती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

5.8 ऊर्जा संसाधन

ऊर्जा संसाधन:-

वे संसाधन जिनसे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। इसका उपयोग खाना पकाने, रोशनी-ताप प्राप्त करने, गाड़ियों के संचालन तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन के लिए किया जाता है।

  1. प्रमुख ईंधन खनिज — कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम।
  2. ऊर्जा संसाधनों को परंपरागत एवं गैर-परंपरागत साधनों में वर्गीकृत किया जाता है।
उदाहरण:- कोयले से विद्युत उत्पादन कर घरों में रोशनी और उद्योगों में मशीनें चलाई जाती हैं।

5.9 परंपरागत ऊर्जा के स्रोत

परंपरागत ऊर्जा के स्रोत:-

वे ऊर्जा स्रोत जिनका उपयोग मानव द्वारा लंबे समय से किया जा रहा है।

  1. लकड़ी और उपले — खाना पकाने-ताप के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन।
  2. कोयला — ताप विद्युत उत्पादन एवं उद्योगों में उपयोग।
  3. पेट्रोलियम — वाहनों के संचालन एवं उद्योगों में प्रयोग।
  4. प्राकृतिक गैस — घरेलू ईंधन एवं उर्वरक उद्योग में उपयोग।
  5. विद्युत ऊर्जा — जल विद्युत, ताप विद्युत।

इनमें से अधिकांश अनवीकरणीय होते हैं और अधिक उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण होता है।

5.9.1 विद्युत का महत्व

विद्युत:-

एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन, जिसका उपयोग घरेलू कार्यों, उद्योगों, परिवहन तथा कृषि में किया जाता है।

  1. जल विद्युत (Hydel Power) — बहते जल से हाइड्रो टरबाइन चलाकर उत्पन्न; नवीकरणीय और कम प्रदूषण।
  2. ताप विद्युत (Thermal Power) — कोयला, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस जलाकर उत्पन्न।

प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएँ: भाखड़ा नांगल परियोजना, दामोदर घाटी कारपोरेशन (DVC), कोयली हाइडल परियोजना।

उदाहरण:- भाखड़ा नांगल परियोजना से जल विद्युत उत्पन्न कर उत्तर भारत के कई राज्यों को बिजली उपलब्ध कराई जाती है।

तापीय विद्युत और जल विद्युत में अंतर

आधारतापीय विद्युतजल विद्युत ऊर्जा
उत्पादन साधनकोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैसगिरते जल की शक्ति से टरबाइन
प्रदूषणप्रदूषण युक्तप्रदूषण रहित
संसाधन का प्रकारअनवीकरणीय स्रोतों पर आधारितनवीकरणीय स्रोतों पर आधारित
भारत में स्थिति310 से अधिक ताप विद्युत केंद्रअनेक बहुउद्देशीय परियोजनाएँ
उदाहरणतलचर, पांकी, नामरूप, उरन, नैवेलीभाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी, कोयली

5.10 गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधन

गैर-परंपरागत ऊर्जा के स्रोत:-

वे ऊर्जा स्रोत जिनका उपयोग नवीन तकनीकों द्वारा किया जाता है और जो पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

  1. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, बायोगैस ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा।
  2. ये स्रोत अक्षय या दीर्घकाल तक उपलब्ध होते हैं और इनसे प्रदूषण कम होता है।
उदाहरण:- सौर ऊर्जा से सोलर पैनल द्वारा घरों में बिजली उत्पन्न की जाती है।

कोयला:-

भारत में बहुतायत में पाया जाने वाला एक जीवाश्म ईंधन, जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का महत्त्वपूर्ण भाग प्रदान करता है।

संपीड़न की मात्रा, गहराई और समय के आधार पर कोयले के तीन प्रकार होते हैं:

  1. लिग्नाइट — निम्न कोटि का भूरा व मुलायम कोयला, अधिक नमी; तमिलनाडु के नैवेली क्षेत्र में प्रमुख भंडार; विद्युत उत्पादन में उपयोग।
  2. बिटुमिनस कोयला — गहराई में दबा हुआ, उच्च तापमान से निर्मित, वाणिज्यिक उपयोग में सर्वाधिक प्रचलित; उच्च श्रेणी का उपयोग धातुशोधन में।
  3. एन्थ्रासाइट कोयला — सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला, कार्बन की मात्रा अधिक, जलने पर कम धुआँ।
उदाहरण:- नैवेली ताप विद्युत संयंत्र में लिग्नाइट से बिजली उत्पन्न की जाती है, जबकि इस्पात कारखानों में बिटुमिनस कोयले का उपयोग लोहा गलाने के लिए होता है।

भारत में कोयले का वितरण (भूगर्भिक युग):-

  1. गोंडवाना युग (लगभग 200 लाख वर्ष से अधिक पुराना) — धातुशोधन कोयला; दामोदर घाटी (झरिया, रानीगंज, बोकारो) में प्रमुख; पश्चिम बंगाल व झारखंड में स्थित; गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी जमाव।
  2. टर्शियरी युग (लगभग 55 लाख वर्ष पुराना) — मुख्यतः उत्तर-पूर्वी भारत (मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड) में पाया जाता है।
उदाहरण:- झरिया कोयला क्षेत्र (झारखंड) गोंडवाना कोयले का प्रमुख क्षेत्र है, जहाँ से इस्पात उद्योग के लिए कोयला प्राप्त किया जाता है।

पेट्रोलियम:-

भारत में कोयले के बाद ऊर्जा का दूसरा प्रमुख साधन। यह आधुनिक उद्योगों और परिवहन व्यवस्था का आधार है।

  1. ताप-प्रकाश के लिए ईंधन, मशीनों के स्नेहक (Lubricant) के रूप में प्रयोग।
  2. तेल शोधनशालाएँ संश्लेषित वस्त्र, उर्वरक तथा अनेक रासायनिक उद्योगों के लिए नोडीय बिंदु का कार्य करती हैं।

उत्पादन: भारत का लगभग 63% पेट्रोलियम मुम्बई हाई से, लगभग 18% गुजरात से और लगभग 13% असम से प्राप्त होता है।

प्राकृतिक गैस:-

एक महत्त्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत; इसका प्रयोग ऊर्जा के साधन के रूप में तथा पेट्रो-रासायन उद्योग के लिए औद्योगिक कच्चे माल के रूप में किया जाता है।

  1. स्वच्छ ईंधन; इसके उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है, इसलिए पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।
  2. वितरण — कृष्णा-गोदावरी नदी बेसिन में विशाल भंडार; अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह भी महत्त्वपूर्ण क्षेत्र।
उदाहरण:- CNG के रूप में प्राकृतिक गैस का उपयोग वाहनों में किया जाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है।

5.10.1 परमाणु ऊर्जा

परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा:-

अणुओं की संरचना में परिवर्तन करके प्राप्त की जाती है। जब अणुओं की संरचना बदली जाती है, तो ऊष्मा के रूप में अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है, जिसका उपयोग विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है।

भारत में परमाणु ऊर्जा के लिए खनिज संसाधन: यूरेनियम (झारखंड), थोरियम (राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला व केरल की मोनाजाइट रेत)।

उदाहरण:- यूरेनियम से उत्पन्न परमाणु ऊर्जा का उपयोग परमाणु विद्युत गृहों में बिजली बनाने के लिए किया जाता है।

5.10.2 सौर ऊर्जा

भारत में सौर ऊर्जा का उज्ज्वल भविष्य:-

  1. भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ सूर्य की किरणें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
  2. यह प्रदूषण रहित और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
  3. निम्नवर्ग के लोग भी इसे आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
उदाहरण:- ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पैनल लगाकर घरों और पानी की पंपिंग के लिए बिजली उत्पन्न की जाती है।

5.10.3 पवन ऊर्जा

पवन ऊर्जा:-

वह ऊर्जा जो हवा की गति से टरबाइन चलाकर प्राप्त की जाती है — एक स्वच्छ, नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत।

  1. भारत में सबसे बड़े पवन ऊर्जा फार्म तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरई तक फैले हुए हैं।
  2. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र और लक्षद्वीप में भी महत्त्वपूर्ण पवन ऊर्जा फार्म हैं।
उदाहरण:- जैसलमेर पवन फार्म राजस्थान में सैकड़ों मेगावॉट विद्युत उत्पादन करता है।

5.10.4 बायोगैस

बायोगैस:-

वह ऊर्जा जो घास-फूस, कृषि कचरा, जानवरों और मानव अपशिष्ट पदार्थों से प्राप्त की जाती है।

  1. नवीकरणीय व पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत।
  2. घरेलू व कृषि कार्यों के लिए आसानी से उपयोग; अपशिष्ट पदार्थों का निपटान भी होता है।
उदाहरण:- ग्रामीण घरों में बायोगैस का उपयोग खाना पकाने और दीप जलाने के लिए किया जाता है।

5.10.5 ज्वारीय ऊर्जा

ज्वारीय ऊर्जा:-

वह ऊर्जा जो महासागरीय जल की ज्वार-भाटा और तरंगों से उत्पन्न की जाती है; विद्युत उत्पादन में प्रयोग होती है।

  1. संकरी खाड़ी के आर-पार बाढ़ द्वार बनाकर बाँध तैयार किए जाते हैं।
  2. उच्च ज्वार के समय पानी बाँध के भीतर भरता है और प्रवेश द्वार बंद कर दिया जाता है।
  3. ज्वार उतरने पर पानी को पाइप के माध्यम से बहाया जाता है, जो टरबाइन को घुमाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है।

भारत में आदर्श दशाएँ: खंभात की खाड़ी (गुजरात), कच्छ की खाड़ी (गुजरात), पश्चिमी तट (गुजरात), सुंदरवन क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, गंगा डेल्टा)।

उदाहरण:- फ्रांस की रेंस (Rance) ज्वारीय ऊर्जा परियोजना इसी प्रक्रिया से विद्युत उत्पादन करती है।

5.10.6 भू-तापीय ऊर्जा

भू-तापीय ऊर्जा:-

वह ऊर्जा जो पृथ्वी के आंतरिक भागों से निकलने वाले ताप का उपयोग करके उत्पन्न की जाती है; मुख्यतः विद्युत उत्पादन में उपयोग होती है।

  1. नवीकरणीय और प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत।
  2. स्थायी और लगातार उपलब्ध ऊर्जा।
उदाहरण:- पृथ्वी के गर्म पानी और भाप से चलने वाले भू-तापीय विद्युत गृह में टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है।

5.11 ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण

ऊर्जा संरक्षण के उपाय:-

  1. जरूरत न होने पर बिजली बंद कर देनी चाहिए।
  2. सार्वजनिक वाहनों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
  3. परंपरागत ऊर्जा स्रोत सीमित हैं, इसलिए इनका प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।
  4. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
  5. विद्युत बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए।
  6. कार-पूलिंग (एक कार में कई लोग यात्रा) का प्रयोग करना चाहिए।
उदाहरण:- घरों में LED बल्ब का उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करके ऊर्जा बचाई जा सकती है।
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