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Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 10

Chapter 10: कार्य तथा ऊर्जा / Work and Energy
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति के बारे में समझेंगे। साथ ही ऊर्जा के विभिन्न रूपों, गतिज एवं स्थितिज ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण के नियम तथा शक्ति की अवधारणा को सरल भाषा में पढ़ेंगे। 

नीचे अध्याय 10 कार्य तथा ऊर्जा  के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 10 : कार्य तथा ऊर्जा

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 9

Subject

Science

Chapter

Chapter 10

Chapter Name

कार्य तथा ऊर्जा

Medium

Hindi

क्या आप Class 9 Science Chapter 2 Notes in Hindi  ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको कार्य तथा ऊर्जा अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप कार्य, ऊर्जा, शक्ति, गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा ऊर्जा संरक्षण के नियम जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं के बारे में विस्तार से समझेंगे।

 

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
10.1 कार्य क्या है?
  10.1.1 कठोर काम करने के बावजूद कुछ अधिक ‘कार्य’ क्यों नहीं होता?
  10.1.2 कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना क्या है?
  10.1.3 एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य कैसे ज्ञात किया जाता है?
10.2 ऊर्जा क्या है?
  10.2.1 ऊर्जा के विभिन्न रूप कौन-कौन से हैं?
  10.2.2 गतिज ऊर्जा क्या है?
  10.2.3 स्थितिज ऊर्जा क्या है?
  10.2.4 किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा कैसे ज्ञात की जाती है?
  10.2.5 क्या ऊर्जा के विभिन्न रूप परस्पर परिवर्तनीय हैं?
  10.2.6 ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है?
10.3 कार्य करने की दर क्या है?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति जैसी महत्वपूर्ण भौतिक राशियों के बारे में समझेंगे। आप जानेंगे कि किसी वस्तु पर किया गया कार्य लगाए गए बल तथा बल की दिशा में हुए विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है। यदि किसी वस्तु का विस्थापन शून्य हो, तो उस पर किया गया कार्य भी शून्य माना जाता है।
आप ऊर्जा की अवधारणा को भी समझेंगे। किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहा जाता है। ऊर्जा और कार्य दोनों का SI मात्रक जूल (Joule) होता है।
इस अध्याय में आप ऊर्जा के विभिन्न रूपों के बारे में पढ़ेंगे। गतिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु को उसकी गति के कारण प्राप्त होती है, जबकि स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु की स्थिति अथवा आकृति के कारण उसमें संचित रहती है।
आप यह भी जानेंगे कि पृथ्वी की सतह से किसी ऊँचाई पर स्थित वस्तु में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होती है। इसके अतिरिक्त ऊर्जा के विभिन्न रूपों के बीच होने वाले रूपांतरणों को भी समझेंगे।
इस अध्याय में ऊर्जा संरक्षण के नियम का अध्ययन किया गया है। इस नियम के अनुसार ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है तथा किसी बंद तंत्र की कुल ऊर्जा सदैव स्थिर रहती है।
अंत में आप शक्ति के बारे में पढ़ेंगे, जो कार्य करने की दर को दर्शाती है। शक्ति का SI मात्रक वाट (Watt) है। यह अध्याय दैनिक जीवन में ऊर्जा के उपयोग तथा उसके संरक्षण को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

10.1 कार्य क्या है?

10.1.1 कठोर काम करने के बावजूद कुछ अधिक 'कार्य' क्यों नहीं होता?

कार्य (Work) किसे कहते हैं :-

कार्य :- वह स्थिति है जिसमें किसी वस्तु पर बल लगाने से वह वस्तु बल की दिशा में विस्थापित हो।

हम कई बार कठिन कार्य करते हैं जैसे :- पढ़ना, लिखना, सोचना, चित्र बनाना, विचार-विमर्श करना परंतु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इनमें बहुत थोड़ा या नगण्य कार्य होता है, क्योंकि यदि वस्तु विस्थापित नहीं हुई, तो कार्य नहीं हुआ माना जाएगा।

कार्य की परिभाषा वैज्ञानिक के अनुसार
“जब बल लगाने पर कोई वस्तु बल की दिशा में विस्थापित होती है, तभी कार्य होता है।” यदि विस्थापन नहीं हुआ — तो वैज्ञानिक दृष्टि में कार्य शून्य माना जाएगा।

उदाहरण :-

आप दीवार को जोर से धक्का देते हैं, लेकिन दीवार हिलती नहीं  तो वैज्ञानिक रूप से कोई कार्य नहीं हुआ।

नोट :-

कार्य के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

1. सजीवों को ऊर्जा भोजन से मिलती है।

2. मशीनों को ऊर्जा ईंधन से मिलती है।

कार्य किया जाना किन स्थितियों में माना जाता है :-

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसी वस्तु पर कार्य किया जाना निम्नलिखित स्थितियों में माना जाता है :-

1. चलती हुई वस्तु विरामावस्था में आ जाए ➡ जैसे – चलती गाड़ी को ब्रेक लगाना।

2. विरामावस्था में पड़ी वस्तु चलने लगे ➡ जैसे – ज़मीन पर रखे बक्से को धक्का देने पर वह आगे बढ़े।

3. गतिमान वस्तु का वेग (गति) बदल जाए ➡ जैसे – तेज़ चलती साइकिल की गति धीमी करना।

4. वस्तु का आकार या आकृति बदल जाए ➡ जैसे – रबर को खींचने पर उसका आकार बदल जाता है।

10.1.2 कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना क्या है?

कार्य किए जाने की कौन-कौन सी दशाएँ होती हैं :-

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसी वस्तु पर कार्य तभी होता है जब निम्नलिखित दोनों शर्तें पूरी हों :-

1. वस्तु पर बल लगाया जाए  ➡ बिना बल लगाए कोई कार्य नहीं हो सकता।

2. वस्तु में विस्थापन (स्थिति में परिवर्तन) हो  ➡ बल लगाने पर वस्तु की स्थिति बदलनी चाहिए।

उदाहरण :-

अगर आप दीवार को बहुत ज़ोर से धक्का लगाते हैं लेकिन वह नहीं हिलती, तो वैज्ञानिक दृष्टि से आपने कोई कार्य नहीं किया, क्योंकि विस्थापन नहीं हुआ।

नोट :-  

यदि बल लगाया गया लेकिन वस्तु हिली नहीं (विस्थापन नहीं हुआ), तो कार्य नहीं हुआ माना जाता है।

10.1.3 एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य कैसे ज्ञात किया जाता है?

एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य किसे कहते हैं :-

एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य :- जब किसी वस्तु पर नियत (स्थिर) बल लगाया जाता है और वस्तु उस बल की दिशा में विस्थापित होती है, तब उस पर नियत बल द्वारा कार्य किया जाता है। इसे निम्नलिखित सूत्र से समझा जा सकता है :- 

कार्य (W) = बल (F) × विस्थापन (s)

यहाँ पर, W = कार्य (Work), F = बल (Force), s = विस्थापन (Displacement)

उदाहरण :-

यदि किसी वस्तु पर 5 न्यूटन बल लगाया गया और वह 3 मीटर विस्थापित हुई,
तो कार्य = 5 × 3 = 15 जूल।

नोट :-

1. कार्य एक अदिश राशि है, यानी इसका केवल मान होता है, दिशा नहीं।
2. कार्य का S.I. मात्रक होता है – न्यूटन-मीटर (N·m) या जूल (Joule)।
3. 1 जूल कार्य = जब 1 न्यूटन बल द्वारा वस्तु को 1 मीटर विस्थापित किया जाए।

1 जूल कार्य किसे कहते हैं :-

जब किसी वस्तु पर लगाया गया बल उसे बल की दिशा में 1 मीटर तक विस्थापित करता है, तो किया गया कार्य 1 जूल (1 Joule) होता है।

 1 जूल (J) = 1 न्यूटन (N) × 1 मीटर (m)
उदाहरण :-

यदि एक व्यक्ति 1 न्यूटन बल लगाकर किसी वस्तु को 1 मीटर तक खींचता है, तो उसने 1 जूल कार्य किया।

नोट :-   

यहाँ पर, 

1. जूल (Joule) कार्य का मात्रक है।

2. न्यूटन (Newton) बल का मात्रक है।

3. मीटर (Meter) विस्थापन का मात्रक है।

कार्य के प्रकार कौन-कौन से होते हैं? समझाइए :-

एक बल द्वारा किया गया कार्य निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है :-

1. धनात्मक कार्य (Positive Work)

2. ऋणात्मक कार्य (Negative Work)

3. शून्य कार्य (Zero Work)

कार्य के प्रकार धनात्मक कार्य (Positive Work) को समझाइए :-

धनात्मक कार्य (Positive Work) :- उस स्थिति को माना जाता है, 

1. जब बल, वस्तु की गति की दिशा में लगाया जाता है।

2. बल और विस्थापन के बीच कोण = 0° है।

3. कार्य का मान धनात्मक होता है।

उदाहरण :-  

जब हम फुटबॉल को किक मारते हैं, तो वह उसी दिशा में चलती है। यह धनात्मक कार्य है।

कार्य के प्रकार ऋणात्मक कार्य (Negative Work) को समझाइए :-

ऋणात्मक कार्य (Negative Work) :- उस स्थिति को माना जाता है, 

1. जब बल, वस्तु की गति की विपरीत दिशा में लगाया जाता है।

2. बल और विस्थापन के बीच कोण = 180°

3. कार्य का मान ऋणात्मक होता है।

उदाहरण :-

जब फुटबॉल रुकती है, तो उस पर घर्षण बल कार्य करता है जो गति की विपरीत दिशा में होता है। यह ऋणात्मक कार्य है।

कार्य के प्रकार शून्य कार्य (Zero Work) को समझाइए :-

शून्य कार्य (Zero Work) :- उस स्थिति को माना जाता है, 

1. जब बल और विस्थापन के बीच कोण = 90° होता है। 

2. ऐसे में किया गया कार्य शून्य (0) होता है।

उदाहरण :-

चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल चंद्रमा की गति के लंबवत (90°) होता है। यहाँ कार्य शून्य होता है।

 

10.2 ऊर्जा क्या है?

ऊर्जा किसे कहते हैं? ऊर्जा के गुणों को समझाइए :-

ऊर्जा :- वह क्षमता है जिससे कोई वस्तु कार्य कर सकती है।

ऊर्जा की विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. ऊर्जा = कार्य करने की क्षमता होती है।

2. किसी वस्तु में ऊर्जा उस वस्तु द्वारा किए गए कार्य के बराबर होती है।

3. जब कोई वस्तु कार्य करती है, तो उसकी ऊर्जा में कमी आती है, और जिस वस्तु पर कार्य होता है, उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है।

4. ऊर्जा एक अदिश राशि है।

5. ऊर्जा का S.I. मात्रक = जूल (J) होता है।

6. ऊर्जा का बड़ा मात्रक किलो-जूल (KJ) होता है। 1 KJ = 1000 J

उदाहरण :-

जब एक बच्चा गेंद को ऊपर फेंकता है, तो वह अपने शरीर की ऊर्जा को गेंद को देने का कार्य करता है। गेंद की ऊँचाई बढ़ने के साथ उसकी ऊर्जा भी बढ़ती है।

10.2.1 ऊर्जा के विभिन्न रूप कौन-कौन से हैं?

ऊर्जा के मुख्य रूप कौन-कौन से होते हैं :-

ऊर्जा के कई प्रकार होते हैं, जो विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करते हैं। नीचे ऊर्जा के मुख्य रूप दिए गए हैं:

1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) :- वह ऊर्जा जो किसी गतिशील वस्तु में होती है।
उदाहरण :- चलती हुई कार, दौड़ता हुआ व्यक्ति।

2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) :-  वह ऊर्जा जो किसी वस्तु में उसके स्थिति या अवस्था के कारण होती है।
उदाहरण :- ऊँचाई पर रखी वस्तु।

3. ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) :-

वह ऊर्जा जो किसी वस्तु में उसके ताप के कारण होती है।
उदाहरण :- उबलता पानी।

4. विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy) :- वह ऊर्जा जो विद्युत धारा से प्राप्त होती है।
उदाहरण :-  पंखा, बल्ब, कम्प्यूटर।

5. ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy) :-  वह ऊर्जा जो कंपन से उत्पन्न होती है और जिसे हम सुन सकते हैं।
उदाहरण :- स्पीकर से निकलने वाली आवाज।

6. प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) :- वह ऊर्जा जो प्रकाश के रूप में होती है।
उदाहरण :- सूर्य से आने वाली ऊर्जा।

7. रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) :- वह ऊर्जा जो रासायनिक अभिक्रियाओं में संग्रहित होती है।
उदाहरण :-  बैटरी, पेट्रोल, भोजन।

8. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) :- वह ऊर्जा जो परमाणु के नाभिक में संग्रहित होती है।
उदाहरण :- परमाणु संयंत्रों में प्रयोग की जाने वाली ऊर्जा।

यांत्रिक ऊर्जा क्या होती है :-

यांत्रिक ऊर्जा :- वह ऊर्जा होती है जो किसी वस्तु में गति या स्थिति के कारण होती है। इसे दो भागों में बाँटा जाता है:

1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) :- वह ऊर्जा जो किसी वस्तु में उसकी गति के कारण होती है।

2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) :- वह ऊर्जा जो किसी वस्तु में उसकी स्थिति (जैसे – ऊँचाई) के कारण होती है।

यांत्रिक ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा

उदाहरण :-

1. झूले पर झूलते हुए बच्चे में स्थितिज व गतिज दोनों ऊर्जा होती हैं।
2. बहते झरने का पानी, गिरने से पहले स्थितिज ऊर्जा रखता है और गिरते समय गतिज ऊर्जा में बदल जाता है।

नोट :-

यदि कोई वस्तु गति कर रही हो या ऊँचाई पर रखी हो, तो उसमें यांत्रिक ऊर्जा होती है।

10.2.2 गतिज ऊर्जा क्या है?

गतिज ऊर्जा क्या होती है? उदाहरण सहित समझाइए :-

गतिज ऊर्जा :- वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी गति के कारण होती है। जब कोई वस्तु गतिशील होती है, तो वह कार्य करने में सक्षम होती है – इसी क्षमता को गतिज ऊर्जा कहा जाता है।

गतिज ऊर्जा के उदाहरण :- 

1. एक गति करती हुई क्रिकेट बॉल

2. बहता हुआ पानी

3. चलती हुई कार

4. दौड़ता हुआ खिलाड़ी

5. लुढ़कता हुआ पत्थर

6. उड़ता हुआ हवाई जहाज

7. बहती हुई हवा

8. गति करती हुई गोली

गतिज ऊर्जा का सूत्र :-

यदि कोई वस्तु द्रव्यमान = m हो और वेग = v हो, तो उसकी गतिज ऊर्जा होगी :-

गतिज ऊर्जा \((KE) = \frac{1}{2}m{v^2}\)

उदाहरण :-

अगर 2 किलोग्राम की गेंद 3 मीटर/सेकंड की गति से चल रही हो, तो:

\(KE\;{\rm{ = }}\;\frac{{\rm{1}}}{{\rm{2}}}\;{\rm{ \times }}\;{\rm{2}}\;{\rm{ \times }}\;{\rm{32}}\;{\rm{ = }}\;{\rm{1}}\;{\rm{ \times }}\;{\rm{9}}\;{\rm{ = }}\;{\rm{9}}\)  जूल

इस प्रकार, उस गेंद में 9 जूल की गतिज ऊर्जा होगी।

नोट :- 

गतिज ऊर्जा निर्भर करती है :- 

1. वस्तु के द्रव्यमान (m) पर 

2. वस्तु के वेग (v) के वर्ग पर

10.2.3 स्थितिज ऊर्जा क्या है?

स्थितिज ऊर्जा किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए :-

स्थितिज ऊर्जा :- वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी स्थिति या आकार में परिवर्तन के कारण संचित होती है। यह ऊर्जा तब प्रकट होती है जब कोई वस्तु ऊँचाई पर हो या उसमें तनाव, खिंचाव आदि हो।

स्थितिज ऊर्जा के मुख्य कारण निम्नलिखित है :- 

1. वस्तु की ऊँचाई

2. वस्तु का तनाव या खिंचाव
स्थितिज ऊर्जा के उदाहरण :- 

1. बाँध में जमा पानी: ऊँचाई पर स्थित होने से इसमें स्थितिज ऊर्जा होती है, जो टरबाइन को घुमाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है।

2. धनुष की तनित डोरी: डोरी में तनाव के कारण उसमें स्थितिज ऊर्जा संचित होती है, जो तीर छोड़ते समय गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।

3. ऊँचाई पर रखा पत्थर: यह नीचे गिरकर कार्य कर सकता है क्योंकि उसमें स्थितिज ऊर्जा होती है।

4. खींची हुई रबर पट्टी: इसमें भी आकृति में परिवर्तन के कारण स्थितिज ऊर्जा संचित होती है।

स्थितिज ऊर्जा का सूत्र निम्नलिखित है :- 

स्थितिज ऊर्जा (PE) = mgh

यहाँ पर, m = वस्तु का द्रव्यमान, g = गुरुत्वाकर्षण त्वरण (9.8 m/s2), h = ऊँचाई

उदाहरण :- यदि 2 किलोग्राम की वस्तु 5 मीटर ऊँचाई पर रखी है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा होगी :- 

PE = mgh = 2 × 9.8 × 5 = 98 जूल

इस प्रकार, उस वस्तु में 98 जूल की स्थितिज ऊर्जा संचित होगी।

स्थितिज ऊर्जा को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-कौन से हैं :-

स्थिति ऊर्जा (Potential Energy) :- को निम्नलिखित तीन मुख्य कारक प्रभावित करते हैं:

1. द्रव्यमान (Mass) :-  स्थिति ऊर्जा ∝ वस्तु का द्रव्यमान (m) = PE ∝ cm

(i) यदि वस्तु का द्रव्यमान अधिक होगा, तो स्थिति ऊर्जा भी अधिक होगी।

(ii) यदि वस्तु का द्रव्यमान कम होगा, तो स्थिति ऊर्जा भी कम होगी।

2. पृथ्वी तल से ऊँचाई (Height from Earth Surface) :-  स्थिति ऊर्जा ∝ पृथ्वी तल से ऊँचाई (h) =  PE ∝ h

(यह उस रास्ते पर निर्भर नहीं करता जिससे वस्तु ऊपर पहुँची है।)

(i) वस्तु की ऊँचाई अधिक होगी, तो उसकी स्थिति ऊर्जा अधिक होगी।

(ii) वस्तु की ऊँचाई कम होगी, तो उसकी स्थिति ऊर्जा कम होगी।

3. आकार में परिवर्तन (Change in Shape) :- वस्तु में खिंचाव (Stretching), ऐंठन (Twisting) या झुकाव (Bending) होने पर उसमें भी स्थिति ऊर्जा संग्रहीत होती है।

(i) जितना अधिक आकार बदलेगा, उतनी ही स्थिति ऊर्जा अधिक होगी।

उदाहरण :-

1. ऊँचाई पर रखा हुआ पत्थर – उसमें अधिक स्थिति ऊर्जा होती है।

2. खींचा गया रबर बैंड – उसमें भी स्थिति ऊर्जा संग्रहीत होती है।

10.2.4 किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा कैसे ज्ञात की जाती है?

किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) को कैसे व्यक्त किया जाता है :-

जब किसी वस्तु को किसी ऊँचाई तक उठाया जाता है, तो उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा संचित हो जाती है।
यह इस प्रकार समझा जा सकता है :-

1. गुरुत्व बल का कार्य :- जब किसी द्रव्यमान mmm की वस्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर ऊँचाई hhh तक उठाया जाता है, तब पृथ्वी का गुरुत्व बल (Gravity) उसे नीचे की ओर खींचता है, जिसका मान होता है:
बल = mg
यहाँ पर,  g = पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण (लगभग 9.8 m/s²)
2. किया गया कार्य (Work Done) :- वस्तु को ऊँचाई तक उठाने में किया गया कार्य,

कार्य (W) = बल × विस्थापन
W = mg × h
3. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) :- यह कार्य वस्तु में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Ep) के रूप में संग्रहीत हो जाता है।

इसलिए, स्थिति ऊर्जा (Ep) = m × g × h = mgh

उदाहरण :-

यदि 2 kg की कोई वस्तु 5 मीटर ऊँचाई पर उठाई जाती है:

Ep = 2 × 9.8 × 5 = 98 जूल (J)

नोट :- 

वस्तु की स्थितिज ऊर्जा इस पर निर्भर करती है :-

(i) वस्तु का द्रव्यमान (m)

(ii) पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण (g)

(iii) वस्तु की ऊँचाई (h)

10.2.5 क्या ऊर्जा के विभिन्न रूप परस्पर परिवर्तनीय हैं?

ऊर्जा का रूपान्तरण किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए :-

ऊर्जा का रूपान्तरण :- जब ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदल जाती है, तो उसे ऊर्जा का रूपान्तरण (Transformation of Energy) कहते हैं।

उदाहरण :-  

एक निश्चित ऊँचाई पर रखा हुआ पत्थर :- जब पत्थर एक ऊँचाई पर स्थिर होता है, तो उसमें केवल स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) होती है।

जब उसे गिराया जाता है, तो :-

(i) उसकी ऊँचाई घटती है ⇒ स्थितिज ऊर्जा घटती है।

(ii) उसका वेग बढ़ता है ⇒ गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) बढ़ती है।

जैसे ही वह ज़मीन तक पहुँचता है :-

a. उसकी स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाती है।

b. उसकी गतिज ऊर्जा अधिकतम हो जाती है।

इस प्रकार :- स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा

यानी ऊर्जा का रूपान्तरण हुआ।

उदाहरण :-

1. विद्युत बल्ब में: विद्युत ऊर्जा → प्रकाश ऊर्जा

2. लाउडस्पीकर में: विद्युत ऊर्जा → ध्वनि ऊर्जा

3. बैटरी से पंखा चलाना: रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा → गतिज ऊर्जा

10.2.6 ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है?

ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है? समझाइए :-

ऊर्जा संरक्षण का नियम :- यह बताता है कि ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।

ऊर्जा संरक्षण नियम के मुख्य गुण निम्नलिखित है :- 

1. ऊर्जा न उत्पन्न की जा सकती है, न नष्ट की जा सकती है।

2. यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित होती है।

3. ऊर्जा का रूपांतरण चाहे जितनी बार हो, लेकिन कुल ऊर्जा हमेशा समान रहती है।

4. कभी-कभी कुछ ऊर्जा ऊष्मा (Heat) या ध्वनि के रूप में बेकार हो जाती है, लेकिन वह भी ऊर्जा का ही रूप होती है।
उदाहरण :-  

एक pendulum (लोलक) के दोलन में :- 

1. ऊँचाई पर: अधिकतम स्थितिज ऊर्जा

2. मध्य में: अधिकतम गतिज ऊर्जा

3. लेकिन दोलन के दौरान कुल ऊर्जा = स्थितिज + गतिज = सदैव समान

जलप्रपात से बिजली बनाना :- 

स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा → फिर भी कुल ऊर्जा समान रहती है।

नोट :-

ऊर्जा का केवल रूप बदलता है, मात्रा नहीं। इसलिए ऊर्जा संरक्षण का नियम वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

मुक्त पतन के समय ऊर्जा का संरक्षण किस प्रकार होता है :-

मुक्त पतन के समय ऊर्जा का संरक्षण :- जब कोई वस्तु पृथ्वी की ओर मुक्त रूप से गिरती है, तो उसमें ऊर्जा का रूपान्तरण और संरक्षण दोनों होते हैं।

1. प्रारम्भिक स्थितिज ऊर्जा :- जब वस्तु ऊँचाई h पर होती है, तो उसमें केवल स्थितिज ऊर्जा होती है। यह ऊर्जा = mgh (जहाँ m = द्रव्यमान, g = गुरुत्वीय त्वरण, h = ऊँचाई)

2. गति के साथ ऊर्जा परिवर्तन :- जैसे-जैसे वस्तु नीचे गिरती है, उसकी ऊँचाई कम होती है, तो स्थितिज ऊर्जा घटती है। साथ ही, उसकी गति बढ़ती है, जिससे गतिज ऊर्जा बढ़ती है।

गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}m{v^2}\)

3. ऊर्जा संरक्षण नियम :- किसी भी क्षण वस्तु की कुल ऊर्जा = स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा यह कुल ऊर्जा हमेशा अचर (constant) रहती है।

उदाहरण :-

यदि किसी इमारत की छत से गेंद गिराई जाती है,

ऊपर: स्थितिज ऊर्जा अधिक, गतिज ऊर्जा शून्य

नीचे पहुँचने पर: स्थितिज ऊर्जा शून्य, गतिज ऊर्जा अधिकतम फिर भी कुल ऊर्जा समान रहती है।

10.3 कार्य करने की दर क्या है?

कार्य करने की दर को क्या कहते हैं? शक्ति किसे कहते हैं :-

शक्ति :- कार्य करने की दर को शक्ति (Power) कहते हैं।  या  ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदलने की दर को शक्ति कहते हैं।

शक्ति का सूत्र है :- शक्ति (P) = कार्य (W)/समय 

शक्ति का SI मात्रक है :- SI मात्रक : वॉट (Watt)

1 वॉट = 1 जूल / सेकंड 

1 W = 1 Joule / 1 second

शक्ति का उपयोग :-

शक्ति यह बताती है कि कोई व्यक्ति या मशीन कितनी तेजी से कार्य कर सकता है।

उदाहरण :-

अगर कोई व्यक्ति 100 जूल कार्य 10 सेकंड में करता है,  तो उसकी शक्ति होगी:

P = 100/10 = 10 Watt

विद्युत उपकरण की शक्ति किसे कहते हैं :-

विद्युत उपकरण :- की शक्ति वह दर होती है जिससे कोई विद्युत उपकरण विद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है।  या  विद्युत ऊर्जा के उपयोग की दर को ही विद्युत उपकरण की शक्ति कहते हैं।

शक्ति का SI मात्रक है :- S.I. मात्रक : वॉट (Watt)

बड़ा मात्रक : किलोवाट (kW)

1 किलोवाट = 1000 वॉट = 1000 जूल / सेकंड

शक्ति का  प्रतीक :- शक्ति को P से दर्शाते हैं।

शक्ति का  सूत्र :- P = W/t

उदाहरण :-

अगर कोई विद्युत बल्ब 100 जूल ऊर्जा को 1 सेकंड में उपयोग करता है, तो उसकी शक्ति होगी:

P = 100/1 = 100 वॉट

ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक क्या है :-

ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक :- 1 किलोवाट घण्टा वह ऊर्जा है, जो 1000 वॉट (1 kW) की शक्ति वाला उपकरण 1 घंटे (3600 सेकंड) तक कार्य करके उपयोग करता है।

ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक रूपांतरण सूत्र :- 1 kWh = 1000 W × 3600 sec = 36,00,000 Joule

या

1 kWh = 3.6 × 106 Joule

उदाहरण :-

अगर कोई हीटर 2 किलोवाट की शक्ति से 1 घंटा चलता है,  तो वह ऊर्जा उपयोग करेगा:

2 kWh = 2 × 3.6 × 106 = 7.2 × 106  Joule

नोट :- 

जूल एक छोटा मात्रक है ऊर्जा की SI इकाई जूल (Joule) है। परंतु, यह बहुत छोटा मात्रक है, इसलिए अधिक ऊर्जा के लिए इसका उपयोग असुविधाजनक होता है।  ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग के लिए बड़ा मात्रक इस्तेमाल किया जाता है :- किलोवाट-घण्टा (kWh)

किलोवाट-घण्टा (kWh) क्या होता है? इसे जूल में कैसे बदला जाता है :-

किलोवाट-घण्टा (kWh) :- जब 1 किलोवाट शक्ति वाला कोई विद्युत उपकरण, 1 घण्टे तक चलता है, तब वह 1 किलोवाट-घण्टा (kWh) ऊर्जा का उपभोग करता है। 

किलोवाट-घण्टा (kWh) की  गणना :-

1 kWh = 1000 Watt × 1 Hour और 1 Hour = 3600 Seconds इसलिए, 1 kWh = 1000 × 3600 = 36,00,000 Joule 

किलोवाट-घण्टा (kWh) रूपांतरण सूत्र :-

1 kWh = 3.6 × 106  Joule

1 kWh उपयोग यूनिट में :- घरेलू बिजली बिल में
1 kWh = 1 यूनिट माना जाता है।

उदाहरण :-

अगर एक 2 किलोवाट का गीजर 3 घंटे तक चलता है,  तो कुल ऊर्जा खर्च = 2 kW × 3 Hour = 6 kWh = 6 Units

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