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Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 9

Chapter 9: Gravitation
Chapter Introduction: 
This chapter explains gravity, mass, weight, thrust, pressure, and buoyancy. It also includes numerical problems to improve problem-solving skills.

FAQ
Ques. Does this chapter include calculation-based questions?
Ans. Yes, numerical questions are an important part of this chapter.

CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 9 : गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न :- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल क्या होता है? इसे एक उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर :- गुरुत्वाकर्षण बल :- वह बल है जो पृथ्वी द्वारा किसी भी वस्तु को अपने केन्द्र की ओर खींचने के लिए लगाया जाता है।  यह बल हर वस्तु पर पृथ्वी की ओर कार्य करता है, चाहे वह स्थिर हो या गति में हो। जब हम किसी वस्तु को ऊपर से छोड़ते हैं, तो वह नीचे की ओर गिरती है, इसका कारण यही गुरुत्वाकर्षण बल है।

उदाहरण :-

1. जब हम किसी पत्थर को बिना किसी धक्का दिए किसी ऊँचाई से छोड़ते हैं, तो वह सीधे पृथ्वी की ओर गिरता है।

2. इसका अर्थ यह है कि पृथ्वी उस पत्थर को अपनी ओर खींच रही है।

3. वास्तव में, यह सिर्फ पृथ्वी ही नहीं, बल्कि सभी वस्तुएँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं, लेकिन पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक होने के कारण उसका बल अधिक प्रभावशाली होता है।

नोट :-  

गुरुत्वाकर्षण बल वह अदृश्य बल है जो न केवल वस्तुओं को पृथ्वी पर बनाए रखता है, बल्कि आकाशीय पिंडों को भी एक-दूसरे से बांधे रखता है।

प्रश्न :- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम क्या है? इसे सूत्र सहित समझाइए।

उत्तर :- न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम :- सर आइजैक न्यूटन ने 1687 ई. में गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम प्रस्तुत किया। इस नियम के अनुसार, सभी वस्तुएँ इस ब्रह्माण्ड में एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं। यह आकर्षण बल दो पिण्डों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

गुरुत्वाकर्षण का सूत्र निम्नलिखित है :-:
यदि दो पिण्डों के द्रव्यमान क्रमशः m1 और m2 हों, और उनके बीच की दूरी d हो, तो उनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल F इस प्रकार होगा :-

\(F = G\frac{{{m_1} \cdot {m_2}}}{{{d^2}}}\)

यहाँ पर, F = गुरुत्वाकर्षण बल, G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant), m1, m2 = दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान, d = उनके बीच की दूरी

उदाहरण :-

पृथ्वी और चाँद एक-दूसरे को गुरुत्वाकर्षण बल से आकर्षित करते हैं। पृथ्वी के बड़े द्रव्यमान के कारण, वह चाँद को अपनी कक्षा में बांधे रखती है।

नोट :-

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे सभी वस्तुएँ आपस में गुरुत्व बल से जुड़ी हुई हैं, और इसी कारण से पृथ्वी पर वस्तुएँ नीचे गिरती हैं, तथा ग्रह-नक्षत्र अपनी कक्षाओं में घूमते रहते हैं।

प्रश्न :- गुरुत्वाकर्षण के नियम को बिंदुवार समझाइए। साथ ही उसके समीकरण और मात्रक भी बताइए।

उत्तर :- गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम :- यह बताता है कि ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु को एक बल से आकर्षित करती है, जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं।

यह नियम दो भागों में बाँटा जा सकता है:

(i) द्रव्यमान के अनुसार संबंध :-  दो वस्तुओं के बीच का गुरुत्व बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुपाती होता है।

F ∝ m1 × m1

(ii) दूरी के अनुसार संबंध :- दो वस्तुओं के बीच का गुरुत्व बल उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

\(F \propto \frac{1}{{{d^2}}}\)

(iii) दोनों को मिलाकर संयुक्त समीकरण:

 \(F = G\frac{{{m_1} \cdot {m_2}}}{{{d^2}}}\)

यहाँ पर, F = गुरुत्व बल, G = सार्वत्रिक गुरुत्व नियतांक, m1, m2 = दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान, d = उनके बीच की दूरी

(iv) इकाइयाँ (मात्रक):

परिमाण

इकाई

मात्रक प्रणाली

बल (F)

न्यूटन (N)

SI प्रणाली

द्रव्यमान (m)

किलोग्राम (kg)

SI प्रणाली

दूरी (d)

मीटर (m)

SI प्रणाली

प्रश्न :- सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) क्या है? और इसे सार्वत्रिक क्यों कहा जाता है, इसका मान क्या होता है?

उत्तर :- गुरुत्वाकर्षण बल के सूत्र में G एक स्थिरांक है, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant) कहा जाता है।

G को सार्वत्रिक स्थिरांक इसलिए कहा जाता है क्योंकि :- 1. इसका मान सभी स्थानों पर एक समान होता है।

2. यह माध्यम की प्रकृति, तापमान, या किसी अन्य भौतिक परिस्थिति पर निर्भर नहीं करता।

गुरुत्वाकर्षण का मान (Value) निम्नलिखित है :-

\(G = 6.67 \times 1{0^{–11}}N{M^2}/k{g^2}\)

प्रश्न :- न्यूटन के गति के तीसरे नियम और गुरुत्वाकर्षण के नियम के बीच क्या सम्बन्ध है?

उत्तर :- 1. न्यूटन का तृतीय गति नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) :- “प्रत्येक क्रिया के लिए एक बराबर तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।”

2. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम :- “ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु, अन्य वस्तु को आकर्षित करती है, और यह आकर्षण उनके द्रव्यमान के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”

3. दोनों नियमों के बीच सम्बन्ध :- जब कोई वस्तु (जैसे एक पत्थर) पृथ्वी से नीचे गिरती है, तो पृथ्वी उस पत्थर को गुरुत्व बल से खींचती है। उसी समय पत्थर भी पृथ्वी को उतने ही बल से अपनी ओर खींचता है।

यह क्रिया और प्रतिक्रिया है :- क्रिया: पृथ्वी पत्थर को खींचती है। प्रतिक्रिया: पत्थर भी पृथ्वी को खींचता है।
4. फिर पृथ्वी क्यों नहीं हिलती?

क्योंकि पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत अधिक है और पत्थर का बहुत कम। 

बल दोनों पर बराबर लगता है (F = m × a), लेकिन त्वरण (a) = F/m होता है। 

चूँकि पृथ्वी का द्रव्यमान (m) बहुत बड़ा है, इसलिए उस पर उत्पन्न त्वरण नगण्य होता है।
उदाहरण :-

अगर आप दीवार को ज़ोर से धक्का देते हैं (क्रिया), तो दीवार भी उतना ही बल आपको पीछे की ओर लगाती है (प्रतिक्रिया)। यही बात धरती और पत्थर के बीच भी लागू होती है।

नोट :-

गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव के साथ-साथ न्यूटन का तीसरा नियम यह बताता है कि कोई भी आकर्षण एकतरफा नहीं होता, बल्कि हर वस्तु दूसरी वस्तु पर उतना ही विपरीत बल लगाती है, चाहे उसका प्रभाव महसूस हो या नहीं।

प्रश्न :- गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का क्या महत्व है?

उत्तर :- गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम न केवल पृथ्वी पर बल्कि पूरे ब्रह्मांड में कार्य करता है। इसका महत्व निम्नलिखित है :- 

1. पृथ्वी से वस्तुओं को बाँधे रखना :-  हम, पेड़-पौधे, जल और वायुमंडल — सब पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण के कारण जुड़े हुए हैं। यदि गुरुत्वाकर्षण न होता तो सब कुछ अंतरिक्ष में उड़ जाता।

2. चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर गति :- चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर बांधे रखने का कारण गुरुत्वाकर्षण बल है। यह बल चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने में मदद करता है।

3. ग्रहों की सूर्य के चारों ओर गति :- सभी ग्रह (जैसे पृथ्वी, मंगल, शनि आदि) सूर्य के गुरुत्व बल के कारण उसकी परिक्रमा करते हैं। यदि यह बल न होता तो ग्रह अंतरिक्ष में भटक जाते।

4. ज्वार-भाटा (Tides) :- चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्व बल समुद्र के जल पर प्रभाव डालता है। इससे समुद्र में ज्वार (high tide) और भाटा (low tide) आते हैं।

उदाहरण :-

जब आप कोई गेंद ऊपर फेंकते हैं, तो वह नीचे गिरती है — यह गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही होता है। इसी प्रकार, पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा पृथ्वी की — ये सभी घटनाएँ गुरुत्वीय बल के कारण होती हैं।

नोट :-  

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम पूरे ब्रह्मांड को एक साथ बाँधे रखने वाला प्राकृतिक बल है। यह न केवल हमारी पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है, बल्कि ग्रहों और उपग्रहों की चाल को भी नियंत्रित करता है।

प्रश्न :- मुक्त पतन (Free Fall) किसे कहते हैं?

उत्तर :- 1. परिभाषा :- जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव से नीचे की ओर गिरती है, तो इस प्रकार के पतन को मुक्त पतन कहते हैं।

2. बल का प्रभाव :- मुक्त पतन के दौरान किसी भी अन्य बल, जैसे — वायु प्रतिरोध या घर्षण का कोई प्रभाव नहीं माना जाता।

3. दिशा :- मुक्त पतन में वस्तु हमेशा पृथ्वी की ओर ही गिरती है, इसलिए उसकी गति की दिशा नहीं बदलती।

4. गति में परिवर्तन :- हालांकि दिशा नहीं बदलती, लेकिन समय के साथ वस्तु की गति (वेग) का परिमाण बढ़ता है, क्योंकि उस पर गुरुत्वीय त्वरण (g) कार्य करता है।

उदाहरण :-

यदि कोई व्यक्ति एक गेंद को ऊँचाई से गिराता है और हम वायु का प्रभाव न मानें, तो वह गेंद केवल पृथ्वी के गुरुत्व बल से नीचे गिरेगी — यही मुक्त पतन कहलाता है। 

नोट :-  

मुक्त पतन वह प्रक्रिया है जिसमें कोई वस्तु केवल गुरुत्व बल के कारण पृथ्वी की ओर गिरती है और इसका वेग समय के साथ बढ़ता है।

प्रश्न :- गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) किसे कहते हैं?

उत्तर :- गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) :- जब कोई वस्तु स्वतंत्र रूप से गिरती है, तो उस पर केवल पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है। इस बल के कारण वस्तु में जो त्वरण उत्पन्न होता है, उसे गुरुत्वीय त्वरण कहा जाता है। 

गुरुत्वीय त्वरण को ‘g’ से दर्शाया जाता है। ‘g’ की दिशा हमेशा पृथ्वी के केन्द्र की ओर होती है, चाहे वस्तु कहीं से भी गिर रही हो। पृथ्वी की सतह पर ‘g’ का मान औसतन  g = 9.8 m/s² होता है।

(यानी हर सेकंड में वस्तु की गति 9.8 मीटर/सेकंड बढ़ती है।)

उदाहरण :-

यदि एक गेंद ऊँचाई से गिराई जाती है, तो हर सेकंड में उसकी गति लगभग 9.8 m/s बढ़ती है। यह बढ़ाव गुरुत्वीय त्वरण के कारण होता है।

नोट :-

गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ वह त्वरण है जो पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण गिरती वस्तु में उत्पन्न होता है और इसकी दिशा हमेशा नीचे की ओर होती है।

प्रश्न :- गुरुत्वीय त्वरण (g) और गुरुत्वीय स्थिरांक (G) में क्या अन्तर होता है?

उत्तर :- गुरुत्वीय त्वरण (g) और गुरुत्वीय स्थिरांक (G) में निम्नलिखित अन्तर होता है :- 

क्रम

गुरुत्वीय त्वरण (g)

गुरुत्वीय स्थिरांक (G)

1.

यह स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु में उत्पन्न त्वरण है।

यह दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वीय बल में प्रयुक्त स्थिरांक है।

2.

इसका मान पृथ्वी पर 9.8 m/s² होता है।

इसका मान 6.674 × 10⁻¹¹ N·m²/kg² होता है।

3.

यह स्थान के अनुसार बदलता है (जैसे ध्रुव व विषुव)।

यह सदैव एक समान रहता है।

4.

यह एक सदिश राशि है (दिशा होती है)।

यह एक अदिश राशि है (कोई दिशा नहीं होती)।

5.

इसका मात्रक m/s² होता है।

इसका मात्रक N·m²/kg² होता है।

6.

यह वस्तु और पृथ्वी के बीच बल से संबंधित है।

यह सभी पिंडों के बीच लगने वाले बल का स्थिरांक है।

प्रश्न :- द्रव्यमान किसे कहते हैं? इसके गुण क्या हैं?

उत्तर :- द्रव्यमान :- किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की कुल मात्रा को द्रव्यमान (Mass) कहते हैं। इसे हम किसी वस्तु के जड़त्व की माप भी कह सकते हैं।

द्रव्यमान के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं :- 

1. यह एक अदिश राशि है — इसका केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती।

2. इसका SI मात्रक किलोग्राम (kg) होता है।

3. इसे ‘m’ द्वारा दर्शाया जाता है।

4. द्रव्यमान सर्वत्र स्थिर रहता है, चाहे वह वस्तु पृथ्वी पर हो या चाँद पर।

5. किसी स्थान पर इसका मान कभी शून्य नहीं होता।

6. यह किसी वस्तु के गुरुत्वीय बल को प्रभावित करता है — द्रव्यमान जितना अधिक, बल उतना अधिक।
उदाहरण :- 

अगर कोई बॉल पृथ्वी पर है या चाँद पर, उसका द्रव्यमान m = 2 kg ही रहेगा।

(हालाँकि उसका वज़न बदल सकता है।)

नोट :-

द्रव्यमान वह स्थायी गुण है जो किसी वस्तु की जड़त्व शक्ति और पदार्थ की मात्रा को दर्शाता है।

प्रश्न :- भार (Weight) किसे कहते हैं? इसका सूत्र और मात्रक क्या है?

उत्तर :- भार :- किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे पृथ्वी उस वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है।

बल = द्रव्यमान × त्वरण

F = m × a

यहाँ पर, त्वरण ‘a’ की जगह, गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ होगा।

अतः भार (W) = m × g
भार के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :-

1. यह एक बल (Force) है।

2. इसे W से दर्शाया जाता है।

3. इसका SI मात्रक होता है — न्यूटन (N)।

4. यह एक सदिश राशि है — इसमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।

5. इसकी दिशा हमेशा पृथ्वी के केंद्र की ओर होती है।

6. वस्तु का भार उस स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण (g) पर निर्भर करता है :- जैसे पृथ्वी और चाँद पर g अलग होने से वजन भी अलग होगा।
उदाहरण :-

यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान m = 5 kg है, और पृथ्वी पर g = 9.8 m/s²,

तो उसका भार :- W = m × g = 5 × 9.8 = 49 N

नोट :-

भार वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है, और यह वस्तु के द्रव्यमान और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है।

प्रश्न :- द्रव्यमान और भार में क्या अंतर होता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- द्रव्यमान और भार में निम्नलिखित अंतर होते हैं :-

द्रव्यमान (Mass)

भार (Weight)

किसी वस्तु में निहित कुल पदार्थ की मात्रा को द्रव्यमान कहते हैं।

जिस गुरुत्वीय बल से पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है, वह उसका भार कहलाता है।

यह वस्तु के जड़त्व की माप है।

यह गुरुत्वीय बल की माप है: W = m × g

यह सर्वत्र समान रहता है — पृथ्वी, चाँद या अंतरिक्ष में भी।

यह स्थान के अनुसार बदलता है, क्योंकि g का मान बदलता है।

इसे भौतिक तुला (Beam Balance) से मापा जाता है।

इसे कमानीदार तुला (Spring Balance) से मापा जाता है।

यह एक अदिश राशि है — केवल परिमाण होता है।

यह एक सदिश राशि है — परिमाण और दिशा दोनों होते हैं।

g का मान शून्य होने पर भी द्रव्यमान शून्य नहीं होता।

g = 0 होने पर भार भी शून्य हो जाता है।

प्रश्न :- गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-कौन से हैं? समझाइए।

उत्तर :- गुरुत्वीय त्वरण (g) :- वह त्वरण है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वस्तुओं में उत्पन्न होता है। यह ‘g’ कुछ कारणों से स्थान-स्थान पर बदलता रहता है।

‘g’ को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं :- 

1. पृथ्वी का आकार :-  पृथ्वी पूरी तरह गोल न होकर चपटी (अथवा ध्रुवों पर चपटी और विषुवत रेखा पर उभरी) है। पृथ्वी की त्रिज्या विषुवत रेखा (Equator) पर अधिक और ध्रुवों (Poles) पर कम होती है। इसलिए g का मान ध्रुवों पर अधिक और विषुवत रेखा पर कम होता है।

2. ऊँचाई (Altitude) :-  जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, g का मान घटता है। क्योंकि पृथ्वी के केन्द्र से दूरी बढ़ जाती है। सूत्र: g = GM / d², जहाँ d दूरी है।

3. गहराई (Depth) :- पृथ्वी की सतह से नीचे जाने पर भी g का मान घटता है। क्योंकि सतह के भीतर पहुँचने पर पृथ्वी का कुछ हिस्सा वस्तु को आकर्षित नहीं कर पाता।

4. पृथ्वी का घूर्णन (Rotation) :- पृथ्वी के घूमने के कारण विषुवत रेखा पर अपकेन्द्रीय बल (centrifugal force) उत्पन्न होता है। यह बल गुरुत्वीय बल के विरुद्ध कार्य करता है, जिससे g का मान थोड़ा कम हो जाता है।

5. स्थान पर निर्भरता :- पृथ्वी के अलग-अलग स्थानों पर g का मान थोड़ा-थोड़ा भिन्न होता है। औसतन पृथ्वी पर g = 9.8 m/s² माना जाता है, लेकिन यह स्थान के अनुसार 9.78 से 9.83 m/s² तक हो सकता है।

प्रश्न :- अंतरिक्ष में फेंकी गई कोई वस्तु लगातार पृथ्वी के चारों ओर किस प्रकार घूमती रहती है? समझाइए।

उत्तर :- जब कोई वस्तु अत्यधिक चाल (velocity) से पृथ्वी की सतह के समानांतर अंतरिक्ष में फेंकी जाती है, तो वह पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण पृथ्वी की ओर गिरने लगती है। परंतु अगर चाल एक निश्चित मान से अधिक हो, तो वह वस्तु पृथ्वी पर गिरने की बजाय उसकी परिक्रमा करने लगती है।

यह प्रक्रिया निम्नलिखित बिंदुओं से समझी जा सकती है :- 

1. गुरुत्वीय बल का प्रभाव :- जब कोई वस्तु पृथ्वी के समीप होती है, तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसे अपनी ओर खींचता है।

2. वस्तु की प्रारम्भिक चाल (Initial Velocity) :- यदि किसी वस्तु को क्षैतिज दिशा में बहुत अधिक चाल से फेंका जाए, तो वह गिरते हुए भी आगे बढ़ती रहती है।

3. पृथ्वी की गोलाई का असर :- पृथ्वी गोल है, इसलिए जैसे-जैसे वस्तु गिरती है, सतह भी उसी अनुपात में नीचे झुकती जाती है।

4. निरंतर गिराव और आगे बढ़ना :- यदि वस्तु की चाल इतनी हो कि वह गिरते हुए भी पृथ्वी की सतह तक न पहुँचे, तो वह पृथ्वी के चारों ओर लगातार घूमती रहती है।

5. कक्षा (Orbit) में गति :- ऐसी वस्तु को कक्षा में स्थित वस्तु कहते हैं, और वह पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करती रहती है।

नोट :-

जब कोई वस्तु पृथ्वी की सतह के समानांतर इतनी अधिक चाल से फेंकी जाती है कि वह गिरते हुए भी पृथ्वी की सतह तक न पहुँचे, तो वह वस्तु पृथ्वी की परिक्रमा करने लगती है। इसे ही हम उपग्रहों की कक्षा में गति कहते हैं।

1. ऐसी चाल को प्रक्षेपण चाल (orbital velocity) कहते हैं।

2. पृथ्वी के पास यह चाल लगभग 7.9 km/s (28440 km/h) होती है।

उपग्रहों को इसी चाल से छोड़ा जाता है ताकि वे पृथ्वी के चारों ओर घूमते रहें।

प्रश्न :- प्रणोद किसे कहते हैं?

उत्तर :- प्रणोद :- जब कोई वस्तु किसी सतह पर रखी होती है, तो सतह उस वस्तु पर एक बल लगाती है, यह बल वस्तु की सतह के लंबवत् दिशा (सामान्य दिशा) में कार्य करता है, और इसी बल को प्रणोद (Normal Force) कहते हैं।

उदाहरण :-

जब कोई किताब मेज पर रखी होती है, तो मेज उस पर नीचे की दिशा में लग रहे भार के विरुद्ध एक बल ऊपर की दिशा में लगाती है — यही बल प्रणोद कहलाता है।

प्रश्न :- दाब किसे कहते हैं?

उत्तर :- दाब:- जब कोई बल किसी सतह पर लगाया जाता है, तो वह सतह के क्षेत्रफल के अनुसार फैल जाता है। प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल, दाब (Pressure) कहलाता है। यदि कोई वस्तु कम क्षेत्रफल में अधिक बल लगाए, तो वह अधिक दाब उत्पन्न करती है।

दाब का सूत्र निम्नलिखित है :-

\(P\; = \;\frac{F}{{A}}\)

उदाहरण :-

कील की नुकीली सतह बहुत कम क्षेत्रफल की होती है। जब उस पर बल लगाया जाता है, तो बहुत अधिक दाब उत्पन्न होता है और वह आसानी से लकड़ी में घुस जाती है।

प्रश्न :- दाब का मात्रक क्या होता है?

उत्तर :- दाब (Pressure) :- का मात्रक बल और क्षेत्रफल के मात्रकों पर आधारित होता है।

दाब = बल ÷ क्षेत्रफल

बल (Force) का S.I. मात्रक = न्यूटन (N)
क्षेत्रफल का S.I. मात्रक = वर्ग मीटर (m²)

अतः दाब का सूत्र  होता है :-

\(P = \frac{N}{{{m^2}}}\)

इसे पॉस्कल (Pascal) कहते हैं।

प्रतीक: Pa
1 Pascal (Pa) = 1 Newton/m²

उदाहरण :-

यदि 1 न्यूटन का बल 1 वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर लगाया जाए, तो उत्पन्न दाब = 1 Pascal (Pa) होगा।

प्रश्न :- दाब को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-कौन से हैं?

उत्तर :- दाब (Pressure) को निम्नलिखित दो प्रमुख कारक प्रभावित करते हैं :-

1. लगाया गया बल (Applied Force) :- जितना अधिक बल किसी सतह पर लगाया जाएगा, उतना ही अधिक दाब उत्पन्न होगा। दाब ∝ बल  (अर्थात दाब, बल के सीधे अनुपाती होता है)
 2. सतह का क्षेत्रफल (Area of Surface) :-  यदि एक ही बल को बड़े क्षेत्रफल पर लगाया जाए तो दाब कम होगा। 

\(P \propto \frac{1}{a}\)
(अर्थात दाब, क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है)
उदाहरण :-

1. यदि किसी कील को हथौड़े से मारें तो वह लकड़ी में आसानी से घुस जाती है, क्योंकि कील का सिरा बहुत नुकीला होता है (क्षेत्रफल कम होता है), जिससे दाब अधिक बनता है। जबकि हथौड़े का पृष्ठ चौड़ा होता है, इसलिए उसी बल से लकड़ी में नहीं घुसता।

प्रश्न :- तरल क्या होते हैं? तरल किस दिशा में दाब लगाते हैं?

उत्तर :- तरल :- सभी द्रव (जैसे — पानी, तेल आदि) और गैसें (जैसे — वायु, ऑक्सीजन आदि) मिलकर तरल (Fluids) कहलाते हैं। ये ऐसे पदार्थ हैं जिनके अणु आपस में दृढ़ता से जुड़े नहीं होते, इसलिए ये बह सकते हैं।

उदाहरण :-

जब कोई बंद बोतल पानी से भरकर निचोड़ी जाती है, तो पानी हर दिशा में निकलने की कोशिश करता है। यह दिखाता है कि तरल सभी दिशाओं में दाब लगाता है।

नोट :-

तरल पदार्थ सभी दिशाओं में दाब लगाते हैं, यानी ये ऊपर, नीचे और किनारे – हर दिशा में बल लगाते हैं।

प्रश्न :- उत्प्लावन क्या होता है? यह किन स्थितियों पर निर्भर करता है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- उत्प्लावन की परिभाषा :- जब कोई वस्तु किसी तरल में डुबाई जाती है, तो उस पर दो बल लगते हैं :- 

1. नीचे की ओर — वस्तु का गुरुत्वीय बल (भार)

2. ऊपर की ओर — उत्प्लावन बल, जो तरल द्वारा लगाया जाता है।

उत्प्लावन बल की दिशा :- यह बल हमेशा ऊपर की ओर लगता है।
उत्प्लावन बल किन पर निर्भर करता है :- यह बल उस तरल के घनत्व और वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव की मात्रा पर निर्भर करता है।

वस्तु तैरेगी या डूबेगी, यह निर्भर करता है :- यदि गुरुत्वीय बल > उत्प्लावन बल, 

निष्कर्ष : वस्तु डूब जाएगी।

यदि गुरुत्वीय बल = उत्प्लावन बल,

निष्कर्ष : वस्तु तरल में तैरती रहेगी।
उदाहरण :-

1. लोहे की कील पानी में डूब जाती है क्योंकि उस पर लगने वाला भार (गुरुत्वीय बल) उत्प्लावन बल से अधिक होता है।

2. जबकि पानी का जहाज पानी की सतह पर तैरता है क्योंकि वह ज्यादा पानी विस्थापित करता है जिससे उत्प्लावन बल उसका भार संतुलित कर देता है।

प्रश्न :- आर्किमिडीज का सिद्धान्त क्या है? समझाइए।

उत्तर :- आर्किमिडीज का सिद्धान्त :- जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्णतः या आंशिक रूप से डुबाया जाता है,  तो वह एक ऊपर की ओर बल का अनुभव करती है। इसे उत्प्लावन बल (Buoyant Force) कहा जाता है।

यह बल वस्तु द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर होता है। यह सिद्धांत ग्रीक वैज्ञानिक आर्किमिडीज ने दिया था।

इसलिए इसे आर्किमिडीज का सिद्धान्त कहा जाता है।

प्रश्न :- आर्किमिडीज के सिद्धांत के प्रमुख उपयोग क्या हैं?

उत्तर :- आर्किमिडीज का सिद्धांत :- विज्ञान और तकनीक के कई क्षेत्रों में उपयोगी है। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं :- 

1. आपेक्षिक घनत्व ज्ञात करने में :-  इस सिद्धांत का उपयोग करके किसी भी ठोस या तरल पदार्थ का आपेक्षिक घनत्व (Relative Density) ज्ञात किया जा सकता है।

2. जलयानों और पनडुब्बियों के निर्माण में :- नावों, जहाजों और पनडुब्बियों का डिज़ाइन ऐसा बनाया जाता है कि वे तरल में पर्याप्त पानी विस्थापित करें और तैर सकें। यह आर्किमिडीज सिद्धांत पर आधारित है।

3. दुग्धमापी और हाइड्रोमीटर में :- दूध की शुद्धता मापने वाला दुग्धमापी और तरल का घनत्व मापने वाला हाइड्रोमीटर भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।

प्रश्न :- घनत्व किसे कहते हैं?

उत्तर :- घनत्व :- जब किसी पदार्थ के एकांक (1) आयतन में मौजूद द्रव्यमान को मापा जाता है, तो उसे घनत्व कहते हैं।

घनत्व एक अदिश राशि है। इसका S.I. मात्रक है → किलोग्राम प्रति घन मीटर kg/m3

घनत्व ρ का सूत्र निम्नलिखित है:- 

घनत्व (Density) = द्रव्यमान (Mass)/आयतन (Volume)

ρ = m/v

प्रश्न :- आपेक्षिक घनत्व किसे कहते हैं?

उत्तर :- आपेक्षिक घनत्व :- किसी पदार्थ के घनत्व और जल (पानी) के घनत्व के अनुपात को आपेक्षिक घनत्व कहते हैं।

इसे “Relative Density” भी कहा जाता है।

इसका सूत्र निम्नलिखित है :- 

आपेक्षिक घनत्व = पदार्थ का घनत्व / पानी का घनत्व

नोट :-

चूँकि यह घनत्व का अनुपात है, अतः इसका कोई मात्रक नहीं होता।

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