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CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER - 9

द्रव्य का परमाणिवक आधार / Atomic Basis of Matter

TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectScience
ChapterChapter 9
Chapter Nameद्रव्य का परमाणिवक आधार
MediumHindi

9.1 द्रव्यमान संरक्षण का नियम

भौतिक परिवर्तन में द्रव्यमान:-

जब जल में नमक घोला जाता है (एक भौतिक परिवर्तन), तो विलयन का द्रव्यमान लिए गए जल और नमक के द्रव्यमानों के योग के समान होता है। यह दर्शाता है कि विलयन बनाने के समय द्रव्यमान में व्यावहारिक रूप से कोई परिवर्तन नहीं होता। यह सभी भौतिक परिवर्तनों के लिए सत्य है।

रासायनिक परिवर्तन में द्रव्यमान:-

जब सिरका और बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) की अभिक्रिया एक बंद निकाय में की जाती है, तो अभिक्रिया के पूर्व और पश्चात कुल द्रव्यमान समान ही रहता है — भले ही खुले निकाय में गैस मुक्त होने के कारण पाठ्यांकों में अंतर दिखाई दे।

सिरका + बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) → कार्बन डाइऑक्साइड + अन्य पदार्थ

द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass):-

किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्य का न तो सृजन किया जा सकता है और न ही उसे नष्ट किया जा सकता है। इसे द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहते हैं, जिसे वर्ष 1789 में आन्तवॉ लवाइजिए (Antoine Lavoisier) ने प्रतिपादित किया।

नोट:- लवाइजिए ने प्रस्तावित किया कि “... प्रत्येक संक्रिया में, संक्रिया के पूर्व और संक्रिया के पश्चात द्रव्यमान की समान मात्रा विद्यमान रहती है”। जब सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के विलयनों को मिश्रित किया जाता है तो सोडियम क्लोराइड के साथ-साथ बेरियम सल्फेट का एक श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है, तथापि कुल द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।

उदाहरण 9.1:-

4.0 g कैल्सियम कार्बोनेट एवं 2.92 g हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से 1.76 g कार्बन डाइऑक्साइड, 0.72 g जल और 4.44 g कैल्सियम क्लोराइड प्राप्त होता है। जाँच कीजिए।

अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = 4.0 + 2.92 = 6.92 g
उत्पादों का कुल द्रव्यमान = 1.76 + 0.72 + 4.44 = 6.92 g
अतः द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन हो रहा है।

9.2 स्थिर अनुपात का नियम

स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions):-

लवाइजिए के पश्चात जोसेफ प्राउस्ट (Joseph Proust) ने प्रस्तावित किया कि दो अथवा दो से अधिक तत्वों से बने किसी भी यौगिक में तत्व द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में संयोजित होते हैं — यह अनुपात उसके स्रोत पर निर्भर नहीं करता।

उदाहरणार्थ — विभिन्न स्रोतों (नदियों, बोरवेल, समुद्र) से एकत्रित जल का विश्लेषण किया जाए तो इसमें सदैव हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान 1:8 के अनुपात में होता है।

नोट:- इसे स्थिर अनुपात का नियम अथवा निश्चित अनुपात का नियम अथवा कभी-कभी प्राउस्ट का नियम भी कहते हैं।

उदाहरण 9.3:-

सोडियम क्लोराइड (NaCl) में सोडियम और क्लोरीन का द्रव्यमान अनुपात 23:35.5 है। यदि 46 g सोडियम पूर्णतः अभिक्रिया करता है तो NaCl के निर्माण के लिए कितनी मात्रा में क्लोरीन की आवश्यकता होगी?

क्लोरीन का आवश्यक द्रव्यमान = (35.5 ÷ 23) × 46 = 71 g

9.3 डाल्टन का परमाणु सिद्धांत

डाल्टन के अभिगृहीत (Postulates):-

  1. संपूर्ण द्रव्य अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं और ये रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेते हैं।
  2. परमाणु अविभाज्य कण होते हैं जिन्हें किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में न तो सृजित किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
  3. किसी तत्व के सभी परमाणुओं के द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं।
  4. विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणधर्म भिन्न-भिन्न होते हैं।
  5. परमाणु सरल पूर्णांकों के अनुपात में संयोजित होकर यौगिक बनाते हैं।
  6. किसी यौगिक में परमाणुओं की सापेक्ष संख्या एवं उनके प्रकार निश्चित होते हैं।
नोट:- डाल्टन के परमाणु सिद्धांत ने द्रव्यमान संरक्षण के नियम और स्थिर अनुपात के नियम की व्याख्या की — किसी रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु अविभाज्य रहते हैं और केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, न तो उनका सृजन होता है और न ही वे नष्ट होते हैं।

9.4 परमाणु किस प्रकार संयोजन करते हैं?

अणु (Molecule):-

अणु को विद्युतरूप से उदासीन किसी कण के रूप में परिभाषित कर सकते हैं जिसमें एक से अधिक परमाणु होते हैं जो स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है तथा उस पदार्थ के सभी गुणधर्मों को प्रदर्शित करता है।

यदि किसी परमाणु के संयोजकता कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या आठ से कम हो तो वह इलेक्ट्रॉनों को साझा कर, ग्रहण कर अथवा त्याग कर अपने संयोजकता कोश को पूर्ण कर सकता है और स्थायी हो सकता है। यह सामान्यतः दो प्रकार से होता है —

  1. इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी — दूसरे परमाणु के साथ कुछ अथवा सभी इलेक्ट्रॉनों को साझा किया जाता है।
  2. इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण — एक अथवा अधिक संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को दूसरे परमाणु को स्थानांतरित किया जाता है अथवा किसी दूसरे परमाणु से इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण किया जाता है।
नोट:- जब परमाणु संयोजित होते हैं तब निकाय की कुल ऊर्जा व्यक्तिगत परमाणुओं की ऊर्जाओं के योग से कम हो जाती है जिससे परिणामी व्यवस्था अधिक स्थायी हो जाती है। वह बल जो परमाणुओं को एक साथ बाँधे रखता है, रासायनिक आबंध (Chemical Bond) कहलाता है।

9.4.1 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा आबंधन — सहसंयोजक आबंध

क. तत्वों के अणु — सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond):-

हाइड्रोजन परमाणु परस्पर एक-एक इलेक्ट्रॉन को साझा कर हाइड्रोजन का एक अणु (H₂) बनाते हैं। इलेक्ट्रॉनों का सहभाजित युग्म दोनों हाइड्रोजन के नाभिकों को आकर्षित करता है और स्थायी अणु बनाता है। परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉनों के सहभाजित युग्म की यह परस्पर क्रिया सहसंयोजी आबंध कहलाती है।

क्लोरीन परमाणु के संयोजकता कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः दोनों क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा कर एक क्लोरीन अणु (Cl₂) बनाते हैं। ऑक्सीजन परमाणु के संयोजकता कोश में छह इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः दोनों ऑक्सीजन परमाणु दो-दो इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं और एक द्वि-आबंध (double bond) द्वारा जुड़कर ऑक्सीजन अणु (O₂) बनाते हैं।

नोट:- यदि दो परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन के सहभाजन द्वारा जुड़े हुए हों तो उन्हें एकल आबंध (single bond) द्वारा जुड़ा हुआ कहा जाता है — जैसे H-H। क्लोरीन को Cl-Cl तथा ऑक्सीजन को O=O द्वारा निरूपित किया जाता है।

ख. यौगिकों के अणु:-

जब दो भिन्न तत्वों के परमाणु संयोजित होते हैं तब यौगिक के अणु बनते हैं। हाइड्रोजन और क्लोरीन दोनों के परमाणुओं को स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए एक-एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है, अतः दोनों परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) का एक अणु बनाते हैं।

जल के निर्माण में हाइड्रोजन को केवल एक और ऑक्सीजन को दो इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। दो हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन को ऑक्सीजन परमाणु के साथ साझा करने से जल का अणु (H₂O) बनता है, जो दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक ऑक्सीजन परमाणु की उपस्थिति को इंगित करता है।

ग. सहसंयोजी यौगिकों का नामकरण:-

सहसंयोजी यौगिकों का नामकरण यौगिक में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या को इंगित करके किया जाता है। इसके लिए उपसर्ग प्रणाली का उपयोग किया जाता है — प्रथम तत्व का नाम सामान्य ही रखा जाता है जबकि दूसरे तत्व के नाम के अंत में आइड (-ide) लगाया जाता है। उपसर्ग — मोनो-(1), डाइ-(2), ट्राइ-(3), टेट्रा-(4), पेन्टा-(5), हेक्सा-(6) आदि।

CO → कार्बन मोनोक्साइड (न कि कार्बन मोनो ऑक्साइड)
CO₂ → कार्बन डाइऑक्साइड
PCl₃ → फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड
N₂O₅ → डाइनाइट्रोजन पेंटऑक्साइड
नोट:- जब सूत्र में प्रथम तत्व हाइड्रोजन हो तो हाइड्रोजन से पहले कोई उपसर्ग नहीं जोड़ा जाता — जैसे H₂S को हाइड्रोजन सल्फाइड कहा जाता है, न कि डाइहाइड्रोजन सल्फाइड। कुछ द्विअंगी यौगिकों को उनके सामान्य नामों से जाना जाता है — जैसे H₂O को जल तथा NH₃ को अमोनिया कहा जाता है।

9.4.2 इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा आबंधन — आयनिक आबंध

आयनिक आबंध (Ionic Bond):-

यदि किसी परमाणु के संयोजकता कोश में चार से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं तो वह सामान्यतः अपने संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को त्याग देता है। सोडियम परमाणु (परमाणु क्रमांक 11) अपना एक संयोजकता इलेक्ट्रॉन त्यागकर एक धनावेशी स्पीशीज बन जाता है जिसे सोडियम धनायन (cation, Na⁺) कहते हैं।

दूसरी ओर, क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करता है और इस पर एक इकाई ऋण आवेश आ जाता है, इसे क्लोरीन का ऋणायन (anion, Cl⁻) कहते हैं।

Na∙ + ∙Cl: → Na⁺ + [∶Cl∶]⁻ → NaCl
नोट:- धनायन और ऋणायन संयुक्त रूप से आयन कहलाते हैं। विपरीत आवेश वाले आयनों के मध्य स्थिर विद्युत आकर्षण बल जो उन्हें बाँधे रखता है, आयनिक आबंध कहलाता है। आयनिक यौगिक सामान्यतः एकल इकाई के रूप में नहीं पाए जाते — वे त्रिविमीय (3-D) क्रिस्टल बनाते हैं जिसमें आयन पुनरावृति प्रतिरूप में व्यवस्थित होते हैं (क्रिस्टल जालक)।

क. आयनिक यौगिकों का नामकरण:-

आयनिक यौगिकों का नाम लिखते हुए पहले धनायन का नाम लिखा जाता है, तत्पश्चात ऋणायन का नाम — जिसका अंत आइड (-ide) से होता है। प्रायः धातुएँ धनायन बनाती हैं और अधातुएँ ऋणायन बनाती हैं। कुछ आयन दो या अधिक तत्वों के परमाणुओं के संयोजन से बनते हैं और बहुपरमाण्विक आयन कहलाते हैं (जैसे हाइड्रॉक्साइड, नाइट्रेट, कार्बोनेट, सल्फेट, अमोनियम)।

9.5 रासायनिक सूत्रों को लिखना

9.5.1 सहसंयोजी यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना

सूत्र लिखने के चरण:-

  1. यौगिक के संघटक तत्वों के प्रतीक लिखिए।
  2. इन तत्वों की संयोजकताएँ लिखिए।
  3. संयोजन करने वाले परमाणुओं की संयोजकताओं का तिर्यक (criss-cross) कीजिए और उन्हें प्रतीकों के बाद पादांक के रूप में लिखिए।
हाइड्रोजन क्लोराइड: H (1) × Cl (1) → HCl
हाइड्रोजन सल्फाइड: H (1) × S (2) → H₂S
कार्बन टेट्राक्लोराइड: C (4) × Cl (1) → CCl₄
नोट:- यदि तिर्यक करने के पश्चात संयोजकता एक है तब उसे लिखा नहीं जाता है।

9.5.2 आयनिक यौगिकों के रासायनिक सूत्र लिखना

सूत्र लिखने के चरण:-

  1. सर्वप्रथम धनायन का प्रतीक लिखिए तत्पश्चात ऋणायन का प्रतीक लिखिए।
  2. आवेशों को मूर्धांक (superscripts) में लिखने की अपेक्षा उन्हें प्रतीकों के नीचे लिखिए।
  3. सूत्र प्राप्त करने के लिए आवेशों (केवल संख्या) का तिर्यक बनाइए।
  4. रासायनिक सूत्र किसी यौगिक में तत्वों का सरलतम अनुपात दर्शाता है, अतः पादांकों को यदि आवश्यक हो एक सामान्य इकाई से भाग दिया जाता है।
कैल्सियम क्लोराइड: Ca(2+) × Cl(1−) → CaCl₂
ऐलुमिनियम ऑक्साइड: Al(3+) × O(2−) → Al₂O₃
मैग्नीशियम ऑक्साइड: Mg(2+) × O(2−) → Mg₂O₂ → सहज रूप में MgO
नोट:- यौगिक के सूत्र में आयनों के आवेश इंगित नहीं किए जाते हैं। जब सूत्र में एक ही प्रकार के दो अथवा अधिक बहुपरमाण्विक आयन होते हैं तब कोष्ठकों का उपयोग किया जाता है — जैसे Al(OH)₃, Al₂(SO₄)₃।

9.6 आयनिक और सहसंयोजी यौगिकों के गुणधर्म

विलेयता एवं गलनांक-क्वथनांक:-

आयनिक यौगिक जैसे सोडियम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट जल में प्रायः घुलनशील होते हैं किंतु किरोसिन और पेट्रोल जैसे विलायकों में अघुलनशील होते हैं। इसके विपरीत अधिकांश सहसंयोजी यौगिक जैसे कर्पूर और नैफ्थलीन जल में अघुलनशील हैं परंतु किरोसिन और पेट्रोल में घुलनशील हैं।

नोट:- प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बलों के कारण आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक प्रायः उच्च होते हैं जबकि सहसंयोजी यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते हैं।

विद्युत चालकता:-

आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते हैं क्योंकि उनके आयन प्रबल बलों द्वारा नियत स्थितियों में बँधे रहते हैं। विद्युत चालन के लिए आयनों को गति करने हेतु मुक्त होना चाहिए, जो तब ही संभव होता है जब आयनिक यौगिकों को जल में घोला जाता है अथवा गलित अवस्था में लाया जाता है।

नोट:- कुछ सहसंयोजी यौगिक, जैसे चीनी, जल में घुलनशील होते हैं किंतु विलयन में आयन नहीं बनाते इसलिए ये विद्युत का चालन नहीं करते हैं। कर्पूर और नैफ्थलीन भी विद्युत का चालन नहीं करते हैं।

9.7 सहसंयोजी यौगिकों का आण्विक द्रव्यमान

आण्विक द्रव्यमान (Molecular Mass):-

सहसंयोजी यौगिकों के अणुओं के द्रव्यमान उनमें उपस्थित परमाणुओं के द्रव्यमानों को जोड़कर ज्ञात किए जा सकते हैं।

जल (H₂O) का आण्विक द्रव्यमान = (1×2) + (16×1) = 18 u
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का आण्विक द्रव्यमान = (12×1) + (16×2) = 44 u
नोट:- आयनिक यौगिकों में आयन 3-D क्रिस्टल बनाते हैं, आयनिक यौगिक अणु नहीं बनाते हैं।

9.8 आयनिक यौगिकों का सूत्र इकाई द्रव्यमान

सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass):-

आयनिक यौगिकों में आयनों की सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात के संग्रह को सूत्र इकाई कहते हैं। सूत्र इकाई का द्रव्यमान सूत्र इकाई द्रव्यमान कहलाता है।

सोडियम ऑक्साइड (Na₂O) का सूत्र इकाई द्रव्यमान = (23×2) + (16×1) = 62 u
कैल्सियम नाइट्रेट Ca(NO₃)₂ का सूत्र इकाई द्रव्यमान = (40×1) + {(14×1)+(16×3)}×2 = 164 u
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