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Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 5

Chapter 5: जीवन की मौलिक इकाई / The Fundamental Unit of Life
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप कोशिका के बारे में समझेंगे, जिसे जीवन की मूलभूत संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई माना जाता है। साथ ही आप कोशिका झिल्ली, कोशिका भित्ति, केंद्रक, कोशिकाद्रव्य तथा विभिन्न कोशिका अंगकों की संरचना और कार्यों को सरल भाषा में पढ़ेंगे।
नीचे अध्याय 5 जीवन की मौलिक इकाई  के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 5 : जीवन की मौलिक इकाई

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 9

Subject

Science

Chapter

Chapter 5

Chapter Name

जीवन की मौलिक इकाई

Medium

Hindi

क्या आप Class 9 Science Chapter 5 Notes in Hindi  ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको जीवन की मौलिक इकाई अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप कोशिका, उसकी संरचना, कोशिका अंगकों तथा उनके कार्यों के बारे में विस्तार से समझेंगे। यह अध्याय जीव विज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
5.1 सजीव किससे बने होते हैं?
5.2 कोशिका किससे बनी होती है?
  5.2.1 प्लाज़्मा झिल्ली अथवा कोशिका झिल्ली क्या है?
  5.2.2 कोशिका भित्ति क्या है?
  5.2.3 केंद्रक क्या है?
  5.2.4 कोशिकाद्रव्य क्या है?
  5.2.5 कोशिका अंगक क्या हैं?
  5.2.5 (i) अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) क्या है?
  5.2.5 (ii) गॉल्जी उपकरण क्या है?
  5.2.5 (iii) लाइसोसोम क्या है?
  5.2.5 (iv) माइटोकॉन्ड्रिया क्या है?
  5.2.5 (v) प्लैस्टिड क्या हैं?
  5.2.5 (vi) रसधानियाँ क्या हैं?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप कोशिका के बारे में समझेंगे, जो सभी जीवधारियों की मूलभूत संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई होती है। आप जानेंगे कि प्रत्येक जीव एक या अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है और कोशिकाएँ ही जीवन की सभी आवश्यक क्रियाएँ संपन्न करती हैं।
आप कोशिका झिल्ली अथवा प्लाज़्मा झिल्ली के बारे में पढ़ेंगे, जो कोशिका को बाहरी वातावरण से अलग रखती है तथा पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है। पादप कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर कोशिका भित्ति पाई जाती है, जो कोशिका को सुरक्षा एवं दृढ़ता प्रदान करती है।
इस अध्याय में आप केंद्रक की संरचना और उसके कार्यों को भी समझेंगे। केंद्रक कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है तथा वंशानुगत गुणों से संबंधित जानकारी को सुरक्षित रखता है।
आप विभिन्न कोशिका अंगकों जैसे अंतर्द्रव्यी जालिका (ER), गॉल्जी उपकरण, लाइसोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया, प्लैस्टिड तथा रसधानियों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे। ये सभी अंगक कोशिका के भीतर विभिन्न कार्यों का संचालन करते हैं और कोशिका को सुचारु रूप से कार्य करने में सहायता करते हैं।
इस अध्याय में आप यह भी जानेंगे कि क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका को ऊर्जा प्रदान करते हैं। रसधानियाँ विभिन्न पदार्थों के संचयन तथा कोशिका की स्फीति बनाए रखने में सहायता करती हैं।
अंत में आप प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच अंतर को समझेंगे तथा यह जानेंगे कि जीवधारियों की वृद्धि और विकास के लिए कोशिका विभाजन कितना महत्वपूर्ण है। यह अध्याय जीव विज्ञान की आगे की पढ़ाई के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।

5.1 सजीव किससे बने होते हैं?

कोशिका क्या होती है :-

कोशिका :- जीवों की सबसे छोटी संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई होती है। सभी जीव — चाहे वे बहुत छोटे हों या बहुत बड़े — कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं।

नोट:-

1. कोशिका को जीवन की मूल इकाई कहा जाता है।

2. कोशिका के संरचना, आकार और कार्य का अध्ययन “साइटोलॉजी” कहलाता है।

5.2 कोशिका किससे बनी होती है?

कोशिका की खोज किसने की थी :-

कोशिका की खोज सबसे पहले रॉबर्ट हुक ने वर्ष 1665 में की थी।

नोट:-

1. रॉबर्ट हुक (1665) :-  उन्होंने एक पतली कार्क (पेड़ की छाल) की परत को अपने बनाए हुए साधारण सूक्ष्मदर्शी से देखा।
उन्होंने उसमें छोटे-छोटे खाने जैसे खाली भाग देखे और उन्हें “कोशिका” (Cell) नाम दिया।
हालांकि, वे मृत कोशिकाएँ थीं।
2. एन्टोनी वॉन ल्यूवेनहाक (1674) :-  उन्होंने उन्नत सूक्ष्मदर्शी की सहायता से तालाब के पानी में स्वतंत्र रूप से जीवित कोशिकाओं को देखा।  ये कोशिकाएँ सच में जीवित थीं और गति कर रही थीं।

कोशिका का निर्माण किन पदार्थों से होता है? स्पष्ट कीजिए :-

कोशिका का निर्माण प्रोटोप्लाज्म नामक जीवित द्रव्य से होता है, जो कई प्रकार के रासायनिक पदार्थों से मिलकर बना होता है। जैसे जल, आयन, लवण और  कार्बनिक यौगिक (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, न्यूक्लिक अम्ल, विटामिन) आदि।

कोशिका सिद्धांत क्या है? किसने इसे प्रस्तुत किया? स्पष्ट कीजिए :-

कोशिका सिद्धांत :- वह वैज्ञानिक विचार है, जो यह समझाता है कि सभी जीवधारियों की रचना कोशिकाओं से होती है और यही जीवन की मूल इकाई है।

प्रतिपादन (प्रस्तावना) :- मैथियास स्लीडन (Matthias Schleiden) और थिओडोर स्वान (Theodor Schwann) नामक वैज्ञानिकों ने 1838-39 में इस सिद्धांत को प्रस्तुत किया।

बाद में रुडोल्फ विर्चो (Rudolf Virchow) ने इसमें एक महत्वपूर्ण बात जोड़ी :- सभी कोशिकाएँ पूर्व-निर्मित कोशिकाओं से ही उत्पन्न होती हैं।

अंततः कोशिका सिद्धांत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं :- 

1. सभी पौधे और जीव कोशिकाओं से बने होते हैं

2. कोशिका जीवन की मूल (संज्ञेय) इकाई है।

3. सभी कोशिकाएँ पूर्व-निर्मित कोशिकाओं से ही उत्पन्न होती हैं।

कोशिकीय आधार पर जीवों को कितने प्रकार में बाँटा गया है :-

कोशिकीय आधार पर जीवों को दो मुख्य वर्गों में बाँटा गया है :-

1. एककोशिकीय जीव

2. बहुकोशिकीय जीव

एककोशिकीय जीव किसे कहते है उदाहरण सहित समझाइए :-

एककोशिकीय जीव :-  वे जीव जो केवल एक ही कोशिका से बने होते हैं और वही कोशिका सभी कार्य करती है, उन्हें एककोशिकीय जीव कहते हैं। ये जीव बहुत छोटे होते हैं और अक्सर सूक्ष्मदर्शी से दिखाई देते हैं।

उदाहरण :-
अमीबा, पैरामिशियम, क्लेमिडोमोनास, बैक्टीरिया (जीवाणु)

बहुकोशिकीय जीव किसे कहते है उदाहरण सहित समझाइए :-

बहुकोशिकीय जीव :-  वे जीव जिनके शरीर में कई कोशिकाएँ होती हैं, और ये कोशिकाएँ मिलकर अलग-अलग अंगों का निर्माण करती हैं और विशेष कार्य करती हैं, उन्हें बहुकोशिकीय जीव कहते हैं।

उदाहरण:- कवक (Fungus), पादप (Plant), मनुष्य, अन्य जन्तु जैसे मछली, पक्षी आदि।

कोशिका के कितने प्रकार होते हैं :-

संरचना के आधार पर कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं:-

1. प्रोकेरियोटिक कोशिका

2. यूकैरियोटिक कोशिका

प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ क्या होती हैं? उनकी विशेषताएँ बताइए :-

प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ :- वे कोशिकाएँ होती हैं जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते। ये सबसे सरल और आदिम कोशिकाएँ मानी जाती हैं।

प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-

1. इनका आकार बहुत छोटा होता है — लगभग 1 से 10 माइक्रोमीटर (µm) तक।
2. कोशिका का केंद्रकीय भाग (न्यूक्लियॉइड) झिल्ली से ढका नहीं होता।

3. इनमें सुस्पष्ट केंद्रक अनुपस्थित होता है।

4. इनमें झिल्ली से घिरे कोशिकांग जैसे माइटोकॉण्ड्रिया, गोल्जी निकाय आदि नहीं पाए जाते।

5. इनका प्रजनन विखंडन (Binary fission) या बडिंग (budding) के माध्यम से होता है।

6. ये हमेशा एककोशिकीय जीव होते हैं।

उदाहरण:-

1. बैक्टीरिया

2. नील-हरित शैवाल (Blue-green algae)

यूकैरियोटिक कोशिकाएँ क्या होती हैं? उनकी विशेषताएँ बताइए :-

यूकैरियोटिक कोशिकाएँ :- वे कोशिकाएँ होती हैं जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली से घिरे कोशिकांग (organelles) उपस्थित होते हैं। ये संरचनात्मक रूप से जटिल होती हैं।

यूकैरियोटिक कोशिकाओं की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-

1. इनका आकार बड़ा होता है — लगभग 5 से 100 माइक्रोमीटर (µm) तक।

2. कोशिका का केंद्रकीय भाग न्यूक्लिअर झिल्ली से ढका होता है।

3. इनमें सुस्पष्ट केंद्रक (nucleus) पाया जाता है।

4. माइटोकॉण्ड्रिया, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, गोल्जी निकाय जैसे झिल्लीबद्ध कोशिकांग उपस्थित रहते हैं।

5. कोशिका का विभाजन माइटोसिस या मियोसिस द्वारा होता है।

6.  ये कोशिकाएँ एककोशिकीय और बहुकोशिकीय दोनों प्रकार के जीवों में पाई जाती हैं।

उदाहरण :- 

1. पादप कोशिका

2. जन्तु कोशिका

3. मनुष्य की कोशिकाएँ

4. अमीबा (एककोशिकीय यूकैरियोट)

कोशिका का आकार कैसा होता है? कुछ उदाहरणों सहित समझाइए :-

कोशिकाओं का कोई एक निश्चित आकार नहीं होता, बल्कि उनका आकार उनके कार्य के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है। अलग-अलग जीवों की कोशिकाएँ आकार और आकृति दोनों में विविध होती हैं।

कोशिका के आकार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-

1. कोशिकाएँ सामान्यतः अंडाकार (spherical) होती हैं।  लेकिन वे लम्बी, स्तम्भ जैसी, या चपटी (disk-shaped) भी हो सकती हैं।

2. कोशिका का आकार उसके कार्य पर निर्भर करता है, जैसे — तंत्रिका कोशिका लंबी होती है क्योंकि उसे संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने होते हैं।

3. विभिन्न जीवों (पादप और जन्तु दोनों) में कोशिकाएँ विभिन्न आकार और प्रकार की होती हैं।

4. कुछ कोशिकाएँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी से ही देखा जा सकता है, जबकि कुछ कोशिकाएँ इतनी बड़ी होती हैं कि उन्हें नंगी आँखों से भी देखा जा सकता है।

5. कोशिकाओं का आकार 0.2 माइक्रोमीटर (µm) से लेकर 18 सेंटीमीटर (cm) तक हो सकता है।

6. बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाओं का सामान्य आकार 2 से 120 माइक्रोमीटर (µm) तक होता है।

उदाहरण :- 

1. सबसे बड़ी कोशिका :-  शुतुरमुर्ग का अंडा – लगभग 15 सेमी लंबा और 13 सेमी चौड़ा
2. सबसे छोटी कोशिका :-  माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) – केवल 0.1 ऐंगस्ट्रॉम (Å)

3. सबसे लंबी कोशिका :-  तंत्रिका कोशिका (Nerve cell) – जिसकी लंबाई 1 मीटर तक हो सकती है

समपरासरी विलयन किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

समपरासरी विलयन :-  जब कोशिका के अन्दर और बाहर की सान्द्रता समान होती है,

तो इसे समपरासरी विलयन कहा जाता है।

इसमें जल का प्रवाह दोनों ओर बराबर होता है, और कोशिका के आकार में कोई बदलाव नहीं होता।

उदाहरण :-

मानव रक्त कोशिकाओं के लिए उपयुक्त नमक का घोल (0.9% NaCl)

अतिपरासरी विलयन किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

अतिपरासरी विलयन :-  जब कोशिका के अन्दर की सान्द्रता बाहरी विलयन की तुलना में अधिक होती है,

तो बाहरी द्रव अतिपरासरी कहलाता है।

इस स्थिति में कोशिका से जल बाहर निकल जाता है, जिससे कोशिका सिकुड़ जाती है (Plasmolysis हो जाता है)।

उदाहरण :-

अत्यधिक खारे पानी में डाली गई पत्तियाँ या कोशिकाएँ।

अल्पपरासरी विलयन किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

अल्पपरासरी विलयन :-  जब कोशिका के बाहर की सान्द्रता कोशिका के अंदर की सान्द्रता से कम होती है, तो बाहरी द्रव अल्पपरासरी कहलाता है।

इस स्थिति में जल कोशिका के अंदर प्रवेश करता है, जिससे कोशिका फूल जाती है, और कभी-कभी फट भी सकती है

उदाहरण :- 

ताजे पानी में रखे गए लाल रक्त कण

जीवद्रव्य कुंचन क्या होता है :-

जीवद्रव्य कुंचन :- जब पादप कोशिका को किसी अतिपरासरी विलयन (Hypertonic solution) में रखा जाता है,  तो परासरण के कारण कोशिका के अंदर से जल बाहर निकलने लगता है। इससे कोशिका की प्लाज्मा झिल्ली और उसके अंदर का जीवद्रव्य (cytoplasm) संकुचित हो जाता है और कोशिका भित्ति से हट जाता है।

इस प्रक्रिया को जीवद्रव्य कुंचन (Plasmolysis) कहते हैं।

कोशिका के मुख्य भाग कौन-कौन से होते हैं :-

कोशिका एक जटिल संरचना है, जो कई भागों से मिलकर बनी होती है। इन भागों को “कोशिका अंगक” (Cell organelles) कहा जाता है। ये अंगक कोशिका के अंदर विशेष कार्य करते हैं, जिससे कोशिका जीवित और सक्रिय रहती है।

कोशिका के तीन मुख्य भाग होते हैं :- 

1. प्लाज्मा झिल्ली (Cell Membrane)

2. केन्द्रक (Nucleus)

3. कोशिका द्रव्य (Cytoplasm)

5.2.1 प्लाज़्मा झिल्ली अथवा कोशिका झिल्ली क्या है?

कोशिका झिल्ली क्या होती है? इसकी विशेषताएँ समझाइए :-

कोशिका झिल्ली :- कोशिका झिल्ली को प्लाज्मा झिल्ली या प्लाज्मालेमा (Plasmalemma) भी कहा जाता है।

यह कोशिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जो उसे बाहरी वातावरण से अलग करता है और नियंत्रण में रखता है।

कोशिका झिल्ली की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-

1 यह एक अर्धपारगम्य (Selectively Permeable) झिल्ली होती है,  जो केवल कुछ विशेष पदार्थों को ही कोशिका के अंदर या बाहर जाने देती है।

2. यह हर कोशिका में पाई जाती है — चाहे वह जन्तु कोशिका हो या पादप कोशिका।

3.  यह कोशिका को अन्य कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य से अलग करती है।

4.  इसका निर्माण प्रोटीन और लिपिड से हुआ होता है।

5. Fluid Mosaic Model (Singer और Nicholson) मॉडल के अनुसार कोशिका झिल्ली में लिपिड की दो परतें होती हैं। इनमें प्रोटीन के अणु ऐसे व्यवस्थित होते हैं जैसे सैंडविच में भराव होता है। 

6. यह रचना लचीली और गतिशील होती है।

7. कोशिका झिल्ली की मोटाई लगभग 75 एंगस्ट्रॉम (Å) होती है।

8. यह झिल्ली लचीली होती है — जिसे मोड़ना, तोड़ना, और फिर से जोड़ना संभव होता है।

प्लाज्मा झिल्ली क्या होती है? यह कैसे कार्य करती है :-

प्लाज्मा झिल्ली (Plasma membrane) कोशिका की सबसे बाहरी झिल्ली होती है, जो कोशिका के भीतर और बाहर के वातावरण के बीच सीमा रेखा का कार्य करती है।

प्लाज्मा झिल्ली के मुख्य कार्य निम्नलिखित  हैं :- 

1. यह कोशिका के भीतर और बाहर अणुओं का आदान-प्रदान करती है।

2. यह कोशिका को निश्चित आकार प्रदान करती है और उसकी रचना बनाए रखती है।

3.  यह अर्धपारगम्य (Semi-permeable) होती है — यानी केवल कुछ विशेष पदार्थों को ही अंदर या बाहर जाने देती है।

प्लाज्मा झिल्ली के माध्यम से अणुओं का आदान-प्रदान निम्नलिखित दो मुख्य तरीकों से होता है :- 

1. विसरण (Diffusion)

2. परासरण (Osmosis)

विसरण (Diffusion) क्या होता है? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

विसरण :- एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें कोई पदार्थ उच्च सान्द्रता (concentration) से निम्न सान्द्रता की ओर स्वतः गति करता है जब तक कि सान्द्रता समान न हो जाए।

विसरण की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :- 

1. यह पदार्थों की सान्द्रता के अंतर के कारण होता है।

2. यह प्रक्रिया अपने आप होती है, इसमें कोई ऊर्जा नहीं लगती।

3. यह प्रक्रिया ठोस, द्रव और गैस — सभी अवस्थाओं में देखी जा सकती है।

4. इसका उद्देश्य दोनों ओर की सान्द्रता को समान करना होता है।

उदाहरण :-

1. अगर किसी कमरे में अगरबत्ती जलाई जाए, तो उसकी खुशबू पूरे कमरे में फैल जाती है।
यह विसरण का एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें गैसें उच्च सान्द्रता (अगरबत्ती के पास) से निम्न सान्द्रता (कमरे के बाकी भाग) की ओर फैलती हैं।

2. कोशिकाओं में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान भी विसरण द्वारा होता है।

परासरण क्या होता है? इसे सरल उदाहरण सहित समझाइए :-

परासरण (Osmosis) :- एक विशेष प्रकार की विसरण प्रक्रिया है, जिसमें केवल जल अणु (विलायक), अर्धपारगम्य झिल्ली (Semi-permeable membrane) के द्वारा उच्च जल सान्द्रता से निम्न जल सान्द्रता की ओर गति करते हैं।

परासरण की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-  

1. यह केवल द्रवीय माध्यम (Liquid Medium) में होता है।

2. इसमें केवल विलायक (जल) ही झिल्ली के आर-पार जाता है,  न कि घुला हुआ पदार्थ (विलेय)।

3. यह प्रक्रिया तब तक चलती है, जब तक दोनों ओर की सान्द्रता समान नहीं हो जाती।

4. इसमें ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती — यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

उदाहरण :- 

1. यदि आप किशमिश को पानी में डालते हैं, तो वह फूल जाती है,  क्योंकि पानी (विलायक) बाहर से अंदर की ओर प्रवेश करता है — यह परासरण का उदाहरण है।

5.2.2 कोशिका भित्ति क्या है?

कोशिका भित्ति क्या होती है? इसकी विशेषताएँ समझाइए :-

कोशिका भित्ति (Cell Wall) पादप कोशिका की सबसे बाहरी कठोर परत होती है।

यह जन्तु कोशिका में नहीं पाई जाती। इसका मुख्य कार्य कोशिका को आकार, सहारा और सुरक्षा देना है।

कोशिका भित्ति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-  

1. यह सख्त, मजबूत, मोटी और संरन्ध्र (छिद्रयुक्त) होती है।

2. यह अजीवित (non-living) परत होती है, जो सेलुलोज (Cellulose) से बनी होती है।

3. यह पादप कोशिकाओं को एक-दूसरे से जोड़ती है और कोशिकाओं को मध्य भित्ति (Middle lamella) द्वारा आपस में बाँधती है।

4. पादप कोशिकाएँ Plasmodesmata नामक सूक्ष्म छिद्रों द्वारा एक-दूसरे से संपर्क में रहती हैं।

5. कवकों (Fungi) की कोशिका भित्ति काइटिन (Chitin) नामक रसायन से बनी होती है, न कि सेलुलोज से।

कोशिका भित्ति क्या कार्य करती है? इसके प्रमुख कार्य समझाइए :-

कोशिका भित्ति पादप कोशिका की एक कठोर, बाहरी परत होती है, जो न केवल संरचना देती है, बल्कि कोशिका की सुरक्षा और समर्थन में भी मदद करती है।

कोशिका भित्ति के मुख्य कार्य निम्नलिखित  हैं :- 

1. संरचना प्रदान करना :-  यह कोशिका को एक निश्चित आकार और संरचना प्रदान करती है।

2. मजबूती देना :- यह कोशिका को मोटाई और मजबूती देती है, जिससे वह दबाव सह सकती है।

3. संरन्ध्रता (Porosity) :- यह एक संरन्ध्र (छिद्रयुक्त) परत होती है, जिससे विभिन्न अणु जैसे पानी, गैसें आदि आर-पार जा सकते हैं

4. मरम्मत व पुनर्जनन क्षमता :-  कोशिका भित्ति में मरम्मत करने और स्वयं को फिर से बनाने (regenerate) की क्षमता होती है,  जो उसे क्षति के बाद भी कार्यशील बनाए रखती है।

5.2.3 केंद्रक क्या है?

केन्द्रक (Nucleus) क्या होता है :-

केन्द्रक :- कोशिका का एक महत्वपूर्ण और नियंत्रण केंद्र होता है। इसे कोशिका का मस्तिष्क या मुख्यालय (Headquarter of the cell) भी कहा जाता है, क्योंकि यह कोशिका की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है

केन्द्रक की महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित  हैं :-  

1. खोज :-  केन्द्रक की खोज 1831 में रॉबर्ट ब्राउन ने की थी।

2.  स्थिति :- (i) यूकैरियोटिक कोशिकाओं में स्पष्ट केन्द्रक पाया जाता है। 

(ii) प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (जैसे जीवाणु) में केन्द्रक नहीं होता, केवल प्राथमिक केन्द्रकीय पदार्थ होता है।

केन्द्रक (Nucleus) की संरचना को समझाइए :-

केन्द्रक (Nucleus) की संरचना :- 

केन्द्रक के निम्नलिखित चार भाग होते हैं :- 

1. केन्द्रक झिल्ली (Nuclear membrane) :-  यह एक दोहरी झिल्ली होती है, जो केन्द्रक को कोशिका द्रव्य से अलग करती है।

2. केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm) :-  यह केन्द्रक के अंदर भरा हुआ एक जेल जैसा द्रव होता है।

3. केन्द्रकाय (Nucleolus) :- यह केन्द्रक के अंदर पाया जाने वाला एक गाढ़ा गोल भाग होता है।

4. क्रोमेटिन धागे (Chromatin threads) :- ये धागे DNA से बने होते हैं, जो सूचनाओं का वहन करते हैं।
यही आगे चलकर क्रोमोसोम बनाते हैं।

केन्द्रक (Nucleus) का क्या कार्य होता है, समझाइए :-

केन्द्रक के निम्नलिखित कार्य होते हैं :-

1. कोशिका की सभी गतिविधियों का नियंत्रण करता है।

2. जनन, विकास और आनुवंशिकता से जुड़ी सूचनाएँ संग्रहित करता है।

3. डी.एन.ए. के माध्यम से आनुवंशिक लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाता है।

जीन (Gene) क्या होता है? इसे सरल भाषा में समझाइए :-

जीन :- (Gene) डी.एन.ए. (DNA) का एक बुनियादी और कार्यक्षम हिस्सा होता है, जो किसी विशेष लक्षण या गुण को नियंत्रित करता है।

5.2.4 कोशिकाद्रव्य क्या है? 5.2.5 कोशिका अंगक क्या हैं?

कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) क्या होता है? इसके कितने भाग होते हैं :-

कोशिका द्रव्य :- वह जेल-जैसा अर्द्धतरल पदार्थ होता है जो प्लाज्मा झिल्ली और केन्द्रक के बीच पाया जाता है। इसी में सभी कोशिकांग (cell organelles) तैरते रहते हैं और कोशिका की मुख्य जैव क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं।

कोशिका द्रव्य के दो प्रमुख भाग निम्नलिखित  हैं :-  

1. सिस्टोल (Cytosol)

2. कोशिकांग (Cell Organelles)

1. सिस्टोल (Cytosol) :- 

(i) यह जलीय भाग है, जिसमें विभिन्न घुलनशील पदार्थ जैसे —  प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लवण आदि होते हैं।

(ii) इसमें लगभग 90% जल, 7% प्रोटीन, 2% कार्बोहाइड्रेट, और 1% अन्य पदार्थ पाए जाते हैं।

(iii) यहीं पर कोशिका की अधिकांश रासायनिक क्रियाएँ होती हैं।

2. कोशिकांग (Cell Organelles) :- 

(i) ये ऐसे विशेषित अंग होते हैं जो कोशिका के भीतर विभिन्न कार्य करते हैं।

(ii) कुछ कोशिकांग एक झिल्ली से ढके होते हैं, कुछ दो झिल्लियों से, और कुछ बिना झिल्ली के भी होते हैं।

उदाहरण :- 

1. एक झिल्ली वाले :- गोल्जी निकाय, लायसोसोम, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम

2. दो झिल्ली वाले :- माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, केन्द्रक

3. बिना झिल्ली वाले :- राइबोसोम, सेंट्रीओल

5.2.5 (i) अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) क्या है?

अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum – ER) क्या होती है? इसकी खोज किसने की :-

अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) :- कोशिका के अंदर पाई जाने वाली झिल्ली-युक्त नलिकाओं और चपटी थैलियों का एक जाल (network) होती है। यह प्रोटीन और वसा के निर्माण तथा उनके परिवहन में सहायता करती है।

अंतर्द्रव्यी जालिका की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-    

1. संरचना :-  यह एक झिल्ली युक्त संरचना होती है, जो कोशिका द्रव्य में नलिकाओं (tubules) और पट्टियों (sheets) के रूप में फैली होती है।

2. खोजकर्ता :- इसकी खोज Porter, Claude एवं Fullam नामक वैज्ञानिकों ने की थी।

3. कार्य :- यह प्रोटीन और वसा (lipid) का निर्माण करके कोशिका झिल्ली और अन्य अंगकों के निर्माण में सहायता करती है।

4. स्थिति :- यह सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है, लेकिन प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं और स्तनधारियों की लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) में अनुपस्थित होता है।

अंतर्द्रव्यी जालिका के कितने प्रकार होते हैं? तालिका के रूप में समझाइए :-

अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum – ER) निम्नलिखित दो प्रकार की होती है :-

1. खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (Rough ER)

2. चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (Smooth ER)

प्रकार

विशेषताएँ

1. खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (Rough ER)

🔹 इसमें राइबोसोम उपस्थित होते हैं।

🔹 यह प्रोटीन संश्लेषण में सहायक होती है।

🔹 यह सिस्टर्नae और नलिकाओं से बनी होती है।

2. चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (Smooth ER)

🔹 इसमें राइबोसोम अनुपस्थित होते हैं।

🔹 यह वसा (लिपिड) के निर्माण में मदद करती है।

🔹 यह विष तथा दवाओं का निराविषीकरण करती है (विशेषतः यकृत कोशिकाओं में)।

🔹 प्रोटीन के परिवहन के लिए नलिका मार्ग बनाती है।

अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum – ER) का क्या कार्य होता है :-

अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) कोशिका का एक महत्त्वपूर्ण अंगक है, जो पदार्थों के परिवहन, संश्लेषण और शुद्धिकरण का कार्य करता है।

अंतर्द्रव्यी जालिका के मुख्य कार्य निम्नलिखित  हैं :-

1. पदार्थों का परिवहन :- यह कोशिका और केन्द्रक के बीच पदार्थों के आवागमन (transport) के लिए
नलिका जैसी सुविधा प्रदान करता है।

2. जैव रासायनिक क्रियाओं का स्थान :- यह कोशिका के विभिन्न अंगकों के बीच जैव-रासायनिक (biochemical) क्रियाओं के लिए स्थान उपलब्ध कराता है।

3. प्रोटीन और वसा का संश्लेषण :- (i) Rough ER – प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक (राइबोसोम की उपस्थिति के कारण)। (ii) Smooth ER – वसा (लिपिड) के संश्लेषण में सहायक।

4. विषहरण (Detoxification) :- Smooth ER, विशेषकर यकृत की कोशिकाओं में, विष और दवाओं को निष्क्रिय (निराविषीकरण) करने में मदद करता है।

5.2.5 (ii) गॉल्जी उपकरण क्या है?

गोल्जी उपकरण (Golgi apparatus) क्या होता है? इसकी संरचना और खोजकर्ता कौन थे :-

गोल्जी उपकरण :- कोशिका का एक महत्वपूर्ण कोशिकांग (cell organelle) है, जो पदार्थों को संशोधित (modify), संग्रहित (store) और पैक (package) करने का कार्य करता है।

गोल्जी उपकरण के मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-   

1. यह पतली झिल्ली वाली चपटी थैलियों (पुटिकाओं) का समूह होता है,  जो एक-दूसरे के ऊपर समानांतर ढंग से सजी रहती हैं।

2. इसकी खोज इटली के वैज्ञानिक कैमिलो गाल्जी (Camillo Golgi) ने की थी, इसलिए इसे उनके नाम पर “गोल्जी उपकरण” कहा जाता है।

3. यह अंगक सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाता है, लेकिन कुछ में अनुपस्थित होता है।

उदाहरण :- 

(i) प्रोकेरियोटिक कोशिकाओं (जैसे – बैक्टीरिया) में

(ii) लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) में

(iii) पादप की सिव ट्यूब कोशिकाओं (Sieve cells) में 

गोल्जी काय (Golgi apparatus) क्या कार्य करता है? इसके मुख्य कार्यों को समझाइए :-

गोल्जी काय :-  कोशिका का एक सक्रिय कोशिकांग है, जो पदार्थों के निर्माण, रूपांतरण, संग्रहण और परिवहन का कार्य करता है।

गोल्जी काय के प्रमुख कार्य निम्नलिखित  हैं :-    

1. लिपिड (वसा) का निर्माण :-  यह कोशिका में लिपिड (चर्बीयुक्त पदार्थ) बनाने में सहायता करता है।

2. मध्य लेमिला का निर्माण :- यह पादप कोशिकाओं की मध्य भित्ति (Middle lamella) बनाने में मदद करता है,
जो दो कोशिकाओं को जोड़ती है।

3. लिपिड का संग्रहण और वितरण :- एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम में बने लिपिड को संग्रहित करता है और
फिर उन्हें कोशिका के भीतर या बाहर विभिन्न स्थानों पर भेजता है।

4. पुटिकाओं में पदार्थों का संचयन और रूपांतरण :- यह पदार्थों को पुटिकाओं (vesicles) में संग्रहित करता है, उनका रूपांतरण करता है, और फिर उन्हें बंद (pack) करके सही स्थान तक पहुंचाता है।

5. लायसोसोम का निर्माण :- गोल्जी काय ही लायसोसोम (Lysosome) नामक कोशिकांग का निर्माण करता है।

6. कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति के निर्माण में सहायता :- यह कोशिका झिल्ली तथा पादप कोशिकाओं की कोशिका भित्ति के निर्माण में भी भाग लेता है।

7. मेलेनिन संश्लेषण में सहायता :- यह रंजक पदार्थ मेलेनिन के निर्माण में भी सहयोग करता है।

माइटोकॉण्ड्रिया क्या है? इसकी विशेषताएँ बताइए :-

माइटोकॉण्ड्रिया :- कोशिका का एक महत्वपूर्ण कोशिकांग है, जिसे कोशिका का पावर हाउस (ऊर्जाघर) कहा जाता है, क्योंकि यह कोशिका को ऊर्जा प्रदान करता है।

माइटोकॉण्ड्रिया की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :-   

1. ऊर्जा उत्पादन केंद्र :-  यह भोजन से ऊर्जा निकालकर ATP (Adenosine Triphosphate) के रूप में संग्रहीत करता है,  जो कोशिका की सभी क्रियाओं में उपयोग होती है।

2. प्रोकेरियोटिक में अनुपस्थित :- यह प्रोकेरियोटिक कोशिकाओं (जैसे– जीवाणु) में नहीं पाया जाता है।

3. यूकैरियोटिक में उपस्थित :- यह सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं (पादप और जन्तु) में पाया जाता है।

4. दोहरी झिल्ली :- इसमें दो झिल्लियाँ होती हैं, (i) बाहरी झिल्ली – चिकनी और छिद्रों वाली (ii) भीतरी झिल्ली – अंदर की ओर मुड़ी हुई, जिससे क्रिस्टी (Cristae) बनती हैं, जो सतह क्षेत्र को बढ़ा देती हैं।

5. स्वतंत्रता :- माइटोकॉण्ड्रिया में अपना DNA और राइबोसोम होते हैं, इसलिए यह कुछ हद तक स्वतंत्र रूप से प्रोटीन बना सकता है।

6. खोज :- इसे सबसे पहले 1880 में Kolliker नामक वैज्ञानिक ने देखा था।

5.2.5 (iii) लाइसोसोम क्या है?

लायसोसोम (Lysosome) क्या होते हैं? ये किस कार्य में सहायक हैं :-

लायसोसोम :- कोशिका के अंदर पाए जाने वाले एकल झिल्ली युक्त पुटिका (vesicle) होते हैं, जो एन्जाइम (पाचक एंजाइम) से भरे होते हैं। इन्हें कोशिका का “सफाईकर्मी” भी कहा जाता है।

लायसोसोम के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं :-   

(i) यह अनावश्यक या क्षतिग्रस्त कोशिका अंगों को नष्ट करते हैं।

(ii) यह बाहरी रोगजनकों (जैसे बैक्टीरिया) को निगलकर पचा देते हैं।

(iii) जब कोशिका बहुत अधिक क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो ये स्वयं को फाड़कर पूरी कोशिका को नष्ट कर सकते हैं — इसे ही “आत्मघाती थैली (Suicidal Bag)” कहा जाता है।

लायसोसोम को आत्मघाती थैली (Suicidal Bag) क्यों कहा जाता है :-

लायसोसोम को आत्मघाती थैली (Suicidal Bag) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अपनी ही अत्यधिक क्षतिग्रस्त या बीमार कोशिका को खुद ही नष्ट कर सकता है।

इसके निम्नलिखित कारण  हैं :- 

(i) लायसोसोम में पाचक एन्जाइम होते हैं।

(ii) जब कोशिका में कोई गड़बड़ी, चोट या संक्रमण होता है,  तो लायसोसोम की झिल्ली फट जाती है। इसके बाद, एन्जाइम बाहर निकलकर पूरी कोशिका को पचा देते हैं।

5.2.5 (iv) माइटोकॉन्ड्रिया क्या है?

माइटोकॉण्ड्रिया का मुख्य कार्य क्या है? इसे समझाइए :-

माइटोकॉण्ड्रिया कोशिका का ऐसा अंगक है जो ऊर्जा उत्पादन में मुख्य भूमिका निभाता है।

इसी कारण इसे कोशिका का पावर हाउस कहा जाता है।

माइटोकॉण्ड्रिया के मुख्य कार्य निम्नलिखित  हैं :-    

1. ऊर्जा निर्माण :-  यह भोजन (ग्लूकोज़) को ऑक्सीजन की सहायता से तोड़कर ATP (Adenosine Triphosphate) नामक ऊर्जा युक्त अणु का निर्माण करता है।

2. ATP का संग्रहण :- जो ऊर्जा माइटोकॉण्ड्रिया में बनती है, उसे ATP के रूप में संचित (store) किया जाता है,
जिससे कोशिका की सभी जैव क्रियाओं को ऊर्जा मिलती है।

3. कोशिकीय श्वसन का केंद्र :- माइटोकॉण्ड्रिया वह स्थान है जहाँ कोशिकीय श्वसन की प्रक्रिया होती है, विशेष रूप से क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle) माइटोकॉण्ड्रिया की भीतरी झिल्ली में होता है।

राइबोसोम क्या होते हैं? इनकी संरचना और उपस्थिति को समझाइए :-

राइबोसोम :- कोशिका के बहुत छोटे, गोल और ठोस कण होते हैं, जो प्रोटीन निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन्हें प्रोटीन निर्माण की फैक्ट्री भी कहा जाता है।

संरचना :- ये RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल) और प्रोटीन से बने होते हैं। ये झिल्ली रहित (non-membranous) होते हैं।

स्थिति :- राइबोसोम दो स्थानों पर पाए जाते हैं —

(i) कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में स्वतंत्र रूप से तैरते हुए

(ii) एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम की बाहरी सतह पर चिपके हुए

राइबोसोम का क्या कार्य होता है? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

राइबोसोम कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण (Protein synthesis) का प्रमुख केंद्र होता है।

यह कोशिका में अमीनो अम्लों से प्रोटीन बनाने का कार्य करता है।

राइबोसोम के मुख्य कार्य निम्नलिखित  हैं :-    

1. प्रोटीन संश्लेषण का स्थान :-  राइबोसोम वह स्थान है जहाँ अमीनो एसिड आपस में जुड़कर प्रोटीन बनाते हैं।
यह संरचनात्मक प्रोटीन (जैसे – त्वचा, मांसपेशियाँ) और क्रियात्मक प्रोटीन (जैसे – एन्जाइम) दोनों बनाते हैं।

2. संश्लेषित प्रोटीन का वितरण :- राइबोसोम द्वारा बनाए गए प्रोटीन को  एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (अद्रव्यी जालिका) की सहायता से  कोशिका के विभिन्न भागों में भेजा जाता है, जहाँ उनकी आवश्यकता होती है।

3. शरीर की वृद्धि और मरम्मत में सहयोग :- राइबोसोम द्वारा बनाए गए प्रोटीन शरीर के  विकास, ऊतकों की मरम्मत, और कोशिकीय कार्यों में मदद करते हैं।

5.2.5 (v) प्लैस्टिड क्या हैं?

लवक (Plastids) क्या होते हैं? ये कहाँ पाए जाते हैं :-

लवक :- केवल पादपों (Plants) और शैवालों (Algae) की कोशिकाओं में पाए जाने वाले विशेष अंगक (special organelles) होते हैं, जिनका मुख्य कार्य भोजन निर्माण, भंडारण या रंग प्रदान करना होता है।

लवकों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित  हैं :- 

1. स्थिति :-  ये केवल पादप कोशिकाओं और शैवाल (Algae) में पाए जाते हैं।
जन्तु कोशिकाओं में ये अनुपस्थित होते हैं।

2. संरचना :- (i) ये दोहरी झिल्ली (double membrane) से बने होते हैं।

(ii) इनके अंदर एक द्रविल पदार्थ होता है जिसे स्ट्रोमा (Stroma) कहते हैं।

(iii) इनका आकार कपनुमा, फीताकार या मेखलाकार हो सकता है।

3. स्वतंत्रता :-  इनमें अपना DNA और राइबोसोम होते हैं, जिससे ये कुछ हद तक स्वतंत्र रूप से प्रोटीन बना सकते हैं।

लवक (Plastids) कितने प्रकार के होते हैं :-

लवक निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं :-

1. ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast)

2. क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast)

3. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast)

क्लोरोप्लास्ट, ल्यूकोप्लास्ट और क्रोमोप्लास्ट क्या हैं? इनके कार्य क्या हैं :-

क्लोरोप्लास्ट, ल्यूकोप्लास्ट और क्रोमोप्लास्ट, लवक (Plastids) हैं जो पौधों की कोशिका में पाए जाने वाले विशेष अंगक होते हैं, जो रंग प्रदान करने, भोजन बनाने और संग्रह करने में सहायता करते हैं।

क्लोरोप्लास्ट, ल्यूकोप्लास्ट और क्रोमोप्लास्ट के निम्नलिखित कार्य हैं :- 

1. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast)

(i) यह केवल पादप कोशिकाओं में पाया जाता है।

(ii) इसमें क्लोरोफिल नामक हरा रंजक पाया जाता है।

(iii) यह सूर्य की ऊर्जा की सहायता से प्रकाश संश्लेषण करता है और भोजन बनाता है। इसलिए इसे कोशिका का रसोईघर (Kitchen of the Cell) कहा जाता है।

2. ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast)

(i) यह एक रंगहीन (अवर्णी) लवक होता है।

(ii) यह मुख्यतः जड़ों और भूमिगत तनों में पाया जाता है।

(iii) इसका कार्य भोजन पदार्थों का संग्रह करना होता है, जैसे— शर्करा (starch), तेल, प्रोटीन

3. क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast)

(i) यह रंगीन लवक होता है (हरे रंग को छोड़कर सभी रंग जैसे– लाल, पीला, नारंगी, भूरा)।

(ii) यह पौधे के रंगीन भागों जैसे— फूलों, फलों की भित्ति, बीज आदि में पाया जाता है।

(iii) इसका कार्य पौधों को रंग देना है, जिससे वे परागण (pollination) के लिए कीटों को आकर्षित करते हैं।

लवकों के प्रकार को तालिका के रूप में दर्शाइए :-

लवकों के प्रकार तालिका के रूप में निम्नलिखित हैं :- 

लवक का प्रकार

रंग/रूप

मुख्य कार्य

कहाँ पाए जाते हैं

1. ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast)

रंगहीन (सफेद)

भोजन (शर्करा, तेल, प्रोटीन) का संग्रहण

जड़, तना आदि में

2. क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast)

रंगीन (लाल, पीला, नारंगी, भूरा आदि)

पादप के विभिन्न भागों को रंग देना

फूल, फल, पत्ती, तना आदि में

3. क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast)

हरा (क्लोरोफिल के कारण)

प्रकाश संश्लेषण (भोजन बनाना)

मुख्यतः पत्तियों में

हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) में बाह्माझिल्ली और अंतःझिल्ली क्या होती हैं :-

हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) एक दोहरी झिल्ली (double membrane) वाला अंगक होता है,  जो पादप कोशिकाओं में प्रकाश संश्लेषण करता है।

इसकी दो निम्नलिखित झिल्लियाँ होती हैं :- 

1. बाह्माझिल्ली (Outer membrane) :- 

(i) यह बाहर की झिल्ली होती है।

(ii) यह चिकनी और अर्द्धपारगम्य (semi-permeable) होती है।

(iii) इसका कार्य कोशिका द्रव्य से लवक की रक्षा करना और कुछ पदार्थों का अंदर-बाहर आना जाने देना होता है।

2. अंतःझिल्ली (Inner membrane) :- 

(i) यह अंदर की झिल्ली होती है।

(ii) यह झिल्ली कम लचीली लेकिन अधिक चयनात्मक होती है। 

(iii) यह स्ट्रोमा (हरित लवक का आंतरिक द्रव) को घेरती है।

(iv) इसके अंदर प्रकाश संश्लेषण से जुड़ी संरचनाएँ पाई जाती हैं। 

पीठिका (Stroma) क्या होती है? यह कहाँ पाई जाती है :-

पीठिका :-  जिसे स्ट्रोमा (Stroma) भी कहा जाता है, हरित लवक (Chloroplast) के अंदर का तरल भरा स्थान होता है, जो अंतः झिल्ली से घिरा होता है।

थायलाकोइड (Thylakoid) क्या होता है? यह कहाँ पाया जाता है :-

थायलाकोइड (Thylakoid) :- एक जटिल चपटी, झिल्ली जैसी थैली होती है,  जो हरित लवक (Chloroplast) के स्ट्रोमा (पीठिका) के अंदर पाई जाती है।

ग्रेना (Grana) क्या होते हैं? यह किस कार्य में सहायक हैं :-

ग्रेना (Grana) :- हरित लवक (Chloroplast) के अंदर पाए जाने वाले थायलाकोइड के ढेर (stack) होते हैं, जो सिक्कों की चट्टी (stack of coins) जैसे दिखाई देते हैं।

ग्रेना में प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश क्रिया (Light Reaction) होती है। यही वह स्थान है जहाँ सूर्य की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (ATP) में बदला जाता है।

5.2.5 (vi) रसधानियाँ क्या हैं?

रिक्तिका (Vacuole) क्या होती है? यह कहाँ पाई जाती है? यह किस कार्य में सहायक हैं :-

रिक्तिका :- जिसे रसघानि (Sap vacuole) भी कहते हैं,  कोशिका के अंदर झिल्ली से घिरी थैलीनुमा संरचना होती है, जो विभिन्न तरल पदार्थों को संग्रहित करती है।

रिक्तिका की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-  

1. संरचना :- (i) यह झिल्ली युक्त थैली होती है।

(ii) इसकी झिल्ली को टोनोप्लास्ट (Tonoplast) कहते हैं।

2. स्थिति :- (i) पादप कोशिकाओं में रिक्तिका बहुत बड़ी होती है (कभी-कभी 90% स्थान घेरती है)।

(ii) जन्तु कोशिकाओं में यह आमतौर पर छोटी और अनेक होती हैं।

3. कार्य :- (i) यह जल, लवण, शर्करा, रंगद्रव्य, अपशिष्ट पदार्थ आदि का संग्रह करती है।

(ii) यह कोशिका में दबाव (turgor pressure) बनाए रखने में मदद करती है।

(iii) यह कोशिका को आकार और कठोरता प्रदान करती है।

पादप कोशिका और जन्तु कोशिका में क्या अंतर होता है :-

पादप कोशिका और जन्तु कोशिका में निम्नलिखित अंतर होता है :-

विशेषता

पादप कोशिका (Plant Cell)

जन्तु कोशिका (Animal Cell)

1. क्लोरोप्लास्ट

उपस्थित

अनुपस्थित

2. रिक्तिका (Vacuole)

बड़ी और स्पष्ट रिक्तिका होती है

रिक्तिका या तो नहीं होती या बहुत छोटी होती है

3. द्रव अवशोषण क्षमता

अधिक मात्रा में द्रव पदार्थ का अवशोषण कर सकती है

सीमित मात्रा में द्रव अवशोषण कर सकती है

4. प्रकाश संश्लेषण

होता है

नहीं होता

5. कोशिका भित्ति

होती है (सेलुलोज की बनी होती है)

नहीं होती

6. लाइसोसोम

सामान्यतः अनुपस्थित या बहुत कम

प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं

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