CLASS IX SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER - 4
अपने परिवेश में गति का वर्णन
| Textbook | NCERT (अन्वेषण) |
|---|---|
| Class | Class IX |
| Subject | Science |
| Chapter | Chapter 4 |
| Chapter Name | अपने परिवेश में गति का वर्णन |
| Medium | Hindi |
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
4.1 सरल रेखा में गति
सरल रेखीय गति:-
जब कोई वस्तु सरल रेखा में गमन करती है तो इसकी गति सरल रेखीय गति कहलाती है — यह सर्वाधिक सरल प्रकार की गति होती है (जैसे सीधे राजमार्ग पर चलती कार, सीधी पटरियों पर चलती रेलगाड़ी)।
4.1.1 स्थिति का वर्णन करना
संदर्भ बिंदु और स्थिति:-
किसी वस्तु की स्थिति का वर्णन करने के लिए संदर्भ बिंदु (reference point) के रूप में एक नियत बिंदु निर्दिष्ट करना होता है। समय के किसी क्षण पर संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु की दूरी और दिशा उस क्षण पर वस्तु की स्थिति का विवरण देते हैं। यदि संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन होता है तो वस्तु गतिशील है; यदि परिवर्तित नहीं होती तो वस्तु विरामावस्था में है।
4.1.2 चलित दूरी और विस्थापन
चलित दूरी (Distance travelled):-
वस्तु की आरंभिक एवं अंतिम स्थिति के बीच उसके द्वारा तय किए गए संपूर्ण पथ की लंबाई है। इसके वर्णन के लिए केवल आंकिक मान (मात्रक सहित) की आवश्यकता होती है, गति की दिशा की नहीं — यह एक अदिश राशि है।
विस्थापन (Displacement):-
समय के किन्हीं दो क्षणों के बीच किसी वस्तु की स्थितियों में होने वाला सकल परिवर्तन है। विस्थापन के संपूर्ण विवरण के लिए दिशा एवं आंकिक मान (परिमाण) दोनों निर्दिष्ट करना आवश्यक है — यह एक सदिश राशि है। किसी वस्तु के विस्थापन का परिमाण दो क्षणों पर उसकी स्थितियों के बीच की दूरी होता है।
4.1.3 माध्य चाल एवं माध्य वेग
माध्य चाल (Average speed):-
वस्तु द्वारा चलित कुल दूरी को यह दूरी तय करने में व्यतीत समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त होती है। माध्य चाल की कोई दिशा नहीं होती, केवल आंकिक मान होता है।
माध्य वेग (Average velocity):-
दिए गए समय अंतराल में किसी वस्तु का माध्य वेग उस समय अंतराल में उसकी स्थिति में परिवर्तन (अथवा विस्थापन) को उस समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त भागफल होता है। वेग की दिशा वही होती है जो विस्थापन की होती है।
vav = s / t (4.2 ख)
उदाहरण 4.1 — पत्रवाहक (आर्यभटीय/गणित कौमुदी पर आधारित)
दो पत्रवाहक 210 योजन दूर स्थित स्थानों से एक-दूसरे की ओर चलना आरंभ करते हैं। एक 9 योजन प्रतिदिन और दूसरा 5 योजन प्रतिदिन चलता है। कुल दूरी/कुल चाल = 210/14 = 15 दिन पश्चात वे मिलेंगे।
उदाहरण 4.2 — तैराक
सारंग तरण-ताल के एक किनारे से दूसरे तक तैरकर वापस लौटने में 50 s लेता है। कुल दूरी 50 m, विस्थापन 0 m। माध्य चाल = 50/50 = 1 m s⁻¹; माध्य वेग = 0/50 = 0 m s⁻¹।
4.1.4 माध्य त्वरण
माध्य त्वरण (Average acceleration):-
किसी दिए गए समय अंतराल में किसी गतिमान वस्तु का माध्य त्वरण इसके वेग में होने वाले परिवर्तन को समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त भागफल है।
माध्य त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) ÷ समय अंतराल (4.3 ख)
a = (v − u) / (t₂ − t₁) (4.3 ग)
माध्य त्वरण का SI मात्रक m s⁻² है। सरल रेखीय गति के लिए यदि वेग का परिमाण बढ़ रहा है तो माध्य त्वरण वेग की दिशा में होता है; यदि घट रहा है तो त्वरण की दिशा वेग की दिशा के विपरीत होती है।
उदाहरण 4.3 — राजमार्ग पर बस
बस 36 km h⁻¹ से 54 km h⁻¹ (10 m s⁻¹ से 15 m s⁻¹) होने में 10 s लेती है → माध्य त्वरण = 0.5 m s⁻² (वेग की दिशा में)। फिर ब्रेक लगाकर 54 km h⁻¹ (15 m s⁻¹) से 5 s में रुकती है → माध्य त्वरण = −3 m s⁻² (वेग की दिशा के विपरीत)।
उदाहरण 4.4 — गिरती हुई वस्तु
ऊँचाई से गिराई गई वस्तु के लिए प्रत्येक 1 s के अंतराल में माध्य त्वरण नियत रहता है = 9.8 m s⁻² — यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण त्वरण कहलाता है और प्रतीक 'g' से निरूपित किया जाता है।
4.2 गति का आलेखीय निरूपण
आलेखीय निरूपण (Graphical representation):-
यह चित्रात्मक रूप में निरूपित करता है कि समय के साथ स्थिति, वेग और त्वरण किस प्रकार परिवर्तित होते हैं। इस प्रकार के आलेख दो वस्तुओं की गतियों की तुलना करने में, भौतिक राशियों के परिकलन में तथा गति समान है या असमान यह पहचानने में सहायता करते हैं।
4.2.2 स्थिति-समय ग्राफ
स्थिति-समय (Position-time) ग्राफ:-
किसी वस्तु की गति अर्थात समय के साथ उसकी स्थिति में होने वाले परिवर्तन को निरूपित करता है। सरल रेखीय स्थिति-समय ग्राफ यह इंगित करता है कि वस्तु नियत वेग से गतिमान है; वक्रित स्थिति-समय ग्राफ यह इंगित करता है कि वेग नियत नहीं है और वस्तु त्वरित गति कर रही है।
उदाहरण 4.6 व 4.7
यदि स्थिति-समय ग्राफ समय-अक्ष के समांतर सरल रेखा है, तो वस्तु विरामावस्था में है। दो वस्तुओं A व B के स्थिति-समय ग्राफ की तुलना में, जिस वस्तु की ग्राफ-रेखा की प्रवणता (झुकाव) अधिक होती है, उसका वेग अधिक होता है।
4.2.3 वेग-समय ग्राफ
वेग-समय (Velocity-time) ग्राफ:-
समय के साथ वेग में होने वाले परिवर्तन को निरूपित करता है। जब वेग नियत रहता है तो ग्राफ X-अक्ष के समांतर सरल रेखा होती है और त्वरण शून्य होता है। सरल रेखीय वेग-समय ग्राफ की प्रवणता से त्वरण का मान प्राप्त होता है।
4.3 सरल रेखा में नियत त्वरण से गति के लिए शुद्धगतिक समीकरण
शुद्धगतिक समीकरण (Kinematic equations):-
नियत त्वरण से सरल रेखा में किसी वस्तु की गति के लिए पाँच भौतिक राशियों — विस्थापन (s), समय अंतराल (t), आरंभिक वेग (u), अंतिम वेग (v), तथा त्वरण (a) को निम्नलिखित समीकरणों द्वारा संबद्ध किया जा सकता है:
s = ut + ½at² (4.4 ख)
v² = u² + 2as (4.4 ग)
उदाहरण 4.8 — ब्रेक लगाने पर कार
राजमार्ग पर कार में ब्रेक लगने से त्वरण −4 m s⁻² आता है। v² = u² + 2as सूत्र से रुकने से पूर्व चलित दूरी: 54 km h⁻¹ (15 m s⁻¹) के लिए 28.1 m, और 108 km h⁻¹ (30 m s⁻¹) के लिए 112.5 m — अर्थात प्रारंभिक वेग दोगुना होने पर रुकने की दूरी चार गुना हो जाती है।
4.4 समतल में गति — एकसमान वृत्तीय गति
वृत्तीय गति:-
जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार पथ पर चलती है तो इसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है। एक परिक्रमा (वृत्त का एक चक्कर) पूर्ण करने में चलित दूरी वृत्त की परिधि के बराबर होती है, जबकि विस्थापन शून्य होता है क्योंकि वस्तु अपनी मूल स्थिति पर लौट आती है।
जबकि समय अंतराल T में माध्य वेग शून्य होगा क्योंकि विस्थापन शून्य है।
एकसमान वृत्तीय गति (Uniform circular motion):-
जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार पथ पर अचर (एकसमान) चाल से चलती है तो इसकी गति एकसमान वृत्तीय गति कहलाती है। इसमें चाल तो अचर रहती है किंतु वेग की दिशा प्रत्येक क्षण परिवर्तित होती रहती है (वेग सदैव वृत्त की स्पर्श रेखा (tangent) के अनुदिश होता है) — इसलिए इस गति में त्वरण होता है, यद्यपि चाल स्थिर है।