Class 9 geography Notes in hindI Chapter - 4
Chapter 4: Climate
Chapter Introduction:
This chapter explains weather, climate, monsoon system, and factors affecting climate in India.
FAQ
Ques. Is monsoon an important topic?
Ans. Yes, monsoon-related questions are very important.
CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 4 : जलवायु
प्रश्न :- जलवायु (Climate) क्या है?
उत्तर :- जलवायु :- किसी विशाल क्षेत्र में लंबे समय (लगभग 30 वर्ष या उससे अधिक) तक मौसम की अवस्थाओं और उनकी विविधताओं के कुल योग को जलवायु कहते हैं।
जलवायु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह दीर्घकालीन (लंबे समय की) स्थिति को दर्शाती है।
2. इसमें तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पवन आदि का औसत स्वरूप शामिल होता है।
3. यह किसी क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों को प्रभावित करती है।
उदाहरण :-
राजस्थान की जलवायु सामान्यतः गर्म और शुष्क होती है, जबकि केरल की जलवायु आर्द्र और वर्षायुक्त होती है।
प्रश्न :- मौसम (Weather) क्या है?
उत्तर :- मौसम :- किसी विशेष समय में किसी क्षेत्र के वायुमंडल की अवस्था को मौसम कहते हैं।
मौसम की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह अल्पकालीन स्थिति को दर्शाता है।
2. मौसम जल्दी-जल्दी बदलता रहता है।
3. इसके प्रमुख तत्त्व हैं — तापमान, वायुमंडलीय दाब, पवन, आर्द्रता और वर्षण।
4. मौसम और जलवायु के तत्त्व समान होते हैं, परंतु दोनों में समयावधि का अंतर होता है।
उदाहरण :-
आज का दिन यदि ठंडा और वर्षायुक्त है, तो यह उस दिन का मौसम कहलाता है।
प्रश्न :- मौसम और जलवायु में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- मौसम और जलवायु में अंतर निम्नलिखित हैं :-
आधार | मौसम | जलवायु |
समयावधि | छोटे समय की वायुमंडलीय दशा को दर्शाता है | लंबे समय की वायुमंडलीय दशा को दर्शाती है |
परिवर्तन | एक दिन में कई बार बदल सकता है | लंबे समय तक स्थिर रहती है |
अध्ययन | मौसम का अध्ययन मौसम विज्ञान कहलाता है | जलवायु का अध्ययन जलवायु विज्ञान कहलाता है |
प्रश्न :- मानसून क्या है?
उत्तर :- मानसून :- ‘मानसून’ शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द ‘मौसिम’ से हुई है, जिसका अर्थ है — मौसम।
मानसून की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु अनुसार परिवर्तन को दर्शाता है।
2. मानसून में पवनें एक ऋतु में एक दिशा से और दूसरी ऋतु में विपरीत दिशा से चलती हैं।
3. भारत की जलवायु पर मानसून का मुख्य प्रभाव पड़ता है।
4. यह देश में वर्षा का प्रमुख कारण है।
उदाहरण :-
गर्मी के मौसम में समुद्र से स्थल की ओर चलने वाली पवनें भारत में वर्षा लाती हैं, इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून कहते हैं।
प्रश्न :- भारत की जलवायु कैसी है?
उत्तर :- भारत की जलवायु :- भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु है।
भारत की जलवायु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह मुख्यतः मानसून पवनों से प्रभावित होती है।
2. एशिया में इस प्रकार की जलवायु दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी भागों में पाई जाती है।
3. सामान्य रूप से देश में जलवायु का एक समान प्रतिरूप दिखाई देता है।
4. फिर भी विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट प्रादेशिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं।
उदाहरण :-
मेघालय में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान के कुछ भागों में बहुत कम वर्षा होती है।
प्रश्न :- भारत में मौसम में कौन-कौन सी भिन्नताएँ पाई जाती हैं ?
उत्तर :- भारत में मौसम में मुख्यतः निम्नलिखित भिन्नताएँ पाई जाती हैं :-
1. तापमान में भिन्नता :-
(i) गर्मियों में राजस्थान के कुछ भागों में तापमान लगभग 50°C तक पहुँच जाता है।
(ii) वहीं जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में तापमान लगभग 20°C रहता है।
(iii) सर्दियों में द्रास (जम्मू-कश्मीर) में तापमान बहुत कम हो जाता है।
2. वर्षा में भिन्नता :-
(i) हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा हिम (बर्फ) के रूप में होती है।
(ii) अन्य क्षेत्रों में वर्षा पानी के रूप में होती है।
(iii) मेघालय में वार्षिक वर्षा लगभग 400 सेमी तक होती है।
(iv) जबकि राजस्थान के कुछ भागों में वर्षा केवल 10 सेमी तक ही होती है।
उदाहरण :-
मेघालय अत्यधिक वर्षा वाला क्षेत्र है, जबकि राजस्थान का पश्चिमी भाग शुष्क और कम वर्षा वाला क्षेत्र है।
प्रश्न :- महाद्वीपीय अवस्था क्या है?
उत्तर :- महाद्वीपीय अवस्था :- जब किसी क्षेत्र में गर्मी के मौसम में बहुत अधिक गर्मी और सर्दी के मौसम में बहुत अधिक ठंड पड़ती है, तो इस स्थिति को महाद्वीपीय अवस्था कहते हैं।
महाद्वीपीय अवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. तापमान में अत्यधिक अंतर पाया जाता है।
2. समुद्र से दूर स्थित क्षेत्रों में यह अवस्था अधिक देखी जाती है।
3. गर्मियों में तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है।
4. सर्दियों में तापमान बहुत अधिक गिर जाता है।
उदाहरण :-
दिल्ली और उत्तर भारत के आंतरिक भागों में गर्मियों में तेज गर्मी और सर्दियों में कड़ाके की ठंड पड़ती है।
प्रश्न :- भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर :- भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं :-
1. अक्षांश (Latitude) :- किसी देश की भूमध्य रेखा से दूरी जलवायु को प्रभावित करती है। कम अक्षांश वाले क्षेत्रों में अधिक गर्मी होती है।
2. ऊँचाई (Altitude) :- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में मैदानों की तुलना में ठंड अधिक होती है।
3. समुद्र से दूरी (Distance from Sea) :- समुद्र के पास स्थित क्षेत्रों में सम (मंद) जलवायु होती है। समुद्र से दूर क्षेत्रों में विषम (अत्यधिक) जलवायु पाई जाती है।
4. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) :- गर्म धाराएँ जलवायु को सम और गर्म बनाती हैं। ठंडी धाराएँ जलवायु को ठंडा और विषम बनाती हैं।
5. वायुदाब (Air Pressure) :- किसी स्थान का वायुदाब उसके अक्षांश और ऊँचाई पर निर्भर करता है। वायुदाब में अंतर से पवनों की दिशा प्रभावित होती है।
उदाहरण :-
मुंबई समुद्र के पास होने से वहाँ की जलवायु सम रहती है, जबकि दिल्ली समुद्र से दूर होने के कारण वहाँ महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है।
प्रश्न :- जेट धारा क्या है?
उत्तर :- जेट धारा :- जेट धारा क्षोभमंडल (Troposphere) की ऊँचाई पर बहने वाली अत्यधिक तीव्र पश्चिमी पवनें होती हैं।
जेट धारा की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इनकी गति लगभग 110 किमी/घंटा से 180 किमी/घंटा तक होती है।
2. ये पवनें बहुत अधिक ऊँचाई पर बहती हैं।
3. भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में शीतकालीन वर्षा लाने में सहायक होती हैं।
4. ये गर्मियों को छोड़कर प्रायः पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में बहती हैं।
5. इनका विस्तार लगभग 27° से 30° उत्तर अक्षांश के बीच पाया जाता है।
उदाहरण :-
पंजाब और हरियाणा में सर्दियों की वर्षा जेट धाराओं के प्रभाव से होती है।
प्रश्न :- अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) क्या है?
उत्तर :- अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र :- यह विषुवतीय अक्षांशों में फैला हुआ निम्न दाब का क्षेत्र होता है, जहाँ पवनें आकर मिलती हैं।
इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह एक गर्त (निम्न दाब क्षेत्र) के रूप में पाया जाता है।
2. यहाँ उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें आपस में मिलती हैं।
3. यह क्षेत्र विषुवत् रेखा के लगभग समानांतर स्थित होता है।
4. सूर्य की आभासी गति के साथ यह क्षेत्र उत्तर या दक्षिण की ओर खिसकता रहता है।
उदाहरण :-
गर्मी के मौसम में सूर्य के उत्तर की ओर जाने पर ITCZ भी उत्तर की ओर खिसकता है, जिससे भारत में मानसून की स्थिति प्रभावित होती है।
प्रश्न :- एलनीनो (El Niño) क्या है ?
उत्तर :- एलनीनो :- एलनीनो एक गर्म महासागरीय धारा है, जो प्रशांत महासागर में उत्पन्न होती है।
एलनीनो की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह दक्षिण अमेरिका के पेरु तट के पास विकसित होती है।
2. यह वहाँ की ठंडी पेरु (हम्बोल्ट) शीतधारा को अस्थायी रूप से कमजोर या विस्थापित कर देती है।
3. इसके कारण समुद्र के जल का तापमान बढ़ जाता है।
4. यह विश्व के अनेक भागों की जलवायु को प्रभावित करती है।
उदाहरण :-
एलनीनो की स्थिति बनने पर भारत में कभी-कभी मानसूनी वर्षा कम हो सकती है।
प्रश्न :- भारत में मानसून का आगमन और वापसी कैसे होती है ?
उत्तर :- भारत में मानसून का आगमन और वापसी को निम्नलिखित तरीके से समझा जा सकता है।
1. मानसून का आगमन (Onset of Monsoon) :-
1. मानसून का समय सामान्यतः जून के प्रारम्भ से मध्य सितम्बर तक रहता है (लगभग 100–120 दिन)। इसके आगमन से वर्षा अचानक बढ़ जाती है, जिसे मानसून प्रस्फोट कहा जाता है।
2. जून के पहले सप्ताह में मानसून भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर से प्रवेश करता है। इसके बाद यह दो शाखाओं में बँट जाता है :-
(i) अरब सागर शाखा
(ii) बंगाल की खाड़ी शाखा
3. अरब सागर शाखा लगभग 10 जून तक मुंबई पहुँचती है।
4. बंगाल की खाड़ी शाखा जून के पहले सप्ताह में असम पहुँच जाती है। ऊँचे पर्वतों के कारण यह शाखा गंगा के मैदान की ओर मुड़ जाती है।
5. मध्य जून तक अरब सागर शाखा सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य भारत में पहुँच जाती है। दोनों शाखाएँ गंगा के मैदान के उत्तर-पश्चिम भाग में मिलती हैं।
6. जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून दिल्ली पहुँच जाता है।
7. जुलाई के प्रथम सप्ताह तक यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में फैल जाता है।
8. मध्य जुलाई तक मानसून हिमाचल प्रदेश और अन्य भागों तक पहुँच जाता है।
2. मानसून की वापसी (Retreat of Monsoon) :-
1. मानसून की वापसी सितम्बर में उत्तर-पश्चिमी भारत से शुरू होती है।
2. मध्य अक्टूबर तक यह उत्तरी प्रायद्वीप से पीछे हट जाता है।
3. दिसंबर के प्रारम्भ तक मानसून पूरी तरह भारत से लौट जाता है।
उदाहरण :-
केरल में मानसून जून के पहले सप्ताह में आता है, जबकि दिल्ली में यह जून के अंत तक पहुँचता है।
प्रश्न :- मानसून का फटना क्या होता है?
उत्तर :- मानसून का फटना :- जब मानसून के आगमन के समय अचानक कई दिनों तक लगातार और तेज वर्षा होती है, तो इसे मानसून का फटना कहते हैं।
मानसून के फटने की मुख्य विशेषताएँ :-
1. वर्षा अचानक और प्रचंड रूप में होती है।
2. कई दिनों तक लगातार वर्षा जारी रहती है।
3. इससे तापमान में कमी आ जाती है।
4. कभी-कभी बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
उदाहरण :-
जून के प्रारंभ में केरल और कर्नाटक में मानसून के प्रवेश के समय तेज और लगातार वर्षा होना मानसून के फटने का उदाहरण है।
प्रश्न :- मानसूनी हवाएँ क्या होती हैं?
उत्तर :- मानसूनी हवाएँ :- वर्षा ऋतु में जब हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं, तो उन्हें मानसूनी हवाएँ कहा जाता है।
मानसूनी हवाओं की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये हवाएँ वर्षा ऋतु में सक्रिय होती हैं।
2. इनका प्रवाह समुद्र से स्थल की ओर होता है।
3. ये अपने साथ अधिक नमी (आर्द्रता) लाती हैं।
4. भारत में अधिकांश वर्षा इन्हीं हवाओं से होती है।
उदाहरण :-
दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर भारत में वर्षा करती हैं।
प्रश्न :- मानसूनी हवाओं का विभाजन कैसे किया जाता है ?
उत्तर :- मानसूनी हवाओं का विभाजन :- मानसूनी हवाओं को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है :-
1. दक्षिण-पश्चिमी मानसून :-
(i) यह जून से सितम्बर तक सक्रिय रहता है।
(ii) ये हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं।
(iii) भारत में अधिकांश वर्षा इसी से होती है।
2. उत्तर-पूर्वी मानसून :-
1. यह अक्टूबर से दिसंबर तक सक्रिय रहता है।
2. ये हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं।
3. दक्षिण-पूर्वी तट (विशेषकर तमिलनाडु) में वर्षा कराती हैं।
उदाहरण :-
जून में आने वाला दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारत के अधिकांश भागों में वर्षा लाता है, जबकि उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु में वर्षा करता है।
प्रश्न :- भारत में मुख्य ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर :- भारत की मुख्य ऋतुएँ :- भारत में सामान्यतः चार प्रमुख ऋतुएँ पाई जाती हैं।
1. शीत ऋतु :- अवधि :- मध्य नवम्बर से फरवरी तक। इस समय तापमान कम रहता है।
2. ग्रीष्म ऋतु :- अवधि :- मार्च से मई तक। इस समय तापमान अधिक होता है।
3. वर्षा ऋतु :- अवधि :- जून से सितम्बर तक। इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा होती है।
4. लौटते हुए मानसून की ऋतु :- अवधि :- अक्टूबर से नवम्बर तक। इस समय मानसून धीरे-धीरे देश से वापस लौटता है।
उदाहरण :-
जून में वर्षा ऋतु प्रारंभ होती है, जबकि जनवरी में शीत ऋतु का प्रभाव अधिक रहता है।
प्रश्न :- शीत ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर :- शीत ऋतु :- शीत ऋतु भारत में मध्य नवम्बर से फरवरी तक रहती है।
शीत ऋतु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. दिसंबर और जनवरी उत्तरी भारत के सबसे ठंडे महीने होते हैं।
2. दक्षिण भारत में औसत तापमान लगभग 24°C रहता है।
3. उत्तर भारत में तापमान लगभग 10°C से 15°C के बीच रहता है।
4. इस ऋतु में अधिकतर स्थानों पर शुष्क मौसम और साफ आकाश रहता है।
5. तापमान और आर्द्रता दोनों कम हो जाते हैं।
6. शीतकालीन वर्षा बहुत कम होती है, परंतु यह रबी की फसलों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
7. प्रायद्वीपीय भारत में समुद्री प्रभाव के कारण शीत ऋतु स्पष्ट रूप से महसूस नहीं होती।
उदाहरण :-
पंजाब और हरियाणा में सर्दियों की हल्की वर्षा गेहूँ की फसल के लिए लाभदायक होती है।
प्रश्न :- ग्रीष्म ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर :- ग्रीष्म ऋतु :- भारत में ग्रीष्म ऋतु मार्च से मई तक रहती है।
ग्रीष्म ऋतु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. मार्च में दक्कन के पठार का तापमान लगभग 38°C तक पहुँच जाता है।
2. अप्रैल में मध्य प्रदेश और गुजरात का तापमान लगभग 42°C तक हो सकता है।
3. मई में उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे राजस्थान) का तापमान लगभग 45°C तक पहुँच जाता है।
4. प्रायद्वीपीय भारत में समुद्री प्रभाव के कारण तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।
5. उत्तरी भारत में तापमान बढ़ने से वायुदाब कम हो जाता है।
उदाहरण :-
मई के महीने में राजस्थान में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जबकि मुंबई में समुद्र के प्रभाव से तापमान कुछ कम रहता है।
प्रश्न :- ‘लू’ क्या होती है?
उत्तर :- लू :- लू अत्यंत गर्म, शुष्क और धूलभरी पवनें होती हैं, जो ग्रीष्म ऋतु में चलती हैं।
लू की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये पवनें मुख्यतः मई और जून के महीनों में चलती हैं।
2. ये दिन के समय अधिक प्रभावी होती हैं।
3. ये भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में चलती हैं।
4. इनका प्रभाव स्वास्थ्य पर हानिकारक हो सकता है।
उदाहरण :-
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मई-जून के दौरान चलने वाली तेज गर्म हवाएँ ‘लू’ कहलाती हैं।
प्रश्न :- वर्षा ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर :- वर्षा ऋतु :- भारत में वर्षा ऋतु सामान्यतः जून से सितम्बर तक रहती है।
वर्षा ऋतु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. जून के प्रारम्भ में उत्तरी भारत में निम्न दाब की स्थिति तीव्र हो जाती है। यह स्थिति दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित करती है। ये पवनें गर्म महासागरों के ऊपर से होकर गुजरती हैं, इसलिए अपने साथ अधिक नमी लाती हैं।
2. इस ऋतु में पवनें तेज गति से चलती हैं और व्यापक वर्षा कराती हैं। देश के उत्तर-पूर्वी भागों में सबसे अधिक वर्षा होती है। मेघालय के खासी पहाड़ियों के दक्षिण में स्थित मासिनराम में विश्व की सर्वाधिक औसत वर्षा होती है।
3. राजस्थान और गुजरात के कुछ भागों में बहुत कम वर्षा होती है।
4. मानसून में मानसून का विराम भी देखा जाता है, जिसमें वर्षा और शुष्क अवधि बारी-बारी से आती है।
5. जब मानसून का गर्त मैदानों के ऊपर होता है, तब अच्छी वर्षा होती है।
6. जब गर्त हिमालय की ओर खिसकता है, तब मैदानों में शुष्क स्थिति और पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है। अत्यधिक वर्षा से कभी-कभी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
7. मानसून का आगमन और वापसी अनियमित होने से किसानों के कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
उदाहरण :-
मेघालय के मासिनराम में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान के पश्चिमी भाग में कम वर्षा के कारण शुष्क स्थिति रहती है।
प्रश्न :- मानसून की वापसी की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर :- मानसून की वापसी :- मानसून की वापसी सामान्यतः अक्टूबर–नवम्बर के दौरान होती है।
मानसून की वापसी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. सूर्य की दक्षिण की ओर आभासी गति के कारण मानसून गर्त (निम्न दाब क्षेत्र) उत्तरी मैदानों में कमजोर हो जाता है। वहाँ धीरे-धीरे उच्च दाब का क्षेत्र बनने लगता है।
2. अक्टूबर के प्रारंभ में मानसूनी पवनें उत्तरी मैदानों से पीछे हटने लगती हैं। यह समय वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल होता है।
3. मानसून लौटने पर आसमान साफ हो जाता है। दिन का तापमान बढ़ता है, जबकि रातें ठंडी और सुहावनी हो जाती हैं।
4. अक्टूबर के अंत में उत्तरी भारत में तापमान तेजी से गिरने लगता है।
5. नवम्बर में बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती निम्न दाब उत्पन्न होते हैं। ये चक्रवात पूर्वी तट पर भारी वर्षा और कभी-कभी विनाशकारी स्थिति उत्पन्न करते हैं।
6. गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में चक्रवातों से अधिक हानि होती है। कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों तक पहुँच जाते हैं।
उदाहरण :-
अक्टूबर–नवम्बर में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में लौटते मानसून के कारण वर्षा होती है।