Class 9 geography Notes in hindI Chapter - 4
Chapter 4: जलवायु / Climate
Chapter Introduction:
इस अध्याय में आप भारत की जलवायु और उसे प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों के बारे में समझेंगे। साथ ही मानसून, ऋतु परिवर्तन, वर्षा वितरण तथा भारतीय जलवायु की विशेषताओं जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल भाषा में पढ़ेंगे।
नीचे अध्याय 4 जलवायु के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 4 : जलवायु
DETAILS | INFORMATION |
Textbook | NCERT |
Class | Class 9 |
Subject | Geography |
Chapter | Chapter 4 |
Chapter Name | जलवायु |
Medium | Hindi |
क्या आप Class 9 Geography Chapter 4 Notes in Hindi ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको जलवायु अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप भारत की जलवायु, मानसून प्रणाली, ऋतुओं तथा जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में विस्तार से समझेंगे।
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
4.1 जलवायवी नियंत्रण क्या है?
4.2 भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
4.2.1 अक्षांश भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करता है?
4.2.2 ऊँचाई का जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है?
4.2.3 वायु दाब एवं पवन भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करते हैं?
4.3 भारतीय मानसून क्या है?
4.4 मानसून का आगमन एवं वापसी कैसे होती है?
4.5 भारत में ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं?
4.5.1 शीत ऋतु की विशेषताएँ क्या हैं?
4.5.2 ग्रीष्म ऋतु की विशेषताएँ क्या हैं?
4.5.3 वर्षा ऋतु या मानसून का आगमन कैसे होता है?
4.5.4 मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) क्या है?
Chapter Summary
इस अध्याय में आप भारत की जलवायु तथा उसकी प्रमुख विशेषताओं के बारे में समझेंगे। आप जानेंगे कि भारत की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जो देश के कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन को गहराई से प्रभावित करती है।
आप उन कारकों के बारे में पढ़ेंगे जो भारत की जलवायु को प्रभावित करते हैं। इनमें अक्षांश, ऊँचाई, वायु दाब, पवन प्रणाली तथा समुद्र से दूरी जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अध्याय में आप भारतीय मानसून की उत्पत्ति तथा उसके महत्व को समझेंगे। मानसूनी पवनें देश के अधिकांश भागों में वर्षा लाती हैं और कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं।
आप मानसून के आगमन और वापसी की प्रक्रिया के बारे में भी जानेंगे। दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में वर्षा लाता है, जबकि मानसून की वापसी के दौरान मौसम में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
अध्याय में भारत की प्रमुख ऋतुओं — शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु तथा मानसून की वापसी के मौसम — का भी अध्ययन किया गया है। प्रत्येक ऋतु की अपनी विशिष्ट जलवायवीय विशेषताएँ होती हैं।
आप भारत में वर्षा के वितरण के बारे में भी समझेंगे। देश के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा समान नहीं होती, जिसके कारण कृषि और प्राकृतिक वनस्पति में विविधता देखने को मिलती है।
अंत में आप यह जानेंगे कि भारतीय मानसून देश के विभिन्न भागों को एक साझा जलवायवीय अनुभव से जोड़ता है। इसी कारण मानसून को भारत की एकता का महत्वपूर्ण परिचायक माना जाता है।
4.1 जलवायवी नियंत्रण क्या है?
जलवायु (Climate) क्या है :-
जलवायु :- किसी विशाल क्षेत्र में लंबे समय (लगभग 30 वर्ष या उससे अधिक) तक मौसम की अवस्थाओं और उनकी विविधताओं के कुल योग को जलवायु कहते हैं।
जलवायु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह दीर्घकालीन (लंबे समय की) स्थिति को दर्शाती है।
2. इसमें तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पवन आदि का औसत स्वरूप शामिल होता है।
3. यह किसी क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों को प्रभावित करती है।
उदाहरण :-
राजस्थान की जलवायु सामान्यतः गर्म और शुष्क होती है, जबकि केरल की जलवायु आर्द्र और वर्षायुक्त होती है।
मौसम (Weather) क्या है :-
मौसम :- किसी विशेष समय में किसी क्षेत्र के वायुमंडल की अवस्था को मौसम कहते हैं।
मौसम की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह अल्पकालीन स्थिति को दर्शाता है।
2. मौसम जल्दी-जल्दी बदलता रहता है।
3. इसके प्रमुख तत्त्व हैं — तापमान, वायुमंडलीय दाब, पवन, आर्द्रता और वर्षण।
4. मौसम और जलवायु के तत्त्व समान होते हैं, परंतु दोनों में समयावधि का अंतर होता है।
उदाहरण :-
आज का दिन यदि ठंडा और वर्षायुक्त है, तो यह उस दिन का मौसम कहलाता है।
मौसम और जलवायु में अंतर स्पष्ट कीजिए :-
मौसम और जलवायु में अंतर निम्नलिखित हैं :-
आधार | मौसम | जलवायु |
समयावधि | छोटे समय की वायुमंडलीय दशा को दर्शाता है | लंबे समय की वायुमंडलीय दशा को दर्शाती है |
परिवर्तन | एक दिन में कई बार बदल सकता है | लंबे समय तक स्थिर रहती है |
अध्ययन | मौसम का अध्ययन मौसम विज्ञान कहलाता है | जलवायु का अध्ययन जलवायु विज्ञान कहलाता है |
भारत की जलवायु कैसी है :-
भारत की जलवायु :- भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु है।
भारत की जलवायु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह मुख्यतः मानसून पवनों से प्रभावित होती है।
2. एशिया में इस प्रकार की जलवायु दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी भागों में पाई जाती है।
3. सामान्य रूप से देश में जलवायु का एक समान प्रतिरूप दिखाई देता है।
4. फिर भी विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट प्रादेशिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं।
उदाहरण :-
मेघालय में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान के कुछ भागों में बहुत कम वर्षा होती है।
भारत में मौसम में कौन-कौन सी भिन्नताएँ पाई जाती हैं :-
भारत में मौसम में मुख्यतः निम्नलिखित भिन्नताएँ पाई जाती हैं :-
1. तापमान में भिन्नता :-
(i) गर्मियों में राजस्थान के कुछ भागों में तापमान लगभग 50°C तक पहुँच जाता है।
(ii) वहीं जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में तापमान लगभग 20°C रहता है।
(iii) सर्दियों में द्रास (जम्मू-कश्मीर) में तापमान बहुत कम हो जाता है।
2. वर्षा में भिन्नता :-
(i) हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा हिम (बर्फ) के रूप में होती है।
(ii) अन्य क्षेत्रों में वर्षा पानी के रूप में होती है।
(iii) मेघालय में वार्षिक वर्षा लगभग 400 सेमी तक होती है।
(iv) जबकि राजस्थान के कुछ भागों में वर्षा केवल 10 सेमी तक ही होती है।
उदाहरण :-
मेघालय अत्यधिक वर्षा वाला क्षेत्र है, जबकि राजस्थान का पश्चिमी भाग शुष्क और कम वर्षा वाला क्षेत्र है।
महाद्वीपीय अवस्था क्या है :-
महाद्वीपीय अवस्था :- जब किसी क्षेत्र में गर्मी के मौसम में बहुत अधिक गर्मी और सर्दी के मौसम में बहुत अधिक ठंड पड़ती है, तो इस स्थिति को महाद्वीपीय अवस्था कहते हैं।
महाद्वीपीय अवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. तापमान में अत्यधिक अंतर पाया जाता है।
2. समुद्र से दूर स्थित क्षेत्रों में यह अवस्था अधिक देखी जाती है।
3. गर्मियों में तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है।
4. सर्दियों में तापमान बहुत अधिक गिर जाता है।
उदाहरण :-
दिल्ली और उत्तर भारत के आंतरिक भागों में गर्मियों में तेज गर्मी और सर्दियों में कड़ाके की ठंड पड़ती है।
4.2 भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
4.2.1 अक्षांश भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करता है? 4.2.2 ऊँचाई का जलवायु पर क्या प्रभाव पड़ता है? 4.2.3 वायु दाब एवं पवन भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करते हैं?
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं :-
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं :-
1. अक्षांश (Latitude) :- किसी देश की भूमध्य रेखा से दूरी जलवायु को प्रभावित करती है। कम अक्षांश वाले क्षेत्रों में अधिक गर्मी होती है।
2. ऊँचाई (Altitude) :- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता जाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में मैदानों की तुलना में ठंड अधिक होती है।
3. समुद्र से दूरी (Distance from Sea) :- समुद्र के पास स्थित क्षेत्रों में सम (मंद) जलवायु होती है। समुद्र से दूर क्षेत्रों में विषम (अत्यधिक) जलवायु पाई जाती है।
4. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) :- गर्म धाराएँ जलवायु को सम और गर्म बनाती हैं। ठंडी धाराएँ जलवायु को ठंडा और विषम बनाती हैं।
5. वायुदाब (Air Pressure) :- किसी स्थान का वायुदाब उसके अक्षांश और ऊँचाई पर निर्भर करता है। वायुदाब में अंतर से पवनों की दिशा प्रभावित होती है।
उदाहरण :-
मुंबई समुद्र के पास होने से वहाँ की जलवायु सम रहती है, जबकि दिल्ली समुद्र से दूर होने के कारण वहाँ महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है।
जेट धारा क्या है :-
जेट धारा :- जेट धारा क्षोभमंडल (Troposphere) की ऊँचाई पर बहने वाली अत्यधिक तीव्र पश्चिमी पवनें होती हैं।
जेट धारा की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. इनकी गति लगभग 110 किमी/घंटा से 180 किमी/घंटा तक होती है।
2. ये पवनें बहुत अधिक ऊँचाई पर बहती हैं।
3. भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में शीतकालीन वर्षा लाने में सहायक होती हैं।
4. ये गर्मियों को छोड़कर प्रायः पूरे वर्ष हिमालय के दक्षिण में बहती हैं।
5. इनका विस्तार लगभग 27° से 30° उत्तर अक्षांश के बीच पाया जाता है।
उदाहरण :-
पंजाब और हरियाणा में सर्दियों की वर्षा जेट धाराओं के प्रभाव से होती है।
अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) क्या है :-
अंतः उष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र :- यह विषुवतीय अक्षांशों में फैला हुआ निम्न दाब का क्षेत्र होता है, जहाँ पवनें आकर मिलती हैं।
इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह एक गर्त (निम्न दाब क्षेत्र) के रूप में पाया जाता है।
2. यहाँ उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें आपस में मिलती हैं।
3. यह क्षेत्र विषुवत् रेखा के लगभग समानांतर स्थित होता है।
4. सूर्य की आभासी गति के साथ यह क्षेत्र उत्तर या दक्षिण की ओर खिसकता रहता है।
उदाहरण :-
गर्मी के मौसम में सूर्य के उत्तर की ओर जाने पर ITCZ भी उत्तर की ओर खिसकता है, जिससे भारत में मानसून की स्थिति प्रभावित होती है।
एलनीनो (El Niño) क्या है :-
एलनीनो :- एलनीनो एक गर्म महासागरीय धारा है, जो प्रशांत महासागर में उत्पन्न होती है।
एलनीनो की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह दक्षिण अमेरिका के पेरु तट के पास विकसित होती है।
2. यह वहाँ की ठंडी पेरु (हम्बोल्ट) शीतधारा को अस्थायी रूप से कमजोर या विस्थापित कर देती है।
3. इसके कारण समुद्र के जल का तापमान बढ़ जाता है।
4. यह विश्व के अनेक भागों की जलवायु को प्रभावित करती है।
उदाहरण :-
एलनीनो की स्थिति बनने पर भारत में कभी-कभी मानसूनी वर्षा कम हो सकती है।
4.3 भारतीय मानसून क्या है?
मानसून क्या है :-
मानसून :- ‘मानसून’ शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द ‘मौसिम’ से हुई है, जिसका अर्थ है — मौसम।
मानसून की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. यह वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु अनुसार परिवर्तन को दर्शाता है।
2. मानसून में पवनें एक ऋतु में एक दिशा से और दूसरी ऋतु में विपरीत दिशा से चलती हैं।
3. भारत की जलवायु पर मानसून का मुख्य प्रभाव पड़ता है।
4. यह देश में वर्षा का प्रमुख कारण है।
उदाहरण :-
गर्मी के मौसम में समुद्र से स्थल की ओर चलने वाली पवनें भारत में वर्षा लाती हैं, इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून कहते हैं।
4.4 मानसून का आगमन एवं वापसी कैसे होती है?
भारत में मानसून का आगमन और वापसी कैसे होती है :-
भारत में मानसून का आगमन और वापसी को निम्नलिखित तरीके से समझा जा सकता है।
1. मानसून का आगमन (Onset of Monsoon) :-
1. मानसून का समय सामान्यतः जून के प्रारम्भ से मध्य सितम्बर तक रहता है (लगभग 100–120 दिन)। इसके आगमन से वर्षा अचानक बढ़ जाती है, जिसे मानसून प्रस्फोट कहा जाता है।
2. जून के पहले सप्ताह में मानसून भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर से प्रवेश करता है। इसके बाद यह दो शाखाओं में बँट जाता है :-
(i) अरब सागर शाखा
(ii) बंगाल की खाड़ी शाखा
3. अरब सागर शाखा लगभग 10 जून तक मुंबई पहुँचती है।
4. बंगाल की खाड़ी शाखा जून के पहले सप्ताह में असम पहुँच जाती है। ऊँचे पर्वतों के कारण यह शाखा गंगा के मैदान की ओर मुड़ जाती है।
5. मध्य जून तक अरब सागर शाखा सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य भारत में पहुँच जाती है। दोनों शाखाएँ गंगा के मैदान के उत्तर-पश्चिम भाग में मिलती हैं।
6. जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून दिल्ली पहुँच जाता है।
7. जुलाई के प्रथम सप्ताह तक यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में फैल जाता है।
8. मध्य जुलाई तक मानसून हिमाचल प्रदेश और अन्य भागों तक पहुँच जाता है।
2. मानसून की वापसी (Retreat of Monsoon) :-
1. मानसून की वापसी सितम्बर में उत्तर-पश्चिमी भारत से शुरू होती है।
2. मध्य अक्टूबर तक यह उत्तरी प्रायद्वीप से पीछे हट जाता है।
3. दिसंबर के प्रारम्भ तक मानसून पूरी तरह भारत से लौट जाता है।
उदाहरण :-
केरल में मानसून जून के पहले सप्ताह में आता है, जबकि दिल्ली में यह जून के अंत तक पहुँचता है।
मानसून का फटना क्या होता है :-
मानसून का फटना :- जब मानसून के आगमन के समय अचानक कई दिनों तक लगातार और तेज वर्षा होती है, तो इसे मानसून का फटना कहते हैं।
मानसून के फटने की मुख्य विशेषताएँ :-
1. वर्षा अचानक और प्रचंड रूप में होती है।
2. कई दिनों तक लगातार वर्षा जारी रहती है।
3. इससे तापमान में कमी आ जाती है।
4. कभी-कभी बाढ़ जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
उदाहरण :-
जून के प्रारंभ में केरल और कर्नाटक में मानसून के प्रवेश के समय तेज और लगातार वर्षा होना मानसून के फटने का उदाहरण है।
मानसूनी हवाएँ क्या होती हैं :-
मानसूनी हवाएँ :- वर्षा ऋतु में जब हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं, तो उन्हें मानसूनी हवाएँ कहा जाता है।
मानसूनी हवाओं की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये हवाएँ वर्षा ऋतु में सक्रिय होती हैं।
2. इनका प्रवाह समुद्र से स्थल की ओर होता है।
3. ये अपने साथ अधिक नमी (आर्द्रता) लाती हैं।
4. भारत में अधिकांश वर्षा इन्हीं हवाओं से होती है।
उदाहरण :-
दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएँ अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर भारत में वर्षा करती हैं।
मानसूनी हवाओं का विभाजन कैसे किया जाता है :-
मानसूनी हवाओं का विभाजन :- मानसूनी हवाओं को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है :-
1. दक्षिण-पश्चिमी मानसून :-
(i) यह जून से सितम्बर तक सक्रिय रहता है।
(ii) ये हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं।
(iii) भारत में अधिकांश वर्षा इसी से होती है।
2. उत्तर-पूर्वी मानसून :-
1. यह अक्टूबर से दिसंबर तक सक्रिय रहता है।
2. ये हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं।
3. दक्षिण-पूर्वी तट (विशेषकर तमिलनाडु) में वर्षा कराती हैं।
उदाहरण :-
जून में आने वाला दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारत के अधिकांश भागों में वर्षा लाता है, जबकि उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु में वर्षा करता है।
4.5 भारत में ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं?
भारत में मुख्य ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं :-
भारत की मुख्य ऋतुएँ :- भारत में सामान्यतः चार प्रमुख ऋतुएँ पाई जाती हैं।
1. शीत ऋतु :- अवधि :- मध्य नवम्बर से फरवरी तक। इस समय तापमान कम रहता है।
2. ग्रीष्म ऋतु :- अवधि :- मार्च से मई तक। इस समय तापमान अधिक होता है।
3. वर्षा ऋतु :- अवधि :- जून से सितम्बर तक। इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा होती है।
4. लौटते हुए मानसून की ऋतु :- अवधि :- अक्टूबर से नवम्बर तक। इस समय मानसून धीरे-धीरे देश से वापस लौटता है।
उदाहरण :-
जून में वर्षा ऋतु प्रारंभ होती है, जबकि जनवरी में शीत ऋतु का प्रभाव अधिक रहता है।
4.5.1 शीत ऋतु की विशेषताएँ क्या हैं?
शीत ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं :-
शीत ऋतु :- शीत ऋतु भारत में मध्य नवम्बर से फरवरी तक रहती है।
शीत ऋतु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. दिसंबर और जनवरी उत्तरी भारत के सबसे ठंडे महीने होते हैं।
2. दक्षिण भारत में औसत तापमान लगभग 24°C रहता है।
3. उत्तर भारत में तापमान लगभग 10°C से 15°C के बीच रहता है।
4. इस ऋतु में अधिकतर स्थानों पर शुष्क मौसम और साफ आकाश रहता है।
5. तापमान और आर्द्रता दोनों कम हो जाते हैं।
6. शीतकालीन वर्षा बहुत कम होती है, परंतु यह रबी की फसलों के लिए महत्वपूर्ण होती है।
7. प्रायद्वीपीय भारत में समुद्री प्रभाव के कारण शीत ऋतु स्पष्ट रूप से महसूस नहीं होती।
उदाहरण :-
पंजाब और हरियाणा में सर्दियों की हल्की वर्षा गेहूँ की फसल के लिए लाभदायक होती है।
4.5.2 ग्रीष्म ऋतु की विशेषताएँ क्या हैं?
ग्रीष्म ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं :-
ग्रीष्म ऋतु :- भारत में ग्रीष्म ऋतु मार्च से मई तक रहती है।
ग्रीष्म ऋतु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. मार्च में दक्कन के पठार का तापमान लगभग 38°C तक पहुँच जाता है।
2. अप्रैल में मध्य प्रदेश और गुजरात का तापमान लगभग 42°C तक हो सकता है।
3. मई में उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे राजस्थान) का तापमान लगभग 45°C तक पहुँच जाता है।
4. प्रायद्वीपीय भारत में समुद्री प्रभाव के कारण तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।
5. उत्तरी भारत में तापमान बढ़ने से वायुदाब कम हो जाता है।
उदाहरण :-
मई के महीने में राजस्थान में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जबकि मुंबई में समुद्र के प्रभाव से तापमान कुछ कम रहता है।
‘लू’ क्या होती है :-
लू :- लू अत्यंत गर्म, शुष्क और धूलभरी पवनें होती हैं, जो ग्रीष्म ऋतु में चलती हैं।
लू की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. ये पवनें मुख्यतः मई और जून के महीनों में चलती हैं।
2. ये दिन के समय अधिक प्रभावी होती हैं।
3. ये भारत के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में चलती हैं।
4. इनका प्रभाव स्वास्थ्य पर हानिकारक हो सकता है।
उदाहरण :-
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मई-जून के दौरान चलने वाली तेज गर्म हवाएँ ‘लू’ कहलाती हैं।
4.5.3 वर्षा ऋतु या मानसून का आगमन कैसे होता है?
वर्षा ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं :-
वर्षा ऋतु :- भारत में वर्षा ऋतु सामान्यतः जून से सितम्बर तक रहती है।
वर्षा ऋतु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. जून के प्रारम्भ में उत्तरी भारत में निम्न दाब की स्थिति तीव्र हो जाती है। यह स्थिति दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक पवनों को आकर्षित करती है। ये पवनें गर्म महासागरों के ऊपर से होकर गुजरती हैं, इसलिए अपने साथ अधिक नमी लाती हैं।
2. इस ऋतु में पवनें तेज गति से चलती हैं और व्यापक वर्षा कराती हैं। देश के उत्तर-पूर्वी भागों में सबसे अधिक वर्षा होती है। मेघालय के खासी पहाड़ियों के दक्षिण में स्थित मासिनराम में विश्व की सर्वाधिक औसत वर्षा होती है।
3. राजस्थान और गुजरात के कुछ भागों में बहुत कम वर्षा होती है।
4. मानसून में मानसून का विराम भी देखा जाता है, जिसमें वर्षा और शुष्क अवधि बारी-बारी से आती है।
5. जब मानसून का गर्त मैदानों के ऊपर होता है, तब अच्छी वर्षा होती है।
6. जब गर्त हिमालय की ओर खिसकता है, तब मैदानों में शुष्क स्थिति और पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है। अत्यधिक वर्षा से कभी-कभी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
7. मानसून का आगमन और वापसी अनियमित होने से किसानों के कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
उदाहरण :-
मेघालय के मासिनराम में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि राजस्थान के पश्चिमी भाग में कम वर्षा के कारण शुष्क स्थिति रहती है।
4.5.4 मानसून की वापसी (परिवर्तनीय मौसम) क्या है?
मानसून की वापसी की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं :-
मानसून की वापसी :- मानसून की वापसी सामान्यतः अक्टूबर–नवम्बर के दौरान होती है।
मानसून की वापसी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-
1. सूर्य की दक्षिण की ओर आभासी गति के कारण मानसून गर्त (निम्न दाब क्षेत्र) उत्तरी मैदानों में कमजोर हो जाता है। वहाँ धीरे-धीरे उच्च दाब का क्षेत्र बनने लगता है।
2. अक्टूबर के प्रारंभ में मानसूनी पवनें उत्तरी मैदानों से पीछे हटने लगती हैं। यह समय वर्षा ऋतु से शीत ऋतु में परिवर्तन का काल होता है।
3. मानसून लौटने पर आसमान साफ हो जाता है। दिन का तापमान बढ़ता है, जबकि रातें ठंडी और सुहावनी हो जाती हैं।
4. अक्टूबर के अंत में उत्तरी भारत में तापमान तेजी से गिरने लगता है।
5. नवम्बर में बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती निम्न दाब उत्पन्न होते हैं। ये चक्रवात पूर्वी तट पर भारी वर्षा और कभी-कभी विनाशकारी स्थिति उत्पन्न करते हैं।
6. गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में चक्रवातों से अधिक हानि होती है। कभी-कभी ये चक्रवात उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों तक पहुँच जाते हैं।
उदाहरण :-
अक्टूबर–नवम्बर में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में लौटते मानसून के कारण वर्षा होती है।