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CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI CHAPTER - 5

प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife)

TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectGeography
ChapterChapter 5
Chapter Nameप्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी
MediumHindi

5.1 प्राकृतिक वनस्पति को प्रभावित करने वाले कारक

प्राकृतिक वनस्पति:-

वनस्पति का वह भाग जो मनुष्य की सहायता के बिना स्वयं उगता है और जिस पर लंबे समय तक मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता, उसे प्राकृतिक (अक्षत) वनस्पति कहते हैं।

  1. यह अपने आप प्राकृतिक रूप से विकसित होती है।
  2. इसमें मनुष्य द्वारा बोआई या देखभाल नहीं की जाती।
  3. यह किसी क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार पनपती है।
  4. लंबे समय तक उस पर मानव हस्तक्षेप नहीं होता।
उदाहरण:- हिमालय के घने वन और अंडमान-निकोबार के जंगल प्राकृतिक वनस्पति के उदाहरण हैं।

देशज वनस्पति:-

वह वनस्पति जो किसी क्षेत्र में मूल रूप से उत्पन्न हुई हो और वहीं स्वाभाविक रूप से पाई जाती हो, उसे देशज वनस्पति कहते हैं।

  1. यह किसी देश या क्षेत्र की मूल वनस्पति होती है।
  2. यह वहाँ की जलवायु और मिट्टी के अनुसार विकसित होती है।
  3. इसे बाहर से लाकर नहीं लगाया जाता।
  4. यह प्राकृतिक रूप से लंबे समय से उस क्षेत्र में पाई जाती है।
उदाहरण:- साल और सागौन के वृक्ष भारत की देशज वनस्पति के उदाहरण हैं।

विदेशज वनस्पति:-

जो पौधे किसी देश में बाहर से लाए गए हों और वहाँ स्वाभाविक रूप से उत्पन्न न हुए हों, उन्हें विदेशज वनस्पति कहते हैं।

  1. ये पौधे उस देश के मूल निवासी नहीं होते।
  2. इन्हें दूसरे देशों से लाकर लगाया जाता है।
  3. ये नई जलवायु में अनुकूल होकर विकसित हो जाते हैं।
  4. कभी-कभी ये स्थानीय वनस्पति को प्रभावित भी कर सकते हैं।
उदाहरण:- यूकेलिप्टस और चीड़ के कुछ प्रकार भारत में बाहर से लाए गए पौधों के उदाहरण हैं।

बायोम:-

भूतल पर स्थित एक बहुत बड़ा पारितंत्र (Ecosystem), जिसमें विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं, उसे बायोम कहते हैं।

  1. यह बहुत बड़े क्षेत्र में फैला होता है।
  2. इसमें विशेष प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
  3. इसमें एक जैसी वनस्पतियाँ और उनसे जुड़े जीव-जंतु होते हैं।
  4. प्रत्येक बायोम की अपनी अलग पहचान होती है।
उदाहरण:- रेगिस्तान, घासभूमि और वर्षावन विभिन्न प्रकार के बायोम के उदाहरण हैं।

वनस्पति तथा वन्य प्राणियों में विविधता के कारण

वनस्पति व वन्य प्राणी विविधता के कारक:-

वनस्पति और वन्य प्राणियों में विविधता विभिन्न प्राकृतिक कारकों के कारण पाई जाती है।

  1. भूभाग (Relief):- भूमि का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। उपजाऊ भूमि पर कृषि की जाती है, जबकि ऊबड़-खाबड़ भूमि पर जंगल और घास के मैदान पाए जाते हैं जहाँ वन्य प्राणी अधिक संख्या में रहते हैं।
  2. मृदा (Soil):- अलग-अलग स्थानों पर अलग प्रकार की मिट्टी पाई जाती है और प्रत्येक मिट्टी विशेष प्रकार की वनस्पति को बढ़ावा देती है।
  3. तापमान (Temperature):- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है, जिससे वनस्पति उष्णकटिबंधीय से उपोष्ण, शीतोष्ण और अल्पाइन प्रकार में बदल जाती है।
  4. सूर्य का प्रकाश (Sunlight):- अधिक समय तक प्रकाश मिलने से पौधों की वृद्धि तेज होती है।
  5. वर्षण (Rainfall):- अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में घने वन पाए जाते हैं, जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्र में झाड़ियाँ और घास अधिक फलती-फूलती हैं।
उदाहरण:- मरुस्थल की बलुई मिट्टी में कंटीली झाड़ियाँ उगती हैं और नदियों के डेल्टा क्षेत्र में पर्णपाती वन पाए जाते हैं। मेघालय जैसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में घने वन पाए जाते हैं, जबकि राजस्थान के मरुस्थल में कंटीली झाड़ियाँ फलती हैं।

5.2 उष्ण कटिबंधीय वर्षावन

उष्ण कटिबंधीय वर्षावन:-

वे वन जो भूमध्य रेखा के दोनों ओर लगभग 5° उत्तर और 5° दक्षिण अक्षांश के बीच पाए जाते हैं, उन्हें उष्ण कटिबंधीय वर्षावन कहते हैं।

  1. ये क्षेत्र वर्ष भर अधिक तापमान वाले होते हैं और यहाँ अत्यधिक वर्षा होती है।
  2. वन बहुत घने और सदाबहार होते हैं।
  3. वृक्षों की ऊँचाई अधिक होती है और अनेक प्रकार की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  4. यहाँ जैव विविधता बहुत अधिक होती है।
उदाहरण:- अमेज़न बेसिन और कांगो बेसिन में उष्ण कटिबंधीय वर्षावन पाए जाते हैं।

वनों के लाभ

वनों के लाभ:-

  1. वर्षा लाने में सहायक — वाष्पोत्सर्जन द्वारा वातावरण में नमी बढ़ाते हैं।
  2. ऑक्सीजन की आपूर्ति — वृक्ष प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  3. जैविक खाद की प्राप्ति — पत्तियों के सड़ने से जैविक खाद बनती है।
  4. बाढ़ तथा भू-कटाव की रोकथाम — पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधे रखती हैं।
  5. वन्य प्राणियों का आश्रय स्थल — अनेक जीव-जंतु वनों में निवास करते हैं।
  6. जलवायु को संतुलित रखना — तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित करते हैं।
  7. खाद्य पदार्थों की प्राप्ति — फल, मेवे, शहद आदि प्राप्त होते हैं।
  8. ईंधन और उद्योगों के लिए सहायक — लकड़ी ईंधन तथा कागज़, फर्नीचर उद्योगों में काम आती है।
  9. औषधियों की प्राप्ति — अनेक औषधीय पौधे वनों में पाए जाते हैं।
उदाहरण:- नीम और तुलसी जैसे पौधे औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं, जबकि सागौन की लकड़ी फर्नीचर बनाने में काम आती है।

भारत की जैव विविधता की मुख्य विशेषताएँ

भारत की प्राकृतिक वनस्पति व जैव विविधता:-

भारत जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के प्रमुख देशों में से एक है।

  1. भारत विश्व के 12 प्रमुख जैव विविधता वाले देशों में शामिल है।
  2. यहाँ लगभग 47,000 प्रजातियों के पौधे पाए जाते हैं।
  3. पौधों की विविधता के आधार पर भारत विश्व में दसवें स्थान पर तथा एशिया में चौथे स्थान पर है।
  4. भारत में लगभग 15,000 फूलों वाले पौधे पाए जाते हैं, जो विश्व के कुल फूलों वाले पौधों का लगभग 6% हैं।
  5. यहाँ बिना फूलों वाले पौधे जैसे फर्न, शैवाल (एल्गी) और कवक (फंजाई) भी मिलते हैं।
  6. भारत में लगभग 90,000 प्रजातियों के जीव-जंतु पाए जाते हैं।
उदाहरण:- हिमालय क्षेत्र में देवदार और चीड़ के वृक्ष मिलते हैं, जबकि पश्चिमी घाट में अनेक दुर्लभ पौधों और जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

भारत की प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार

भारत की प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार:-

भारत की प्राकृतिक वनस्पति को मुख्यतः निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा गया है:

  1. उष्ण कटिबंधीय वर्षावन (सदाबहार वन)
  2. उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन (मानसूनी वन)
  3. कंटीले वन या झाड़ियाँ
  4. पर्वतीय वन
  5. मैंग्रोव वन
उदाहरण:- राजस्थान में कंटीले वन मिलते हैं, जबकि सुंदरवन क्षेत्र में मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।

उष्ण कटिबंधीय वर्षावन (सदाबहार वन) की विशेषताएँ

उष्ण कटिबंधीय वर्षावन (सदाबहार वन):-

ये वन अधिक वर्षा और गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं।

  1. वितरण क्षेत्र:- पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, लक्षद्वीप द्वीपसमूह, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम का ऊपरी भाग, तमिलनाडु का तटीय क्षेत्र।
  2. जलवायु:- जहाँ 200 सेमी से अधिक वर्षा होती है, वर्ष भर गर्म व आर्द्र जलवायु रहती है तथा शुष्क ऋतु बहुत कम समय के लिए होती है।
  3. वनस्पति:- वृक्षों की ऊँचाई लगभग 60 मीटर या उससे अधिक होती है। पेड़, झाड़ियाँ और लताएँ अधिक मात्रा में पाई जाती हैं तथा ये वन वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं।
  4. प्रमुख वृक्ष:- आबनूस, महोगनी, रोज़वुड, रबड़ और सिनकोना।
  5. प्रमुख वन्य जीव:- हाथी, बंदर और लंगूर, एक सींग वाला गैंडा, लीमर, हिरण।
उदाहरण:- पश्चिमी घाट और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में सदाबहार वन पाए जाते हैं, जहाँ वर्ष भर हरियाली बनी रहती है।

5.3 उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन

उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन (मानसूनी वन):-

ये भारत में सबसे अधिक क्षेत्र में फैले वन हैं जो 70 से 200 सेमी तक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ग्रीष्म ऋतु में पेड़ लगभग 6–8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।

इसके दो प्रकार हैं — आर्द्र पर्णपाती वन और शुष्क पर्णपाती वन।

आर्द्र पर्णपाती वन

आर्द्र पर्णपाती वन:-

100 से 200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं।

  1. वितरण क्षेत्र:- उत्तर-पूर्वी राज्य, हिमालय के तराई क्षेत्र, झारखंड, पश्चिमी ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी घाट की पूर्वी ढाल।
  2. प्रमुख वृक्ष:- सागौन (सबसे महत्वपूर्ण), बांस, शीशम, चंदन, कुसुम, अर्जुन, शहतूत।

शुष्क पर्णपाती वन

शुष्क पर्णपाती वन:-

70 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं।

  1. वितरण क्षेत्र:- उत्तर प्रदेश, बिहार तथा प्रायद्वीपीय पठार के कुछ भाग।
  2. प्रमुख वृक्ष:- सागौन, पीपल, नीम।
  3. प्रमुख जीव:- शेर, सूअर, हिरण, हाथी, साँप, कछुए।
उदाहरण:- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सागौन के वन उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वनों के उदाहरण हैं।

5.4 कंटीले वन तथा झाड़ियाँ

कंटीले वन या झाड़ियाँ:-

ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 70 सेमी से कम वर्षा होती है।

  1. कम वर्षा और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं और देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में अधिक मिलते हैं।
  2. प्रमुख क्षेत्र:- गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के कुछ भाग।
  3. प्रमुख पौधे:- बबूल (अकेसिया), खजूर, नागफनी।
  4. वृक्ष बिखरे हुए होते हैं, जड़ें लंबी और दूर तक फैली होती हैं जिससे वे जल प्राप्त कर सकें, तथा पत्तियाँ छोटी होती हैं जिससे जल का कम वाष्पीकरण हो।
  5. प्रमुख वन्य जीव:- चूहे, खरगोश, लोमड़ी, भेड़िए, जंगली गधा, ऊँट तथा घोड़े।
उदाहरण:- राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में नागफनी और बबूल के कंटीले वन पाए जाते हैं।

5.5 पर्वतीय वन

पर्वतीय वन:-

पर्वतीय क्षेत्र में ऊँचाई बढ़ने और तापमान घटने के साथ वनस्पति में परिवर्तन होता है।

  1. 1000–2000 मीटर:- आर्द्र शीतोष्ण कटिबंधीय वन, चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष जैसे ओक और चेस्टनट।
  2. 1500–3000 मीटर:- शंकुधारी वन — चीड़, देवदार और सिल्वर फर, जो हिमालय की दक्षिणी ढाल तथा दक्षिण व उत्तर-पूर्व भारत के ऊँचे भागों में मिलते हैं।
  3. 3600 मीटर से अधिक:- अल्पाइन वनस्पति — सिल्वर फर, जुनिपर, पाइन, बर्च। हिमरेखा के पास वृक्ष छोटे होकर झाड़ियों में बदल जाते हैं और आगे अल्पाइन घास के मैदान मिलते हैं।
नोट:- गुज्जर और बक्करवाल जनजातियाँ इन घास के मैदानों का उपयोग पशु-चारण के लिए करती हैं।

प्रमुख वन्य जीव:- कश्मीरी हिरण, तिब्बती हिरण, जंगली भेड़, खरगोश, तिब्बती बारहसिंघा, हिम तेंदुआ, रीछ, लाल पांडा तथा जंगली बकरी।

उदाहरण:- हिमालय क्षेत्र में ऊँचाई के अनुसार चीड़ और देवदार से लेकर अल्पाइन घास के मैदान तक विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है।

5.6 मैंग्रोव वन

मैंग्रोव वन:-

मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्र में पाई जाने वाली विशेष प्रकार की वनस्पति है, जहाँ ज्वार-भाटा आता है।

  1. ये वन समुद्र तट और नदी के डेल्टा क्षेत्र में पाए जाते हैं।
  2. इन पौधों की जड़ें पानी में डूबी रहती हैं।
  3. मिट्टी और बालू तटों पर जमा हो जाती है, जिससे यह वनस्पति विकसित होती है।
  4. खारे पानी में भी उगने की क्षमता होती है।

प्रमुख क्षेत्र:- गंगा डेल्टा, ब्रह्मपुत्र डेल्टा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टा क्षेत्र।

प्रमुख वृक्ष:- सुंदरी (गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में), नारियल, ताड़ तथा केवड़ा।

प्रमुख वन्य जीव:- रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ, कछुए, घड़ियाल तथा साँप।

उदाहरण:- सुंदरवन क्षेत्र में मैंग्रोव वन पाए जाते हैं, जहाँ सुंदरी वृक्ष और रॉयल बंगाल टाइगर प्रसिद्ध हैं।

5.7 भारत के वन्य प्राणी

भारत में वन्य प्राणियों की विविधता:-

भारत वन्य प्राणियों की विविधता के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।

  1. भारत में लगभग 90,000 प्रजातियों के जानवर पाए जाते हैं।
  2. यहाँ ताजे पानी और समुद्री जल दोनों में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ मिलती हैं।
  3. देश में 2000 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  4. लगभग 2,546 प्रजातियों की मछलियाँ भारत में उपलब्ध हैं।
उदाहरण:- भारत में मोर, बाघ, हाथी जैसे वन्य प्राणी तथा गंगा और समुद्र में अनेक प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं।

भारत में वन्यजीवों का वितरण

वन्यजीवों का वितरण:-

भारत में भिन्न जलवायु और स्थलरूपों के कारण वन्यजीव अलग-अलग क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

  1. हाथी — असम, कर्नाटक और केरल के उष्ण एवं आर्द्र वनों में पाए जाते हैं।
  2. एक सींग वाला गैंडा — पश्चिम बंगाल और असम के दलदली क्षेत्र में मिलता है।
  3. जंगली गधा और ऊँट — कच्छ का रन और थार मरुस्थल में पाए जाते हैं।
  4. शेर और बाघ — भारत विश्व का एकमात्र देश है जहाँ शेर और बाघ दोनों पाए जाते हैं। भारतीय शेर का प्राकृतिक निवास गुजरात के गिर वन में है। बाघ मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल के सुंदरवन तथा हिमालयी क्षेत्र में पाए जाते हैं।
  5. अन्य प्रमुख जीव — तेंदुआ, याक (ऊँची पहाड़ियों में), तिब्बती बारहसिंघा, नीली भेड़, जंगली भेड़, क्यांग तथा लाल पांडा।
  6. जलजीव — कछुए, मगरमच्छ और घड़ियाल नदियों, झीलों और समुद्री क्षेत्रों में पाए जाते हैं। घड़ियाल मगरमच्छ की ऐसी प्रजाति है जो विश्व में मुख्यतः भारत में पाई जाती है।
  7. पक्षी — मोर, बत्तख, तोता, मैना, सारस और कबूतर जैसे रंग-बिरंगे पक्षी भारत में पाए जाते हैं।
उदाहरण:- गुजरात के गिर वन में शेर पाए जाते हैं, जबकि असम में एक सींग वाला गैंडा प्रसिद्ध है।

वन्य प्राणियों के समक्ष संकट के कारण

वन्य प्राणियों के समक्ष संकट:-

मनुष्य द्वारा पादपों और जीवों के अत्यधिक उपयोग से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो गया है, जिससे अनेक प्रजातियाँ संकट में आ गई हैं।

  1. प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन।
  2. वनों की कटाई और आवास का नष्ट होना।
  3. पर्यावरण प्रदूषण।
  4. शिकार और अवैध व्यापार।
  5. लगभग 1300 पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हो चुकी हैं।
  6. लगभग 20 प्रजातियाँ पूर्णतः विलुप्त हो चुकी हैं।
उदाहरण:- वनों की कटाई के कारण कई जंगली जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, जिससे वे संकट में पड़ रहे हैं।

वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु सरकारी कदम

वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु भारत सरकार के कदम:-

  1. देश में 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves) स्थापित किए गए हैं। इनमें से प्रमुख हैं — सुंदरवन, नंदा देवी, मन्नार की खाड़ी, नीलगिरि, ग्रेट निकोबार, मानस, सिमलीपाल, पंचमढ़ी, अचनाकमार-अमरकंटक।
  2. सन् 1992 से पादप उद्यानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है।
  3. शेर संरक्षण, गैंडा संरक्षण और भारतीय भैंसा संरक्षण जैसी विशेष योजनाएँ चलाई गई हैं।
  4. पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अनेक कार्यक्रम लागू किए गए हैं।
  5. देश में लगभग 103 राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किए गए हैं।
  6. लगभग 535 वन्य प्राणी अभयारण्य बनाए गए हैं।
  7. अनेक चिड़ियाघर भी स्थापित किए गए हैं।
उदाहरण:- गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान शेरों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है, जबकि असम का काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान गैंडे की सुरक्षा के लिए जाना जाता है।
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