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Class 9 geography Notes in hindI Chapter - 3

Chapter 3: Drainage
Chapter Introduction: 
This chapter explains river systems in India, including Himalayan and Peninsular rivers, and their importance.

FAQ
Ques. Are map-based questions asked from rivers?
Ans. Yes, river-related map questions are common.

CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 3 : अपवाह

प्रश्न :- अपवाह (Drainage) क्या है?

उत्तर :- अपवाह :- अपवाह शब्द का प्रयोग किसी क्षेत्र में नदियों और उनकी सहायक नदियों के जाल (नदी तंत्र) की व्याख्या के लिए किया जाता है।

अपवाह की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. यह बताता है कि किसी क्षेत्र में नदियाँ किस प्रकार बहती हैं और जल को कहाँ तक ले जाती हैं
2. अपवाह से हमें उस क्षेत्र की भू-आकृति और जल प्रवाह व्यवस्था की जानकारी मिलती है।

उदाहरण :-
गंगा नदी और उसकी सहायक नदियाँ (यमुना, घाघरा, गंडक आदि) मिलकर गंगा अपवाह तंत्र बनाती हैं।

प्रश्न :- अपवाह द्रोणी (Drainage Basin) क्या है?

उत्तर :- अपवाह द्रोणी :- वह क्षेत्र होता है, जहाँ की समस्त वर्षा जल एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा प्रवाहित किया जाता है। इस क्षेत्र का सारा जल अंततः एक ही नदी तंत्र में मिल जाता है। इसे नदी द्रोणी भी कहा जाता है।

उदाहरण :-

गंगा नदी और उसकी सहायक नदियाँ जिस पूरे क्षेत्र का जल बहाकर ले जाती हैं, उसे गंगा अपवाह द्रोणी कहते हैं।

प्रश्न :- विश्व की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी कौन-सी है?

उत्तर :- विश्व की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी अमेज़न नदी की है। 

इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. यह द्रोणी दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में स्थित है।

2. अमेज़न नदी की अपवाह द्रोणी का क्षेत्रफल विश्व में सबसे अधिक है।

3. इस द्रोणी में अनेक सहायक नदियाँ शामिल हैं, जो विशाल मात्रा में जल प्रवाहित करती हैं।

नोट :- 

अमेज़न नदी और उसकी सहायक नदियाँ जिस विस्तृत क्षेत्र का जल बहाकर अटलांटिक महासागर में ले जाती हैं, वही अमेज़न अपवाह द्रोणी कहलाती है।

प्रश्न :- भारत की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी कौन-सी है ?

उत्तर :- भारत की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी गंगा नदी की है।

इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. गंगा अपवाह द्रोणी का विस्तार उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है।

2. इसमें गंगा नदी तथा उसकी अनेक सहायक नदियाँ सम्मिलित हैं।

3. यह अपवाह द्रोणी भारत की कृषि, जनसंख्या एवं आर्थिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

उदाहरण :-

यमुना, घाघरा, कोसी, सोन आदि नदियाँ मिलकर गंगा अपवाह द्रोणी का निर्माण करती हैं।

प्रश्न :- जल विभाजक क्या है?

उत्तर :- जल विभाजक :- कोई भी ऊँचा क्षेत्र, जैसे पर्वत या उच्च भूमि, जो दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को एक-दूसरे से अलग करता है, जल विभाजक कहलाता है।

जल विभाजक  की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. जल विभाजक यह निर्धारित करता है कि वर्षा का जल किस नदी तंत्र में प्रवाहित होगा।

2. इसके कारण एक ही क्षेत्र का जल अलग-अलग नदियों में बह सकता है।

3. यह अपवाह तंत्र के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उदाहरण :-

अमरकंटक पठार नर्मदा और सोन नदियों के बीच स्थित एक प्रमुख जल विभाजक है।

प्रश्न :- भारत में अपवाह तंत्र क्या है?

उत्तर :- भारत में अपवाह तंत्र :- भारत के अपवाह तंत्र का नियंत्रण मुख्यतः भौगोलिक आकृतियों के द्वारा होता है। नदियों की दिशा, प्रवाह तथा विस्तार स्थलरूप पर निर्भर करता है। इसी आधार पर भारतीय नदियों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है :- 

भारतीय नदियों के प्रमुख वर्ग निम्नलिखित है :-
1. हिमालय की नदियाँ :- हिमालय की नदियाँ हिमालय पर्वत से निकलती हैं तथा वर्षा व हिमनद दोनों से जल प्राप्त करती हैं।

2. प्रायद्वीपीय नदियाँ :- प्रायद्वीपीय नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं तथा मुख्यतः वर्षा पर निर्भर होती हैं।

उदाहरण :- 

गंगा नदी हिमालय की नदी है, जबकि गोदावरी नदी प्रायद्वीपीय नदी का उदाहरण है।

प्रश्न :- हिमालय की नदियों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर :- हिमालय की नदियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. हिमालय की अधिकतर नदियाँ बारहमासी नदियाँ होती हैं।

2. इनमें वर्ष भर जल प्रवाहित होता रहता है, क्योंकि इन्हें वर्षा के साथ-साथ हिमनदों के पिघलने से भी जल प्राप्त होता है।

3. हिमालय की दो प्रमुख नदियाँ सिंधु तथा ब्रह्मपुत्र हैं, जो इस पर्वतीय श्रृंखला के उत्तरी भाग से निकलती हैं।
4. इन नदियों ने पर्वतों को काटकर गॉर्ज (गहरी घाटियाँ) बनाई हैं।
5. हिमालय की नदियाँ अपने उद्गम से लेकर समुद्र तक लंबा मार्ग तय करती हैं।
6. ऊपरी भागों में ये नदियाँ तीव्र अपरदन करती हैं तथा अपने साथ अधिक मात्रा में सिल्ट एवं बालू का संवहन करती हैं।
7. मध्य एवं निचले भागों में ये नदियाँ विसर्प (मेअंडर), गोखुर झीलें तथा बाढ़ मैदानों में निक्षेपण आकृतियाँ बनाती हैं।
8. ये नदियाँ समुद्र के पास पहुँचकर पूर्ण विकसित डेल्टा का निर्माण करती हैं।

उदाहरण :-

गंगा नदी हिमालय की एक प्रमुख बारहमासी नदी है, जो गॉर्ज, बाढ़ मैदान और सुंदर डेल्टा का निर्माण करती है।

प्रश्न :- हिमालय की प्रमुख नदियाँ कौन-सी हैं? नदी तंत्र से क्या अभिप्राय है?

उत्तर :- हिमालय की प्रमुख नदियाँ निम्नलिखित है :- 

1.  सिंधु नदी तंत्र 

2. गंगा नदी तंत्र

3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

नदी तंत्र :- किसी एक मुख्य नदी तथा उसकी सभी सहायक नदियों के समूह को नदी तंत्र कहा जाता है। ये नदियाँ लंबी दूरी तक प्रवाहित होती हैं। इनमें अनेक बड़ी एवं महत्त्वपूर्ण सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं। 

उदाहरण :-

गंगा नदी तंत्र में यमुना, घाघरा, गंडक और कोसी जैसी प्रमुख सहायक नदियाँ शामिल हैं।

प्रश्न :- उत्तर–सिंधु नदी तंत्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- सिंधु नदी तंत्र का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है :- 

1. उद्गम स्थान : सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट होता है।

2. प्रवाह दिशा : यह नदी पश्चिम की ओर बहती हुई लद्दाख से भारत में प्रवेश करती है।

3. गार्ज का निर्माण : लद्दाख क्षेत्र में यह नदी एक सुंदर एवं दर्शनीय गार्ज का निर्माण करती है।

4. मैदानी क्षेत्र में प्रवेश : बलूचिस्तान तथा गिलगित से बहते हुए यह नदी अटक के पास पर्वतीय क्षेत्र से बाहर निकलती है।

5. सहायक नदियाँ : जास्कर, नूबरा, श्योक तथा हुंजा जैसी अनेक नदियाँ इसमें आकर मिलती हैं।

6. लंबाई : सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2,900 किलोमीटर है।

7. मुहाना : अंत में यह नदी कराची के पूर्व में अरब सागर में मिल जाती है।

उदाहरण :-

श्योक नदी, सिंधु नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जो लद्दाख क्षेत्र में इसमें मिलती है।

प्रश्न :- गंगा नदी तंत्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- गंगा नदी तंत्र  का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है :- 

1. लंबाई : गंगा नदी की लंबाई 2,500 किलोमीटर से अधिक है।

2. उद्गम : गंगा की मुख्य धारा भागीरथी गंगोत्री हिमनद से निकलती है।

3. नाम परिवर्तन : उत्तराखंड के देवप्रयाग में अलकनंदा नदी के मिलने के बाद इसे गंगा कहा जाता है।

4. मैदान में प्रवेश : हरिद्वार के पास गंगा नदी पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है।

5. सहायक नदियाँ : हिमालय से निकलने वाली कई प्रमुख नदियाँ गंगा में मिलती हैं, जैसे :- 

यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी

उदाहरण :-

यमुना नदी, गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है, जो प्रयागराज में गंगा से मिलती है।

प्रश्न :- ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है :-

1. उद्गम : ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पूर्व भाग से निकलती है।

2. लंबाई : इसकी कुल लंबाई सिंधु नदी से कुछ अधिक है, लेकिन इसका अधिकांश मार्ग भारत के बाहर स्थित है।

3. प्रवाह दिशा : यह नदी हिमालय के समानांतर पूर्व दिशा में बहती है।

4. यू (U) आकार का मोड़ : नामचा बारवा शिखर (7,757 मीटर) के पास यह अंग्रेज़ी के U अक्षर जैसा तीव्र मोड़ बनाती है।

5. भारत में प्रवेश : अरुणाचल प्रदेश में गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है, जहाँ इसे दिहांग कहा जाता है।

6. विभिन्न नाम : इसे विभिन्न स्थानों पर विभिन्न नामों से जाना जाता है :- 

तिब्बत में — सांगपो

भारत में — ब्रह्मपुत्र

बांग्लादेश में — जमुना

7. सहायक नदियाँ : दिबांग, लोहित, केनुला तथा अन्य नदियाँ असम में इससे मिलती हैं।

8. गाद की मात्रा : तिब्बत क्षेत्र शुष्क एवं शीत होने के कारण यहाँ ब्रह्मपुत्र में गाद कम पाई जाती है

उदाहरण :-
लोहित नदी, ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी है, जो असम में आकर इसमें मिलती है।

प्रश्न :- सुन्दर वन डेल्टा क्या है ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर :- सुन्दर वन डेल्टा का संक्षेप में  वर्णन निम्नलिखित है :-

1. विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा : सुन्दर वन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।

2. निर्माण : यह डेल्टा गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण से बना है।

3. नाम का कारण : इस डेल्टा का नाम यहाँ पाए जाने वाले सुंदरी वृक्ष के कारण पड़ा है।

4. स्थिति : यह डेल्टा भारत और बांग्लादेश के तटीय भागों में फैला हुआ है।

5. प्राकृतिक विशेषता : यह क्षेत्र घने मैंग्रोव वनों के लिए प्रसिद्ध है।

6. महत्त्व : यह डेल्टा जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है और प्राकृतिक आपदाओं से तटीय क्षेत्रों की रक्षा करता है।

उदाहरण :-

सुंदरी वृक्ष, जो खारे पानी में उगता है, सुन्दर वन डेल्टा की प्रमुख वनस्पति है।

प्रश्न :- प्रायद्वीपीय नदियाँ क्या हैं और उनकी विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर :- प्रायद्वीपीय नदियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. मौसमी प्रवाह: अधिकतर प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी होती हैं, क्योंकि इनका जल वर्षा पर निर्भर करता है।

2. शुष्क ऋतु में जल की कमी: शुष्क मौसम में बड़ी नदियाँ छोटी धाराओं में बदल जाती हैं।

3. लंबाई व गहराई: हिमालयी नदियों की तुलना में ये छिछली और कम लंबी होती हैं।

4. उद्गम क्षेत्र: कुछ नदियाँ केंद्रीय उच्चभूमि से निकलती हैं।

5. प्रवाह की दिशा :- अधिकांश नदियाँ पश्चिमी घाट से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। कुछ नदियाँ पश्चिम की ओर भी बहती हैं।

उदाहरण :-

गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियाँ हैं।

प्रश्न :- भारत की प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियों के नाम लिखिए।

उत्तर :- भारत की प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियाँ निम्नलिखित है :-

1. नर्मदा द्रोणी

2. पानी द्रोणी

3. गोदावरी द्रोणी

4. महानदी द्रोणी

5. कृष्णा द्रोणी

6.  कावेरी द्रोणी

प्रश्न :- नर्मदा द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- नर्मदा द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. उद्गम स्थल : नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक पहाड़ी के निकट है।

2. प्रवाह की दिशा : यह नदी पश्चिम की ओर बहती है और एक भ्रंश घाटी में बहती है।

3. दर्शनीय स्थल :- जलमार्ग में कई प्राकृतिक दर्शनीय स्थल पाए जाते हैं। जबलपुर के निकट यह नदी संगमरमर के शैल में गहरे गॉर्ज से बहती है। तीव्र ढाल पर गिरने से यहाँ धुँआधार प्रपात बनता है।

4. सहायक नदियाँ : नर्मदा की अधिकांश सहायक नदियाँ छोटी हैं और मुख्य धारा से समकोण पर मिलती हैं

5. क्षेत्रफल : नर्मदा द्रोणी मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ भागों में विस्तृत है।

प्रश्न :- तापी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- तापी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. उद्गम स्थल : तापी नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के बेतुल जिले में सतपुड़ा श्रृंखला में है।

2. प्रवाह की दिशा : यह नर्मदा की तरह पश्चिम की ओर भ्रंश घाटी में बहती है, लेकिन लंबाई कम है।

3. क्षेत्रफल : तापी द्रोणी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में फैली हुई है।

4. तटीय परिस्थितियाँ : अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच का तटीय मैदान बहुत संकीर्ण होने के कारण नदियों की लंबाई कम रहती है।

5. मुख्य नदियाँ : पश्चिम की ओर बहने वाली अन्य प्रमुख नदियाँ हैं – साबरमती, माही, भारत पुजा और पेरियार

प्रश्न :- गोदावरी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- गोदावरी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. विशेषता : गोदावरी सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है और इसका अपवाह तंत्र प्रायद्वीपीय नदियों में सबसे बड़ा है।

2. उद्गम स्थल : महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चिम घाट की ढालों से निकलती है।

3. प्रवाह और समापन : यह नदी बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
4. क्षेत्रफल : गोदावरी द्रोणी महाराष्ट्र (50%), मध्य प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में फैली हुई है।
5. लंबाई : लगभग 1,500 कि॰मी॰
6. सहायक नदियाँ : पूर्णा, वर्धा, प्रान्हिता, मांजरा, वेनगंगा और पेनगंगा। वे अंतिम तीन सहायक नदियाँ बहुत बड़ी हैं।
7. अन्य नाम : बड़े आकार और क्षेत्रफल के कारण इसे ‘दक्षिण गंगा’ भी कहा जाता है।

प्रश्न :- महानदी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- महानदी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. उद्गम स्थल : महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ की उच्चभूमि से होता है।
2. प्रवाह और समापन : यह नदी ओडिशा से बहते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।
3. लंबाई : लगभग 860 कि॰मी॰
4. अपवाह द्रोणी का क्षेत्रफल : महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में फैली हुई है।

प्रश्न :- कृष्णा द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- कृष्णा द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. उद्गम स्थल : महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट, महाबलेश्वर के निकट से निकलती है।
2. प्रवाह और समापन : कृष्णा लगभग 1,400 कि॰मी॰ बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
3. सहायक नदियाँ : तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मुसी और भीमा।
4. अपवाह द्रोणी का क्षेत्रफल : महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में फैली हुई है।

प्रश्न :- कावेरी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर :- कावेरी द्रोणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. उद्गम स्थल : कावेरी पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी श्रृंखला से निकलती है।
2. प्रवाह और समापन : तमिलनाडु में कुडलूर के दक्षिण से बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
3. लंबाई : लगभग 760 कि॰मी॰
4. सहायक नदियाँ : अमरावती, भवानी, हेमावती और काबिनि।
5. अपवाह द्रोणी का क्षेत्रफल : तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में फैली हुई है।

प्रश्न :- झील क्या होती है?

उत्तर :- झील :-  पृथ्वी की सतह के गर्त वाले भागों में जहाँ जल जमा हो जाता है, उसे झील कहते हैं। बड़े आकार वाली झीलों को समुद्र कहा जाता है।

उदाहरण :- 

केस्पियन सागर, मृत सागर, अरल सागर।

प्रश्न :-  झीलों की उपयोगिता क्या है?

उत्तर :- झीलों की उपयोगिता निम्नलिखित है :-

1. बाढ़ की रोकथाम में सहायक।
2. नदी के बहाव को सुचारु बनाना।
3. जल विद्युत उत्पादन के लिए उपयोगी।
4. जलवायु को सामान्य और नियंत्रित रखना।
5. जलीय पारितंत्र को संतुलित करना।
6. पर्यटन को बढ़ावा देना।

प्रश्न :-  भारत में किस प्रकार की झीलें पाई जाती हैं?

उत्तर :- भारत में निम्नलिखित प्रकार की झीलें पाई जाती हैं :-

1. भारत में बहुत सी झीलें हैं, जो आकार और अन्य लक्षणों में भिन्न हैं।
2. अधिकांश झीलें स्थायी होती हैं।
3. कुछ झीलें केवल वर्षा ऋतु में पानी से भरती हैं, जैसे अर्धशुष्क क्षेत्रों की अंतर्देशीय झीलें
4. कुछ झीलों का निर्माण हिमानियों और बर्फ चादर की क्रिया से हुआ है।
5. अन्य झीलें वायु, नदियों और मानवीय क्रियाकलापों के कारण बनी हैं।

प्रश्न :-  भारत में मीठे पानी की प्राकृतिक झीलें कौन-कौन सी हैं?

उत्तर :- भारत में मीठे पानी की प्राकृतिक झीलें निम्नलिखित  हैं :-

1. वुलर झील
2. डल झील
3. भीमताल
4. नैनीताल
5. लोकताक
6. बड़ापानी

प्रश्न :-  भारत में मानव निर्मित झीलें कौन-कौन सी हैं?

उत्तर :- भारत में मानव निर्मित झीलें निम्नलिखित  हैं :-

1. गोविन्द सागर
2. राणा प्रताप सागर
3. निज़ाम सागर

प्रश्न :-  नदियों का अर्थव्यवस्था में महत्त्व क्या है?

उत्तर :- नदियों का अर्थव्यवस्था में निम्नलिखित महत्त्व हैं :-

1. कृषि हेतु सिंचाई के लिए आवश्यक।
2. नौसंचालन और परिवहन के साधन के रूप में उपयोगी।
3. जलविद्युत उत्पादन में सहायक।
4. भारत जैसे कृषि प्रधान देश में आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान।

प्रश्न :-  नदी प्रदूषण क्या है और इसके कारण क्या हैं?

उत्तर :- नदी प्रदूषण :- नदी के जल की गुणवत्ता में हानि को नदी प्रदूषण कहते हैं।

नदी प्रदूषण की मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :- 

1. घरेलू, औद्योगिक तथा कृषि कार्यों में जल की बढ़ती माँग से नदी जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

2. अधिक जल निकासी के कारण नदियों का आयतन घटता जाता है।

3. उद्योगों का प्रदूषित जल और अपरिष्कृत कचरा नदियों में मिल जाता है।

4. इससे न केवल जल की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि नदी की स्वतः स्वच्छीकरण क्षमता भी कम हो जाती है।

उदाहरण :-
कई शहरों में नालों और कारखानों का गंदा पानी नदियों में मिल जाने से नदी जल प्रदूषित हो जाता है।

प्रश्न :-  नदी प्रदूषण से बचाव कैसे किया जा सकता है?

उत्तर :- नदी प्रदूषण से बचाव निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है :-

1. नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और स्वच्छ बनाने के लिए अनेक कार्य योजनाएँ लागू की गई हैं
2. औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू कचरे का नदी में सीधा प्रवाह रोकना
3. नदी के जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण
4. सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाकर स्वच्छता सुनिश्चित करना।

प्रश्न :-  राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) क्या है?

उत्तर :- राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) :- 1985 में गंगा एक्शन प्लान (GAP) के तहत देश में नदी सफाई कार्यक्रम शुरू हुआ।

1995 में राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP) के तहत अन्य नदियों को भी इसमें शामिल किया गया।

राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना का मुख्य (एनआरसीपी) उद्देश्य निम्नलिखित हैं :- 

1. नदियों के जल में प्रदूषण कम करना

2. जल की गुणवत्ता में सुधार करना।

महत्त्व :- नदियाँ देश में मुख्य जल स्रोत हैं और आर्थिक, कृषि व पारिस्थितिकी के लिए आवश्यक हैं।

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