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Class 9 geography Notes in hindI Chapter - 2

Chapter 2: भारत की भौतिक विशेषताएँ / Physical Features of India
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप भारत की विविध भौतिक संरचना और प्रमुख स्थलाकृतियों के बारे में समझेंगे। साथ ही हिमालय पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान तथा द्वीप समूहों जैसी महत्वपूर्ण भौगोलिक इकाइयों को सरल भाषा में पढ़ेंगे। 
नीचे अध्याय 2 भारत की भौतिक विशेषताएँ  के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 2 : भारत का भौतिक स्वरूप

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 9

Subject

Geography

Chapter

Chapter 2

Chapter Name

भारत की भौतिक विशेषताएँ

Medium

Hindi

क्या आप Class 9 Geography Chapter 2 Notes in Hindi ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको भारत की भौतिक विशेषताएँ अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप भारत के प्रमुख स्थलरूपों, पर्वतों, मैदानों, पठारों, मरुस्थलों, तटीय क्षेत्रों तथा द्वीप समूहों के बारे में विस्तार से समझेंगे।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
2.1 भारत का मुख्य भौगोलिक वितरण क्या है?
2.2 हिमालय पर्वत की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
2.3 उत्तरी मैदान कैसे बने हैं?
2.4 प्रायद्वीपीय पठार की विशेषताएँ क्या हैं?
2.5 भारतीय मरुस्थल की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
2.6 तटीय मैदान क्या हैं?
2.7 भारत के द्वीप समूह कौन-कौन से हैं?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप भारत की भौतिक संरचना तथा उसकी विविध स्थलाकृतियों के बारे में समझेंगे। आप जानेंगे कि भारत एक विशाल देश है जहाँ पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल, तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह जैसी अनेक भौगोलिक इकाइयाँ पाई जाती हैं।
आप हिमालय पर्वत के बारे में पढ़ेंगे, जो भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित विश्व की सबसे युवा वलित पर्वतमालाओं में से एक है। हिमालय देश की जलवायु, नदियों तथा प्राकृतिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अध्याय में आप उत्तरी मैदानों के निर्माण और उनकी विशेषताओं को समझेंगे। ये मैदान नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बने हैं और भारत के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में गिने जाते हैं।
आप प्रायद्वीपीय पठार के बारे में भी जानेंगे, जो भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग माना जाता है। यह क्षेत्र खनिज संसाधनों से समृद्ध है और देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
अध्याय में भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान तथा द्वीप समूहों का भी अध्ययन किया गया है। मरुस्थली क्षेत्र अपनी विशिष्ट जलवायु के लिए प्रसिद्ध है, जबकि तटीय मैदान और द्वीप समूह समुद्री व्यापार, मत्स्य पालन तथा पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अंत में आप समझेंगे कि भारत की भौतिक विविधता न केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती है, बल्कि कृषि, उद्योग, परिवहन तथा मानव जीवन को भी गहराई से प्रभावित करती है।

2.1 भारत का मुख्य भौगोलिक वितरण क्या है?

भारत का भौतिक स्वरूप किस प्रकार विविध है :-

भारत का भौतिक स्वरूप निम्नलिखित प्रकार से विविध है :- 

1. भूगोलवेत्ताओं के अनुसार भारत का भौतिक स्वरूप विश्व में पाई जाने वाली लगभग सभी प्रकार की भू-आकृतियों का मिश्रण है।

2. भारत में पर्वत, मैदान, मरुस्थल, पठार तथा द्वीप समूह सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं।
3. यहाँ विभिन्न प्रकार के शैल खंड मिलते हैं, जिनमें कुछ कठोर तथा कुछ मुलायम होते हैं।
4. भारत में भिन्न-भिन्न प्रकार की मृदाएँ पाई जाती हैं।
5. मृदाओं का वर्गीकरण उनके रंग और बनावट के आधार पर किया जाता है।
6. मृदा का रंग और स्वरूप इस बात पर निर्भर करता है कि उसका निर्माण किस शैल से हुआ है

उदाहरण :-
उत्तरी भारत के मैदानों में जलोढ़ मृदा पाई जाती है, जबकि दक्कन पठार में काली मृदा मिलती है।

भारत के संपूर्ण क्षेत्रफल का विभाजन किस प्रकार किया गया है :-

भारत के संपूर्ण क्षेत्रफल का विभाजन निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है :-

1. भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.7% भाग पर्वतीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
2. 18.6% क्षेत्र पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
3. भारत का 27.7% भाग पठारी क्षेत्र में शामिल है।
4. सबसे अधिक अर्थात 43% क्षेत्र मैदानी भाग का है।

उदाहरण :- 

हिमालय पर्वतीय क्षेत्र का उदाहरण है, जबकि गंगा–ब्रह्मपुत्र मैदान मैदानी भाग का प्रमुख उदाहरण है।

विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियों का निर्माण कैसे होता है :-

विभिन्न प्रकार की भू-आकृतियों का निर्माण :- पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली भौतिक आकृतियों के निर्माण के पीछे कुछ वैज्ञानिक सिद्धांत हैं। इन सिद्धांतों में सबसे प्रमुख प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत है।

प्लेट विवर्तनिक का सिद्धांत क्या है :-

प्लेट विवर्तनिक का सिद्धांत :- यह एक ऐसा वैज्ञानिक सिद्धांत है जो पृथ्वी की सतह पर बनने वाली भौतिक आकृतियों की उत्पत्ति की व्याख्या करता है।

प्लेट विवर्तनिक का सिद्धांत के विषय में मुख्य तथ्य निम्नलिखित है :- 

1. इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी (क्रस्ट) कई भागों में विभाजित है।
2. पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी मुख्य रूप से सात बड़ी प्लेटों एवं कुछ छोटी प्लेटों से बनी हुई है।
3. ये प्लेटें निरंतर धीमी गति से चलती रहती हैं।
4. प्लेटों की गति के कारण पर्वत, पठार, ज्वालामुखी और भूकंप क्षेत्र बनते हैं।

उदाहरण :- 

भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपसी टकराव से हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ।

प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें कौन-कौन सी हैं :-

प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें :- पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी कई बड़ी विवर्तनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें पृथ्वी की सतह पर निरंतर धीमी गति से गतिशील रहती हैं।

प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें निम्नलिखित हैं :- 

1. प्रशान्त महासागरीय प्लेट

2. उत्तर अमेरिकी प्लेट

3. दक्षिण अमेरिकी प्लेट

4. अफ्रीकी प्लेट

5. अंटार्कटिक प्लेट

6. यूरेशियन प्लेट

7. इंडो-आस्ट्रेलियन प्लेट

नोट :- 

इन प्लेटों की आपसी गति से पर्वत निर्माण, भूकंप एवं ज्वालामुखी गतिविधियाँ होती हैं।

उदाहरण :-
इंडो-आस्ट्रेलियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव से हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ।

भारत की भौगोलिक आकृतियों का विभाजन कैसे किया गया है :-

भारत की भौगोलिक आकृतियों का विभाजन :- भारत की भौगोलिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है। भूगोलवेत्ताओं ने भारत की भौगोलिक आकृतियों को निम्नलिखित प्रमुख वर्गों में विभाजित किया है :- 

1. हिमालय पर्वत श्रृंखला :- यह भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित है। यह देश को ठंडी हवाओं से बचाती है।

2. उत्तरी मैदान :- यह सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित है। यह क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है।

3. प्रायद्वीपीय पठार :- यह भारत का प्राचीनतम भूभाग है। खनिज संसाधनों से समृद्ध है।

4. भारतीय मरुस्थल :- इसे थार मरुस्थल भी कहते हैं। यहाँ वर्षा बहुत कम होती है।

5. तटीय मैदान :- यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के किनारे फैला है। यहाँ प्रमुख बंदरगाह स्थित हैं।

6. द्वीप समूह :- इसमें अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह शामिल हैं। ये सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

उदाहरण :-

उत्तरी मैदान भारत का प्रमुख कृषि क्षेत्र है, जहाँ गेहूँ और चावल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

2.2 हिमालय पर्वत की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

हिमालय पर्वत क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए :-

हिमालय पर्वत :- भारत को मध्य एशिया की ठंडी हवाओं से बचाता है, जिससे देश की जलवायु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

हिमालय पर्वत की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. हिमालय को नवीन वलित पर्वत कहा जाता है।

2. यह भारत की उत्तरी सीमा का निर्धारण करता है।

3. हिमालय पर्वत सिंधु नदी से लेकर ब्रह्मपुत्र नदी तक फैला हुआ है।

4. हिमालय पर्वत की कुल लंबाई लगभग 2400 किलोमीटर है।

5. इसकी चौड़ाई कश्मीर में लगभग 400 किलोमीटर, और अरुणाचल प्रदेश में लगभग 150 किलोमीटर है।

हिमालय का विभाजन किन आधारों पर किया गया है :-

हिमालय का विभाजन निम्नलिखित दो प्रमुख आधारों पर किया गया है :-

1. उत्तर–दक्षिण विभाजन :- इस आधार पर हिमालय को ऊँचाई और भौतिक बनावट के अनुसार विभाजित किया गया है।

2. पश्चिम–पूर्व विभाजन :- इस आधार पर हिमालय को भौगोलिक विस्तार के अनुसार विभाजित किया गया है।

नोट :-  

उत्तर–दक्षिण विभाजन में हिमालय को समानांतर पर्वत श्रेणियों में बाँटा गया है, जबकि पश्चिम–पूर्व विभाजन में सिंधु नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक के भागों के आधार पर विभाजन किया जाता है।

उत्तर–दक्षिण विभाजन के आधार पर हिमालय को किन भागों में बाँटा गया है :-

उत्तर–दक्षिण विभाजन में हिमालय के भाग :- ऊँचाई, भौतिक बनावट तथा संरचना के आधार पर हिमालय को तीन भागों में विभाजित किया गया है :- 

1. हिमाद्रि (महान या आन्तरिक हिमालय) :- हिमालय की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी। यहाँ सदैव हिमाच्छादित चोटियाँ पाई जाती हैं। माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा जैसी ऊँची चोटियाँ इसी भाग में हैं।

2. हिमाचल (निम्न या मध्य हिमालय) :- हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित। ऊँचाई हिमाद्रि से कम। यहाँ अनेक घाटियाँ और पर्वतीय नगर स्थित हैं।

3. शिवालिक (बाह्य हिमालय) :- हिमालय की सबसे दक्षिणी एवं सबसे नई पर्वत श्रेणी। ऊँचाई सबसे कम। यहाँ पर दून घाटियाँ पाई जाती हैं।

उदाहरण :- 

हिमाद्रि में माउंट एवरेस्ट, हिमाचल में कुल्लू–कांगड़ा घाटियाँ, तथा शिवालिक में देहरादून घाटी पाई जाती है।

पश्चिम से पूर्व के आधार पर हिमालय का विभाजन किन भागों में किया गया है :-

पश्चिम से पूर्व के आधार पर हिमालय का विभाजन :- देशांतर दिशा (पश्चिम से पूर्व) के आधार पर हिमालय को चार भागों में बाँटा गया है :- 

1. पंजाब हिमालय :- सिंधु नदी से सतलुज नदी के बीच फैला हुआ। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के भाग इसमें आते हैं।

2. कुमाऊँ हिमालय :- सतलुज नदी से काली नदी के बीच स्थित। उत्तराखण्ड का अधिकांश भाग इसी में शामिल है।

3. नेपाल हिमालय :- काली नदी से तिस्ता नदी के बीच फैला हुआ। नेपाल देश का अधिकांश क्षेत्र इसमें आता है।

4. असम हिमालय :- तिस्ता नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक विस्तृत। अरुणाचल प्रदेश एवं असम के पर्वतीय भाग इसमें आते हैं।

उदाहरण :- 

जम्मू-कश्मीर का पर्वतीय क्षेत्र पंजाब हिमालय, उत्तराखण्ड का पर्वतीय क्षेत्र कुमाऊँ हिमालय, नेपाल का पर्वतीय क्षेत्र नेपाल हिमालय, तथा अरुणाचल प्रदेश का पर्वतीय क्षेत्र असम हिमालय में शामिल है।

हिमाद्रि (महान या आन्तरिक हिमालय) क्या है ? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए :-

हिमाद्रि (महान या आन्तरिक हिमालय) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. हिमालय की सबसे उत्तरी एवं सर्वोच्च पर्वत श्रृंखला को हिमाद्रि या महान/आन्तरिक हिमालय कहते हैं।
2. यह हिमालय की सबसे अधिक सतत (लगातार फैली हुई) श्रृंखला है।

3. इसकी औसत ऊँचाई लगभग 6,000 मीटर है।

4. हिमालय के सभी प्रमुख एवं सर्वोच्च शिखर इसी श्रेणी में स्थित हैं।

5. महान हिमालय के वलय (folds) की प्रकृति असममित होती है।

6. इस भाग का क्रोड ग्रेनाइट शैल से बना हुआ है।

7. यह पर्वत श्रृंखला सदैव हिमाच्छादित रहती है।

8. इसी क्षेत्र से अनेक हिमानियाँ (ग्लेशियर) निकलती हैं।

उदाहरण :-

माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा जैसे विश्व के ऊँचे शिखर हिमाद्रि (महान हिमालय) में स्थित हैं।

हिमाचल (निम्न हिमालय या मध्य हिमालय) क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए :-

हिमाचल (निम्न हिमालय या मध्य हिमालय) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :-
1. हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित पर्वत श्रृंखला को हिमाचल या निम्न/मध्य हिमालय कहा जाता है।

2. यह हिमालय की सबसे अधिक असम (असमान बनावट वाली) श्रृंखला है।
3. इन पर्वतों का निर्माण मुख्यतः अत्यधिक संपीडित एवं परिवर्तित शैलों से हुआ है।
4. इनकी ऊँचाई 3,700 मीटर से 4,500 मीटर के बीच पाई जाती है।

5. इनकी औसत चौड़ाई लगभग 50 किलोमीटर है।

6. पीर पंजाल इस श्रेणी की सबसे लंबी एवं सबसे महत्त्वपूर्ण श्रृंखला है।

7. धौलाधर एवं महाभारत श्रेणियाँ भी इसी भाग में आती हैं।

8. इसी हिमालय में कश्मीर घाटी, कांगड़ा घाटी तथा कुल्लू घाटी स्थित हैं।

9. यह क्षेत्र अपने पहाड़ी नगरों के लिए प्रसिद्ध है। उदाहरण :- शिमला, मसूरी और नैनीताल जैसे प्रसिद्ध पहाड़ी नगर हिमाचल (निम्न हिमालय) क्षेत्र में स्थित हैं।

शिवालिक पर्वत श्रेणी क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए :-

शिवालिक पर्वत श्रेणी :- हिमालय की सबसे बाहरी पर्वत श्रृंखला को शिवालिक कहा जाता है।

शिवालिक की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. इसकी चौड़ाई 10 से 50 किलोमीटर के बीच होती है।
2. इसकी ऊँचाई लगभग 900 से 1,100 मीटर तक पाई जाती है।
3. यह श्रृंखला उत्तर में स्थित मुख्य हिमालय से नदियों द्वारा लाए गए असंपीडित अवसादों से बनी है।
4. शिवालिक की घाटियाँ बजरी एवं जलोढ़ की मोटी परतों से ढँकी रहती हैं।
5. निम्न हिमालय (हिमाचल) और शिवालिक के बीच स्थित लंबवत घाटी को दून कहा जाता है।
6. शिवालिक क्षेत्र में कई प्रसिद्ध दून घाटियाँ पाई जाती हैं।

उदाहरण :-
देहरादून, कोटलीदून और पाटलीदून शिवालिक क्षेत्र की प्रमुख दून घाटियाँ हैं।

हिमाचल (निम्न हिमालय) में पाए जाने वाले प्रमुख दर्रे कौन-कौन से हैं :-

हिमाचल में पाए जाने वाले प्रमुख दर्रे निम्नलिखित है :-

1. काराकोरम दर्रा
2. रोहतांग दर्रा
3. वुर्जिल दर्रा
4. जोजिला दर्रा
5. पीरपंजाल दर्रा
6. शिपकिला दर्रा

नोट :-  

रोहतांग दर्रा हिमाचल प्रदेश में स्थित एक महत्वपूर्ण दर्रा है, जो कुल्लू घाटी को लाहौल–स्पीति से जोड़ता है।

हिमालय का पश्चिम से पूर्व तक विभाजन कैसे किया गया है :-

हिमालय का पश्चिम से पूर्व विभाजन निम्नलिखित प्रकार से किया गया है :-

1. पंजाब हिमालय:- सतलुज और सिंधु नदियों के बीच स्थित भाग। इसे कश्मीर और हिमाचल हिमालय भी कहा जाता है।

2. कुमाऊँ हिमालय:- सतलुज और काली नदियों के बीच स्थित भाग।

3. नेपाल हिमालय :- काली और तिस्ता नदियों के बीच स्थित भाग।

4. असम हिमालय :- तिस्ता और दिहांग नदियों के बीच स्थित भाग।

नोट :-  

हिमालय का यह विभाजन नदी घाटियों की सीमाओं के आधार पर किया गया है।

2.3 उत्तरी मैदान कैसे बने हैं?

उत्तरी मैदान क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए :-

उत्तरी मैदान :- उत्तरी मैदान का निर्माण सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र तथा उनकी सहायक नदियों से हुआ है। हिमालय के गिरीपाद (पर्वत पाद) में लाखों वर्षों तक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ अवसादों के जमाव से इस मैदान का निर्माण हुआ है।

उत्तरी मैदान की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. इसका कुल विस्तार लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है।
2. इस मैदान की लंबाई लगभग 2400 किलोमीटर है।
3. इसकी चौड़ाई 240 किलोमीटर से 320 किलोमीटर के बीच पाई जाती है।
4. यह भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र है।
5. कृषि के लिए अनुकूल दशाओं के कारण यह क्षेत्र सर्वाधिक कृषि उत्पादक है।
6. इसी कारण इसे भारत का अन्न भंडार गृह कहा जाता है।

नोट :-  

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाग उत्तरी मैदान में स्थित हैं और गेहूँ–धान की अधिक उपज के लिए प्रसिद्ध हैं।

उत्तरी मैदान का विभाजन कौन-कौन से भागों में किया गया है :-

उत्तरी मैदान को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है :-

1. गंगा का मैदान :- यह मैदान घाघर से लेकर तिस्ता नदी तक फैला है। इसमें उत्तर भारत के हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के कुछ भाग और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

2. पंजाब का मैदान :- उत्तरी मैदान का पश्चिमी भाग पंजाब का मैदान कहलाता है। इसे सिंधु और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित किया गया है। इसका बहुत बड़ा भाग पाकिस्तान में स्थित है।

3. ब्रह्मपुत्र का मैदान :- ब्रह्मपुत्र का मैदान पूर्वी क्षेत्र में, विशेषकर असम में स्थित है। यह मैदान नदी के आलूब्ध अवसादों से निर्मित है।

उदाहरण :- 

गंगा का मैदान में उत्तर प्रदेश के कानपुर और लखनऊ जिले आते हैं, पंजाब का मैदान में अमृतसर और लुधियाना, ब्रह्मपुत्र का मैदान में असम के ढकुआहा और गुवाहाटी स्थित हैं। 

आकृतिक भिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदानों का विभाजन क्या है :-

आकृतिक भिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदानों का विभाजन :-  उत्तरी मैदानों को भौगोलिक आकृति और जलोढ़ निर्माण के आधार पर निम्नलिखित चार भागों में बाँटा गया है :- 

1. भावर (Bhabar) :- नदियाँ पर्वतों से उतरते समय शिवालिक की ढाल पर 8–16 किलोमीटर चौड़ी पट्टी में गुटिका का निक्षेपण करती हैं। इसे भाबर कहा जाता है। सभी नदियाँ इस पट्टी में विलुप्त हो जाती हैं।

2. तराई (Terai) :- भाबर पट्टी के दक्षिण में नदियाँ पुनः निकलती हैं। यह नम और दलदली क्षेत्र बनाता है। इस क्षेत्र को तराई कहा जाता है।

3. भांगर (Bhangar) :- उत्तरी मैदान का सबसे विशालतम भाग, जो पुराने जलोढ़ निक्षेप से बना है। यह बाढ़ वाले मैदान के ऊपर स्थित है और वेदिका जैसी आकृति प्रदर्शित करता है। इस क्षेत्र की मृदा में चूनेदार निक्षेप (कंकड़) पाए जाते हैं।

4. खादर (Khadar) :- बाढ़ वाले मैदानों के नए और युवा जलोढ़ निक्षेप को खादर कहते हैं। यह क्षेत्र हर वर्ष पुनः निर्माण होता है, इसलिए अत्यंत उपजाऊ है। गहन कृषि के लिए आदर्श माना जाता है।

उदाहरण :- 

देहरादून का भाग तराई में आता है, कानपुर का पुराना भाग भांगर पर स्थित है, वहीं गंगा के किनारे का नया उपजाऊ मैदान खादर कहलाता है।

दोआब क्या है? इसका अर्थ बताइए :-

दोआब :-  दो नदियों के बीच की भूमि। यह शब्द दो + आब से बना है, जहाँ ‘दो’ = दो नदियाँ, और ‘आब’ = पानी

उदाहरण :- 

1. पंजाब का ब्यास-चिनाब दोआब (दो नदियों के बीच का क्षेत्र)।

2. गंगा-यमुना दोआब उत्तर प्रदेश में स्थित है।

2.4 प्रायद्वीपीय पठार की विशेषताएँ क्या हैं?

प्रायद्वीपीय पठार क्या है? इसके मुख्य भाग कौन-कौन से हैं :-

प्रायद्वीपीय पठार :- प्रायद्वीपीय पठार एक मेज़ जैसी आकृति वाला स्थल है। यह पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय और रूपांतरित शैलों से बना है। इसे गोंडवाना भूमि के टूटने और अपवाह के कारण बनाया गया था।

प्रायद्वीपीय पठार के मुख्य भाग निम्नलिखित है :- 

1. मध्य उच्चभूमि (Central Highlands) :- भारत के मध्य भाग में स्थित। मुख्यतः राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों में फैला।

2. दक्कन का पठार (Deccan Plateau) :- दक्षिण भारत में स्थित। मुख्यतः महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में फैला।

उदाहरण :- 

मध्य उच्चभूमि में सतपुड़ा पर्वतमाला आती है, दक्कन पठार में महानदी और कृष्णा नदी के जलोढ़ मैदान पाए जाते हैं।

मध्य उच्चभूमि क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए :-

मध्य उच्चभूमि :- प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग है जो नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है।

मध्य उच्चभूमि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. यह अधिकांशतः मालवा के पठार पर फैला हुआ है।
2. विध्य श्रृंखला इसकी दक्षिण सीमा बनाती है।
3. सतपुड़ा श्रृंखला दक्षिण में और अरावली पर्वत उत्तर-पश्चिम में इसे घेरते हैं।
4. पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई और पथरीले मरुस्थल से मिलता है।

उदाहरण :- 

मध्य उच्चभूमि में इंदौर और उज्जैन के पठारी क्षेत्र आते हैं।

दक्षिण का पठार क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए :-

दक्षिण का पठार :- एक त्रिभुजाकार भूभाग है जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है।

दक्षिण का पठार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा श्रृंखला है।
2. इसके पूर्वी विस्तार में महादेव, कैमूर पहाड़ी और मैकाल श्रृंखला स्थित हैं।
3. यह पठार पश्चिम में ऊँचा और पूर्व की ओर कम ढाल वाला है।
4. पठार का एक भाग उत्तर-पूर्व में भी फैला है, जिसे स्थानीय रूप से मेघालय, कार्बी एंगलौंग पठार और उत्तर कचार पहाड़ी कहा जाता है।

उदाहरण :-
दक्कन पठार का पश्चिमी हिस्सा महाराष्ट्र में ऊँचा और पूर्वी हिस्सा आंध्र प्रदेश की ओर ढलान वाला है।

दक्कन ट्रैप (Deccan Trap) क्या है :-

दक्कन  ट्रैप :- प्रायद्वीपीय पठार का वह क्षेत्र है जहाँ काली मृदा (Black Soil) पाई जाती है। इसे कृषि के लिए उपजाऊ भूमि माना जाता है। यह क्षेत्र मुख्यतः महाराष्ट्र, मध्य भारत और दक्कन पठार में फैला हुआ है।

उदाहरण :-
महाराष्ट्र और मध्य भारत में कपास की खेती मुख्यतः दक्कन ट्रैप की काली मृदा में की जाती है।

2.5 भारतीय मरुस्थल की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

भारतीय मरुस्थल क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए :-

भारतीय मरुस्थल (Thar Desert) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. स्थान: अरावली पहाड़ियों के पश्चिमी किनारे पर स्थित।
2. आकार: बालू के टिब्बों से ढँका तरंगित मैदान
3. वर्षा: इस क्षेत्र में प्रति वर्ष 150 मिमी से भी कम वर्षा होती है।
4. जलवायु: शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र।
5. वनस्पति: यहाँ वनस्पति बहुत कम पाई जाती है।

उदाहरण :-

राजस्थान का थार मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल है।

डेल्टा क्या है? इसका निर्माण कैसे होता है :-

डेल्टा :- डेल्टा वह भू-आकृति है जो नदी के सागर में मिलने से पहले उसके प्रवाह में अवरोध आने पर बनती है। जब नदी का प्रवाह धीमा हो जाता है, तो यह मलबे (sediment) का निक्षेपण करने लगती है। मलबे के जमा होने से अवसाद बनता है और यह त्रिभुजाकार आकार ले लेता है। जिसे डेल्टा कहते है।

उदाहरण :- 

1. गंगा-यमुना का सुंदरबन डेल्टा भारत और बांग्लादेश में स्थित है।

2. गोदावरी और कृष्णा नदी के डेल्टा भी दक्षिण भारत में पाए जाते हैं।

2.6 तटीय मैदान क्या हैं?

तटीय मैदान क्या है? इसकी विशेषताएँ लिखिए :-

तटीय मैदान की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. स्थान: प्रायद्वीपीय पठार के किनारों पर स्थित संकीर्ण तटीय पट्टियाँ
2. पश्चिम से पूर्व तक विस्तार: अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ।
3. पश्चिमी तट: पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच स्थित संकीर्ण मैदान
4. पूर्वी तट: बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट के बीच विस्तृत और समतल मैदान।

उदाहरण :- 

मुंबई, कोच्चि पश्चिमी तट पर और विशाखापट्टनम, पुडुचेरी पूर्वी तट पर तटीय मैदान में स्थित हैं।

तटीय मैदान का विभाजन क्या है :-

तटीय मैदान का विभाजन निम्नलिखित तीन भागों में किया जाता है :-

1. उत्तरी भाग (Konkan Coast) :- मुख्यतः मुंबई और गोवा क्षेत्र।

2. मध्य भाग (Kannad Coast / Karnataka Coast) :- कर्नाटक तटीय क्षेत्र को शामिल करता है।

3. दक्षिणी भाग (Malabar Coast) :- केरल तटीय क्षेत्र को शामिल करता है।

उदाहरण :- 

1. मुंबई तट उत्तरी तट का हिस्सा है।

2. उडुपी और मंगलूरु मध्य तट (कन्नड तट) में आते हैं।

3. कोच्चि और त्रिवेंद्रम दक्षिणी तट (मालाबार) में आते हैं।

2.7 भारत के द्वीप समूह कौन-कौन से हैं?

भारत के द्वीप समूह कौन-कौन से हैं? उनके विशेषताएँ लिखिए :-

भारत के निम्नलिखित द्वीप समूह है :-

1. अरब सागर के द्वीप (लक्षद्वीप)

(i) यह समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है।
(ii) पहले इनको लकादीव, मीनकाय और एमीनदीव कहा जाता था।
(iii) 1973 में नाम बदलकर लक्षद्वीप रखा गया।
(iv) क्षेत्रफल: केवल 32 वर्ग कि.मी.
(v) प्रशासनिक मुख्यालय: कावारत्ती द्वीप
(vi) यहाँ पादप और जंतु विविधता पाई जाती है।
(vii) पिटली द्वीप में पक्षियों का अभयारण्य है और मानव निवास नहीं है।

2. बंगाल की खाड़ी के द्वीप (अंडमान और निकोबार)

(i) यह समूह अंडमान (उत्तर) और निकोबार (दक्षिण) में बाँटा गया है।
(ii) यह द्वीप समूह आकार में बड़े और बिखरे हुए हैं।
(iii) माना जाता है कि ये द्वीप निमज्जित पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर हैं।
(iv) सुरक्षा के लिए यह द्वीप समूह महत्त्वपूर्ण है।
(v) यहाँ पादप और जंतु विविधता बहुत अधिक है।
(vi) द्वीप विषुवतीय जलवायु और घने जंगलों से आच्छादित हैं।

उदाहरण :-

लक्षद्वीप में अगत्ती और मिनिकॉय द्वीप।

अंडमान और निकोबार में हैवलॉक, रिट्रीट और नीकोबार द्वीप शामिल हैं।

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