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Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 11

Chapter 11: Electricity
Chapter Introduction: 
This chapter covers electric current, potential difference, Ohm’s law, and related numerical problems. It is one of the most scoring chapters in Physics.

FAQ
Ques. Is this chapter considered scoring in exams?
Ans. Yes, with regular numerical practice, students can score high marks from this chapter.

CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 11 : विद्युत

प्रश्न :- विद्युत ऊर्जा क्या है?

उत्तर :- विद्युत ऊर्जा :- जब किसी चालक में विद्युत आवेश बहता है, तो उस प्रक्रिया में जो ऊर्जा खर्च होती है, उसे विद्युत ऊर्जा कहा जाता है।

यदि किसी चालक के दो सिरों के बीच विभवांतर (V) वोल्ट हो, तो 1 कूलॉम आवेश को एक सिरे से दूसरे सिरे तक ले जाने के लिए खर्च होने वाली ऊर्जा W = qV के रूप में व्यक्त की जाती है।

जहां q आवेश है और V विभवांतर है।

प्रश्न :- विद्युत परिपथ क्या है?

उत्तर :- विद्युत परिपथ :- वह पथ है, जिस पर विद्युत धारा निरंतर रूप से बहती है और जो पूरी तरह से बंद होता है, उसे विद्युत परिपथ कहा जाता है।

प्रश्न :- आवेश क्या है?

उत्तर :- आवेश :- आवेश परमाणु के भीतर स्थित एक बुनियादी कण होता है, जो धनात्मक अथवा

ऋणात्मक हो सकता है। समान प्रकार के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, अथवा बाहर की ओर खींचते हैं, जबकि विपरीत (असमान) आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

नोट :-  कूलॉम (C) और आवेश से संबंधित जानकारी

विवरण

मान

कूलॉम (C)

आवेश का SI मात्रक

1 कूलॉम आवेश

6 × 1018 इलेक्ट्रॉनों पर उपस्थित आवेश

1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश

1.6 × 10–19  कूलॉम (ऋणात्मक आवेश)

कुल आवेश (Q)

Q = ne

इलेक्ट्रॉनों की संख्या

e (एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश)

e = 1.6 × 10–19 कूलॉम

प्रश्न :- विद्युत धारा क्या है?

उत्तर :- विद्युत धारा :- वह दर है, जिस पर आवेश एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक प्रवाहित होता है। 

विद्युत धारा = आवेश / समय, अर्थात I = Q/t

विद्युत धारा का SI मात्रक = ऐम्पियर (A)

प्रश्न :- ऐम्पियर और विद्युत धारा में क्या संबंध है?

उत्तर :- ऐम्पियर और विद्युत धारा में क्या संबंध :- एक ऐम्पियर विद्युत धारा का अर्थ है प्रति सेकंड एक कूलॉम आवेश का प्रवाह, यानी 1A = 1C/1s

छोटे परिमाण की विद्युत धारा को मिलिऐम्पियर (1mA = 10–3A या माइक्रोऐम्पियर (1µA = 106A में व्यक्त किया जाता है।

नोट :-  

विद्युत धारा के माप

मान

1 ऐम्पियर (1A)

1 कूलॉम / 1 सेकंड (1A = 1C/1s)

1 मिलिऐम्पियर (1mA)

10–3 ऐम्पियर (1mA = 10–3A)

1 माइक्रोऐम्पियर (1µA)

10–6 ऐम्पियर (1µA = 10–6A)

प्रश्न :- विद्युत धारा का मापन कैसे करते हैं? विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों की प्रवाह की दिशा के विपरीत (opposite) क्यों मानी जाती है?

उत्तर :- विद्युत धारा का मापन :-  विद्युत धारा का मापन ऐमीटर के द्वारा किया जाता है। ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत कम होता है और इसे विद्युत परिपथ में श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा जाता है।

विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों की प्रवाह की दिशा के विपरीत (opposite) मानी जाती है। इसका कारण यह है कि जब पहली बार विद्युत की परिघटना का निरीक्षण किया गया था, उस समय इलेक्ट्रॉनों के बारे में कोई भी जानकारी मौजूद नहीं थी, इसलिए विद्युत धारा को धनात्मक आवेशों के प्रवाह के रूप में समझा गया था।

प्रश्न :- विद्युत विभव किसे कहते है?

उत्तर :- विद्युत विभव :- किसी बिंदु पर स्थित एकल धनात्मक आवेश में जो विद्युत स्थितिज ऊर्जा संग्रहित होती है, वह उस बिंदु के विद्युत विभव के बराबर होती है।

प्रश्न :- विद्युत विभवांतर किसे कहते है?

उत्तर :- विद्युत विभवांतर :- विद्युत विभवांतर वह कार्य होता है जो एक आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करने में किया जाता है।

नोट :-  V = W / Q

यहाँ पर, V विधुत विभवांतर, W कार्य और Q आवेश को दर्शाता है।

प्रश्न :- विद्युत विभवांतर 1 वोल्ट से आप क्या समझते है?

उत्तर :- विधुत विभवांतर 1 वोल्ट :- 1 वोल्ट का विभवांतर वह स्थिति होती है जब 1 कूलॉम आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने के लिए 1 जूल का कार्य किया जाता है।

नोट :- 1 वोल्ट (V) = 1 जूल (J) कार्य / 1 कूलॉम (C) आवेश

अथवा  1V = 1JC–1

प्रश्न :- वोल्टमीटर से हम क्या मापते है?

उत्तर :- वोल्टमीटर :- वोल्टमीटर वह यंत्र है, जिसका उपयोग विभवांतर (वोल्टेज) को मापने के लिए किया जाता है। इसका प्रतिरोध बहुत अधिक होता है और इसे हमेशा पार्श्वक्रम (Parallel) रूप से जोड़ा जाता है।

प्रश्न :- सेल क्या होता है और विद्युत धारा किस दिशा में प्रवाहित होती है?

उत्तर :- सेल :- यह एक सरल यंत्र है जो विभवांतर को स्थिर बनाए रखता है। विद्युत धारा हमेशा उच्च विभवांतर से निम्न विभवांतर की दिशा में बहती है।

प्रश्न :- ओम का नियम को समझाइए।

उत्तर :- ओम का नियम :- तार का तापमान स्थिर होने पर जब किसी विद्युत परिपथ में एक धातु के तार के दोनों सिरों के बीच विभवांतर (V) होता है, तो उस तार में बहने वाली विद्युत धारा (I) उस विभवांतर के समानुपाती होती है।

नोट :-

ओम का सुत्र है : – 

V ∝ R 

V =  IR

यहाँ, R वह स्थिरांक है जिसे तार का प्रतिरोध (Resistance) कहा जाता है। 

प्रश्न :- प्रतिरोध से आप क्या समझते है?

उत्तर :- प्रतिरोध :- प्रतिरोध वह गुण है जो किसी चालक में विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है।

इसका SI मात्रक ओम (Ω) होता है, जो ग्रीक अक्षर से निरूपित किया जाता है। ओम का नियम के अनुसार,

R = V/I

प्रश्न :- एक ओम को किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?

उत्तर :- 1 ओम को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है :-  जब किसी परिपथ में 1 एंपियर की धारा प्रवाहित हो और उस परिपथ के बीच विभवांतर 1 वोल्ट हो, तो उस परिपथ का प्रतिरोध 1 ओम के बराबर होता है।

 

1 ओम = 1 वोल्ट / 1 एम्पियर

 

प्रश्न :- परिवर्ती प्रतिरोध किसे कहते है?

उत्तर :- परिवर्ती प्रतिरोध :- वह यंत्र होता है, जिसका उपयोग  बिना स्रोत की वोल्टता में कोई परिवर्तन किए, विद्युत परिपथ में विद्युत धारा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न :- धारा नियंत्रक किसे कहा जाता है?

उत्तर :- धारा नियंत्रक :- वह युक्ति जिसका उपयोग परिपथ में प्रतिरोध को  नियंत्रत करने के लिए किया जाता है, उसे धारा नियंत्रक कहा जाता है।

प्रश्न :- उन तत्वों को लिखिए जिन पर एक चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है।

उत्तर :- वह तत्व जिन पर एक चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है, वे निम्नलिखित हैं :-

1. चालक की लंबाई के साथ प्रत्यक्ष रूप से संबंधित होता है अथवा समानुपाती होता है।

2. अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के विपरीत अनुपाती अथवा व्युत्क्रमानुपाती होता है।

3. तापमान में बदलाव के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा होता अथवा समानुपाती होता है।

4. इसके साथ ही, यह पदार्थ की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।

प्रश्न :- प्रतिरोधकता क्या होता है?

उत्तर :- प्रतिरोधकता :- जब 1 मीटर लंबी भुजा वाले घन के विपरीत फलकों से विद्युत धारा प्रवाहित होती है और इस प्रक्रिया में जो प्रतिरोध उत्पन्न होता है, उसे प्रतिरोधकता कहते हैं।

प्रतिरोधकता की SI इकाई ओम (Ω) है।

नोट :-

1. धातुओं और मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता लगभग 10-8 से 10-6 ओम मीटर के बीच होती है।

2. मिश्रधातुओं की प्रतिरोधक क्षमता उनकी अवयव धातुओं की प्रतिरोधक क्षमता से अधिक होती है।

3. मिश्रधातुओं का उपयोग तापन युक्तियों में किया जाता है, क्योंकि मिश्रधातुओं का दहन उच्च तापमान पर भी शीघ्र नहीं होता है।

4. तांबा और ऐलुमिनियम की प्रतिरोधकता बहुत कम होने के कारण इनके तारों का उपयोग विद्युत संचरण के लिए किया जाता है।

प्रश्न :- प्रतिरोधकता और तापमान के बीच कैसा संबंध होता है?

उत्तर :- प्रतिरोधकता :- चालक की लंबाई और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं होती, लेकिन यह तापमान के अनुसार बदलती रहती है।

प्रश्न :- श्रेणीक्रम संयोजन किसे कहते है।

उत्तर :- श्रेणीक्रम संयोजन :- जब दो या तीन प्रतिरोधकों को एक ही दिशा में जोड़कर परिपथ में शामिल किया जाता है, तो उसे श्रृंखला/श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं।

प्रश्न :- श्रेणीक्रम संयोजन में कुल प्रतिरोध कैसे ज्ञात किया जाता है और प्रत्येक प्रतिरोधक में से किस प्रकार की धारा प्रवाहित होती है?

उत्तर :- श्रेणीक्रम संयोजन में कुल प्रतिरोध निम्नलिखित तरीके से ज्ञात किया जाता है:-  

श्रेणीक्रम/श्रृंखला संयोजन में कुल प्रतिरोध: कुल प्रतिरोध RS = R₁ + R₂ + R3 

यहां, प्रतिरोधकों का योग कुल प्रतिरोध बनाता है।

श्रृंखला में प्रत्येक प्रतिरोधक में से एक बराबर धारा प्रवाहित होती है, और कुल विभवांतर, सभी प्रतिरोधकों के विभवांतर का योग होता है।

नोट :- 

जब एकल तुल्य प्रतिरोध (equivalent resistance) की बात की जाती है, तो वह सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से अधिक होता है, क्योंकि प्रतिरोधकों का कुल प्रतिरोध श्रेणी संयोजन में उनके व्यक्तिगत प्रतिरोधों का योग होता है।

प्रश्न :- पार्श्वक्रम संयोजन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर :- पार्श्वक्रम संयोजन (Parallel Combination) :-  जब तीन प्रतिरोधकों को एक साथ बिंदुओं X और Y के मध्य जोड़ा जाता है, तो इसे पार्श्वक्रम संयोजन कहते हैं।

1. पार्श्वक्रम संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर एक समान होता है और वह उपयोग किए गए विभवांतर के भी बिल्कुल बराबर होता है।

2. कुल धारा, प्रत्येक प्रतिरोधक से गुजरने वाली धाराओं का योग होती है। I = I1 + I2 + I3

3. एकल तुल्य प्रतिरोध (equivalent resistance) का व्युत्क्रम, सभी प्रतिरोधकों के व्युत्क्रमों के योग के बिल्कुल बराबर होता है।

प्रश्न :- पार्श्वक्रम और श्रेणीक्रम संयोजन में से किसमें अधिक सुरक्षित और प्रभावी संचालन होता है, और क्यों?

उत्तर :- पार्श्वक्रम और श्रेणीक्रम संयोजन में से पार्श्वक्रम संयोजन में अधिक सुरक्षित और प्रभावी संचालन होता है, जिसके निम्नलिखित कारण है :-  

1. श्रेणीक्रम संयोजन में एक अवयव खराब हो जाने पर परिपथ पूरी तरह से टूट जाता है और बाकी सभी अवयव भी काम करना बंद कर देते हैं।

2. जबकि विभिन्न अवयवों में विभिन्न धारा की आवश्यकता होती है, लेकिन यह गुण श्रेणीक्रम संयोजन में काम नहीं करता है, क्योंकि श्रेणीक्रम में सभी अवयवों में समान धारा प्रवाहित होती है।

3. पार्श्वक्रम संयोजन में कुल प्रतिरोध कम होता है, जिससे अधिक धारा प्रवाहित हो सकती है।

प्रश्न :- विधुत धारा के तापीय प्रभाव को समझाइए।

उत्तर :- विधुत धारा का तापीय प्रभाव :- जब एक विद्युत परिपथ केवल प्रतिरोधक से बना होता है, तो स्रोत की ऊर्जा पूरी तरह से ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है। इस प्रभाव को विधुत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।

ऊर्जा की गणना इस प्रकार की जाती है:

ऊर्जा = शक्ति × समय
या
H = P × t

जहां, P = शक्ति, t = समय।

नोट :- 

शक्ति (P) की गणना इस प्रकार होती है:
P = V × I

इसलिए,

H = I² × R × t

जहां, V = IR (ओम का नियम)।

H = उत्पन्न ऊष्मा ऊर्जा।

प्रश्न :- जूल का विद्युत धारा का तापन नियम क्या है?

उत्तर :- जूल का विद्युत धारा का तापन नियम :-

1. किसी चालक/प्रतिरोधक में विद्युत् धारा के बहने से उत्पन्न होने वाली ऊष्मा, विद्युत धारा के वर्ग के बिल्कुल समानुपाती होती है।

2. यह ऊष्मा चालक के प्रतिरोध के समानुपाती होती है।

3. यह विद्युत धारा के प्रवाह के समय के समानुपाती होती है।

4. इस प्रभाव का उपयोग हीटर, प्रेस आदि में फायदेमंद(वांछनीय) होता है, लेकिन यह कम्प्यूटर, मोबाइल जैसी तकनीकी डिवाइस में फायदेमंद नहीं (अवांछनीय) होता है।

प्रश्न :- विद्युत बल्ब का तंतु टंगस्टन (Tungsten) से क्यों बना होता है?

उत्तर :- विद्युत बल्ब का तंतु टंगस्टन (Tungsten) से बना होता है क्योंकि :-

1. इसका गलनांक अत्यधिक (3380°C) होता है, जिससे यह उच्च तापमान पर भी नुकसान नहीं पहुंचाता है और उच्च तापमान पर उपचयित भी नहीं होता है।

2. टंगस्टन के अलावा, बल्बों में रासायनिक दृष्टि से निष्क्रिय नाइट्रोजन और आर्गन गैस भरी होती है, जिससे तंतु की जीवनकाल (lifespan) बढ़ जाती है।

नोट :- 

विद्युत बल्ब में मुख्य रूप से ऊर्जा ऊष्मा के रूप में व्यर्थ हो जाती है, जबकि कुछ ऊर्जा प्रकाश के रूप में निकलती है।

प्रश्न :- विद्युत शक्ति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर :- विद्युत शक्ति :- शक्ति वह दर है जिस पर कोई कार्य किया जाता है। इसे ऊर्जा के उपभोग की दर भी कहा जाता है। अर्थात किसी विद्युत परिपथ में ऊर्जा के उपभोग या क्षय की दर को विद्युत शक्ति कहा जाता है।

विद्युत शक्ति से संबंधित अन्य प्रमुख जानकारी निम्नलिखित है:- 

विवरण

मान

विद्युत शक्ति (P)

P = V × I

वोल्टेज (V)

वोल्ट (Volt)

धारा (I)

ऐम्पियर (Ampere)

शक्ति का SI मात्रक

वाट (Watt)

1 वाट

1 वोल्ट × 1 ऐम्पियर

ऊर्जा का व्यावहारिक मात्रक

किलोवाट-घंटा (kWh)

1 kWh

3.6 × 10⁶ जूल (J)

1 kWh =

विद्युत ऊर्जा की एक यूनिट

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