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Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 7

Chapter 7: गति / Motion
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप वस्तुओं की गति तथा उससे संबंधित महत्वपूर्ण भौतिक राशियों के बारे में समझेंगे। साथ ही चाल, वेग, त्वरण, दूरी-समय ग्राफ, वेग-समय ग्राफ तथा गति के समीकरणों को सरल भाषा में पढ़ेंगे। 
नीचे अध्याय 7 गति  के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। 

CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 7 : गति

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 9

Subject

Science

Chapter

Chapter 7

Chapter Name

गति

Medium

Hindi

क्या आप Class 9 Science Chapter 7 Notes in Hindi  ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको गति अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप गति, चाल, वेग, त्वरण, गति के ग्राफ तथा गति के समीकरणों जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं के बारे में विस्तार से समझेंगे।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
7.1 गति का वर्णन कैसे किया जाता है?
7.1.1 सरल रेखीय गति क्या है?
7.1.2 एकसमान गति और असमान गति क्या हैं?
7.2 गति की दर का मापन कैसे किया जाता है?
7.2.1 दिशा के साथ चाल को क्या कहते हैं?
7.3 वेग में परिवर्तन की दर क्या है?
7.5 गति के समीकरण क्या हैं?
7.6 एकसमान वृत्तीय गति क्या है?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप गति की अवधारणा तथा उससे संबंधित महत्वपूर्ण भौतिक राशियों के बारे में समझेंगे। आप जानेंगे कि किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाला परिवर्तन गति कहलाता है, जिसे दूरी या विस्थापन के आधार पर व्यक्त किया जा सकता है।
आप एकसमान एवं असमान गति के बारे में भी पढ़ेंगे। जब कोई वस्तु समान समयांतराल में समान दूरी तय करती है, तो उसकी गति एकसमान कहलाती है, जबकि बदलती हुई गति को असमान गति कहा जाता है।
इस अध्याय में आप चाल और वेग के बीच अंतर को समझेंगे। चाल किसी वस्तु द्वारा प्रति इकाई समय में तय की गई दूरी को दर्शाती है, जबकि वेग किसी वस्तु के विस्थापन तथा उसकी दिशा को भी व्यक्त करता है।
आप त्वरण के बारे में भी जानेंगे, जो किसी वस्तु के वेग में प्रति इकाई समय होने वाले परिवर्तन की दर होती है। त्वरण की सहायता से किसी वस्तु की गति में होने वाले परिवर्तन को समझा जा सकता है।
इस अध्याय में दूरी-समय तथा वेग-समय ग्राफ के माध्यम से गति को प्रदर्शित करने की विधि भी समझाई गई है। ग्राफों की सहायता से किसी वस्तु की गति का विश्लेषण करना अधिक सरल हो जाता है।
अंत में आप गति के महत्वपूर्ण समीकरणों तथा एकसमान वृत्तीय गति के बारे में पढ़ेंगे। गति के समीकरणों की सहायता से दूरी, वेग, समय और त्वरण के बीच संबंध स्थापित किया जाता है। यह अध्याय भौतिकी में गति से संबंधित अवधारणाओं को समझने की मजबूत नींव तैयार करता है।

7.1 गति का वर्णन कैसे किया जाता है?

7.1.1 सरल रेखीय गति क्या है?

गति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए :-

गति :- जब कोई वस्तु समय के साथ अपने चारों ओर के वातावरण के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती है, तो कहा जाता है कि वस्तु गति में है।

गति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :- 

1. गति का अर्थ है स्थिति में परिवर्तन।

2. यह परिवर्तन समय के साथ होता है।

3. गति को किसी संदर्भ बिंदु (Reference Point) के सापेक्ष देखा जाता है।

उदाहरण :-

चलती हुई बस में बैठा व्यक्ति सड़क के किनारे खड़े व्यक्ति के सापेक्ष गति में होता है, जबकि बस के अंदर बैठे अन्य यात्रियों के सापेक्ष वह स्थिर प्रतीत होता है।

मूल बिंदु क्या होता है? उदाहरण सहित समझाइए :-

मूल बिंदु (Origin) :- जब हमें किसी वस्तु की स्थिति बतानी होती है, तो हम एक निश्चित स्थान को आधार मानते हैं। इस निश्चित स्थान को मूल बिंदु (Origin) कहा जाता है।

मूल बिंदु की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-  

1. यह एक ऐसा बिंदु होता है जिससे वस्तु की स्थिति या दूरी मापी जाती है।

2. मूल बिंदु को ही संदर्भ बिंदु भी कहा जा सकता है।

3. गति का वर्णन करते समय मूल बिंदु का निर्धारण आवश्यक होता है।

उदाहरण :-  

मान लीजिए कोई बच्चा स्कूल की इमारत से 50 मीटर दूर खड़ा है, तो स्कूल की इमारत को मूल बिंदु मानकर उसकी स्थिति बताई जाती है।

भौतिक अवस्था क्या होती है :-

भौतिक अवस्था :- किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ परिवर्तन के आधार पर उसे दो अवस्थाओं में बाँटा जा सकता है, जिसे भौतिक अवस्था कहा जाता है।

भौतिक अवस्था कितने प्रकार के होते है :-

भौतिक अवस्था के निम्नलिखित दो  प्रकार होते हैं :-

1. विरामावस्था (Rest Position) :- जब किसी वस्तु की स्थिति किसी निश्चित बिंदु के सापेक्ष समय के साथ नहीं बदलती है, तो वह विरामावस्था में होती है।

उदाहरण :-

एक बेंच पर रखा हुआ बैग — विरामावस्था में है।

2. गतिजावस्था (Motion Position) :- जब किसी वस्तु की स्थिति किसी निश्चित बिंदु के सापेक्ष समय के साथ बदलती रहती है, तो वह गतिजावस्था में होती है।
उदाहरण :-

चलती हुई कार — गतिजावस्था में है।

गतिजावस्था के प्रारूप कितने प्रकार के होते हैं? उन्हें उदाहरण सहित समझाइए :-

वस्तु की गति अलग-अलग पथों पर अलग-अलग प्रकार से हो सकती है। इसे ही गतिजावस्था के प्रारूप कहा जाता है।

गतिजावस्था के प्रमुख प्रारूप निम्नलिखित हैं :-

1. वृतीय गति (Circular Motion) :-  जब कोई वस्तु एक गोलाकार पथ पर चलती है, तो वह वृतीय गति में होती है।

उदाहरण :-

पंखे का घूमता हुआ पंख, पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर गति।

2. रेखीय गति (Linear Motion) :- जब कोई वस्तु सीधी रेखा में गति करती है, तो उसे रेखीय गति कहते हैं।

उदाहरण :-

सड़क पर चलती कार, फ्री-फॉलिंग (गिरती हुई) वस्तु।

3. कंपन गति / दोलन गति (Oscillatory Motion) :- जब कोई वस्तु एक बिंदु के चारों ओर आवृत्त रूप से आगे-पीछे हिलती है, तो वह कंपन गति में होती है।

उदाहरण :-

पेंडुलम की गति, झूले की गति।

मूल भौतिक राशियाँ क्या होती हैं :-

मूल भौतिक राशियाँ :- वे राशियाँ होती हैं जिन्हें मापा जा सकता है। इनका उपयोग किसी भौतिक गुणधर्म को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

हर भौतिक राशि के दो भाग होते हैं :- 

1. परिमाण (Magnitude) – जो बताता है कि कितनी मात्रा है।

2. इकाई (Unit) – जो बताती है कि वह माप किस रूप में किया गया है।

मूल भौतिक राशियाँ वे सात आधारभूत राशियाँ होती हैं जिन्हें अन्य सभी राशियों को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

सात मूल भौतिक राशियाँ इस प्रकार हैं :- 

क्र.सं.

भौतिक राशि

इकाई (SI में)

प्रतीक

1.

दैर्ध्य (लंबाई)

मीटर (m)

l

2.

द्रव्यमान

किलोग्राम (kg)

m

3.

समय

सेकंड (s)

t

4.

तापमान

केल्विन (K)

T

5.

विद्युत धारा

ऐम्पियर (A)

I

6.

द्रव्य की मात्रा

मोल (mol)

n

7.

ज्योति तीव्रता

कैंडेला (cd)

Iv

भौतिक राशियों का विभाजन कितने प्रकार का होता है :-

भौतिक राशियों को उनके गुणों के आधार पर निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया जाता है :-

1. अदिश राशि (Scalar Quantity)
2. सदिश राशि (Vector Quantity)

अदिश और सदिश राशि को उदाहरण सहित समझाइए :-

अदिश राशि (Scalar Quantity) :- जिन भौतिक राशियों में केवल परिमाण (magnitude) होता है लेकिन दिशा नहीं होती, वे अदिश कहलाती हैं। ये केवल एक संख्या से व्यक्त की जाती हैं।

उदाहरण :- 

1. दूरी (Distance)

2. द्रव्यमान (Mass)

3. समय (Time)

4. तापमान (Temperature)

5. चाल (Speed)

 

सदिश राशि (Vector Quantity) :- जिन भौतिक राशियों में परिमाण के साथ-साथ दिशा (direction) भी होती है, उन्हें सदिश कहा जाता है। इन्हें पूर्णतः व्यक्त करने के लिए दिशा आवश्यक होती है।

उदाहरण :- 

1. वेग (Velocity)

2. विस्थापन (Displacement)

3. बल (Force)

4. सवेग (Momentum)

5. त्वरण (Acceleration)

दूरी क्या होती है? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

दूरी :- वह कुल पथ होती है जिसे कोई वस्तु प्रारम्भिक बिंदु से अंतिम बिंदु तक तय करती है। यह वास्तविक पथ की लम्बाई का माप होता है। दूरी एक अदिश राशि है, अर्थात् इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं।

दूरी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :- 

1. यह हमेशा धनात्मक होती है।

2. वस्तु चाहे किसी भी दिशा में जाए, दूरी बढ़ती रहती है।

3. इसका मात्रक मीटर (m) होता है।

उदाहरण :- 

रमेश अपने घर से निकलकर स्कूल गया जो 3 किमी दूर है, फिर बाज़ार गया जो वहाँ से 2 किमी दूर है।

तो रमेश की कुल दूरी = 3 किमी + 2 किमी = 5 किमी होगी।

नोट  :- 

दूरी हमेशा वस्तु द्वारा तय की गई कुल लम्बाई को दर्शाती है, चाहे दिशा कुछ भी हो।

विस्थापन क्या होता है? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

विस्थापन :- किसी वस्तु की प्रारम्भिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को कहा जाता है। यह एक सदिश राशि है, अर्थात् इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।

विस्थापन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :- 

1. विस्थापन वस्तु की वास्तविक स्थिति में बदलाव दर्शाता है।

2. इसमें दिशा का निर्धारण आवश्यक होता है।

3. विस्थापन का मात्रक मीटर (m) होता है।

4. यह शून्य भी हो सकता है, यदि प्रारंभिक और अंतिम बिंदु एक ही हो।

उदाहरण :- 

रमेश घंटाघर से चलकर 65 किमी. दक्षिण-पश्चिम दिशा में जाता है।
यह उसकी प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी है, इसलिए यह विस्थापन कहलाएगा।

नोट  :- 

1. विस्थापन वह दूरी है जो दिशा के साथ मापी जाती है और यह वस्तु की वास्तविक स्थिति में परिवर्तन को दर्शाता है।

2. दूरी और विस्थापन दोनों को ही सामान्य रूप से अंग्रेजी वर्ण ‘S’ से निरूपित किया जाता है। इन दोनों में अंतर उनके प्रकार में होता है :

(i) दूरी एक अदिश राशि है।

(ii) विस्थापन एक सदिश राशि है।

दूरी और विस्थापन में क्या अंतर होता है? इसे तालिका के रूप में समझाइए :-

दूरी और विस्थापन में अंतर निम्न तालिका में दिया गया है :-

बिंदु

दूरी

विस्थापन

परिभाषा

वास्तविक पथ की लंबाई को दूरी कहते हैं।

प्रारम्भिक और अंतिम स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी विस्थापन कहलाती है।

राशि का प्रकार

अदिश राशि (Scalar Quantity)

सदिश राशि (Vector Quantity)

दिशा

इसमें दिशा का कोई महत्व नहीं होता।

इसमें दिशा का होना आवश्यक होता है।

मान (Value)

हमेशा धनात्मक होती है, ‘0’ नहीं हो सकती।

धनात्मक, ऋणात्मक या ‘0’ हो सकती है।

तुलना

विस्थापन से बराबर या अधिक हो सकती है।

दूरी से बराबर या कम होती है।

उदाहरण :-
यदि कोई व्यक्ति 10 मीटर आगे जाकर वापस 10 मीटर पीछे आ जाता है :- 

1. दूरी = 10 + 10 = 20 मीटर

2. विस्थापन = 0 मीटर (क्योंकि प्रारंभिक और अंतिम स्थिति एक ही है)

नोट :-

दोनों को ‘S’ से निरूपित किया जाता है, लेकिन उनका अर्थ और गुण अलग होते हैं।

7.1.2 एकसमान गति और असमान गति क्या हैं?

एक समान गति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए :-

एक समान गति :- उस स्थिति को कहते हैं जब कोई वस्तु समान समयांतराल में समान दूरी तय करती है। इसका अर्थ है कि वस्तु की गति पूरे समय के दौरान स्थिर (constant) बनी रहती है। इसमें गति में कोई बढ़ाव या घटाव नहीं होता।

उदाहरण :-

घड़ी की सुइयाँ एक समान गति से घूमती हैं, क्योंकि वे हर मिनट में बराबर कोण तय करती हैं।

नोट :-

यदि किसी वाहन की गति एक समान है, तो उसका चाल ग्राफ समय के साथ एक सीधी रेखा (Straight Line) प्रदर्शित करता है।

असमान गति क्या होती है? यह कितने प्रकार के होते है :-

असमान गति :- वह गति होती है जब कोई वस्तु अलग-अलग समय में अलग-अलग दूरी तय करती है। इसका अर्थ है कि वस्तु की गति समय के साथ बदलती रहती है, यानी कभी तेज, कभी धीमी।

असमान गति निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं :- 

1. त्वरण गति (Accelerated Motion) :-  जब किसी वस्तु की गति समय के साथ लगातार बढ़ती रहती है, तो इसे त्वरण गति कहते हैं।

2. मंदन गति (Retarded/Decelerated Motion) :- जब किसी वस्तु की गति समय के साथ लगातार घटती रहती है, तो इसे मंदन गति कहते हैं।

उदाहरण :-

1. व्यस्त सड़क पर चलती कार कभी तेज तो कभी धीमी चलती है :-  यह असमान गति का उदाहरण है।
2. ट्रेन के स्टार्ट होने पर उसकी गति धीरे-धीरे बढ़ती है :-  यह त्वरण गति है।
3. स्टेशन पर रुकते समय ट्रेन की गति घटती है :-  यह मंदन गति है। 

7.2 गति की दर का मापन कैसे किया जाता है?

चाल क्या होती है? इसे समझाइए :-

चाल :- गति की दर का मापन है। यह बताता है कि कोई वस्तु किस दर से दूरी तय कर रही है। चाल ज्ञात करने के लिए, वस्तु द्वारा चली गई दूरी को समय से भाग दिया जाता है।

चाल का सूत्र निम्नलिखित है :- 

चाल (Speed) = दूरी (Distance) / समय (Time)

चाल की इकाई :-

S.I. इकाई — मीटर/सेकंड (m/s)

सामान्यतः — किलोमीटर/घंटा (km/h)

उदाहरण :- 

यदि कोई व्यक्ति 100 मीटर की दूरी 20 सेकंड में तय करता है, तो उसकी चाल होगी :- 

चाल =100 / 20 = 5 m/s

चाल की मुख्य विशेषताएँ क्या होती हैं :-

चाल की मुख्य निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं :-

1. चाल एक अदिश राशि होती है, यानी इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती।

2. चाल का मात्रक मीटर प्रति सेकण्ड (m/s) होता है। इसके अलावा cm/s या km/h भी प्रयोग होते हैं।

3. यदि कोई वस्तु समान गति से चलती है, तो उसकी चाल भी समान होती है।

4. यदि गति असमान हो, तो चाल भी बदलती रहती है।

5. असमान गति की स्थिति में, चाल का मापन करने के लिए औसत चाल निकाली जाती है।

उदाहरण :-

अगर कोई गाड़ी 60 किमी की दूरी 2 घंटे में तय करती है, तो उसकी औसत चाल = 60 ÷ 2 = 30 किमी/घंटा।

औसत चाल क्या होती है? इसे सूत्र सहित समझाइए :-

औसत चाल :- जब कोई वस्तु असमान गति से चलती है, तब उसकी गति को समझने के लिए हम औसत चाल का उपयोग करते हैं। औसत चाल वह चाल होती है जो वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी और कुल समय के अनुपात से प्राप्त होती है।

औसत चाल का सूत्र निम्नलिखित है :- 

औसत चाल (v) = कुल दूरी (S) / कुल समय (t)

उदाहरण :- 

यदि कोई व्यक्ति 90 किलोमीटर की दूरी 3 घंटे में तय करता है, तो उसकी औसत चाल होगी :- 

(v) = 90 / 3 = 30 किमी/घंटा 

चाल कितने प्रकार की होती है :-

चाल के दो मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं :-

1. एकसमान चाल (Uniform Speed)

2. समान चाल (Non-uniform Speed)

एक समान चाल तथा असमान चाल क्या है? उदाहरण सहित समझाइए :-

एकसमान चाल (Uniform Speed) :- जब कोई वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरी तय करती है, तो उसे एकसमान चाल कहा जाता है। इसमें चाल स्थिर रहती है।

उदाहरण :-

एकसमान चाल – रेलगाड़ी जो हर 10 सेकंड में 100 मीटर तय करती है। 

असमान चाल (Non-uniform Speed) :- जब कोई वस्तु समान समय अंतराल में अलग-अलग दूरी तय करती है, तो उसे असमान चाल कहा जाता है। इसमें चाल बदलती रहती है।
उदाहरण :-

असमान चाल – भीड़भाड़ वाले रास्ते पर चलती कार जो कभी रुकती है, कभी तेज चलती है।

7.2.1 दिशा के साथ चाल को क्या कहते हैं?

वेग किसे कहते हैं? इसे समझाइए :-

वेग :- वह भौतिक राशि है जो किसी वस्तु की चाल और दिशा दोनों को दर्शाती है।  जब कोई वस्तु एक निश्चित दिशा में गति करती है, तो उसकी चाल को ही वेग (Velocity) कहा जाता है। 

वेग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :- 

1. यह एक सदिश राशि है, यानी इसमें दिशा और परिमाण दोनों होते हैं। 

2. इसे v से निरूपित किया जाता है। 

3. यदि वस्तु की दिशा या चाल में परिवर्तन होता है, तो वेग भी बदल जाता है। 

वेग की गणना निम्नलिखित प्रकार से की जाती है :- 

वेग = कुल विस्थापन / कुल समय

उदाहरण :-

यदि एक छात्र 100 मीटर पूर्व की ओर 20 सेकंड में जाता है, तो

वेग = 100 मीटर / 20 सेकंड = 5 मीटर/सेकंड पूर्व दिशा में

नोट :-

वेग के मान धनात्मक, शून्य या ऋणात्मक भी हो सकते हैं — यह दिशा पर निर्भर करता है।

औसत वेग किसे कहते हैं? इसे समझाइए :-

औसत वेग :- जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ धीरे-धीरे बदलता है, तो हम उसका औसत वेग निकाल सकते हैं। यदि परिवर्तन समान रूप से हो रहा है (यानि नियमित रूप से), तो औसत वेग को इस निम्नलिखित प्रकार से निकाला जाता है :-

औसत वेग = प्रारंभिक वेग (u) + अंतिम वेग (v) / 2

उदाहरण :-  यदि किसी वस्तु की गति 0 m/s से शुरू होकर 20 m/s तक 10 सेकंड में पहुँची, तो औसत वेग होगा :- 

औसत वेग = 0 + 20 / 2 = 10 m/s

नोट :-

यह सूत्र सिर्फ तभी प्रयोग किया जाता है जब त्वरण समान हो।

वेग और चाल में क्या अंतर होता है :-

वेग और चाल में कुछ मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं :-

मापदंड

वेग

चाल

भौतिक राशि का प्रकार

सदिश राशि (दिशा और परिमाण दोनों होते हैं)

अदिश राशि (केवल परिमाण होता है)

मान (Value)

ऋणात्मक, धनात्मक या शून्य हो सकता है

हमेशा धनात्मक होता है

औसत मान

औसत वेग शून्य हो सकता है (जैसे गोल पथ में)

औसत चाल कभी शून्य नहीं होती

7.3 वेग में परिवर्तन की दर क्या है?

वेग में परिवर्तन की दर क्या कहलाती है :-

त्वरण या मंदन :- जब कोई वस्तु असमान गति से चलती है यानी उसका वेग समय के साथ बदलता रहता है, तो उस बदलाव की दर को त्वरण या मंदन कहा जाता है।

7.5 गति के समीकरण क्या हैं?

त्वरण और मंदन को उदाहरण सहित समझाइए :-

त्वरण (Acceleration) :- जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ बढ़ता है, तो वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। इसे ‘a’ से दर्शाया जाता है इसका मान धनात्मक (+) होता है। इसका मात्रक ms-2 होता है ।

उदाहरण :- 

कोई गाड़ी 0 से 60 km/h की गति 10 सेकंड में प्राप्त करती है :- यह त्वरण है।
2. मंदन (Retardation) :- जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ घटता है, तो वेग में परिवर्तन की दर को मंदन कहते हैं। यह भी ‘a’ से दर्शाया जाता है, लेकिन इसका मान ऋणात्मक (–) होता है। इसका मात्रक ms-2 होता है ।

उदाहरण :-  

कोई गाड़ी 60 km/h से 0 तक रुक जाती है :- यह मंदन है।

नोट :-

1. दोनों सदिश राशियाँ हैं।

2. इनका मान धनात्मक (+), ऋणात्मक (–), या शून्य हो सकता है।

त्वरण कितने प्रकार का होता है? समझाइए :-

त्वरण मुख्यतः निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं :-

1. एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration)

2. असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration)

एकसमान त्वरण और असमान त्वरण को उदाहरण सहित समझाइए :-

एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration) :- जब किसी वस्तु का वेग समान समयांतराल में समान रूप से बढ़ता या घटता है, तब उसे एकसमान त्वरण कहते हैं। इसका मान पूरे समय में एक जैसा रहता है।

उदाहरण :- 

कोई वाहन 10 सेकंड में हर सेकंड 2 m/s की दर से वेग बढ़ाए :- यह एकसमान त्वरण है।

असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration) :- जब किसी वस्तु का वेग समान समयांतराल में असमान रूप से बढ़ता या घटता है, तब उसे असमान त्वरण कहते हैं। इसका मान समय-समय पर बदलता रहता है।
उदाहरण :- 

कोई वाहन ट्रैफिक में कभी तेज़ और कभी धीमा चले :- यह असमान त्वरण है। 

7.6 एकसमान वृत्तीय गति क्या है?

एकसमान वृत्तीय गति क्या होती है? समझाइए :-

जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर समान चाल से घूमती है, तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहा जाता है।

एकसमान वृत्तीय गति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :- 

1. चाल (Speed) में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

2. वेग (Velocity) की दिशा हर क्षण बदलती रहती है।

3. इस कारण इसमें त्वरण पाया जाता है।

4. वस्तु का वेग हमेशा वृत्त की स्पर्शरेखा (Tangent) की दिशा में होता है।

वेग का सूत्र निम्नलिखित है :-

v = 2πr / t

यहाँ पर , v = वेग, r = वृत्त की त्रिज्या, t = समय, 2πr = वृत्त की परिधि

उदाहरण :-  

घड़ी की सुई, पंखा, या पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर घूमना :-  ये सभी एकसमान वृत्तीय गति के उदाहरण हैं।

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