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Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 4

Chapter 4: परमाणु की संरचना / Structure of the Atom
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप परमाणु की आंतरिक संरचना तथा उसके विभिन्न घटकों के बारे में समझेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, परमाणु मॉडल, इलेक्ट्रॉनों का वितरण तथा परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल भाषा में पढ़ेंगे।
नीचे अध्याय 4 परमाणु की संरचना के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 4 : परमाणु की संरचना

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 9

Subject

Science

Chapter

Chapter 4

Chapter Name

परमाणु की संरचना

Medium

Hindi

क्या आप Class 9 Science Chapter 4 Notes in Hindi  ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको परमाणु की संरचना अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप परमाणु की संरचना, उपपरमाण्विक कणों, परमाणु मॉडल, संयोजकता तथा समस्थानिक एवं समभारिक जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं के बारे में विस्तार से समझेंगे।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
4.1 पदार्थों में आवेशित कण क्या हैं?
4.2 परमाणु की संरचना क्या है?
  4.2.1 टॉमसन का परमाणु मॉडल क्या है?
  4.2.2 रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या है?
  4.2.3 बोर का परमाण्विक मॉडल क्या है?
  4.2.4 न्यूट्रॉन क्या है?
4.3 विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन कैसे वितरित होते हैं?
4.4 संयोजकता क्या है?
4.5 परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या क्या हैं?
  4.5.1 परमाणु संख्या क्या है?
  4.5.2 द्रव्यमान संख्या क्या है?
4.6 समस्थानिक क्या हैं?
  4.6.1 समभारिक क्या हैं?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप परमाणु की संरचना तथा उसके विभिन्न घटकों के बारे में समझेंगे। आप जानेंगे कि परमाणु पदार्थ का मूल निर्माण खंड है और इसके भीतर इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन जैसे उपपरमाण्विक कण पाए जाते हैं।
आप टॉमसन, रदरफोर्ड तथा नील्स बोर द्वारा प्रस्तुत विभिन्न परमाणु मॉडलों के बारे में भी पढ़ेंगे। टॉमसन ने परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति का विचार दिया, जबकि रदरफोर्ड के प्रयोग से परमाणु केंद्रक की खोज हुई। बोर ने बताया कि इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा स्तरों वाली कक्षाओं में केंद्रक के चारों ओर घूमते हैं।
इस अध्याय में आप न्यूट्रॉन की खोज तथा उसके महत्व को भी समझेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के आवेश एवं द्रव्यमान से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे।
आप यह भी समझेंगे कि परमाणु में इलेक्ट्रॉन विभिन्न कक्षाओं में किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं और किसी तत्व की संयोजकता कैसे निर्धारित की जाती है। संयोजकता किसी परमाणु की संयोजन क्षमता को दर्शाती है।
इसके अतिरिक्त आप परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या के बारे में पढ़ेंगे। परमाणु संख्या किसी तत्व के केंद्रक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाती है, जबकि द्रव्यमान संख्या प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कुल योग के बराबर होती है।
अंत में आप समस्थानिक तथा समभारिक की अवधारणाओं को समझेंगे। समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग होती है, जबकि समभारिकों की द्रव्यमान संख्या समान लेकिन परमाणु संख्या अलग होती है। यह अध्याय आधुनिक परमाणु सिद्धांत को समझने की मजबूत नींव तैयार करता है।

4.1 पदार्थों में आवेशित कण क्या हैं?

परमाणु क्या होता है? इसे समझाइए :-

परमाणु :- किसी भी पदार्थ का सबसे छोटा कण होता है, जो उस पदार्थ के सभी रासायनिक गुणों को दर्शा सकता है। परमाणु, तीन उप-परमाणु कणों से मिलकर बना होता है:- प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन

नोट:-

प्रारंभ में जॉन डाल्टन ने यह माना था कि “परमाणु अविभाज्य है (यानि उसे और छोटे भागों में नहीं बाँटा जा सकता)।” लेकिन बाद में उप-परमाणु कणों (जैसे प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन) की खोज ने यह सिद्ध कर दिया कि परमाणु विभाज्य होता है।

प्रोटॉन की खोज किसने की :-

प्रोटॉन की खोज ई. गोल्डस्टीन (E. Goldstein) ने की थी।

उन्होंने एनोड किरणें या केनाल किरणें (Canal Rays) के प्रयोग से यह खोज की थी।

प्रोटॉन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

बिंदु

विवरण

खोजकर्ता

ई. गोल्डस्टीन (E. Goldstein)

खोज का माध्यम

एनोड किरणें / केनाल किरणें (Canal Rays)

प्रोटॉन पर आवेश

+1.6 × 10⁻¹⁹ कूलम्ब (C)

प्रोटॉन का द्रव्यमान

1.673 × 10⁻²⁷ किलोग्राम (kg)

प्रोटॉन का द्रव्यमान

इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से 1840 गुना अधिक

आवेश का प्रकार

धनात्मक (Positive)

प्रतीक

p⁺

नोट:-

1. प्रोटॉन परमाणु के केंद्र यानी नाभिक (nucleus) में पाया जाता है।
2. यह धनात्मक आवेशित उप-परमाणु कण है।

4.2 परमाणु की संरचना क्या है?

परमाणु मॉडल क्या है? किन वैज्ञानिकों ने परमाणु के मॉडल प्रस्तुत किए हैं :-

जब वैज्ञानिकों ने उप-परमाण्विक कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज की, तब यह जानने की कोशिश की गई कि ये कण परमाणु में किस तरह से स्थित हैं।

इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने परमाणु के निम्नलिखित विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए।

क्रमांक

परमाणु मॉडल

प्रस्तुत करने वाले वैज्ञानिक

(a)

टॉमसन का परमाणु मॉडल

जे. जे. टॉमसन (J. J. Thomson)

(b)

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल

रदरफोर्ड (Ernest Rutherford)

(c)

बोर का परमाणु मॉडल

नील्स बोर (Niels Bohr)

नोट:-

आज के समय में क्वांटम यांत्रिक परमाणु मॉडल को वैज्ञानिक रूप से सबसे सटीक माना जाता है तथा इस माॅडल को स्वीकृति भी दी गई है।

हालाँकि, इसे उच्च कक्षाओं (जैसे कक्षा 11–12) में विस्तार से पढ़ाया जाता है। 

4.2.1 टॉमसन का परमाणु मॉडल क्या है?

टॉमसन का परमाणु मॉडल क्या था? इसे क्यों ‘कटा तरबूज मॉडल’ कहा जाता है :-

टॉमसन का परमाणु मॉडल वर्ष 1897 में जे. जे. टॉमसन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

इसे ‘कटा तरबूज मॉडल’ भी कहा जाता है।

मॉडल की विशेषता :-

टॉमसन के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोला होता है, जैसे तरबूज का लाल भाग। 

इसमें इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण होते हैं, जो उस गोले में तरबूज के बीजों की तरह फैले होते हैं। इसलिए इसे ‘कटा तरबूज मॉडल’ कहा जाता है।

इस मॉडल में धनावेश और ऋणावेश की कुल मात्रा बराबर मानी गई है, जिससे परमाणु विद्युत अंततः  न्यूट्रल (आवेशरहित) होता है।

कमियाँ :- 

1. यह मॉडल यह नहीं समझा सका कि इलेक्ट्रॉन स्थिर क्यों रहते हैं और न ही उनकी स्थिति और गति के बारे में बता पाया।

2. इसलिए यह मॉडल अधिक वैज्ञानिकों को स्वीकार्य नहीं हुआ और बाद में नकार दिया गया।

नोट :-

टॉमसन का मॉडल परमाणु की रचना को सरलता से समझाने का पहला प्रयास था, लेकिन यह परमाणु की पूरी संरचना को स्पष्ट रूप से नहीं समझा पाया।

4.2.2 रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या है?

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या था? यह किस प्रयोग पर आधारित था :-

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल प्रसिद्ध सोने की पन्नी (Gold Foil) प्रयोग पर आधारित था। यह प्रयोग वर्ष 1909 में एर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा किया गया था।

रदरफोर्ड प्रयोग का विवरण :-

1. रदरफोर्ड ने तेज गति से चलने वाले अल्फा कण (He²⁺) को बहुत पतली सोने की पन्नी के साथ टक्कर करवाई।

2. अधिकतर अल्फा कण सीधे निकल गए।

3. कुछ थोड़े-से कण निम्न कोणों से मुड़ गए।

4. बहुत ही कम कण जैसे कि प्रत्येक 12000 कणों में से केवल एक वापस लौट आए।

 

इससे रदरफोर्ड ने क्या निष्कर्ष निकाला?

1. परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त (खाली) होता है, क्योंकि ज़्यादातर अल्फा कण बिना किसी रुकावट के सीधे निकल गए।

2. परमाणु के केंद्र में एक छोटा, घना और धनात्मक आवेश वाला भाग होता है,  जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है। यह निष्कर्ष इसलिए निकला क्योंकि लगभग हर 12000 में से एक अल्फा कण पीछे की ओर लौट गया।

3. कुछ अल्फा कणों का मुड़ जाना यह दर्शाता है कि नाभिक धनावेशित है, और उसमें द्रव्यमान केंद्रित होता है।

4. नाभिक का आकार परमाणु के आकार से बहुत छोटा होता है,  लगभग  10,000 गुना छोटा

5. परमाणु का सम्पूर्ण द्रव्यमान नाभिक में ही स्थित होता है।

रदरफोर्ड के प्रयोग की विशेषताएँ :-

1. परमाणु का केंद्र एक धनावेशित भाग होता है, जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है।
2. परमाणु का पूरा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है।
3. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों तरफ वलयाकार पथ (circular path) में घूमते रहते हैं।
4. नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में बहुत ही छोटा होता है।

 

रदरफोर्ड के प्रयोग की मुख्य कमी:-

रदरफोर्ड ने कहा कि –  “इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वलयाकार मार्ग (circular path) में घूमते हैं।” लेकिन

1. चूँकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित (negative charge) कण हैं और गति कर रहे हैं,  इसलिए भौतिकी के नियमों के अनुसार, वे अपनी ऊर्जा खोते रहते हैं।

2. जैसे-जैसे ऊर्जा घटती है, इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर गिरता है,  और अंत में नाभिक से टकराकर परमाणु को अस्थिर बना देता है।

“लेकिन ऐसा वास्तविक जीवन में नहीं होता है — परमाणु स्थिर रहते हैं।”

नोट :-

रदरफोर्ड यह नहीं समझा पाए कि इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोने के बावजूद नाभिक में क्यों नहीं गिरते।
इसी कारण से, उनका मॉडल अधूरा माना गया और बाद में बोर मॉडल द्वारा इसे सुधारा गया।

4.2.3 बोर का परमाण्विक मॉडल क्या है?

बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य बिंदु क्या थे :-

बोर ने रदरफोर्ड के मॉडल की कमी को दूर करते हुए 1912 में परमाणु का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया। इस मॉडल में परमाणु की संरचना से जुड़े निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य बताए गए :-

बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य विशेषताएँ :-

1. नियत ऊर्जा कक्षाएँ :-  इलेक्ट्रॉन परमाणु के केंद्र यानी नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित ऊर्जा कक्षाओं (energy levels) में ही चक्कर लगाते हैं। इन्हें निर्धारित कक्षाएँ या श्रेणियाँ (shells) कहा जाता है।

2. ऊर्जा का विकिरण नहीं होता :-  जब तक इलेक्ट्रॉन किसी निश्चित कक्षा में घूमते हैं, तब तक वे अपनी ऊर्जा नहीं खोते।  इस प्रकार परमाणु स्थिर बना रहता है।

3. ऊर्जा परिवर्तन :-  जब कोई इलेक्ट्रॉन एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाता है, तो वह

(i) ऊर्जा प्राप्त करता है (ऊँची कक्षा में जाने पर) या

(ii) ऊर्जा उत्सर्जित करता है (नीची कक्षा में आने पर)।

नोट:-

बोर का मॉडल यह समझाने में सफल रहा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरते और परमाणु कैसे स्थिर बना रहता है।  यह मॉडल आगे चलकर आधुनिक परमाणु सिद्धांत का आधार बना।

4.2.4 न्यूट्रॉन क्या है?

न्यूट्रॉन की खोज किसने की :-

न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैडविक (James Chadwick) ने की थी।

उन्होंने हल्के तत्वों (जैसे- लीथियम, बोरोन आदि) पर कणों की बमबारी करवाई, जिससे एक नए कण का पता चला

जिसका द्रव्यमान प्रोटॉन के बराबर था, लेकिन उस पर कोई आवेश नहीं था

इन्हीं कणों को न्यूट्रॉन कहा गया।

न्यूट्रॉन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

बिंदु

विवरण

खोजकर्ता

जेम्स चैडविक (James Chadwick)

खोज का माध्यम

हल्के तत्वों पर कणों की बमबारी

न्यूट्रॉन पर आवेश

कोई नहीं (शून्य / Neutral)

न्यूट्रॉन का द्रव्यमान

लगभग 1.675 × 10⁻²⁷ किलोग्राम (kg)

द्रव्यमान की तुलना

प्रोटॉन के लगभग बराबर

स्थान

परमाणु के नाभिक (nucleus) में

हाइड्रोजन में अनुपस्थिति

हाइड्रोजन के प्रोटियम समस्थानिक में नहीं पाया जाता

नोट:-

चूँकि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत ही कम होता है, इसलिए किसी भी परमाणु का कुल द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के द्रव्यमानों का योग होता है।

4.3 विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन कैसे वितरित होते हैं?

इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की :-

इलेक्ट्रॉन की खोज प्रसिद्ध वैज्ञानिक जे. जे. थॉमसन ने की थी। उन्होंने कैथोड किरण प्रयोग (Cathode Ray Experiment) के माध्यम से परमाणु में इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति का पता लगाया।

इलेक्ट्रॉन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

बिंदु

विवरण

खोजकर्ता

जे. जे. थॉमसन (J.J. Thomson)

खोज का माध्यम

कैथोड किरणें (Cathode Rays)

इलेक्ट्रॉन पर आवेश

– 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलम्ब (C)

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान

9.1 × 10⁻³¹ किलोग्राम (kg)

आवेश का प्रकार

ऋणात्मक (Negative)

प्रतीक

e⁻

नोट:-

1. इलेक्ट्रॉन एक ऋणात्मक आवेशित उप-परमाणु कण है।
2. यह परमाणु के बहुत बाहर (nucleus के चारों ओर) गति करता है।

4.4 संयोजकता क्या है?

संयोजकता क्या होती है? इसे उदाहरण सहित समझाइए :-

संयोजकता :- बोरबरी नियम के अनुसार संयोजकता किसी तत्व की वह क्षमता होती है, जिसके द्वारा वह दूसरे तत्वों के साथ मिलकर रासायनिक बंध बनाता है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि कोई तत्व अपने बाहरी (अंतिम) कोश में 8 इलेक्ट्रॉन पूरे करने के लिए कितने इलेक्ट्रॉन लेता, देता या साझा करता है

जब कोई तत्व इलेक्ट्रॉन लेता या देता है, तो जितने इलेक्ट्रॉन उसमें भाग लेते हैं, उसी संख्या को उस तत्व की संयोजकता (Valency) कहा जाता है।

उदाहरण :-

1. हाइड्रोजन (H) का एक इलेक्ट्रॉन है, इसे 2 इलेक्ट्रॉन पूरे करने हैं, इसलिए यह एक इलेक्ट्रॉन साझा करता है → इसकी संयोजकता 1 है।

2. ऑक्सीजन (O) को 8 इलेक्ट्रॉन पूरे करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए → इसकी संयोजकता 2 है।

नोट:-

बोरबरी नियम (Octet Rule) के अनुसार, तत्व इस प्रयास में रहते हैं कि उनके अंतिम कोश में कुल 8 इलेक्ट्रॉन हो जाएँ, ताकि वे अधिक स्थिर हो सकें।

4.5 परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या क्या हैं?

4.5.1 परमाणु संख्या क्या है?

परमाणु संख्या किसे कहते हैं :-

परमाणु संख्या :- किसी भी परमाणु में प्रोटॉन की कुल संख्या को उसकी परमाणु संख्या कहा जाता है।

परमाणु संख्या से जुड़ी मुख्य विशेषताएँ :-

1. परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या

उदाहरण :-

हाइड्रोजन में 1 प्रोटॉन होता है, इसलिए उसकी परमाणु संख्या 1 होती है।

2. प्रत्येक तत्व की एक विशिष्ट परमाणु संख्या होती है
उदाहरण :-

(i) हाइड्रोजन (H) की परमाणु संख्या = 1

(ii) हीलियम (He) की परमाणु संख्या = 2

(iii) कार्बन (C) की परमाणु संख्या = 6

3. परमाणु संख्या बदलने से तत्व भी बदल जाता है,  इसलिए यह तत्व की पहचान का आधार/परिचायक होती है।

4. प्रतीक :- परमाणु संख्या को ‘Z’ अक्षर द्वारा दर्शाया जाता है।

5. अनावेशित (neutral) परमाणु में :-  प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन

नोट :-

परमाणु संख्या यह बताती है कि कोई तत्व कौन सा है, और यही उसे आवर्त सारणी में उसकी स्थिति दिलाती है।

4.5.2 द्रव्यमान संख्या क्या है?

द्रव्यमान संख्या किसे कहते हैं :-

द्रव्यमान संख्या :- किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन की कुल संख्या होती है।

द्रव्यमान संख्या को ‘A’ से दर्शाया जाता है।

सूत्र:- 

A = p + n

जहाँ,

A = द्रव्यमान संख्या

p = प्रोटॉनों की संख्या

n = न्यूट्रॉनों की संख्या

4.6 समस्थानिक क्या हैं?

समस्थानिक किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए :-

समस्थानिक :- वे परमाणु होते हैं जो एक ही तत्व के बने होते हैं, तथा  जिनकी परमाणु संख्या समान होती है लेकिन उनकी द्रव्यमान संख्या अलग-अलग होती है।

उदाहरण :-

हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं:

1. प्रोटियम (1H1) – इसमें 1 प्रोटॉन और 0 न्यूट्रॉन होते हैं।
2. ड्यूटेरियम (1H2) – इसमें 1 प्रोटॉन और 1 न्यूट्रॉन होते हैं।

3. ट्रिटियम (1H3) – इसमें 1 प्रोटॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं।

तीनों में परमाणु संख्या 1 है, लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग है, इसलिए ये समस्थानिक कहलाते हैं।

नोट :-

1. समस्थानिकों में प्रोटॉन की संख्या समान होती है। 

2. न्यूट्रॉन की संख्या अलग-अलग होने के कारण इनकी द्रव्यमान संख्या अलग होती है।

3. रासायनिक गुण समान होते हैं, परंतु भौतिक गुण भिन्न हो सकते हैं।

समस्थानिकों का क्या उपयोग होता है? उदाहरण सहित समझाइए :-

समस्थानिकों का विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपयोग होता है, जैसे चिकित्सा, ऊर्जा उत्पादन और पुरातात्विक खोजों में।
ये उपयोग उनके विशेष भौतिक गुणों पर आधारित होते हैं जो कि निम्नलिखित है :-

1. यूरेनियम-235 :-  परमाणु संयंत्रों में ईंधन के रूप में उपयोग होता है। इससे परमाणु ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।
2. कोबाल्ट-60 :-  कैंसर के इलाज में विकिरण चिकित्सा (radiotherapy) के लिए प्रयोग किया जाता है।

3. आयोडीन-131 :-  घेघा (goitre) और थायरॉयड से जुड़ी बीमारियों के उपचार में उपयोग होता है।
4. कार्बन-14 (C-14) :-  प्राचीन जीवाश्मों या वस्तुओं की उम्र जानने के लिए कार्बन डेटिंग पद्धति में प्रयोग होता है।

4.6.1 समभारिक क्या हैं?

समभारिक किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए :-

समभारिक :-  वे परमाणु होते हैं जो भिन्न-भिन्न तत्वों के होते हैं, जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, लेकिन उनकी परमाणु संख्या अलग-अलग होती है।

उदाहरण :-

1.  कैल्शियम-40 (20Ca40) और 2. आर्गन-40 (18Ar40)

इन दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है, लेकिन परमाणु संख्याएँ अलग-अलग हैं (Ca = 20, Ar = 18), इसलिए ये समभारिक हैं।

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