CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER - 8
आनुवंशिकता / Heredity
| Textbook | NCERT |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Science |
| Chapter | Chapter 8 |
| Chapter Name | आनुवंशिकता |
| Medium | Hindi |
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
8.1 जनन के दौरान विभिन्नताओं का संचयन
आनुवंशिकी:-
वह विज्ञान है जो वंशानुक्रम के माध्यम से लक्षणों के प्रसार और उनके बीच के भेदों का अध्ययन करता है।
8.2 आनुवंशिकता
आनुवंशिकता:-
विभिन्न लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में सही तरीके से वंशानुगत होना ही आनुवंशिकता कहलाता है।
8.2.1 वंशानुगत लक्षण
विभिन्नता:-
एक ही प्रजाति के विभिन्न जीवों की शारीरिक संरचना और डी.एन.ए. में अंतर को विभिन्नता कहा जाता है।
विभिन्नता का महत्व:-
यदि कोई एक समूह (समष्टि) अपने पर्यावरण के अनुकूल है, परंतु यदि पर्यावरण में कुछ बड़े बदलाव (जैसे तापमान में बदलाव, जल स्तर में बदलाव आदि) होते हैं, तो उस समूह का पूरी तरह से नष्ट होना संभव है। लेकिन उस समूह में कुछ जीवों में विभिन्नताएँ होने पर, उन जीवों के समूह के लिए जीवित रहने की कुछ संभावनाएँ अवश्य बनी रहेंगी। इस प्रकार, विभिन्नताएँ किसी प्रजाति की दीर्घकालिक उत्तरजीविता को सुनिश्चित करने में सहायक होती हैं। विभिन्नता जैविक विकास का एक प्रमुख आधार है।
विभिन्नता के प्रकार:-
- शारीरिक कोशिका विभिन्नता (Somatic Cell Variation)
- जनन कोशिका विभिन्नता (Germ Cell Variation)
| विशेषताएँ | शारीरिक कोशिका विभिन्नता | जनन कोशिका विभिन्नता |
|---|---|---|
| स्थिति | शारीरिक कोशिका में होती है | जनन कोशिका में होती है |
| अगली पीढ़ी में स्थानांतरण | स्थानांतरित नहीं होती | स्थानांतरित होती है |
| जैव विकास पर प्रभाव | जैव विकास में सहायक नहीं होती | जैव विकास में सहायक होती है |
| अन्य नाम | उपार्जित लक्षण | आनुवंशिक लक्षण |
| उदाहरण | कुत्ते की पूँछ काटना, कानों में छेद करना | मानव शरीर की लंबाई, बालों का रंग |
विभिन्नताओं का संचयन और जनन:-
विभिन्नताएँ जनन प्रक्रिया के माध्यम से उत्पन्न होती हैं, चाहे वह लैंगिक जनन हो या अलैंगिक जनन।
अलैंगिक और लैंगिक जनन में उत्पन्न विभिन्नताओं में अंतर:-
- अलैंगिक जनन:- विभिन्नताएँ कम होती हैं; डी.एन.ए. प्रतिकृति के दौरान कम त्रुटियाँ उत्पन्न होती हैं।
- लैंगिक जनन:- विभिन्नताएँ अपेक्षाकृत अधिक होती हैं; तीन जैविक प्रक्रियाओं द्वारा आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है — (i) क्रॉस संकरण (ii) गुणसूत्रों का पुनर्संयोजन (iii) उत्परिवर्तन (Mutation)।
विभिन्नता के लाभ:-
प्राकृतिक विभिन्नता/विविधता के कारण जीवों को अलग-अलग प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।
8.2.2 मेंडल का योगदान — लक्षणों की वंशागति के नियम
मेंडल का योगदान:-
- मेंडल ने वंशागति के कुछ प्रमुख नियमों की पहचान की।
- उन्हें आनुवंशिकी का जनक माना जाता है।
- मेंडल ने मटर के पौधों में विभिन्न लक्षणों का अध्ययन किया, जैसे गोल या झुर्रीदार बीज, लंबे या बौने पौधे, और सफेद या बैंगनी फूल।
- उन्होंने भिन्न-भिन्न लक्षणों वाले मटर के पौधों को चयनित किया, जैसे लंबे पौधे और बौने पौधे, और इनसे प्राप्त संतति में इन लक्षणों के अनुपात की गणना की।
मेंडल द्वारा मटर के पौधों के चयन के कारण:-
- मटर के पौधों में विभिन्न विकल्पी लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
- मटर का जीवनकाल छोटा होता है, जिससे प्रयोग जल्दी समाप्त होते हैं।
- मटर के पौधों में सामान्यतः स्वपरागण होता है, लेकिन कृत्रिम रूप से परपरागण भी संभव है।
- मटर के पौधे एक ही पीढ़ी में बहुत सारे बीज उत्पन्न करते हैं।
8.2.3 लक्षणों की अभिव्यक्ति
एकल संकरण (मोनोहाइब्रिड क्रॉस):-
इसमें दो मटर के पौधों के बीच एक ही विकल्पी लक्षण (जैसे लंबाई) का क्रॉस किया जाता है।
अवलोकन:-
- F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबी ऊँचाई के थे, कोई भी पौधा मध्यम ऊँचाई का नहीं था। इसका मतलब यह था कि एक लक्षण (लंबाई) दूसरे पर हावी था।
- F₂ पीढ़ी में 3/4 पौधे लंबे थे और 1/4 पौधे बौने थे।
- फीनोटाइप अनुपात F₂ में 3:1 था (3 लंबे पौधे, 1 बौना पौधा) और जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 था (TT, Tt, tt)।
निष्कर्ष:-
- TT और Tt दोनों प्रकार के पौधे लंबे होते हैं, जबकि tt बौने होते हैं।
- T जीन की एक ही प्रति पौधों को लंबा बनाने के लिए काफी होती है, जबकि पौधों को बौना बनाने के लिए दोनों ही प्रतियों का tt होना अनिवार्य होता है।
- T जैसे लक्षण प्रभावी होते हैं, जबकि t जैसे लक्षण अप्रभावी होते हैं।
द्वि-संकरण (या द्विकल्पीय द्वि-संकरण):-
जब मटर के पौधों के दो जोड़ी लक्षणों के मध्य क्रॉस किया जाता है, जैसे बीजों के रंग और आकृति के लक्षण। इस प्रकार के क्रॉस में दो जोड़ी लक्षण (जैसे बीज की आकृति और रंग) स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।
मेंडल के आनुवंशिकता के नियम:-
मेंडल ने मटर के पौधों पर किए गए संकरण प्रयोगों के परिणामों के आधार पर कुछ प्रमुख सिद्धांतों का विकास किया, जिन्हें मेंडल के आनुवंशिकता के नियमों के नाम से जाना जाता है। मेंडल ने तीन मुख्य नियमों का प्रतिपादन किया:-
- प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)
- पृथक्करण का नियम / विसंयोजन का नियम (Law of Segregation)
- स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)
| नियम | विवरण |
|---|---|
| प्रभाविता का नियम | जब मेंडल ने विभिन्न लक्षणों वाले संकर पादपों का संकरण किया, तो उसने पाया कि एक लक्षण दूसरे पर प्रभाव डालता है और वह अभिव्यक्त होता है, जबकि दूसरा लक्षण दबकर रह जाता है। दबे हुए लक्षण को अप्रभावी कहा जाता है |
| पृथक्करण का नियम / विसंयोजन का नियम | युग्मक निर्माण के दौरान, दोनों विकल्पी (एलील्स) अलग-अलग हो जाते हैं। प्रत्येक युग्मक में केवल एक विकल्पी (एलील) होता है — इसे युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहा जाता है |
| स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम | द्विसंकर संकरण में विभिन्न लक्षणों का वंशानुगमन एक-दूसरे से स्वतंत्र होता है; एक लक्षण का युग्मक दूसरे लक्षण के युग्मक से स्वतंत्र रूप से वितरित होता है, और इसका अनुपात 9:3:3:1 होता है |
8.2.4 लिंग निर्धारण
विभिन्न जीवों में लिंग निर्धारण:-
प्रत्येक जीव में लिंग निर्धारण के लिए विभिन्न तंत्र अपनाए जाते हैं। हर प्रजाति में लिंग निर्धारण के लिए अलग-अलग प्रक्रिया होती है। इसके उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं:-
- कुछ जीवों में लिंग निर्धारण की निर्भरता अंडे के तापमान पर होती है, जैसे घोंघा।
- कुछ जीवों में लिंग निर्धारण जीन या लिंग सूत्र (क्रोमोसोम) द्वारा नियंत्रित होता है, जैसे मानव — इसमें महिला का लिंग XX (मादा) और पुरुष का लिंग XY (नर) होता है।
मानव में लिंग निर्धारण:-
मानवों में लिंग निर्धारण की निर्भरता इस बात पर होती है कि बच्चे को पिता से कौन सा गुणसूत्र प्राप्त होता है। सभी बच्चे अपनी माँ से X गुणसूत्र प्राप्त करते हैं, जबकि लिंग निर्धारण पिता पर निर्भर करता है। इस कारण से लड़का अथवा लड़की होने की संभावना 50 प्रतिशत होती है।
- यदि बच्चे को पिता से X गुणसूत्र प्राप्त होता है, तो वह लड़की होती है।
- यदि पिता से Y गुणसूत्र प्राप्त होता है, तो बच्चा लड़का होता है।
आनुवंशिक लक्षण:-
वे गुण होते हैं जिन्हें एक जीव अपने माता-पिता से प्राप्त करता है। यह लक्षण उस जीव के शारीरिक या मानसिक गुण होते हैं।
आनुवंशिक लक्षण के गुण:-
- ये लक्षण जीवों को उनके माता-पिता से वंशानुगत रूप से प्राप्त होते हैं।
- ये जनन कोशिकाओं में होते हैं और अगली पीढ़ी को प्राप्त होते हैं।
- ये जैविक विकास में योगदान करते हैं।
आनुवंशिक विचलन के कारण:-
- यदि DNA में पर्याप्त बदलाव होते हैं।
- गुणसूत्र की संख्या में कोई बदलाव आ जाता है।