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Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 3

Chapter 3: धातु एवं अधातु / Metals and Non-metals
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों के बारे में सरल भाषा में समझेंगे। साथ ही धातुओं एवं अधातुओं की अभिक्रियाएँ, सक्रियता श्रेणी, धातुकर्म तथा दैनिक जीवन एवं उद्योगों में इनके उपयोगों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
नीचे अध्याय 3 धातु एवं अधातु के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 3 : धातु एवं अधातु

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 10

Subject

Science

Chapter

Chapter 3

Chapter Name

धातु एवं अधातु

Medium

Hindi

क्या आप Class 10 Science Chapter 3 Notes in Hindi ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको धातु एवं अधातु अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप धातुओं एवं अधातुओं के गुण, उनकी अभिक्रियाएँ, सक्रियता श्रेणी, धातुकर्म तथा संक्षारण जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं के बारे में विस्तार से समझेंगे।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
3.1 भौतिक गुणधर्म क्या हैं?
3.1.1 धातुओं के भौतिक गुणधर्म क्या होते हैं?
3.1.2 अधातुओं के भौतिक गुणधर्म क्या होते हैं?
3.2 धातुओं के रासायनिक गुणधर्म क्या हैं?
3.2.1 धातुओं को वायु में जलाने पर क्या होता है?
3.2.2 धातुएँ जल के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?
3.2.3 धातुएँ अम्लों के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?
3.2.4 धातुएँ अन्य धातु लवणों के विलयन के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?
3.2.5 सक्रियता श्रेणी क्या है?
3.3 धातुएँ एवं अधातुएँ कैसे अभिक्रिया करती हैं?
3.3.1 आयनिक यौगिकों के गुणधर्म क्या हैं?
3.4 धातुओं की प्राप्ति कैसे की जाती है?
3.4.1 धातुओं का निष्कर्षण क्या है?
3.4.2 अयस्कों का समृद्धीकरण कैसे किया जाता है?
3.4.3 सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?
3.4.4 सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?
3.4.5 सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?
3.4.6 धातुओं का परिष्करण कैसे किया जाता है?
3.5 संक्षारण क्या है?
3.5.1 संक्षारण से सुरक्षा कैसे की जाती है?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप धातुओं एवं अधातुओं के बारे में सरल भाषा में समझेंगे। आप जानेंगे कि धातुएँ सामान्यतः चमकीली, तन्य, आघातवर्ध्य तथा ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी चालक होती हैं। अधिकांश धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में पाई जाती हैं, जबकि पारद एकमात्र ऐसी धातु है जो द्रव अवस्था में होती है।
आप यह भी समझेंगे कि धातुएँ इलेक्ट्रॉन छोड़कर धनायन बनाती हैं, इसलिए उन्हें विद्युत धनात्मक तत्व कहा जाता है। दूसरी ओर अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं, इसलिए वे विद्युत ऋणात्मक तत्व कहलाती हैं।
इस अध्याय में आप धातुओं की ऑक्सीजन, जल एवं अम्लों के साथ होने वाली अभिक्रियाओं के बारे में पढ़ेंगे। साथ ही उभयधर्मी ऑक्साइड जैसे एल्युमिनियम ऑक्साइड एवं जिंक ऑक्साइड के गुणों को भी समझेंगे, जो अम्लीय एवं क्षारकीय दोनों प्रकार के गुण प्रदर्शित करते हैं।
आप सक्रियता श्रेणी के बारे में भी जानेंगे, जिसमें धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के आधार पर क्रम में रखा जाता है। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ कम अभिक्रियाशील धातुओं को उनके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती हैं।
इसके अलावा आप धातुकर्म, अयस्क से धातु का निष्कर्षण, मिश्रातु तथा उनके उपयोगों के बारे में भी समझेंगे। अध्याय में संक्षारण की प्रक्रिया और उससे बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई है।
अंत में आप अधातुओं के गुणधर्म, उनकी अभिक्रियाओं तथा धातुओं से उनके अंतर को भी विस्तार से समझेंगे। यह अध्याय दैनिक जीवन एवं उद्योगों में उपयोग होने वाली धातुओं और अधातुओं की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करता है।

3.1 भौतिक गुणधर्म क्या हैं?

धातु किसे कहते हैं :-

विद्युत् तथा ऊष्मा के सुचालक पदार्थों को धातु कहा जाता है।

उदाहरण :- 

1. Fe (लोहा) 

2. Al (एलुमिनियम) 

3. Ca (कैल्सियम) 

4. Na (सोडियम)

5. K (पोटेशियम)

3.1.1 धातुओं के भौतिक गुणधर्म क्या होते हैं?

धातुओं में कौन-कौन से भौतिक गुण पाए जाते हैं :-

धातुओं में निम्नलिखित भौतिक गुण पाए जाते हैं जिसके कारण हम धातुओं की पहचान आसानी से कर सकते हैं :-

भौतिक रूप :- 1. धातुएँ भौतिक रूप में कठोर(ठोस) होते हैं। अलग-अलग धातुओं की कठोरता अलग-अलग होती है। 

अपवाद :- मर्करी एक ऐसी धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाती है।

2. धातुओं का गलनांक अपेक्षाकृत अधिक होता है।

अपवाद :- गैलियम तथा सीज़ियम का गलनांक इतना कम होता है कि ये हथेली पर रखने से हथेली के ताप से ही पिघल जाती है।

चमकीलापन :- धातु चमकीले होते हैं। धातुओं के चमकने के इस गुणधर्म को ही धात्विक चमक कहते हैं।

आघातवर्ध्यता :- धातु को हथौड़े आदि से पीटकर पतली चादर में परिवर्तित किया जा सकता है। धातुओं के इस गुण को आघातवर्ध्यता कहते हैं। आघातवर्ध्य वस्तुयें, जैसे:- सोना तथा चाँदी।  

तन्यता :- धातु को खींचकर तार (Wire) आदि जैसी वस्तुएं बनाई जा सकती हैं। धातुओं की इस खिंचने की क्षमता को ही तन्यता कहते है। 

चालकता :- धातुएँ विद्युत् एवं ऊष्मा की सुचालक होती हैं, कॉपर तथा सिल्वर विद्युत् एवं ऊष्मा के अच्छे सुचालक है।

अपवाद :- मर्करी तथा लेड ऐसे धातुएं हैं जो ऊष्मा के कुचालक हैं।

ध्वनिकता :- धातु को पीटकर ध्वनि उत्पन्न की जा सकती है। यही कारण है की धातुओं को ध्वनिक कहा जाता है।

धातुओं का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता है :-

धातुओं का उपयोग निम्नलिखित कार्याे के लिए किया जाता है :-

1. इमारतें तथा पुल आदि बनाने के लिए।

2. ट्रैन तथा ट्रैन की पटरियाँ आदि बनाने के लिए।

3. हवाई जहाज तथा समुंद्री जहाज बनाने के लिए।

4. गाड़ियों अथवा वाहनों का निर्माण करने के लिए।

5. बर्तनों, आभूषणों तथा मशीन के पुर्जे आदि बनाने के लिए।

3.1.2 अधातुओं के भौतिक गुणधर्म क्या होते हैं?

अधातु किसे कहते हैं :-

विद्युत् तथा ऊष्मा के कुचालक पदार्थों को अधातु कहा जाता है :-

उदाहरण :- 

1. (H) हइड्रोजन 

2. (O) ऑक्सीजन 

3. (N) नाइट्रोजन 

4. (Cl) क्लोरीन

5. (I) आयोडीन

अधातुओं में कौन-कौन से गुण पाए जाते हैं :-

अधातुओं में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं जिसके कारण हम अधातुओं की पहचान आसानी से कर सकते हैं :-

1. भंगुर :- अधातुओं में भंगुरता का गुण पाया  जाता हैं अर्थात् यह हथौड़े आदि से पीटने पर आसानी से टूट जाते है। 

2. घनत्व :- अधातुओं का घनत्व बहुत कम होता है।

3. नरम :- अधातुएँ नरम होते हैं।

4. अध्वनिक :- अधातुओं को पीटने पर उनसे धवनि उत्पन्न नहीं होती है।  

5. मलिन :- अधातुएँ दिखने में मलिन होते हैं।

अधातुओं का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता है :-

अधातुओं का उपयोग निम्नलिखित कार्याे के लिए किया जाता है :-

1. हइड्रोजन :- का उपयोग रॉकेट के अंदर ईंधन के रूप में किया जाता है।

2. ऑक्सीजन :- का उपयोग हम साँस लेने के लिए करते है।

3. नाइट्रोजन :- का उपयोग खेतों में उर्वरक के रूप में किया जाता है।

4. क्लोरीन :- का उपयोग जल को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।

5. आयोडीन :- का उपयोग घावों को भरने के लिए एंटीबायोटिक के रूप में किया जाता है।

धातुओं तथा अधातुओं में पाँच अंतर बताइये :-

धातुओं तथा अधातुओं में पाँच अंतर निम्नलिखित हैं :-

धातुओं के पाँच गुण 

अधातुओं के पाँच गुण 

1. ये चमकीली होती हैं।

1. ये चमकीली नहीं होती हैं।

2. इनमें आघातवर्ध्यता तथा तन्यता का गुण पाया जाता है।

2. इनमें आघातवर्ध्यता तथा तन्यता का गुण नहीं पाया जाता है।

3. इन्हे पीटने पर धवनि उत्पन्न होती है।

3. इन्हे पीटने पर धवनि उत्पन्न नहीं  होती है।

4. सामान्य तौर पर इनका घनत्व ज्यादा होता है।

4. सामान्य तौर पर इनका घनत्व धातुओं से कम होता है।

5. धातु ऑक्साइड या तो उभयधर्मी या तो क्षारीय होती है।

5. अधातु ऑक्साइड अम्लीय होती है।

नोट :-

1. धातु तथा तनु अम्ल की अभिक्रिया करने पर धातु तनु अम्ल में से हइड्रोजन गैस को विस्थापित कर देती है और हइड्रोजन गैस का निर्माण करती है। जबकि अधातु तनु अम्ल में से हइड्रोजन गैस को विस्थापित नहीं करती है।

2. धातु ऑक्साइड आयनिक तथा अधातु ऑक्साइड सहसंयोजी होते हैं।

3. सोडियम तथा पोटेशियम दो ऐसी धातुएं हैं जिनका घनत्व कम होता है।

4. मर्करी एक ऐसा धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है इसके अलावा सभी धातुएँ ठोस अवस्था में पाए जाते हैं।

5. ब्रोमीन एक इकलौता ऐसा अधातु है जो द्रव अवस्था में है इसके अलावा सभी अधातुएँ या तो गैस या तो ठोस अवस्था में हैं।

अधातुओं में कौन-कौन से भौतिक गुण पाए जाते हैं :-

अधातुओं में निम्नलिखित भौतिक गुण पाए जाते हैं जिसके कारण हम अधातुओं की पहचान आसानी से कर सकते हैं :-

भौतिक रूप :-  अधातुएँ भौतिक रूप में या तो ठोस या तो गैस के रूप में होती हैं।

अपवाद :- केवल ब्रोमीन ही इकलौती ऐसी अधातु है जो द्रव्य के रूप में पायी जाती है। 

चमकीलापन :- अधातुएँ चमकीले नहीं होते हैं।

अपवाद :- आयोडीन इकलौता ऐसा अधातु हैं जो चमकीला नहीं होता है। 

आघातवर्ध्यता :-  अधातुएँ आघातवर्ध्य नहीं होते हैं इन्हे हतौड़े से पीटकर पतली चादर मैं नहीं बदला जा सकता है।

भंगुर :- अधातुओं में भंगुरता का गुण पाया  जाता हैं अर्थात् यह हथौड़े आदि से पीटने पर आसानी से टूट जाते है।

तन्यता :- अधातुओं को खींचकर तार (Wire) आदि जैसी वस्तुएं नहीं बनाई जा सकती हैं, क्योंकि अधातुओं में तन्यता का गुण नहीं पाया जाता है।

चालकता :- अधातुएँ विद्युत् एवं ऊष्मा की कुचालक होती है।

अपवाद :- 1. ग्रेफाइट विद्युत् का सुचालक है

2. हीरा उष्मा का सुचालक है

उपरोक्त दोनों ही अधातुएँ कार्बन के अपरूप हैं।

ध्वनिकता :- अधातुओं को पीटने से ध्वनि उत्पन्न नहीं होती है।

3.2 धातुओं के रासायनिक गुणधर्म क्या हैं?

धातुओं के रासायनिक गुणधर्म से आप क्या समझते हैं :-

किसी धातु को किसी दूसरे तत्व के साथ अभिक्रिया कराने  पर  धातु के गुण मे जो परिवर्तन होता है वह धातु के रासायनिक गुणधर्मों की वजह से ही होता है। निम्नलिखित अभिक्रियाएँ धातुओं के रासायनिक गुणधर्म के कारण ही होती है :-

1. धातुओं का वायू में दहन होना

2. धातुओं का जल के साथ अभिक्रिया करना अथवा नहीं करना

3. धातुओं का अम्लों के साथ अभिक्रिया करना 

4. धातुओं का लवणों के विलयन साथ अभिक्रिया करना

दहन क्या है? समझाइये :-

वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमे कोई पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके ऊष्मा उत्पन्न करता है दहन कहलाता है।

3.2.1 धातुओं को वायु में जलाने पर क्या होता है?

धातुओं  का वायु में दहन को समझाइये :-

सामान्यतः एक चमकदार ज्वाला के साथ धातुओं  का वायु में दहन होता है तथा लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके  संगत धातु के ऑक्साइड का निर्माण करती है।

जिसका रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है :-

धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड 

उदहारण :-

वायु की उपस्तिथि में जब काॅपर को गर्म किया जाता है तब यह ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके काले रंग के काॅपर ऑक्साइड का निर्माण करता है। 

 जिसका रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है :-

2Cu + O2 → 2CuO 

इसी प्रकार वायु की उपस्तिथि में जब एलुमिनियम  को गर्म किया जाता है तब यह ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके एलुमिनियम ऑक्साइड का निर्माण करता है। 

जिसका रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है :-

4Al + 3O2 → 2Al2O3

धातु ऑक्साइड में कौन- कौन से गुणधर्म होते है :-

धातु ऑक्साइड में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं :-

1. धातु ऑक्साइड  क्षारकीय प्रकृति के होते हैं। यहाँ क्षारकीय होने का अर्थ यह है कि इनके अम्लों से क्रिया करके लवण तथा जल प्राप्त किया जाता है।

अपवाद :-

कुछ धातु ऑक्साइड अम्लीय तथा क्षारकीय दोनों प्रकृति के होते हैं, जैसे : – 

(i) ऐलूमिनियम ऑक्साइड

(ii) जिंक ऑक्साइड आदि।

2. धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील होते हैं।

अपवाद :-

कुछ धातु ऑक्साइड जल में घुलकर क्षार का निर्माण करते हैं। जैसे :-

(i) सोडियम ऑक्साइड

(ii) पोटैशियम ऑक्साइड आदि।

अम्ल तथा क्षारक के साथ ऐलूमिनियम ऑक्साइड कैसे अभिक्रिया करता है :-

अम्ल तथा क्षारक के साथ ऐलूमिनियम ऑक्साइड इस प्रकार अभिक्रिया करता है :-

Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O

Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O

सोडियम ऑक्साइड  तथा पोटैशियम ऑक्साइड किस प्रकार जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं :-

सोडियम ऑक्साइड  तथा पोटैशियम ऑक्साइड  इस प्रकार जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं।

K2O(s) + H2O(I) → 2KOH(aq)

Na2O(s) + H2O(I) → 2NaOH(aq)

उभयधर्मी ऑक्साइड क्या है :-

अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल उत्पन्न करने वाले धातु ऑक्साइड उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।

धातुएँ ऑक्सीजन के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती है :-

धातुएँ ऑक्सीजन के साथ निम्नलिखित तथा विभिन्न अभिक्रियाएँ करती है :-

1. सोडियम तथा पोटैशियम जैसी कुछ धातुएँ ऑक्सीजन के साथ बहुत तेज अभिक्रिया करती है यहाँ तक कि खुले मे रखने पर यह आग तक पकड़ लेती है।

2. सोना तथा चाँदी अत्याधिक ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

3. सामान्य तापमान पर ऐलुमिनियम, मैग्निशियम, जिंक लेड आदि जैसी धातुओं की सतह के ऊपर ऑक्सीजन के संपर्क में रहने से ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती है, ऑक्साइड की यही परत धातुओं को पुनः ऑक्सीकरण से सुरक्षित रखती है।

4. लोहे को गर्म करने पर उसका दहन नहीं होता है। परंतु जब लौहे के चूर्ण को बर्नर की ज्वाला में डाला जाता है तो वह तेजी से जलने लगता है।

3.2.2 धातुएँ जल के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?

धातुएँ जल के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती है :-

धातुएँ जल के साथ निम्नलिखित तथा विभिन्न अभिक्रियाएँ करती है :-

1. धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • धातु + जल → धातु ऑक्साइड + हाइड्रोजन

2. कुछ धातु ऑक्साइड जल में घुलनशील होने के कारण, जल में घुलने के पश्चात धातु हाइड्राॅक्साइड का निर्माण करती है। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • धातु ऑक्साइड + जल → धातु हाइड्राॅक्साइड

आइए धातुओं की जल के साथ अभिक्रया को कुछ और उदाहरणों से समझते हैं :-

(i) कुछ धातुएँ ठंडे जल के साथ तीव्र गति से अभिक्रिया करती हैं, यह अभिक्रिया इतनी तीव्र तथा ऊष्माक्षेपी होती है, कि यह अभिक्रिया में उत्पन्न हुई हाइड्रोजन गैस को तुरंत प्रज्ज्वलित कर देती है। जैसे सोडियम तथा  पोटैशियम आदि। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • 2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g) + ऊष्मा
  • 2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g) + ऊष्मा

(ii) कैल्शियम धातु  जल के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करती है, यह गति इतनी धीमी होती है, कि इस अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न ऊष्मा हाइड्रोजन को प्रज्जवलित करने में भी सक्षम नहीं होती हैं। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :- 

  • Ca(s) + 2H2O(I)  → Ca(OH)2(aq) + H2(g)

नोट :-

इस अभिक्रिया में कैल्शियम धातू तैरना प्रारंभ कर देता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इस अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न हाइड्रोजन गैस के बुलबुले कैल्सियम धातु की सतह पर चिपक जाते हैं।

3. मैग्निशियम धातु गर्म जल के साथ अभिक्रिया करता है, तथा मैग्निशियम हाइड्राॅक्साइड औरं हाइड्रोजन गैस का निर्माण करता है। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है

  • Mg(s) +2H2O(l) → Mg(OH)2(s) + H2(g)

नोट :-

इस अभिक्रिया में मैग्निशियम धातू तैरना प्रारंभ कर देता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इस अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न हाइड्रोजन गैस के बुलबुले मैग्निशियम धातु की सतह पर चिपक जाते हैं।

मैग्निशियम ठन्डे जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता है।

अपवाद :-

(i) जिंक, आयरन, तथा ऐलूमिनियम जैसी कुछ धातुएँ, न तो ठंडे जल के साथ अभिक्रिया करती हैं, न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती हैं। ये धातुएँ भाप के साथ अभिक्रिया करती है तथा धातु ऑक्साइड एवं हाइड्रोजन का निर्माण करती हैं। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित हैः-

  • 3Fe(s) + 4H2O(g) →  Fe3O4(s) + 4H2(g)
  • 2Al(s) + 3H2O(g) → Al2O3(s) + 3H2(g)

(ii) गोल्ड, सिल्वर, काॅपर, तथा लेड जैसी कुछ धातुएँ तो जल के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करती है।

3.2.3 धातुएँ अम्लों के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?

धातुएँ अम्ल/अम्लों के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती है :-

धातुएँ अम्ल/अम्लों के साथ निम्नलिखित अभिक्रियाएँ करती है :-

1. धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया करने के पश्चात संगत लवण एवं हाइड्रोजन गैस का निर्माण करती हैं। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन 

अपवाद :-

धातुएँ नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करने के पश्चात हाइड्रोजन गैस का निर्माण नहीं करती है।

2. बाकि धातुओं के मुकाबले पोटैशियम तथा सोडियम धातुएँ अम्लों के साथ अधिक तीव्र गति से अभिक्रिया करती है।

धातुएँ नाइट्रिक अम्ल (HNO3) के साथ अभिक्रिया करने के पश्चात हाइड्रोजन गैस का निर्माण क्यों नहीं करती है :-

धातुएँ नाइट्रिक अम्ल (HNO3) के साथ अभिक्रिया करने के पश्चात हाइड्रोजन गैस का निर्माण नहीं करती है, क्योंकि नाइट्रिक अम्ल (HNO3) एक प्रबल ऑक्सीकारक होने के कारण अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न हुई हाइड्रोजन गैस का ऑक्सीकरण करके उसे जल बना देता है तथा खुद नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड जैसे कि (No, NO2, N2O) में अपचयित हो जाता है।

अपवाद :-

मैग्निशियम तथा मैंगनीज दो ऐसी धातुएँ हैं जो तनु अम्ल (HNO3) के साथ अभिक्रिया करने के पश्चात हाइड्रोजन गैस का निर्माण करते हैं।

धातुएँ, तनु अम्लों के साथ किस दर पर क्रिया करते है :-

धातुएँ, तनु अम्लों के साथ इस दर पर क्रिया करते है :-

Mg > Al > Zn > Fe।

नोट :-

कॉपर धातु,  तनु अम्ल HCL के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करता है।

3.2.4 धातुएँ अन्य धातु लवणों के विलयन के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?

धातुएँ, धातु लवणों के विलयन के साथ किस प्रकार से अभिक्रिया करती है :-

धातुएँ, धातु लवणों के विलयन के साथ निम्न प्रकार से अभिक्रिया करती है :-

विस्थापन अभिक्रिया का प्रदर्शन करते हुए अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील  धातु को उसके यौगिक के गलित अवस्था अथवा उसके विलयन से विस्थापित कर देता है।

उदाहरण :-

यदि धातु (X), धातु (Y) को उसके विलयन से विस्थापित कर देता है तो धातु (X), धातु (Y) की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील है। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • धातु (X) + (Y) का लवण विलयन → (X) का लवण विलयन + धातु (Y)

3.2.5 सक्रियता श्रेणी क्या है?

सक्रियता श्रेणी क्या है :-

सक्रियता श्रेणी धातुओं की वह सूची है जिसके अन्तर्गत धातुओं की क्रियाशीलता को घटते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाता है :-

K

पोटैशियम 

सबसे अधिक अभिक्रियाशीलता 

Na

सोडियम 

Ca

कैल्शियम 

Mg

मैग्नीशियम 

Al

ऐलुमिनियम 

Zn

जिंक 

घटती अभिक्रियाशीलता  

Fe

आयरन 

Pb

लेड 

[H]

[हाइड्रोजन]

Cu

कॉपर (तांबा)

Hg

मर्करी (पारद)

सबसे कम अभिक्रियाशीलता  

Ag

सिल्वर 

Au

गोल्ड 

3.3 धातुएँ एवं अधातुएँ कैसे अभिक्रिया करती हैं?

धातुओं के साथ अधातुओं की अभिक्रिया किस प्रकार होती है? समझाइए :-

धातुओं के साथ अधातुओं की अभिक्रिया निम्नलिखित  प्रकार से होती है :-

1. संयोजकता कोश को पूर्ण करने के लिए तत्व अभिक्रियाशील होते हैं।

2. धातुओं के परमाणु अपनी संयोजकता कोश में से इलेक्ट्रान का त्याग करके धनायन बनाते हैं।

3. अधातु के परमाणु संयोजकता कोश में इलेक्ट्रान को ग्रहण करके ऋणायन का निर्माण करते हैं

4. विपरित आवेश वाले आयन एक-दूसरे को आकर्षित करकेे स्थिर तथा मजबूत विद्युत बल में बँध जाते है, तथा आयनिक यौगिक का निर्माण करते हैं।

3.3.1 आयनिक यौगिकों के गुणधर्म क्या हैं?

आयनिक यौगिकों के गुणधर्मों के बारे में बताएँ :-

आयनिक यौगिकों के मुख्य गुणधर्मं निम्नलिखित है :-

1. ठोस भौतिक प्रकृति :- धनायनों तथा ऋणायनों के मध्य मजबूत आकर्षण बल के फलस्वरूप आयनिक यौगिक कठोर एवं ठोस होते हैं। भंगुर होने के कारण ये यौगिक दाब डालने पर टुकड़ों में टूट जाते हैं।

2. अधिक क्वथनांक तथा गलनांक :- क्योंकि मजबूत अंतर – आयन के आकर्षण बल को तोड़ने के  लिए पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए आयनिक यौगिकों का क्वथनांक तथा गलनांक बहुत अधिक होता है।

3. घुलनशीलता :- ये यौगिक आमतौर पर जल में घुलनशील होते हैं, जबकि पेट्रोल, किरोसिन आदि जैसे विलायकों में ये अविलेय होते हैं।

4. विद्युत चालकता :- जलीय या गलित अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं, परंतु ये आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते हैं।

3.4 धातुओं की प्राप्ति कैसे की जाती है?

हमें धातुओं की प्राप्ति कहाँ से होती है? इनका स्रोत क्या है :-

हमें धातुओं की प्राप्ति पृथ्वी की भू-पर्पटी से होती है, यही इनका मुख्य स्रोत है।

धातुओं को अभिक्रियाशीलता के अनुसार हम कितने वर्गों में विभाजित करते है :-

हम धातुओं को अभिक्रियाशीलता के अनुसार मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित करते है :-

1. कम अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे :- सोना, चांदी, प्लेटिनम)  सक्रियता श्रेणी में नीचे 

2. मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे :- ऐलुमिनियम, जस्ता)  सक्रियता श्रेणी के मध्य 

3. अति अभिक्रियाशील धातुएँ (जैसे :- सोडियम, पोटेशियम)  सक्रियता श्रेणी में ऊपर

3.4.1 धातुओं का निष्कर्षण क्या है? 3.4.3 सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है? 3.4.4 सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है? 3.4.5 सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?

उपरोक्त तीनों वर्गों के धातुओं का निष्कर्षण करने के लिए हम कौन सी तकनीक का उपयोग करते है :-

उपरोक्त तीनों वर्गों के धातुओं का निष्कर्षण करने के लिए हम विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते है :-

1. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली तथा कम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण :- सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली तथा कम अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड को सिर्फ गर्म करके ही हमें धातु मिल जाता है। 

उदहारण :-

(i) जस्ता ऑक्साइड (ZnO): जस्ता ऑक्साइड (ZnO) को सिर्फ गर्म करने पर ही हमें ज़स्ता (Zn) प्राप्त हो जाता है। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • 2ZnO [→ (ताप)] 2Zn+O2

(ii) कॉपेर (II) ऑक्साइड (CuO): गर्म करने पर तांबा (Cu) प्राप्त होता है। जिसका रासायनिक सूत्र निम्नलिखित है :-

  • CuO [→ (Δ)] Cu + O2

 2. सक्रियता श्रेणी में मध्य में आने वाली धातुओं का निष्कर्षण :- सक्रियता श्रेणी में मध्य में आने वाली धातुओं को प्राप्त करने में हमें बाकी धातुओ के मुकाबले अधिक जटिलता होती है, 

उदहारण :-

(i) ये कार्बोनेट या सल्फाइड के रूप में पाई जाती है, और क्योंकि धातुओं को उनके ऑक्साइड द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सकता हैं, इसलिए कार्बोनेट या सल्फाइड को पहले ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। इसके बाद ऑक्साइड को गर्म करके धातु को प्राप्त कर लिया जाता है।

(ii) कार्बोनेट का उष्मा द्वारा ऑक्साइड में रूपांतरण :-

  • CaCO3 [→ (Δ)] CaO + CO2

(iii) सल्फाइड का उष्मा द्वारा ऑक्साइड में रूपांतरण

  • ZnS + O2 [→ (Δ)] ZnO + SO2
  • ZnS + O2 [→ (Δ)] ZnO + SO2

इसके बाद, ऑक्साइड को कोयले या अन्य रिडक्शन  एजेंट के साथ गर्म करके धातु प्राप्त की जाती है।

उदाहरण :-

कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) को कोयले के साथ गर्म करने पर :-

  • CaO + C [→ (Δ)] Ca+CO2

जिंक ऑक्साइड (ZnO) को कार्बन के साथ गर्म करने पर :-

  • ZnO + C [→ (Δ)] Zn + CO2
 3. सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर आने वाली तथा अधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण :- सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर आने वाली तथा अधिक अभिक्रियाशील धातुएं जैसी धातुएं होती हैं। इन धातुओं का निष्कर्षण विद्युत अपघटन विधि से किया जाता है।

उदहारण :- 

(i) सोडियम क्लोराइड (NaCl) का विद्युत अपघटन करके सोडियम प्राप्त किया जाता है। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • 2NaCl (लवण) [→ (विद्युत अपघटन)] 2Na (द्रव) + Cl2 (गैसीय)

नोट :-

यहाँ Na⁺ (सोडियम आयन) कैथोड पर इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके सोडियम धातु (Na) में परिवर्तित होते हैं। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

Na++ e→ Na (द्रव)

तथा Cl (क्लोराइड आयन) एनोड पर इलेक्ट्रॉन छोड़कर क्लोरीन गैस (Cl2) में परिवर्तित होते हैं। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • 2Cl− 2e→ Cl2 (गैसीय)

(ii) एलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) का विद्युत अपघटन करके एलुमिनियम और ऑक्सीजन प्राप्त होता है। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • Al2O3 (लवण) [→ (विद्युत अपघटन)] 2Al (द्रव) + O2 (गैसीय)

नोट :-

यहाँ Al3+ (एलुमिनियम आयन) कैथोड पर इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके एलुमिनियम धातु (Al) में परिवर्तित होते हैं। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • Al3+ + 3e →  Al (द्रव)

तथा O2– (ऑक्साइड आयन) एनोड पर इलेक्ट्रॉन छोड़कर ऑक्सीजन गैस (O2) में परिवर्तित होते हैं। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • 2O2–4e O2 (गैसीय)

खनिज किसे कहते है?

पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से मौजूद यौगिकों और तत्वों  को खनिज कहा जाता है।

अयस्क किसे कहते है :-

अयस्क वह पदार्थ अथवा खनिज है जिसमें कोई मूल्यवान धातु अधिक मात्रा में मौजूद होती है।

3.4.2 अयस्कों का समृद्धीकरण कैसे किया जाता है?

अयस्को के समृद्धिकरण से आप क्या समझते हैं :-

अयस्कों का समृद्धिकरण (Ore Enrichment) वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों (Mineral Ores) से मुख्य धातु को पृथक और शुद्ध किया जाता है, इसमें अयस्कों से अवांछनीय तत्वों या अपशिष्टों को हटा कर मुख्य धातु की सांद्रता (Concentration) बढ़ाई जाती है। ताकि उसका उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जा सके। 

गैंग किसे कहते हैं :-

पृथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों (Mineral Ores) में रेत तथा मिट्टी जैसी कई अशुद्धियाँ भी पाई जाती है, जिन्हें गैंग कहा जाता हैं, इनकी भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर गैंग को हटाने के लिए हम विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हैं।

भर्जन (Roasting) किसे कहते हैं :-

ऑक्सीजन की उपस्थिति में सल्फाइड अयस्क को अधिक ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, यह प्रक्रिया भर्जन (Roasting) कहलाती है।  जिसका रासायनिक सूत्र है :-

2Cu2S + 3O2 [→ (उच्च ताप)] 2Cu2O + 2SO2

निस्तापन (Calcination) किसे कहते हैं :-

सीमित ऑक्सीजन की उपस्थिति में कार्बोनेट अयस्क को अधिक ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, यह प्रक्रिया निस्तापन  (Calcination) कहलाती है। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

CaCO3 [→ (उच्च ताप)] CaO + CO2

अपचयन (Reduction) किसे कहते हैं :-

अपचयन (Reduction) वह रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी तत्व या यौगिक से ऑक्सीजन को हटा दिया जाता है अथवा उसमें हाइड्रोजन की वृद्धि होती है। 

इसके अंतर्गत भर्जन अथवा निस्तापन से प्राप्त धातु ऑक्साइड को कार्बन जैसे अपचायक के साथ गर्म करके धातु को प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण :-

CuO + H2 → Cu + H2O

थर्मिट (Thermite Reaction) अभिक्रिया किसे कहते हैं :-

थर्मिट (Thermite Reaction) :- धातु निष्कर्षण की प्रक्रिया में विस्थापन अभिक्रियाओं में बहुत अधिक ताप उत्पन्न होता है, जिसका उपयोग धातुओं को पिघलाने में किया जाता है, जिसमें दो धातुओं के ऑक्साइडो  के बीच उच्च ताप पर अभिक्रिया होती है यह अभिक्रिया मुख्य  रूप से एलुमिनियम और लोहा के बीच होती है, जिसका रासायनिक सूत्र है :-

 Fe2O3 + 2Al  [→ (Δ)] 2Fe + Al2O3

नोट :-

थर्मिट अभिक्रिया का उपयोग हम पटरियों को जोड़ने के लिए, धातु निष्कर्षण  के लिए, गोला-बारूद को नष्ट करने के लिए, बड़े धातु संरचनाओं और पुलों के निर्माण के लिए भी करते है। थर्मिट अभिक्रिया का उपयोग कुछ विशेष रासायनिक अभिक्रियाओं और प्रयोगों के अध्ययन में भी किया जाता है।

3.4.6 धातुओं का परिष्करण कैसे किया जाता है?

धातुओं के परिष्करण से आप क्या समझते हैं? ये विद्युत अपघटनी परिष्करण क्या है :-

विभिन्न अपचयन प्रक्रियाओं के पश्चात भी धातुएँ पूरी तरह से शुद्ध नहीं हो पाती है, इनमें कुछ अपद्रव्य अभी भी मौजूद होते हैं, विद्युत अपघटनी परिष्करण द्वारा हम इन अपद्रव्यों को हटा कर शुद्ध धातु को प्राप्त करते है। इसे ही धातुओं के परिष्करण के नाम से भी जाना जाता है।

विद्युत अपघटनी परिष्करण से धातुओं का परिष्करण को समझाइए :-

विद्युत अपघटनी परिष्करण :-

1. इस प्रक्रिया में शुद्ध धातु की एक पतली परत को कैथोड बनाया जाता है, तथा अशुद्ध धातु को एनोड बनाया जाता है। 

2. विद्युत अपघटक के रूप में धातु के लवण विलयन का उपयोग किया जाता है।

3. विद्युत धारा को प्रवाहित करने के पश्चात शुद्ध धातु विद्युत अपघटक से कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है। उतनी ही मात्रा में अशुद्ध धातु ऐनोड में घुल जाती है।

4. सभी अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड की तली पर निक्षेपित हो जाती है, इसे हम ऐनोड पंक के नाम से जानते है। तथा विलेय अशुद्धियाँ विलयन में ही चली जाती है।

नोट :-

गोल्ड, सिल्वर, काॅपर, जिंक तथा निकैल आदि अनेक धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है।

3.5 संक्षारण क्या है?

संक्षारण (Corrosion) क्या है ;-

संक्षारण (Corrosion):- वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी धातु का (ऑक्सीजन, अम्ल या नमी) के संपर्क में आने के कारण उसकी संरचना में बदलाव होने लगता है और वह धीरे-धीरे नष्ट अथवा क्षय हो जाती है।

उदाहरण :- 

1. लोहे का संक्षारण :- पानी तथा ऑक्सीजन के संपर्क में आने से होता है। जब लोहा वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आता है, तब लोहे पर भूरे रंग की पतली परत चढ़ जाती है, जिसे जंग कहते है। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • Fe(s) + O2(g) + H2O (l) → Fe2O3xH2O(s) (जंग)

2. काॅपर का संक्षारण :- वायुमंडल में उपस्थित CO2 के साथ अभिक्रिया करके काॅपर पर हरे रंग की (क्षारीय काॅपर कार्बोनेट) की परत चढ़ जाती है। जिसकी वजह से काॅपर अपनी भूरे रंग की चमक को खो देता है। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

2Cu(OH)2(s) + CO2(g) → Cu2(OH)2CO3(s) (क्षारीय काॅपर कार्बोनेट)

3. सिल्वर का संक्षारण:- वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर की वस्तुएँ धीरे धीरे काली पड़ जाती हैं, क्योंकि सिल्वर पर सिल्वर सल्फाइड (Ag2S) की पतली परत बन जाती है। जिसका रासायनिक सूत्र है :-

  • 2Ag(s) + H2S(g) → Ag2S(s) + H2(g)

3.5.1 संक्षारण से सुरक्षा कैसे की जाती है?

हम संक्षारण से सुरक्षा किस प्रकार पा सकते है :-

हम संक्षारण से सुरक्षा निम्नलिखित तरीकों से पा सकते है :-

1. धातुओं के ऊपर पेंट करके

2. धातुओं के ऊपर तेल और ग्रीज़ लगाकर

3. धातुओं के ऊपर यशदलेपन करके

4. धातुओं के ऊपर क्रोमियम लेपन करकेे

5. मिश्रधातु बनाकर अथवा एनोडीकरण करके

यशदलेपन का क्या अर्थ है :-

जंग से सुरक्षित रखने के लिए इस्पात तथा लोहे पर जिंक (जस्ते) की पतली परत चढ़ाई जाती है, इस क्रिया को यशदलेपन के नाम से जाना जाता है।

मिश्रधातु का क्या अर्थ है ;-

मिश्रधातु/मिश्रातु दो या दो से अधिक धातुओं का मिश्रण होता है , जिसे एक साथ मिलाकर एक नये पदार्थ का निर्माण किया जाता है।

उदाहरण :-

1. स्टील (Iron-Carbon): लोहे और कार्बन का मिश्रण होता है, परंतु यह शुद्ध लोहे की तुलना में कम विद्युत चालकता प्रदान करता है।

2. तांबा-निकेल मिश्रधातु (Cu-Ni): तांबे में निकेल मिलाने से मिश्रधातु की विद्युत चालकता कम हो जाती है।  यह मिश्रधातु तांबे की तुलना में अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करती है। जबकि शुद्ध तांबा एक अच्छा विद्युत चालक है।

नोट :- 

(i) कभी कभी इसमें अधातुओं का भी प्रयोग किया जाता है।

(ii) यदि मिश्रण में उपयोग होने वाला कोई एक धातु पारद है, तो इस मिश्रधातु को अमलगम कहते है।

(iii) शुद्ध धातु की अपेक्षा मिश्रधातु का गलनांक तथा विद्युत चालकता कम होती है।

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