CLASS X राजनीति विज्ञान NOTES IN HINDI CHAPTER - 4
राजनीतिक दल (Political Parties)
| Textbook | NCERT |
|---|---|
| Class | Class X |
| Subject | राजनीति विज्ञान (Political Science) |
| Chapter | Chapter 4 |
| Chapter Name | राजनीतिक दल |
| Medium | Hindi |
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
- 4.1 राजनीतिक दल — अर्थ, विशेषताएँ एवं घटक
- 4.2 राजनीतिक दल के कार्य
- 4.3 विपक्ष की भूमिका
- 4.4 राजनीतिक दल की आवश्यकता
- 4.5 दलीय व्यवस्थाएँ
- 4.6 किसी देश में दलों की संख्या
- 4.7 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दल
- 4.8 आजादी के बाद भारत में दलीय क्रम
- 4.9 राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दल
- 4.10 राजनीतिक दलों के सामने चुनौतियाँ
- 4.11 राजनीतिक दलों में सुधार
4.1 राजनीतिक दल — अर्थ, विशेषताएँ एवं घटक
राजनीतिक दल:-
चुनाव लड़कर सरकार में सत्ता प्राप्त करने का प्रयास करने वाला लोगों का संगठित समूह।
- लोगों का संगठित समूह होता है।
- मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़ना होता है।
- सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने का प्रयास करता है।
- जनता के हितों और विचारों का प्रतिनिधित्व करता है।
राजनीतिक दल के घटक
घटक:-
राजनीतिक दल कई तत्वों से मिलकर बना होता है, जो दल को मजबूत और सक्रिय बनाते हैं।
- नेता (Leaders):- दल का नेतृत्व करते हैं और नीतियाँ व निर्णय तय करते हैं।
- सक्रिय सदस्य (Active Members):- दल के लिए कार्य करते हैं और गतिविधियों में भाग लेते हैं।
- अनुयायी या समर्थक (Followers/Supporters):- दल को समर्थन देते हैं और चुनाव में वोट देते हैं।
4.2 राजनीतिक दल के कार्य
कार्य:-
लोकतंत्र में शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में मदद करने वाले प्रमुख कार्य।
- चुनाव लड़ना और उम्मीदवार खड़े करना।
- नीतियाँ और कार्यक्रम मतदाताओं के सामने रखना।
- चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा विधायिका में कानून-निर्माण।
- बहुमत प्राप्त दल द्वारा सरकार बनाना और चलाना।
- विपक्ष की भूमिका — सरकार की आलोचना और निगरानी करना।
- जनता की समस्याएँ उठाना और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन करना।
- कल्याणकारी योजनाओं का प्रसार करना।
- विभिन्न मुद्दों पर जनमत का निर्माण करना।
4.3 विपक्ष की भूमिका
लोकतंत्र में विपक्ष:-
विपक्ष लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सरकार को जवाबदेह और संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।
- सरकार की नीतियों पर निगरानी रखना।
- गलत नीतियों का विरोध करना।
- केवल आलोचना ही नहीं, बल्कि अच्छे कार्यों में सकारात्मक सहयोग भी देना।
4.4 राजनीतिक दल की आवश्यकता
आवश्यकता:-
आधुनिक लोकतंत्र में राजनीतिक दल बहुत आवश्यक होते हैं, क्योंकि इनके बिना शासन व्यवस्था प्रभावी रूप से नहीं चल सकती।
- आधुनिक लोकतंत्र के संचालन के लिए आवश्यक।
- नीतिगत दिशा प्रदान करना।
- सरकार की उपयोगिता सुनिश्चित करना।
- विभिन्न वर्गों के विचारों का प्रतिनिधित्व।
- जवाबदेह सरकार बनाना।
- विपक्षी दल द्वारा सरकार पर नियंत्रण (Check)।
- सरकार को समर्थन एवं संतुलन प्रदान करना।
- जटिल समाज में विभिन्न मुद्दों व विचारों में समन्वय।
4.5 दलीय व्यवस्थाएँ
दलीय व्यवस्था:-
किसी देश में कितने राजनीतिक दल सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, इसे दलीय व्यवस्था कहते हैं।
- एक दलीय व्यवस्था (One Party System):- केवल एक ही राजनीतिक दल को सरकार बनाने की अनुमति; अन्य दलों की भूमिका सीमित। उदाहरण — China
- द्विदलीय व्यवस्था (Two Party System):- सत्ता मुख्यतः दो प्रमुख दलों के बीच बदलती रहती है। उदाहरण — United States, United Kingdom
- बहुदलीय व्यवस्था (Multi Party System):- दो से अधिक दल सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं; गठबंधन सरकार भी बन सकती है। उदाहरण — India
4.5.1 गठबंधन या मोर्चा
गठबंधन या मोर्चा:-
वह व्यवस्था जिसमें कई राजनीतिक दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं या सरकार बनाते हैं।
- यह बहुदलीय व्यवस्था में पाया जाता है।
- कई दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं।
- उद्देश्य चुनाव जीतना और सरकार बनाना होता है।
- छोटे दलों को भी सत्ता में भागीदारी मिलती है।
4.5.2 गठबंधन की सरकार
गठबंधन की सरकार:-
दो या दो से अधिक राजनीतिक दल मिलकर जिस सरकार को बनाते और चलाते हैं।
- किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर आवश्यकता होती है।
- कई दल आपस में मिलकर सरकार बनाते हैं।
- दल साझा कार्यक्रम (Common Programme) के आधार पर काम करते हैं।
- विभिन्न दलों को सत्ता में भागीदारी का अवसर मिलता है।
4.5.3 भारतीय लोकतंत्र में गठबंधन सरकारों की भूमिका
गठबंधन सरकारों की भूमिका:-
गठबंधन सरकारों ने भारत में लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- भारत में 1989 से 2014 तक केंद्र में अधिकतर गठबंधन सरकारें रहीं।
- गठबंधन के कारण क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ा।
- केंद्रीय सरकार को सभी राज्यों व क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देना पड़ता है।
4.6 किसी देश में दलों की संख्या
दलों की संख्या:-
किसी देश में राजनीतिक दलों की संख्या निश्चित नहीं होती, बल्कि यह समय के साथ विकसित होती है।
- कोई निश्चित संख्या तय नहीं की जा सकती।
- दलों की संख्या लंबे समय में धीरे-धीरे विकसित होती है।
- यह देश की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रकृति पर निर्भर करती है।
- राजनीतिक इतिहास और चुनाव प्रणाली भी इसे प्रभावित करते हैं।
- एक बार स्थापित होने के बाद इसे आसानी से बदला नहीं जा सकता।
4.7 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दल
4.7.1 क्षेत्रीय दल
क्षेत्रीय दल:-
वे राजनीतिक दल जो किसी एक राज्य या क्षेत्र के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- राज्य विधानसभा चुनाव में कुल मतों का 6% या उससे अधिक प्राप्त करने पर।
- कम से कम 2 सीटों पर जीत हासिल करने पर।
- दल को राज्य (क्षेत्रीय) दल के रूप में मान्यता मिलती है।
- ये मुख्यतः अपने राज्य या क्षेत्र के मुद्दों पर ध्यान देते हैं।
4.7.2 राष्ट्रीय दल
राष्ट्रीय दल:-
वह राजनीतिक दल जो पूरे देश या कई राज्यों में सक्रिय होकर अपनी पहचान बनाता है।
- लोकसभा चुनाव में कुल वोटों का 6%, या कम से कम चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कुल वोटों का 6% हासिल करना।
- लोकसभा चुनाव में कम से कम चार सीटों पर जीत दर्ज करना।
- इसे राष्ट्रीय दल की मान्यता दी जाती है।
- यह दल कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियाँ करता है।
4.7.3 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दल में अंतर
| विशेषताएँ | राष्ट्रीय राजनीतिक दल | क्षेत्रीय राजनीतिक दल |
|---|---|---|
| विद्यमानता | देश की सभी/अधिकांश इकाइयों में मौजूद | किसी क्षेत्र विशेष या कुछ ही राज्यों में मौजूद |
| मत प्रतिशत | लोकसभा या चार राज्यों की विधानसभा में कुल वोट का कम से कम 6% | राज्य विधानसभा में कुल वोट का 6% या अधिक |
| सीटों में जीत | लोकसभा में कम से कम 4 सीटें | राज्य विधानसभा में कम से कम 2 सीटें |
| उदाहरण | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी | आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल |
4.8 आजादी के बाद भारत में दलीय क्रम
केंद्र सरकारों का क्रम:-
- 1947–1977: केवल कांग्रेस पार्टी की सरकार।
- 1977–1980: जनता पार्टी की सरकार।
- 1980–1989: पुनः कांग्रेस पार्टी की सरकार।
- 1991–1996: कांग्रेस पार्टी की सरकार फिर से बनी।
- 1996–2004: गठबंधन सरकारों का दौर।
- 2004–2014: कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन सरकार।
- 2014: 18 वर्षों बाद किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला।
4.9 राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दल
मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल:-
2017 और 2019 दोनों वर्षों में भारत में 7 दल राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रहे।
- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
- बहुजन समाज पार्टी (BSP)
- आम आदमी पार्टी (AAP)
- तृणमूल कांग्रेस (TMC)
- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)
- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI)
4.9.1 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:-
भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख राजनीतिक पार्टी, जिसकी स्थापना 1885 में हुई थी।
- भारत की आजादी में मुख्य भूमिका रही।
- आजादी के बाद के कई दशकों तक प्रमुख भूमिका निभाई।
- आजादी के बाद के 70 वर्षों में लगभग 50 वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही।
4.9.2 भारतीय जनता पार्टी (BJP)
भारतीय जनता पार्टी:-
भारतीय जन संघ के पुनर्जन्म के रूप में मानी जाने वाली पार्टी, जिसकी स्थापना 1980 में हुई।
- पहली बार 1998 में सत्ता में आई और 2004 तक शासन किया।
- 2014 में पुनः सत्ता में आई और अकेले पूर्ण बहुमत हासिल किया।
- राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मजबूत राजनीतिक प्रभाव रखती है।
4.9.3 बहुजन समाज पार्टी (BSP)
बहुजन समाज पार्टी:-
कांशी राम के नेतृत्व में 1984 में स्थापित पार्टी, जो बहुजन समाज (दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय) के लिए सत्ता चाहती है।
- उत्तर प्रदेश में इसकी पकड़ बहुत मजबूत है।
- उत्तर प्रदेश में यह पार्टी दो बार सरकार बना चुकी है।
4.9.4 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
CPI(M):-
1964 में स्थापित पार्टी, जिसकी विचारधारा मार्क्स और लेनिन के सिद्धांतों पर आधारित है; यह समाजवाद व धर्मनिरपेक्षता का समर्थन करती है।
- पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में अच्छा समर्थन प्राप्त है।
- हाल के वर्षों में लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है; पश्चिम बंगाल की सत्ता हाथ से निकल गई।
4.9.5 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)
CPI:-
भारत की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी।
- 1964 में पार्टी के विभाजन के बाद यह कमजोर हो गई।
- केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ठीक-ठाक समर्थन प्राप्त है।
4.9.6 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)
NCP:-
कांग्रेस पार्टी में फूट के परिणामस्वरूप 1999 में स्थापित पार्टी, जो लोकतंत्र, गांधीवाद, धर्मनिरपेक्षता, समानता, सामाजिक न्याय और संघीय ढाँचे की वकालत करती है।
- महाराष्ट्र में काफी शक्तिशाली है।
- मेघालय, मणिपुर और असम में भी समर्थन प्राप्त है।
4.10 राजनीतिक दलों के सामने चुनौतियाँ
चुनौतियाँ:-
- वंशवाद की चुनौती:- नेतृत्व एक ही परिवार तक सीमित होने से नए नेताओं को अवसर कम मिलता है।
- पारदर्शिता का अभाव:- निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट न होना।
- आंतरिक लोकतंत्र का अभाव:- अधिकांश दलों में आंतरिक चुनाव नियमित नहीं होते।
- विकल्पहीनता:- कई दलों की नीतियाँ एक जैसी होने से मतदाताओं को सही विकल्प चुनने में कठिनाई।
- आपराधिक तत्वों की घुसपैठ:- अपराध से जुड़े लोगों को टिकट मिलने से राजनीति की छवि खराब होती है।
4.11 राजनीतिक दलों में सुधार
हाल में उठाए गए कदम:-
- दल-बदल विरोधी कानून बनाया गया।
- शपथपत्र के माध्यम से संपत्ति और आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य।
- राजनीतिक दलों के लिए सांगठनिक चुनाव व आयकर रिटर्न भरना जरूरी किया गया।
भविष्य के लिए सुझाव:-
- सदस्यों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होना चाहिए।
- महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण होना चाहिए।
- चुनाव खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाना चाहिए।
- आम जनता की राजनीति में भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए।
4.11.1 दल-बदल
दल-बदल:-
जब कोई प्रतिनिधि किसी दल से निर्वाचित होने के बाद उस दल को छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है।
- यह घटना आमतौर पर विधायक या सांसद के स्तर पर होती है।
- सरकार की स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है, लोकतंत्र में अस्थिरता बढ़ती है।
4.11.2 शपथपत्र
शपथपत्र:-
एक आधिकारिक दस्तावेज जिसमें व्यक्ति अपने बारे में निजी सूचनाएँ देता है और उनके सत्य होने की शपथ लेता है।
- इसमें दी गई जानकारी कानूनी रूप से मान्य होती है।
- चुनाव के समय उम्मीदवार अपनी संपत्ति, आय और आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र में देते हैं।
4.11.3 राजनीतिक पक्षपात
राजनीतिक पक्षपात:-
जब कोई राजनीतिक दल समाज के किसी एक विशेष वर्ग या हिस्से के हितों को प्राथमिकता देता है।
- हर दल का संबंध किसी न किसी सामाजिक समूह या वर्ग से होता है, इसलिए नजरिया उसी ओर झुका होता है।
- इससे समाज के अन्य वर्गों के हित नजरअंदाज हो सकते हैं।