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Class 9 geography Notes in hindI Chapter - 5

Chapter 5: Natural Vegetation and Wildlife
Chapter Introduction: 
This chapter explains types of vegetation, wildlife diversity, and conservation methods in India.

FAQ
Ques. Are conservation topics important?
Ans.Yes, biodiversity and conservation are important topics.

CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI
CHAPTER 5 : प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी

प्रश्न :-  प्राकृतिक वनस्पति क्या होती है?

उत्तर :- प्राकृतिक वनस्पति :- वनस्पति का वह भाग जो मनुष्य की सहायता के बिना स्वयं उगता है और जिस पर लंबे समय तक मानवीय प्रभाव नहीं पड़ता, उसे प्राकृतिक (अक्षत) वनस्पति कहते हैं।

प्राकृतिक वनस्पति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. यह अपने आप प्राकृतिक रूप से विकसित होती है।

2. इसमें मनुष्य द्वारा बोआई या देखभाल नहीं की जाती।

3. यह किसी क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार पनपती है।

4. लंबे समय तक उस पर मानव हस्तक्षेप नहीं होता।

उदाहरण :-
हिमालय के घने वन और अंडमान-निकोबार के जंगल प्राकृतिक वनस्पति के उदाहरण हैं।

प्रश्न :- देशज वनस्पति क्या होती है?

उत्तर :- देशज वनस्पति :- वह वनस्पति जो किसी क्षेत्र में मूल रूप से उत्पन्न हुई हो और वहीं स्वाभाविक रूप से पाई जाती हो, उसे देशज वनस्पति कहते हैं।

देशज वनस्पति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. यह किसी देश या क्षेत्र की मूल वनस्पति होती है।

2. यह वहाँ की जलवायु और मिट्टी के अनुसार विकसित होती है।

3. इसे बाहर से लाकर नहीं लगाया जाता।

4. यह प्राकृतिक रूप से लंबे समय से उस क्षेत्र में पाई जाती है।

उदाहरण :-

साल और सागौन के वृक्ष भारत की देशज वनस्पति के उदाहरण हैं।

प्रश्न :- विदेशज वनस्पति क्या होती है ?

उत्तर :- विदेशज वनस्पति :- जो पौधे किसी देश में बाहर से लाए गए हों और वहाँ स्वाभाविक रूप से उत्पन्न न हुए हों, उन्हें विदेशज वनस्पति कहते हैं।

विदेशज वनस्पति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. ये पौधे उस देश के मूल निवासी नहीं होते।

2. इन्हें दूसरे देशों से लाकर लगाया जाता है।

3. ये नई जलवायु में अनुकूल होकर विकसित हो जाते हैं।

4. कभी-कभी ये स्थानीय वनस्पति को प्रभावित भी कर सकते हैं।

उदाहरण :-
यूकेलिप्टस और चीड़ के कुछ प्रकार भारत में बाहर से लाए गए पौधों के उदाहरण हैं।

 

प्रश्न :- बायोम क्या होता है?

उत्तर :- बायोम :- भूमि पर स्थित एक बहुत बड़ा परितंत्र (Ecosystem), जिसमें विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं, उसे बायोम कहते हैं।

बायोम की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. यह बहुत बड़े क्षेत्र में फैला होता है।

2. इसमें विशेष प्रकार की जलवायु पाई जाती है।

3. इसमें एक जैसी वनस्पतियाँ और उनसे जुड़े जीव-जंतु होते हैं।

4. प्रत्येक बायोम की अपनी अलग पहचान होती है।

उदाहरण :-

रेगिस्तान, घासभूमि और वर्षावन विभिन्न प्रकार के बायोम के उदाहरण हैं।

प्रश्न :- वनस्पति तथा वन्य प्राणियों में विविधता के कारण क्या हैं?

उत्तर :- वनस्पति और वन्य प्राणियों में विविधता विभिन्न प्राकृतिक कारकों के कारण पाई जाती है।

 

वनस्पति तथा वन्य प्राणियों में विविधता के निम्नलिखित कारण हैं :-

1. भूभाग (Relief) :- वनस्पति पर भूमि का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। कृषि, उपजाऊ भूमि पर की जाती है। ऊबड़-खाबड़ भूमि पर जंगल और घास के मैदान पाए जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में वन्य प्राणी अधिक संख्या में रहते हैं।

2. मृदा (Soil) :- अलग-अलग स्थानों पर अलग प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। प्रत्येक मिट्टी विशेष प्रकार की वनस्पति को बढ़ावा देती है। मरुस्थल की बलुई मिट्टी में कंटीली झाड़ियाँ उगती हैं। नदियों के डेल्टा क्षेत्रों में पर्णपाती वन पाए जाते हैं।

3. तापमान (Temperature) :- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है।  हिमालय की ढलानों और प्रायद्वीपीय पहाड़ियों में 915 मीटर से ऊपर तापमान कम हो जाता है। इससे वनस्पति ऊष्णकटिबंधीय से उपोष्ण, शीतोष्ण और अल्पाइन प्रकार में बदल जाती है।

3. सूर्य का प्रकाश (Sunlight) :- अधिक समय तक प्रकाश मिलने से पौधों की वृद्धि तेज होती है। गर्मी के मौसम में वृक्ष तेजी से बढ़ते हैं।

4. वर्षण (Rainfall) :- अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में घने वन पाए जाते हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में झाड़ियाँ और घास अधिक मिलती हैं। उदाहरण :- मेघालय जैसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में घने वन पाए जाते हैं, जबकि राजस्थान के मरुस्थल में कंटीली झाड़ियाँ मिलती हैं।

प्रश्न :- उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन क्या होते हैं ?

उत्तर :- उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन :- वे वन जो भूमध्य रेखा के दोनों ओर लगभग 5° उत्तर और 5° दक्षिण अक्षांश के बीच पाए जाते हैं, उन्हें उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन कहते हैं।

उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. ये क्षेत्र वर्ष भर अधिक तापमान वाले होते हैं।

2. यहाँ अत्यधिक वर्षा होती है।

3. वन बहुत घने और सदाबहार होते हैं।

4. वृक्षों की ऊँचाई अधिक होती है और अनेक प्रकार की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

5. यहाँ जैव विविधता बहुत अधिक होती है।

उदाहरण :-

अमेज़न बेसिन और कांगो बेसिन में उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन पाए जाते हैं।

प्रश्न :- वनों के क्या-क्या लाभ हैं ?

उत्तर :- वनों के निम्नलिखित लाभ हैं :- 

1. वर्षा लाने में सहायक – वन वाष्पोत्सर्जन द्वारा वातावरण में नमी बढ़ाते हैं।

2. ऑक्सीजन की आपूर्ति – वृक्ष प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।

3. खाद की प्राप्ति – पत्तियों के सड़ने से जैविक खाद बनती है।

4. बाढ़ तथा भूमि कटाव की रोकथाम – पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधे रखती हैं।

5. वन्य प्राणियों का आश्रय स्थल – अनेक जीव-जंतु वनों में निवास करते हैं।

6. जलवायु को संतुलित रखना – वन तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित करते हैं।

7. खाद्य पदार्थों की प्राप्ति – फल, मेवे, शहद आदि प्राप्त होते हैं।

8. ईंधन और उद्योगों के लिए सहायक – लकड़ी ईंधन तथा कागज, फर्नीचर आदि उद्योगों में काम आती है।

9. औषधियों की प्राप्ति – अनेक औषधीय पौधे वनों में पाए जाते हैं।

उदाहरण :-

नीम और तुलसी जैसे पौधे औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं, जबकि सागौन की लकड़ी फर्नीचर बनाने में काम आती है।

प्रश्न :- भारत की प्राकृतिक वनस्पति और जैव विविधता की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर :- भारत की प्राकृतिक वनस्पति :- भारत जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के प्रमुख देशों में से एक है।

भारत की प्राकृतिक वनस्पति और जैव विविधता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. भारत विश्व के 12 प्रमुख जैव विविधता वाले देशों में शामिल है।

2. यहाँ लगभग 47,000 प्रजातियों के पौधे पाए जाते हैं।

3. पौधों की विविधता के आधार पर भारत विश्व में दसवें स्थान पर तथा एशिया में चौथे स्थान पर है।

4. भारत में लगभग 15,000 फूलों वाले पौधे पाए जाते हैं, जो विश्व के कुल फूलों वाले पौधों का लगभग 6% हैं।

5. यहाँ बिना फूलों वाले पौधे जैसे फर्न, शैवाल (एल्गी) और कवक (फंजाई) भी मिलते हैं।

6. भारत में लगभग 90,000 प्रजातियों के जीव-जंतु पाए जाते हैं।

7. विभिन्न प्रकार की मछलियाँ ताजे पानी और समुद्री जल दोनों में पाई जाती हैं।

उदाहरण :-

हिमालय क्षेत्र में देवदार और चीड़ के वृक्ष मिलते हैं, जबकि पश्चिमी घाट में अनेक दुर्लभ पौधों और जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

प्रश्न :- भारत की प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार कौन-कौन से हैं?

उत्तर :- भारत की प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार :- भारत की प्राकृतिक वनस्पति को मुख्यतः निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा गया है :

1. उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन (सदाबहार वन) :- ये अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं। वृक्ष घने और ऊँचे होते हैं।

2. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन :- इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है। ये शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। भारत में सबसे अधिक क्षेत्र में पाए जाते हैं।

3. कंटीले वन या झाड़ियाँ :- कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनमें कंटीले पौधे और झाड़ियाँ होती हैं। ये शुष्क और अर्ध-शुष्क प्रदेशों में मिलते हैं।

4. पर्वतीय वन :- पर्वतीय क्षेत्रों में ऊँचाई के अनुसार पाए जाते हैं। ऊँचाई बढ़ने पर वनस्पति का प्रकार बदलता है।

5. मैंग्रोव वन :- ये तटीय और डेल्टा क्षेत्रों में पाए जाते हैं। खारे पानी में उगने की क्षमता रखते हैं।

उदाहरण :-
राजस्थान में कंटीले वन मिलते हैं, जबकि सुंदरवन क्षेत्र में मैंग्रोव वन पाए जाते हैं।

प्रश्न :- उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन (सदाबहार वन) की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर :- उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन (सदाबहार वन) :- ये वन अधिक वर्षा और गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन (सदाबहार वन) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. वितरण क्षेत्र :- पश्चिमी घाट के अधिक वर्षा वाले क्षेत्र, लक्षद्वीप द्वीपसमूह, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम का ऊपरी भाग, तमिलनाडु का तटीय क्षेत्र

2. जलवायु संबंधी विशेषताएँ :- जहाँ 200 सेमी से अधिक वर्षा होती है। वर्ष भर गर्म और आर्द्र जलवायु रहती है। शुष्क ऋतु बहुत कम समय के लिए होती है।

3. वनस्पति की विशेषताएँ :- वृक्षों की ऊँचाई लगभग 60 मीटर या उससे अधिक होती है। पेड़, झाड़ियाँ और लताएँ अधिक मात्रा में पाई जाती हैं। पतझड़ का कोई निश्चित समय नहीं होता। ये वन वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं। प्रमुख व्यापारिक वृक्ष — आबनूस, महोगनी, रोजवुड, रबड़ और सिंकोना।

4. प्रमुख वन्य जीव :- हाथी, बन्दर और लंगूर, एक सींग वाला गैंडा, लैमुर, हिरण

उदाहरण :-

पश्चिमी घाट और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में सदाबहार वन पाए जाते हैं, जहाँ वर्ष भर हरियाली बनी रहती है।

प्रश्न :- उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन क्या हैं ? इनके प्रकार और विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर :- उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन :- ये भारत में सबसे अधिक क्षेत्र में फैले वन हैं। इन्हें मानसूनी वन भी कहा जाता है। ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 70 से 200 सेमी तक वार्षिक वर्षा होती है। ग्रीष्म ऋतु में पेड़ लगभग 6–8 सप्ताह के लिए अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।

इसके निम्नलिखित दो प्रकार हैं :-

1. आद्र पर्णपाती वन :- 100 से 200 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।  

वितरण क्षेत्र :- उत्तर-पूर्वी राज्य, हिमालय के गिरीपद, झारखंड, पश्चिमी ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी घाट की पूर्वी ढाल। 

प्रमुख वृक्ष :- सागौन (सबसे महत्वपूर्ण), बांस, शीशम, चंदन, कुसुम, अर्जुन, शहतूत।

2. शुष्क पर्णपाती वन :- 70 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
वितरण क्षेत्र :- उत्तर प्रदेश, बिहार तथा प्रायद्वीपीय पठार के कुछ भाग।
प्रमुख वृक्ष :-  सागौन, पीपल, नीम।

प्रमुख जीव :- शेर, सूअर, हिरण, हाथी, साँप, कछुए।

उदाहरण :-

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सागौन के वन उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वनों के उदाहरण हैं।

प्रश्न :- कंटीले वन या झाड़ियाँ क्या हैं ? उनकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर :- कंटीले वन या झाड़ियाँ :- ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ 70 सेमी से कम वर्षा होती है।

उनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. कम वर्षा और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

2. देश के उत्तर-पश्चिमी भाग में अधिक मिलते हैं।

3. प्रमुख क्षेत्र — गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के कुछ भाग।

4. प्रमुख पौधे — बबूल (अकेशिया), खजूर, नागफनी।

5. वृक्ष बिखरे हुए होते हैं।

6. जड़ें लंबी और दूर तक फैली होती हैं, जिससे वे जल प्राप्त कर सकें।

7. पत्तियाँ छोटी होती हैं, जिससे जल का कम वाष्पीकरण हो।

प्रमुख वन्य जीव :- चूहे, खरगोश, लोमड़ी, भेड़िए, जंगली गधा, ऊँट तथा घोड़े।

उदाहरण :- 

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में नागफनी और बबूल के कंटीले वन पाए जाते हैं।

प्रश्न :- पर्वतीय वनों की विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर :- पर्वतीय वन :- पर्वतीय क्षेत्रों में ऊँचाई बढ़ने और तापमान घटने के साथ वनस्पति में परिवर्तन होता है।

पर्वतीय वनों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. ऊँचाई के अनुसार वनस्पति का विभाजन :- 

(i) 1000 से 2000 मीटर तक :- आद्र शीतोष्ण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं। चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष जैसे — ओक और चेस्टनट मिलते हैं।

(ii) 1500 से 3000 मीटर तक :- शंकुधारी वन पाए जाते हैं। 

प्रमुख वृक्ष :- चीड़, देवदार और सिल्वर फर। ये वन हिमालय की दक्षिणी ढाल तथा दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत के ऊँचे भागों में मिलते हैं।

(iii) 3600 मीटर से अधिक ऊँचाई :- यहाँ अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है। 

प्रमुख वृक्ष :- सिल्वर फर, जुनिपर, पाइन, बर्च। हिमरेखा के पास वृक्ष छोटे होकर झाड़ियों में बदल जाते हैं। आगे चलकर अल्पाइन घास के मैदान मिलते हैं।

2. मानव उपयोग :- गुज्जर और बक्करवाल जनजातियाँ इन घास के मैदानों का उपयोग पशु-चारण के लिए करती हैं।

3. प्रमुख वन्य जीव :- कश्मीरी हिरण, चितराहिरण, जंगली भेड़, खरगोश, तिब्बती बारासिंघा, हिम तेंदुआ, रीछ,  लाल पांडा, तथा जंगली बकरी

उदाहरण :-

हिमालय क्षेत्र में ऊँचाई के अनुसार चीड़ और देवदार से लेकर अल्पाइन घास के मैदान तक विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है।

 

प्रश्न :- मैंग्रोव वन क्या हैं ? उनकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर :- मैंग्रोव वन :- मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाली विशेष प्रकार की वनस्पति है, जहाँ ज्वार-भाटा आता है।

मैंग्रोव वन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :-

1. ये वन समुद्र तट और नदी के डेल्टा क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

2. इन पौधों की जड़ें पानी में डूबी रहती हैं।

3. मिट्टी और बालू तटों पर जमा हो जाती है, जिससे यह वनस्पति विकसित होती है।

4. खारे पानी में भी उगने की क्षमता होती है।

प्रमुख क्षेत्र :- गंगा डेल्टा, ब्रह्मपुत्र डेल्टा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियों के डेल्टा क्षेत्र

प्रमुख वृक्ष :- सुंदरी (गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में), नारियल, ताड़, तथा केवड़ा

प्रमुख वन्य जीव :- रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ, कछुए, घड़ियाल, तथा साँप

उदाहरण :- सुंदरवन क्षेत्र में मैंग्रोव वन पाए जाते हैं, जहाँ सुंदरी वृक्ष और रॉयल बंगाल टाइगर प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न :- भारत में वन्य प्राणियों की स्थिति का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- वन्य प्राणी :- भारत वन्य प्राणियों की विविधता के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।

भारत में वन्य प्राणियों की स्थिति के विषय में मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं :-

1. भारत में लगभग 90,000 प्रजातियों के जानवर पाए जाते हैं।

2. यहाँ ताजे पानी और समुद्री जल दोनों में विभिन्न प्रकार की मछलियाँ मिलती हैं।

3. देश में 2000 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

4. लगभग 2,546 प्रजातियों की मछलियाँ भारत में उपलब्ध हैं।

5. यह विविधता भारत की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है।

उदाहरण :-

भारत में मोर, बाघ, हाथी जैसे वन्य प्राणी तथा गंगा और समुद्र में अनेक प्रकार की मछलियाँ पाई जाती हैं।

प्रश्न :- भारत में वन्यजीवों का वितरण कैसे पाया जाता है?

उत्तर :- भारत में वन्यजीवों का वितरण :- भारत में विभिन्न जलवायु और स्थलरूपों के कारण वन्यजीव अलग-अलग क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

1. स्तनधारी जीव :- 

(i) हाथी — असम, कर्नाटक और केरल के ऊष्ण एवं आद्र वनों में पाए जाते हैं।

(ii) एक सींग वाला गैंडा — पश्चिम बंगाल और असम के दलदली क्षेत्रों में मिलता है।

(iii) जंगली गधा और ऊँट — कच्छ का रन और थार मरुस्थल में पाए जाते हैं। 

(iv) शेर और बाघ —  भारत विश्व का एकमात्र देश है जहाँ शेर और बाघ दोनों पाए जाते हैं। भारतीय शेर का प्राकृतिक निवास गुजरात के गिर वन में है। बाघ मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल के सुंदरवन तथा हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

नोट :- 

भारतीय भैंसा, नीलगाय, चौसिंघा, छोटा मृग तथा विभिन्न प्रकार के हिरण भी मिलते हैं। बंदरों की अनेक प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं।

2. अन्य प्रमुख जीव :- 

(i) तेंदुआ शिकारी जीवों में प्रमुख है। 

(ii) लद्दाख की ऊँचाइयों में याक पाए जाते हैं।

(iii) तिब्बती बारहसिंघा, नीली भेड़, जंगली भेड़ और कियांग भी पर्वतीय क्षेत्रों में मिलते हैं।

(iv) लाल पांडा कुछ पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

3. जलजीव :- 

(i) नदियों, झीलों और समुद्री क्षेत्रों में कछुए, मगरमच्छ और घड़ियाल पाए जाते हैं।

(ii) घड़ियाल मगरमच्छ की ऐसी प्रजाति है जो विश्व में मुख्यतः भारत में पाई जाती है।

4. पक्षी :-

(i) भारत में अनेक रंग-बिरंगे पक्षी पाए जाते हैं — जैसे मोर, बत्तख, तोता, मैना, सारस और कबूतर।

उदाहरण :-

गुजरात के गिर वन में शेर पाए जाते हैं, जबकि असम में एक सींग वाला गैंडा प्रसिद्ध है।

प्रश्न :- वन्य प्राणियों को संकट क्यों उत्पन्न हुआ है?

उत्तर :- वन्य प्राणियों को संकट :- मनुष्य द्वारा पादपों और जीवों के अत्यधिक उपयोग से पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो गया है, जिससे अनेक प्रजातियाँ संकट में आ गई हैं।

मुख्य कारण एवं तथ्य निम्नलिखित हैं :-

1. प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन।

2. वनों की कटाई और आवास का नष्ट होना।

3. पर्यावरण प्रदूषण।

4. शिकार और अवैध व्यापार।

5. लगभग 1300 पादप प्रजातियाँ संकटग्रस्त हो चुकी हैं।

6. लगभग 20 प्रजातियाँ पूर्णतः विलुप्त हो चुकी हैं।

उदाहरण :-

वनों की कटाई के कारण कई जंगली जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, जिससे वे संकट में पड़ रहे हैं।

प्रश्न :- वन्य प्राणियों के बचाव के लिए भारत सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए हैं?

उत्तर :- वन्य प्राणियों का बचाव के लिए  भारत सरकार ने पादप और जीव संपत्ति की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं :- 

1. देश में 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves) स्थापित किए गए हैं। इनमें से प्रमुख हैं :- सुंदरवन, नंदा देवी, मन्नार की खाड़ी, नीलगिरि, ग्रेट निकोबार, मानस, सिमलीपाल, पंचमढ़ी, अचनाकमार-अमरकंटक

2. सन 1992 से पादप उद्यानों को वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

3. शेर संरक्षण, गैंडा संरक्षण और भारतीय भैंसा संरक्षण जैसी विशेष योजनाएँ चलाई गई हैं।

4. पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए अनेक कार्यक्रम लागू किए गए हैं।

5. देश में लगभग 103 राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किए गए हैं।

6. लगभग 535 वन्य प्राणी अभयारण्य बनाए गए हैं।

7. अनेक चिड़ियाघर भी स्थापित किए गए हैं।

उदाहरण :-

गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान शेरों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है, जबकि असम का काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान गैंडे की सुरक्षा के लिए जाना जाता है।

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