CLASS 9 GEOGRAPHY NOTES IN HINDI CHAPTER - 2
भारत की भौतिक विशेषताएँ (Physical Features of India)
| Textbook | NCERT |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Geography |
| Chapter | Chapter 2 |
| Chapter Name | भारत की भौतिक विशेषताएँ |
| Medium | Hindi |
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
2.1 भारत का भौगोलिक विभाजन
भारत की भौतिक विविधता:-
भारत का भौतिक स्वरूप विश्व में पाई जाने वाली लगभग सभी प्रकार की भू-आकृतियों का मिश्रण है। यहाँ पर्वत, मैदान, पठार, मरुस्थल और द्वीप समूह — सभी प्रकार की भू-आकृतियाँ मौजूद हैं।
- यहाँ भिन्न-भिन्न प्रकार के शैल खंड मिलते हैं — कुछ कठोर तथा कुछ मुलायम।
- भिन्न-भिन्न प्रकार की मृदाएँ पाई जाती हैं, जिनका वर्गीकरण रंग और बनावट के आधार पर होता है।
- मृदा का रंग और स्वरूप इस बात पर निर्भर करता है कि उसका निर्माण किस शैल से हुआ है।
क्षेत्रफल के आधार पर विभाजन:-
भूगोलवेत्ताओं ने भारत के कुल क्षेत्रफल को चार श्रेणियों में बाँटा है:
| भाग | प्रतिशत क्षेत्रफल |
|---|---|
| पर्वतीय क्षेत्र | 10.7% |
| पहाड़ियाँ | 18.6% |
| पठारी क्षेत्र | 27.7% |
| मैदानी भाग | 43% |
2.1.1 प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत
प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत:-
यह वैज्ञानिक सिद्धांत है जो पृथ्वी की सतह पर बनने वाली भौतिक आकृतियों की उत्पत्ति की व्याख्या करता है।
- पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी (क्रस्ट) सात बड़ी और कुछ छोटी प्लेटों में विभाजित है।
- ये प्लेटें निरंतर धीमी गति से खिसकती रहती हैं।
- प्लेटों की गति के कारण ही पर्वत, पठार, ज्वालामुखी और भूकंप क्षेत्र बनते हैं।
भारत की प्रमुख भौगोलिक इकाइयाँ:-
- हिमालय पर्वतखला — देश की उत्तरी सीमा पर स्थित, ठंडी हवाओं से रक्षा करती है।
- उत्तरी मैदान — सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित, अत्यंत उपजाऊ।
- प्रायद्वीपीय पठार — भारत का सबसे प्राचीन भूभाग, खनिज संसाधनों से समृद्ध।
- भारतीय मरुस्थल (थार) — बहुत कम वर्षा वाला क्षेत्र।
- तटीय मैदान — अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के किनारे फैला, प्रमुख बंदरगाह स्थित।
- द्वीप समूह — अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप, सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण।
2.2 हिमालय पर्वत
हिमालय पर्वत:-
हिमालय भारत को मध्य एशिया की ठंडी हवाओं से बचाता है, जिससे देश की जलवायु पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसे नवीन वलित पर्वत कहा जाता है और यह देश की उत्तरी सीमा का निर्धारण करता है।
- हिमालय सिंधु नदी से लेकर ब्रह्मपुत्र नदी तक फैला हुआ है।
- कुल लंबाई लगभग 2400 किलोमीटर है।
- चौड़ाई कश्मीर में लगभग 400 किमी और अरुणाचल प्रदेश में लगभग 150 किमी है।
2.2.1 हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक
हिमाद्रि (महान/आंतरिक हिमालय):-
हिमालय की सबसे उत्तरी एवं सर्वोच्च, सबसे सतत पर्वत श्रृंखला है।
- औसत ऊँचाई लगभग 6,000 मीटर।
- हिमालय के सभी प्रमुख व सर्वोच्च शिखर इसी श्रेणी में स्थित हैं।
- क्रोड क्रिस्टलीय (ग्रेनाइट) शैल से बना, सदैव हिमाच्छादित रहता है।
- इसी क्षेत्र से अनेक हिमानियाँ (ग्लेशियर) निकलती हैं।
हिमाचल (निम्न/मध्य हिमालय):-
हिमाद्रि के दक्षिण में स्थित, हिमालय की सबसे असमान बनावट वाली श्रृंखला है।
- ऊँचाई 3,700 से 4,500 मीटर के बीच, औसत चौड़ाई लगभग 50 किमी।
- पीर पंजाल इस श्रेणी की सबसे लंबी व महत्त्वपूर्ण खला है; धौलाधर व महाभारत श्रेणियाँ भी इसमें शामिल हैं।
- कश्मीर, कांगड़ा और कुल्लू घाटियाँ इसी भाग में स्थित हैं।
शिवालिक:-
हिमालय की सबसे बाहरी और सबसे नई पर्वत श्रृंखला, जो मुख्य हिमालय से नदियों द्वारा लाए गए असंपिंडित अवसादों से बनी है।
- चौड़ाई 10-50 किमी, ऊँचाई लगभग 900-1,100 मीटर।
- घाटियाँ बजरी और जलोढ़ की मोटी परतों से ढँकी रहती हैं।
- हिमाचल और शिवालिक के बीच स्थित लंबवत घाटी को दून कहा जाता है।
हिमालय के प्रमुख दर्रे:-
- काराकोरम दर्रा
- रोहतांग दर्रा
- जोजिला दर्रा
- बुर्जिल दर्रा
- पीरपंजाल दर्रा
- शिपकीला दर्रा
2.2.2 पश्चिम से पूर्व विभाजन
पश्चिम से पूर्व हिमालय विभाजन:-
देशांतर दिशा (पश्चिम से पूर्व) के आधार पर हिमालय को चार भागों में बाँटा गया है।
| भाग | विस्तार |
|---|---|
| पंजाब हिमालय | सिंधु से सतलुज नदी के बीच |
| कुमाऊँ हिमालय | सतलुज से काली नदी के बीच |
| नेपाल हिमालय | काली से तिस्ता नदी के बीच |
| असम हिमालय | तिस्ता से ब्रह्मपुत्र नदी तक |
2.3 उत्तरी मैदान
उत्तरी मैदान:-
उत्तरी मैदान का निर्माण सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा हिमालय के गिरिपाद में लाखों वर्षों तक जमा जलोढ़ अवसादों से हुआ है।
- कुल विस्तार लगभग 7 लाख वर्ग किमी, लंबाई लगभग 2400 किमी।
- चौड़ाई 240 से 320 किमी के बीच।
- भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला और सर्वाधिक कृषि उत्पादक क्षेत्र, इसलिए इसे भारत का "अन्न भंडार" कहा जाता है।
2.3.1 उत्तरी मैदान के भाग
गंगा का मैदान, पंजाब का मैदान और ब्रह्मपुत्र का मैदान:-
- गंगा का मैदान — घाघरा से तिस्ता नदी तक फैला, इसमें हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के भाग और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
- पंजाब का मैदान — सिंधु और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित पश्चिमी भाग, जिसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में स्थित है।
- ब्रह्मपुत्र का मैदान — पूर्वी क्षेत्र, विशेषकर असम में स्थित, नदी के जलोढ़ अवसादों से बना।
2.3.2 भाबर, तराई, भांगर और खादर
भाबर:-
नदियाँ पर्वतों से उतरते समय शिवालिक की ढाल पर 8-16 किमी चौड़ी पट्टी में गुटिकाश्म (कंकड़-पत्थर) का निक्षेपण करती हैं। सभी नदियाँ इस पट्टी में विलुप्त हो जाती हैं।
तराई:-
भाबर पट्टी के दक्षिण में नदियाँ पुनः प्रकट होती हैं और नम, दलदली क्षेत्र बनाती हैं।
भांगर:-
उत्तरी मैदान का सबसे विशाल भाग, जो पुराने जलोढ़ निक्षेप से बना है और बाढ़ वाले मैदान से ऊँचा स्थित है। इसकी मृदा में चूनेदार निक्षेप (कंकड़) पाए जाते हैं।
खादर:-
बाढ़ वाले मैदानों का नया व युवा जलोढ़ निक्षेप, जो हर वर्ष पुनः निर्मित होता है और अत्यंत उपजाऊ होता है — गहन कृषि के लिए आदर्श माना जाता है।
दोआब:-
दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहा जाता है — 'दो' अर्थात दो नदियाँ और 'आब' अर्थात पानी।
2.4 प्रायद्वीपीय पठार
प्रायद्वीपीय पठार:-
मेज़ जैसी आकृति वाला यह स्थल पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय और रूपांतरित शैलों से बना है और गोंडवाना भूमि के टूटने से बना माना जाता है। इसके दो मुख्य भाग हैं — मध्य उच्चभूमि और दक्कन का पठार।
मध्य उच्चभूमि:-
प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है, मुख्यतः मालवा के पठार पर फैला हुआ है।
- विंध्य श्रेणी इसकी दक्षिण सीमा बनाती है।
- सतपुड़ा श्रेणी दक्षिण में और अरावली पर्वत उत्तर-पश्चिम में इसे घेरते हैं।
- पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई मरुस्थल से मिल जाता है।
दक्कन का पठार:-
त्रिभुजाकार भूभाग जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। उत्तर में सतपुड़ा खला है और पूर्वी विस्तार में महादेव, कैमूर व मैकाल श्रेणियाँ स्थित हैं। पठार पश्चिम में ऊँचा और पूर्व की ओर ढालवाला है।
दक्कन ट्रैप:-
प्रायद्वीपीय पठार का वह क्षेत्र जहाँ काली मृदा पाई जाती है, जो कृषि के लिए उपजाऊ मानी जाती है। यह मुख्यतः महाराष्ट्र और मध्य भारत में फैला है।
डेल्टा:-
यह वह भू-आकृति है जो नदी के सागर में मिलने से पहले प्रवाह धीमा होने पर मलबे (अवसाद) के जमाव से बनती है और त्रिभुजाकार आकार लेती है।
2.5 भारतीय मरुस्थल
भारतीय मरुस्थल (थार):-
- अरावली पहाड़ियों के पश्चिमी किनारे पर स्थित।
- बालू के टिब्बों से ढँका तरंगित मैदान।
- वार्षिक वर्षा 150 मिमी से भी कम, शुष्क जलवायु वाला क्षेत्र।
- वनस्पति बहुत कम पाई जाती है।
2.6 तटीय मैदान
तटीय मैदान:-
प्रायद्वीपीय पठार के किनारों पर स्थित संकीर्ण तटीय पट्टियाँ, जो अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक फैली हैं।
- पश्चिमी तट — पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच संकीर्ण मैदान।
- पूर्वी तट — बंगाल की खाड़ी और पूर्वी घाट के बीच विस्तृत और समतल मैदान।
तटीय मैदान के तीन भाग:-
- कोंकण तट (उत्तरी भाग) — मुख्यतः मुंबई और गोवा क्षेत्र।
- कन्नड़/कर्नाटक तट (मध्य भाग) — कर्नाटक तटीय क्षेत्र।
- मालाबार तट (दक्षिणी भाग) — केरल तटीय क्षेत्र।
2.7 भारत के द्वीप समूह
लक्षद्वीप (अरब सागर के द्वीप):-
- छोटे प्रवाल द्वीपों से बना समूह; पहले लकादीव, मिनिकॉय और अमीनदीवी कहलाता था, 1973 में नाम बदलकर लक्षद्वीप रखा गया।
- क्षेत्रफल केवल 32 वर्ग किमी; प्रशासनिक मुख्यालय कावारत्ती द्वीप।
- यहाँ पादप व जंतु विविधता पाई जाती है; पिट्टी द्वीप पक्षी अभयारण्य है, यहाँ मानव निवास नहीं है।
अंडमान और निकोबार (बंगाल की खाड़ी के द्वीप):-
- अंडमान (उत्तर) और निकोबार (दक्षिण) में विभाजित; आकार में बड़े और बिखरे हुए हैं।
- माना जाता है कि ये द्वीप जलमग्न पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर हैं।
- सुरक्षा की दृष्टि से यह द्वीप समूह महत्त्वपूर्ण है; यहाँ पादप-जंतु विविधता बहुत अधिक है।
- द्वीप विषुवतीय जलवायु और घने जंगलों से आच्छादित हैं।