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Class 9 SCIENCE NOTES IN HINDI CHAPTER 11

Chapter 11: Sound
Chapter Introduction: 
This chapter explains sound, its properties, and propagation. Students learn about frequency, amplitude, and applications of sound.

FAQ
Ques. Are diagram-based questions asked from this chapter?
Ans. Yes, diagrams related to sound waves are important.

CLASS 9 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 11 : ध्वनि

प्रश्न :- ध्वनि क्या है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि :- ऊर्जा का एक रूप है, जो तरंगों के रूप में एक माध्यम (जैसे हवा, जल, ठोस) से होकर संचरित होती है। यह हमारे कानों में श्रवण संवेदना उत्पन्न करती है, जिससे हम विभिन्न आवाजें सुन पाते हैं।

ध्वनि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है जो कणों के कंपन से उत्पन्न होती है।

2. यह तरंगों के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा करती है।

3. ध्वनि को सुनने के लिए माध्यम का होना आवश्यक है (जैसे – हवा)।

4. यह ऊर्जा का एक रूप है और इस पर ऊर्जा संरक्षण का नियम लागू होता है।

5. निर्वात (वैक्यूम) में ध्वनि का संचरण नहीं हो सकता।
उदाहरण :-

जब हम ड्रम बजाते हैं, तो उसकी झिल्ली में कंपन होता है। यह कंपन आस-पास की हवा में तरंगें उत्पन्न करता है, जो हमारे कानों तक पहुँचकर ध्वनि उत्पन्न करता है।

प्रश्न :- ध्वनि का उत्पादन कैसे होता है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि :- ध्वनि का उत्पादन तब होता है जब कोई वस्तु कंपन (वाइब्रेशन) करती है। वस्तु के कंपन से आस-पास के कण भी कंपन करने लगते हैं और यह कंपन तरंगों के रूप में हमारे कानों तक पहुँचता है, जिससे हम ध्वनि सुनते हैं।

ध्वनि उत्पादन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. कंपनशील वस्तुएँ ही ध्वनि उत्पन्न करती हैं।

2. कंपन के लिए आवश्यक ऊर्जा किसी बाहरी स्रोत (जैसे हाथ, हवा, या यंत्र) से मिलती है।

3. कंपन रुकते ही ध्वनि बंद हो जाती है।

4. ध्वनि का निर्माण एक ऊर्जा परिवर्तन प्रक्रिया है (यांत्रिक ऊर्जा → ध्वनि ऊर्जा)।
उदाहरण :-

जब हम तबले या ड्रम की तनित झिल्ली पर हाथ से मारते हैं, तो झिल्ली कंपित होती है और इसी कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न :- ध्वनि उत्पन्न करने के कौन-कौन से तरीके होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि उत्पन्न करने के कई तरीके होते हैं, जो वस्तुओं के कंपन के प्रकार पर आधारित होते हैं।

 ध्वनि उत्पन्न के प्रमुख तरीके निम्नलिखित है :-

1. कंपन करते तंतु से :-  जब कोई तंतु (तार) कंपित होता है तो ध्वनि उत्पन्न होती है।
उदाहरण :- सितार, वीणा, गिटार आदि।

2. कंपन करती वायु से :- जब वायु का प्रवाह कंपन करता है, तब भी ध्वनि उत्पन्न होती है।
उदाहरण :- बाँसुरी, हारमोनियम, शंख आदि।

3. कंपन करती तनित झिल्ली से :- तन कर रखी गई झिल्ली कंपन करके ध्वनि उत्पन्न करती है।
उदाहरण :- तबला, ड्रम, ढोलक आदि।

4. कंपन करती प्लेटों से :- धातु की प्लेटें जब टकराकर कंपन करती हैं तो ध्वनि निकलती है।
उदाहरण :-  साइकिल की घंटी, थाली बजाना।

5. घर्षण द्वारा :- दो वस्तुओं को रगड़ने या खुरचने से उत्पन्न कंपन से भी ध्वनि निकलती है।
उदाहरण :- आरी से लकड़ी काटते समय, दो पत्थरों को रगड़ने पर।

प्रश्न :- ध्वनि का संचरण किस प्रकार होता है? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि का संचरण :- एक माध्यम की सहायता से होता है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के कणों में भी कंपन उत्पन्न करती है, और यही कंपन ध्वनि के रूप में आगे बढ़ते हैं।

ध्वनि  संचरण की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. माध्यम क्या है :- वह पदार्थ जिसमें होकर ध्वनि यात्रा करती है, उसे माध्यम कहते हैं।

2. माध्यम के प्रकार :- माध्यम ठोस, द्रव या गैस कुछ भी हो सकता है।

3. कंपन की प्रक्रिया :- (i) कंपन करती वस्तु अपने पास के वायु कणों को हिला देती है।

(ii) ये वायु कण अगल-बगल के कणों को बल लगाकर कंपनित करते हैं।

(iii) इस प्रकार यह कंपन आगे बढ़ता है और ध्वनि तरंग बनती है।

4. विक्षोभ की गति :- माध्यम के कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते, केवल विक्षोभ (disturbance) आगे बढ़ता है।

5. ध्वनि का संचरण तब तक होता है जब तक वह हमारे कान तक नहीं पहुँच जाती।
उदाहरण :- 

जब हम घंटी बजाते हैं, तो उसकी धातु की प्लेट कंपित होती है। यह कंपन आस-पास की हवा के कणों में कंपन करता है और यही कंपन हमारे कानों तक पहुँच कर ध्वनि का आभास कराता है।

प्रश्न :- तरंग किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- तरंग :- एक विक्षोभ (disturbance) है जो किसी माध्यम में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऊर्जा का संचरण करता है, जबकि यह ऊर्जा स्रोत और गंतव्य के बीच कोई प्रत्यक्ष संपर्क नहीं होता।

तरंग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. तरंग माध्यम में गति करता हुआ विक्षोभ होता है।

2. यह एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक केवल ऊर्जा को पहुंचाता है, कणों को नहीं।

3. ध्वनि भी एक तरंग के रूप में ही माध्यम में संचरित होती है।

4. ध्वनि को फैलने के लिए माध्यम (जैसे वायु, जल, ठोस) की आवश्यकता होती है।

5. ध्वनि एक यांत्रिक तरंग है। 

उदाहरण :-

जब आप एक रस्सी के एक सिरे को हिलाते हैं, तो यह कंपन रस्सी में तरंग के रूप में दूसरे सिरे तक पहुँचता है — यह तरंग है, जो ऊर्जा को स्थानांतरित करती है लेकिन रस्सी के कण स्थायी रूप से आगे नहीं बढ़ते।

नोट :- 

यांत्रिक तरंग :-  ये वे तरंगें हैं जो किसी माध्यम की आवश्यकता से ही संचरित होती हैं।

प्रश्न :- सम्पीडन किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- सम्पीडन :- जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास की वायु के कणों को एक-दूसरे के निकट धकेलती है, जिससे एक उच्च दाब और घनत्व वाला क्षेत्र बनता है। इसी क्षेत्र को सम्पीडन (Compression) कहा जाता है।

सम्पीडन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. सम्पीडन एक ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ माध्यम (जैसे वायु) के कण आपस में बहुत पास-पास आ जाते हैं।

2. इससे वहाँ उच्च दाब और अधिक घनत्व उत्पन्न होता है।

3. यह प्रक्रिया तभी होती है जब ध्वनि की अनुदैर्ध्य तरंगें फैलती हैं।

4. सम्पीडन ध्वनि तरंग का एक भाग होता है, जो कम्पनशील वस्तु से दूर की ओर गति करता है।
उदाहरण :-

जब एक तबले की झिल्ली को बजाया जाता है, तो वह कंपन करके आस-पास की वायु को संपीडित करती है और इस प्रकार वायु में सम्पीडन उत्पन्न होता है।

प्रश्न :- विरलन किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- विरलन :- जब कोई वस्तु कंपन करती है और पीछे की ओर हटती है, तो वह अपने पीछे के वायु कणों को दूर-दूर कर देती है। इससे एक ऐसा क्षेत्र बनता है जहाँ वायु के कणों का घनत्व और दाब सामान्य से कम होता है। इसे ही विरलन (Rarefaction) कहते हैं।

विरलन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. विरलन वह क्षेत्र होता है जहाँ वायु के कण आपस में दूर-दूर होते हैं।

2. इसमें दाब और घनत्व सामान्य से कम होता है।

3. यह ध्वनि की अनुदैर्ध्य तरंग का एक भाग होता है।

4. विरलन कम्पनशील वस्तु से दूर की ओर गति करता है और सम्पीडन के बाद आता है।
उदाहरण :-

जब तबले की झिल्ली कम्पन करके पीछे की ओर जाती है, तो वह पीछे की वायु को विरल कर देती है और इस प्रकार वायु में विरलन उत्पन्न होता है।

प्रश्न :- ध्वनि तरंग कैसे बनती है? इसे समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि तरंग  :- जब कोई वस्तु तेज़ी से आगे-पीछे कंपन करती है, तो वह आस-पास की हवा को भी कंपनित कर देती है। इस कंपन से हवा में सम्पीडन और विरलन की एक श्रृंखला बनती है, जिससे ध्वनि तरंग बनती है।

ध्वनि तरंग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. कंपन करने वाली वस्तु वायु में दाब को बदलती है।

2. आगे की गति से वायु कण पास-पास आकर सम्पीडन बनाते हैं।

3. पीछे की गति से वायु कण दूर-दूर होकर विरलन बनाते हैं।

4. सम्पीडन और विरलन की यह क्रमिक श्रृंखला आगे बढ़ती है और ध्वनि तरंग का निर्माण करती है।

5. ध्वनि तरंग का संचरण दरअसल घनत्व में परिवर्तन के रूप में होता है।
उदाहरण :-

जब एक तार वाले वाद्य यंत्र जैसे सितार की तार को झंकृत किया जाता है, तो वह आगे-पीछे कंपन करती है और वायु में सम्पीडन-विरलन उत्पन्न करती है जिससे ध्वनि तरंग बनती है।

प्रश्न :- अनुदैर्ध्य तरंग किसे कहते हैं? इसे समझाइए।

उत्तर :- अनुदैर्ध्य तरंग :- जब तरंग के संचरण की दिशा में ही माध्यम के कण आगे-पीछे कंपन करते हैं, तो ऐसी तरंग को अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) कहते हैं।

अनुदैर्ध्य तरंग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. इसमें माध्यम के कण तरंग की दिशा में ही कंपन करते हैं।

2. ऐसी तरंगों में सम्पीडन (compression) और विरलन (rarefaction) बनते हैं।

3. अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव और गैस — सभी माध्यमों में चल सकती हैं।
उदाहरण :-

ध्वनि तरंग एक अनुदैर्ध्य तरंग है, क्योंकि इसमें वायु के कण तरंग की दिशा में ही आगे-पीछे कंपन करते हैं।

प्रश्न :- अनुप्रस्थ तरंगें कैसे उत्पन्न होती हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- अनुप्रस्थ तरंगें :- जब किसी माध्यम में तरंग की दिशा के लंबवत (सीधे ऊपर-नीचे) कणों का कंपन होता है, तो अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves) उत्पन्न होती हैं।

अनुप्रस्थ तरंगों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं।

2. यह तरंगों की दिशा के ऊपर और नीचे की ओर दोलन करती है।

3. इसमें श्रृंग (crest) और गल (trough) बनते हैं।
उदाहरण :-

यदि स्लिंकी (spring) का एक सिरा किसी दीवार से बाँधकर दूसरे सिरे को ऊपर-नीचे हिलाया जाए, तो उत्पन्न तरंग अनुप्रस्थ तरंग होती है, क्योंकि कंपन तरंग की दिशा के लंबवत होता है।

प्रश्न :- ध्वनि तरंग :- के प्रमुख अभिलक्षण कौन-कौन से होते हैं? उन्हें नाम सहित लिखिए।

उत्तर :- ध्वनि तरंग के पाँच प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित हैं, जो तरंग की प्रकृति और गुणों को बताते हैं।

1. तरंग दैर्ध्य (Wavelength)

2. आवृत्ति (Frequency)

3. आयाम (Amplitude)

4. आवर्तकाल (Time Period)

5. तरंग वेग (Wave Velocity)

उदाहरण :-

जब कोई गायक अलग-अलग स्वर में गाता है, तो उसकी आवाज में आवृत्ति और आयाम जैसे गुण अलग-अलग होते हैं, जिससे हमें अलग-अलग ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।

प्रश्न :- तरंग दैर्ध्य किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- तरंग दैर्ध्य  :- ध्वनि तरंग में, संपीडन और विरलन की पुनरावृत्त इकाई की कुल लंबाई को तरंग दैर्ध्य कहते हैं।

तरंग दैर्ध्य की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. तरंग दैर्ध्य वह दूरी है जो दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों के बीच होती है।

2. इसे यूनानी अक्षर λ (लैम्डा) से दर्शाया जाता है।

3. एक पूर्ण दोलन के दौरान तरंग जितनी दूरी तय करती है, वही उसकी तरंग दैर्ध्य होती है।

4. इसका SI मात्रक मीटर (m) होता है।
उदाहरण :-

जब स्लिंकी (spring) में अनुदैर्ध्य तरंग उत्पन्न होती है, तो दो पास-पास के संपीडनों के बीच की दूरी को तरंग दैर्ध्य कहा जाता है।

प्रश्न :- आवृत्ति किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- आवृत्ति :- जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह एक सेकंड में जितनी बार दोलन करती है या जितनी पूर्ण तरंगें उत्पन्न करती है, उसे आवृत्ति कहते हैं।

आवृत्ति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. एक सेकंड में उत्पन्न पूर्ण तरंगों की संख्या को आवृत्ति कहा जाता है।

2. इसे ग्रीक अक्षर “ν” से दर्शाते हैं।

3. आवृत्ति का SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hertz) है, जिसका प्रतीक Hz होता है। 

4. आवृत्ति उस वस्तु की होती है जो तरंग को उत्पन्न करती है।

5. आवृत्ति का बड़ा मात्रक :- 1 किलोहर्ट्ज (kHz) = 1000 Hz होता है।

उदाहरण :-

यदि एक ध्वनि स्रोत एक सेकंड में 500 बार कंपन करता है, तो उसकी आवृत्ति 500 Hz होगी।

नोट :- 

यदि कोई वस्तु 1 सेकंड में 1 बार कंपन करती है, तो उसकी आवृत्ति 1 Hz होगी।

1 हर्ट्ज (Hz) का अर्थ होता है :- 1 कम्पन प्रति सेकंड।

प्रश्न :- आवर्तकाल किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- आवर्तकाल (Time Period) :- वह समय होता है जो एक पूर्ण दोलन या कम्पन को पूरा करने में लगता है। दूसरे शब्दों में, एक तरंग के एक संपीडन और एक विरलन के एक निश्चित बिंदु से गुजरने में जितना समय लगता है, वह आवर्तकाल कहलाता है।

आवर्तकाल (Time Period) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. इसे T अक्षर से प्रदर्शित किया जाता है।

2. इसका S.I. मात्रक सेकेण्ड (s) है।

3. आवर्तकाल का सूत्र :- 

आवृत्ति (n) = 1/आवर्तकाल (T) 

या T = 1/n

इसका मतलब है कि यदि आवृत्ति अधिक होगी, तो आवर्तकाल कम होगा, और यदि आवृत्ति कम होगी, तो आवर्तकाल अधिक होगा।

उदाहरण :-

यदि किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है, तो उसका आवर्तकाल होगा :- 

T = 1/100 = 0.01 सेकंड 

इसका अर्थ है कि वह स्रोत 0.01 सेकंड में एक कम्पन पूरा करता है।

प्रश्न :- ध्वनि तरंग का आयाम किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- आयाम (Amplitude) :- जब कोई कण कम्पन करता है, तो वह अपनी स्थिति से दाएँ और बाएँ या ऊपर और नीचे गति करता है। किसी माध्यम के कण का अपनी मूल स्थिति (स्थिर अवस्था) से दोनों ओर अधिकतम विस्थापन होता है। इस गति की अधिकतम दूरी ही तरंग का आयाम कहलाती है।

आयाम (Amplitude) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. इसे अंग्रेजी अक्षर ‘A’ से दर्शाया जाता है।

2.  इसका S.I. मात्रक मीटर (m) होता है।

3.  आयाम जितना अधिक होता है, तरंग की ऊर्जा और ध्वनि की तीव्रता (प्रबलता) उतनी ही अधिक होती है। अर्थात

तारत्व, प्रबलता तथा गुणता जैसे अभिलक्षण पाये जाते हैं।

उदाहरण :-

यदि दो ध्वनि स्रोत समान आवृत्ति पर ध्वनि उत्पन्न कर रहे हैं, लेकिन एक का आयाम अधिक है, तो उसकी आवाज़ ज़्यादा तेज़ (तेज ध्वनि) सुनाई देगी।
जैसे :- धीमे से बोला गया “हैलो” और ज़ोर से बोला गया “हैलो”, दोनों की आवृत्ति समान हो सकती है, पर आयाम अलग होगा।

प्रश्न :- तरंग वेग किसे कहते हैं? इसे सूत्र सहित समझाइए।

उत्तर :- तरंग वेग :- जब कोई तरंग किसी माध्यम में गति करती है, तो वह एक निश्चित समय में एक निश्चित दूरी तय करती है। एक सेकंड में तरंग द्वारा तय की गई दूरी को ही तरंग वेग (Wave velocity) कहते हैं।

तरंग वेग की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. तरंग वेग का S.I. मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) होता है।

2. तरंग वेग सूत्र :-
वेग (V) = दूरी/समय = λ/T

यहाँ पर, λ = तरंगदैर्ध्य (Wave length)
T = आवर्तकाल (Time period)

3. अन्य सूत्र :-  V = λ × ν

यहाँ पर, ν = आवृत्ति (Frequency)
λ = तरंगदैर्ध्य (Wave length)

उदाहरण :-

यदि किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य λ = 1.5 m और आवृत्ति ν = 340 Hz हो, तो उसका तरंग वेग होगा :- V = λ × ν = 1.5 × 340 = 510  m/s

नोट :- 

तरंग का वेग इस बात पर निर्भर करता है कि माध्यम क्या है और तरंग किस प्रकार की है।

प्रश्न :- ध्वनि का तारत्व किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि का तारत्व (Pitch) :- उस ध्वनि की तीक्ष्णता या पतलेपन-मोटेपन को व्यक्त करता है। यह ध्वनि की आवृत्ति पर निर्भर करता है।

तारत्व की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. तारत्व का संबंध आवृत्ति से है। आवृत्ति जितनी अधिक, ध्वनि उतनी तीक्ष्ण (पतली) और उच्च तारत्व वाली होती है। आवृत्ति जितनी कम, ध्वनि उतनी भारी (मोटी) और निम्न तारत्व वाली होती है।

2. तारत्व का कोई मात्रक नहीं होता, क्योंकि यह एक गुणात्मक विशेषता है।

3. तारत्व और आवृत्ति में समानुपाती संबंध होता है :-  तारत्व ∝ आवृत्ति

उदाहरण :-

1. स्त्रियों की आवाज़ की आवृत्ति पुरुषों से अधिक होती है, इसलिए उनकी आवाज़ पतली और तीक्ष्ण सुनाई देती है – यानी उच्च तारत्व।
2. पुरुषों की आवाज़ की आवृत्ति कम होती है, इसलिए वह गंभीर और भारी सुनाई देती है – यानी निम्न तारत्व।
3. बाँसुरी की आवाज़ का तारत्व उच्च होता है जबकि ढोलक या बेस ड्रम की आवाज़ का तारत्व निम्न होता है।
नोट :- 

ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है और यह हमें यह बताता है कि कोई आवाज़ पतली है या भारी।

प्रश्न :- ध्वनि की प्रबलता किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि की प्रबलता (Loudness) :-  उस ध्वनि की शक्ति या तेज़ी को दर्शाती है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि हमारे कानों तक ध्वनि तरंगों द्वारा प्रति सेकंड कितनी ऊर्जा पहुँचती है।

ध्वनि की प्रबलता की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. प्रबलता ध्वनि तरंगों के आयाम पर निर्भर करती है। जितना अधिक आयाम, उतनी ही प्रबल (तेज़) ध्वनि। जितना कम आयाम, उतनी ही मृदु (धीमी) ध्वनि।

2. प्रबलता = आयाम का वर्ग :- प्रबलता ∝(आयाम)2

3. मात्रक: प्रबलता को डेसीबल (decibel – dB) में मापा जाता है।

4. ध्वनि ऊर्जा का स्रोत जितना शक्तिशाली होगा, उसकी ध्वनि उतनी ही प्रबल होगी।
उदाहरण :-  

1. जब कोई ढोल ज़ोर से बजता है, तो उसका आयाम अधिक होता है, जिससे हमें उसकी ध्वनि प्रबल सुनाई देती है।

2. वहीं, धीमे स्वर में बोले गए शब्दों में आयाम कम होता है, इसलिए वह कम प्रबल (धीमा) लगता है।

3. कान के पास तेज़ हॉर्न बजाना — बहुत अधिक प्रबलता, कानों को नुकसान पहुँचा सकती है (उच्च dB)।

नोट :- 

ध्वनि की प्रबलता उसके आयाम पर निर्भर करती है और यह हमें बताती है कि कोई आवाज़ तेज़ है या धीमी।

प्रश्न :- गुणता किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- गुणता (Quality) :- किसी ध्वनि की वह विशेषता है जिससे हम समान तारत्व (pitch) और समान प्रबलता (loudness) वाली दो ध्वनियों में अंतर कर सकते हैं।

गुणता (Quality) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. गुणता ध्वनि तरंग की आकृति (waveform) पर निर्भर करती है।

2. गुणता ही वह कारण है जिससे अलग-अलग संगीत वाद्ययंत्रों (जैसे बांसुरी, सितार, हारमोनियम) से एक ही स्वर बजने पर उनकी आवाज़ अलग-अलग सुनाई देती है।

3. यह ध्वनि का एक संगीतात्मक अभिलक्षण है।
उदाहरण :-

अगर बांसुरी और सितार से एक ही स्वर (जैसे “सा”) समान प्रबलता और तारत्व के साथ बजाया जाए, तब भी हम उनकी ध्वनि में फर्क कर सकते हैं, क्योंकि उनकी गुणता अलग होती है।

नोट :-   

गुणता हमें यह पहचानने में मदद करती है कि ध्वनि किस स्रोत से आई है, भले ही उसकी आवृत्ति और आयाम एक जैसे हों।

प्रश्न :- टोन किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- टोन (Tone) :- उस ध्वनि को कहते हैं जिसमें केवल एक ही आवृत्ति (एकल आवृत्ति) होती है और वह नियमित रूप से कंपन करती है।

टोन (Tone) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. टोन एक शुद्ध ध्वनि होती है जो केवल एक ही आवृत्ति पर आधारित होती है।

2. यह ध्वनि बहुत सरल व एकसमान तरंग के रूप में होती है।

3. किसी कम्पनशील वस्तु से उत्पन्न ऐसी ध्वनि जिसमें कोई अन्य आवृत्तियाँ न हो, उसे टोन कहा जाता है।

4. यह सामान्यतः प्रयोगशाला में उत्पन्न की जाती है, जैसे कि ट्यूनिंग फोर्क से।

उदाहरण :-

जब एक ट्यूनिंग फोर्क (ध्वनि काँटा) को ठोकर मारी जाती है, तो यह एक शुद्ध टोन उत्पन्न करता है, जिसमें केवल एक आवृत्ति होती है। इसे हम शुद्ध स्वर या टोन कहते हैं।

नोट :- 

एक ऐसी ध्वनि है जो केवल एक ही आवृत्ति से बनी होती है और इससे कोई भी अन्य मिश्रित ध्वनियाँ (overtone या harmonics) नहीं होती।

प्रश्न :- स्वर किसे कहते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- स्वर (Note) :- वह ध्वनि होती है जो अनेक आवृत्तियों के मिश्रण से मिलकर बनी होती है, किंतु उसमें एक मुख्य आवृत्ति (मूल स्वर) प्रमुख होती है।

स्वर (Note)  की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. स्वर कई टोन (tones) या ध्वनियों का मिश्रण होता है।

2. इसमें एक मुख्य आवृत्ति होती है, जिसे मूल आवृत्ति (fundamental frequency) कहते हैं, और अन्य आवृत्तियाँ ओवरटोन्स या हार्मोनिक्स कहलाती हैं।

3. ये ध्वनियाँ नियमित रूप से कंपन करती हैं, इसलिए यह हमें संगीतमय प्रतीत होती है।

4. स्वर संगीत का आधार होते हैं, जैसे सा, रे, गा, मा आदि।
उदाहरण :-

जब हम सितार या बांसुरी बजाते हैं, तो उससे जो ध्वनि निकलती है, वह एक स्वर होती है, क्योंकि उसमें एक मूल आवृत्ति के साथ अनेक सहायक आवृत्तियाँ भी होती हैं।

नोट :-

स्वर एक संगीतमय ध्वनि होती है जो अनेक नियमित कंपन वाली ध्वनियों के मिश्रण से बनती है और यह मनुष्य को सुगम और मधुर प्रतीत होती है।

प्रश्न :- शोर किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- शोर (Noise) :- वह ध्वनि होती है जो अनियमित कंपन से उत्पन्न होती है और सुनने में कर्णप्रिय (सुखद) नहीं होती। इसकी प्रबलता (intensity) अधिक होती है।

शोर (Noise) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. जब किसी ध्वनि की प्रबलता 80 डेसिबल (dB) से अधिक हो जाती है, तो वह शोर कहलाती है।

2. यह उलझन भरी, तीव्र और असंगठित ध्वनि होती है।

3. शोर का स्रोत अनियंत्रित कंपन करने वाली वस्तुएँ होती हैं।

4. यह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, जैसे – सिरदर्द, तनाव, श्रवण क्षमता में कमी आदि।
उदाहरण :- 

1. तेज़ ट्रैफिक का शोर

2. मशीनों का तेज़ आवाज़

3. लाउडस्पीकर की ऊँची आवाज़

4. हवाई जहाज़ के उड़ान भरने का शोर
नोट :-

शोर और संगीत में मुख्य अंतर यह है कि संगीत सुनने में सुखद होता है जबकि शोर कष्टदायक।

प्रश्न :- संगीत किसे कहते हैं? समझाइए।

उत्तर :- संगीत :- एक ऐसी ध्वनि होती है जो सुनने में मधुर, लयबद्ध और कर्णप्रिय (pleasant) होती है। इसमें ध्वनि की गुणता, तारत्व और प्रबलता का समुचित तालमेल होता है।

संगीत की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. संगीत में कंपन नियमित होते हैं।

2. संगीत सुनने में आनंददायक और मानसिक रूप से शांतिदायक होता है।

3. संगीत की गुणता (Quality) अच्छी होती है, जिससे यह मन को भाता है।

4. इसमें विभिन्न स्वर और तालों का संयोजन होता है।
उदाहरण :-

1. वाद्य यंत्रों से उत्पन्न मधुर ध्वनि (हारमोनियम, बांसुरी, सितार आदि)

2. गायक द्वारा गाया गया गीत

3. प्रकृति की मधुर ध्वनियाँ (जैसे – पक्षियों का चहकना, बहती नदी की आवाज़)
नोट :-

संगीत और शोर के बीच मुख्य अंतर यह है कि संगीत नियमित व मधुर होता है, जबकि शोर अनियमित व कष्टदायक।

प्रश्न :- विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल किस प्रकार भिन्न होती है? समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि की चाल माध्यम के प्रकार और उसकी अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) पर निर्भर करती है जो कि निम्नलिखित है :- 

1. माध्यम के अनुसार :- (i) गैसों में – ध्वनि की चाल सबसे कम होती है।

(ii) द्रवों में – गैसों की तुलना में चाल अधिक होती है।

(iii) ठोसों में – ध्वनि की चाल सबसे अधिक होती है।

2. तापमान का प्रभाव :- (i) जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, ध्वनि की चाल भी बढ़ती है।

(ii) क्योंकि गर्म माध्यम में कण अधिक गतिशील होते हैं।

3. नमी (आर्द्रता) का प्रभाव :- (i) वायुमंडल में नमी बढ़ने पर, ध्वनि की चाल बढ़ जाती है।

(ii) क्योंकि जलवाष्प हवा की तुलना में हल्की होती है और कंपन जल्दी पहुँचता है।

4. प्रकाश की चाल की तुलना :- (i) प्रकाश की चाल, ध्वनि की चाल से कई गुना अधिक होती है।

(ii) इसलिए बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और गर्जना बाद में सुनाई देती है।

5. वायु में ध्वनि की चाल :- सामान्य तापमान (22°C) पर वायु में ध्वनि की चाल लगभग 344 मीटर/सेकंड (m/s) होती है।
उदाहरण :-

1. यदि कोई ट्रेन पुल से गुजरती है, तो आवाज़ पहले हम रेल की पटरियों में सुनते हैं (ठोस माध्यम), फिर हवा में (गैस माध्यम)।

2. बिजली चमकने पर पहले चमक दिखती है (प्रकाश), फिर गरज की आवाज़ आती है (ध्वनि)।

प्रश्न :- ध्वनि बूम (Sonic Boom) क्या है? इसे कैसे उत्पन्न किया जाता है? समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि बूम (Sonic Boom) :- एक प्रकार का तेज विस्फोट जैसी ध्वनि है, जो वायुयान या अन्य वस्तु द्वारा ध्वनि की चाल से तेज गति (पराध्वनिक गति) से चलने पर उत्पन्न होती है।

ध्वनि बूम (Sonic Boom) मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :- 

1. पराध्वनिक गति (Supersonic Speed) :- जब कोई वस्तु (जैसे वायुयान, गोली या रॉकेट) ध्वनि की गति (लगभग 344 m/s) से तेज चलती है, तो वह पराध्वनिक गति कहलाती है।

2. प्रघाती तरंगें (Shock Waves) :- ऐसी गति से चलती वस्तुएँ हवा को तेजी से विस्थापित करती हैं, जिससे प्रघाती तरंगें बनती हैं। ये तरंगें अचानक दबाव में वृद्धि करती हैं और तेज आवाज़ पैदा करती हैं।

3. ध्वनि बूम (Sonic Boom) :- प्रघाती तरंगों के एकत्रित होकर तेज विस्फोट जैसा शोर उत्पन्न करने को ध्वनि बूम कहा जाता है। यह ध्वनि इतनी तीव्र होती है कि खिड़कियों के शीशे भी टूट सकते हैं।
ध्वनि बूम के प्रभाव निम्नलिखित है :-

1. यह कर्णप्रिय नहीं होता।

2. ध्वनि प्रदूषण का कारण बन सकता है।

3. इमारतों, खिड़कियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
उदाहरण :-

लड़ाकू विमान (जैसे सुखोई या राफेल) जब बहुत तेज गति से उड़ते हैं और ध्वनि की गति पार कर जाते हैं, तो ज़मीन पर तेज धमाका सुनाई देता है — यह ध्वनि बूम होता है।

प्रश्न :- ध्वनि का परावर्तन क्या होता है? इसके नियमों को समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि का परावर्तन :- उस घटना को कहते हैं जब ध्वनि तरंगें किसी कठोर सतह से टकराकर वापस लौटती हैं, ठीक वैसे ही जैसे प्रकाश परावर्तित होता है।

परावर्तन के नियम (Reflection Laws) — ध्वनि के लिए भी लागू होते हैं जो कि निम्नलिखित है :- 

1. पहला नियम :- आपतित ध्वनि तरंग, परावर्तित ध्वनि तरंग और आपतन बिन्दु पर खींचा गया अभिलम्ब — ये तीनों एक ही तल (plane) में होते हैं।
2. दूसरा नियम :- ध्वनि का आपतन कोण (Angle of Incidence) और परावर्तन कोण (Angle of Reflection) आपस में समान होते हैं।

उदाहरण :-

जब हम बंद कमरे की दीवार पर चिल्लाते हैं, तो कुछ देर बाद हमारी आवाज लौटकर आती है, जिसे हम प्रतिध्वनि के रूप में सुनते हैं — यह ध्वनि का परावर्तन है।

नोट :-

1. केवल कठोर तथा समतल सतहें ही ध्वनि का अच्छा परावर्तन करती हैं। 

2. मुलायम या खुरदरी सतहें जैसे कपड़ा, फोम आदि ध्वनि को अवशोषित कर लेती हैं, परावर्तित नहीं करतीं।

प्रश्न :- ध्वनि के परावर्तन के क्या उपयोग हैं? समझाइए।

उत्तर :- ध्वनि के परावर्तन का प्रयोग कई यंत्रों तथा उपकरणों में किया जाता है ताकि ध्वनि को एक दिशा में भेजा जा सके और उसकी प्रबलता (तेज़ी) बढ़ाई जा सके।

ध्वनि के परावर्तन के मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं :-

1. मेगाफोन (Megaphone) :- यह एक शंक्वाकार यंत्र होता है। इसमें ध्वनि भीतर की दीवारों से परावर्तित होकर एक ही दिशा में आगे बढ़ती है। इससे आवाज दूर तक स्पष्ट सुनाई देती है।

2. लाउडस्पीकर, हॉर्न, तुरही और शहनाई :- इन यंत्रों में भी ध्वनि तरंगें परावर्तित होकर एक दिशात्मक रूप से निकलती हैं। इससे ध्वनि कम ऊर्जा में अधिक दूरी तक जाती है।
3. ध्वनि की प्रबलता में वृद्धि :- जब ध्वनि तरंगें बार-बार परावर्तित होती हैं, तो उनका आयाम जुड़ जाता है, जिससे ध्वनि की प्रबलता (Intensitiy) बढ़ जाती है और ध्वनि तेज़ सुनाई देती है।

उदाहरण :-

कोई नेता मेगाफोन से भाषण देता है, तो उसकी आवाज बहुत दूर तक स्पष्ट सुनाई देती है — यह ध्वनि के परावर्तन का ही उपयोग है।

प्रश्न :- प्रतिध्वनि क्या होती है? समझाइए।

उत्तर :- प्रतिध्वनि :- वह ध्वनि होती है जो किसी कठोर सतह से परावर्तित होकर फिर से सुनाई देती है। यह परावर्तन के कारण ध्वनि का दोहराव होता है, जिसे हम अपने कानों से सुन सकते हैं।

प्रतिध्वनि सुनाई देने की शर्तें निम्नलिखित हैं :-

1. मुख्य ध्वनि और परावर्तित ध्वनि (प्रतिध्वनि) के बीच कम से कम 0.1 सेकंड का अंतर होना चाहिए।
2. यह तभी संभव है जब परावर्तक सतह कम से कम 17.2 मीटर की दूरी पर हो (ध्वनि की चाल = 344 m/s)। क्योंकि 344 m/s × 0.1 s = 34.4 m → आवाज को जाने और लौटने में कुल 34.4 m चाहिए, यानी एक ओर दूरी ≈ 17.2 m

उदाहरण :-

जब आप किसी खाली हॉल या पहाड़ी क्षेत्र में जोर से चिल्लाते हैं और कुछ क्षण बाद वही आवाज़ फिर से सुनाई देती है — इसे प्रतिध्वनि कहते हैं।

नोट :- 

प्रतिध्वनि कब होती है?

1. जब ध्वनि किसी कठोर सतह (जैसे ईंट की दीवार, पहाड़, चट्टान आदि) से टकराती है।

2. मुलायम सतहें (जैसे पर्दे, कालीन) ध्वनि को अवशोषित कर लेती हैं, जिससे प्रतिध्वनि नहीं होती। 

प्रश्न :- अनुरणन क्या होता है? समझाइए।

उत्तर :- अनुरणन (Reverberation) :- वह घटना है जब किसी बंद स्थान जैसे हॉल या सभागार में ध्वनि बार-बार परावर्तित होकर थोड़ी देर तक बनी रहती है। यह ध्वनि के बार-बार परावर्तन के कारण होता है, जब वह दीवारों, छत और फर्श से टकराती है। यदि यह परावर्तन बहुत अधिक होता है, तो ध्वनि लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे वह धुंधली, विकृत और समझने में कठिन हो सकती है। यह सामान्यतः तब होता है जब हॉल में मुलायम वस्तुएँ जैसे पर्दे, गद्दियाँ आदि नहीं होतीं जो ध्वनि को अवशोषित कर सकें।

अनुरणन और प्रतिध्वनि में में निम्नलिखित अंतर होता है :- 

1. प्रतिध्वनि में ध्वनि स्पष्ट रूप से दोहराई जाती है।

2. अनुरणन में ध्वनि मिलकर धीरे-धीरे मद्धम होती है।

उदाहरण :-

जब कोई व्यक्ति बड़े हॉल में माइक से बोलता है और आवाज़ कुछ क्षण तक हल्की गूंज के रूप में बनी रहती है, तो यह अनुरणन कहलाता है।

प्रश्न :- किसी बड़े हॉल या सभागार में अनुरणन को कम करने के क्या उपाय हैं?

उत्तर :- अनुरणन को कम करने के लिए हॉल या सभागार में ऐसी वस्तुएँ लगाई जाती हैं जो ध्वनि को अवशोषित कर सकें। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जाते हैं :- 

1. छत और दीवारों पर फाइबर बोर्ड के पैनल लगाए जाते हैं, जो ध्वनि को अवशोषित करते हैं।

2. खिड़कियों और दरवाज़ों पर भारी पर्दे लगाए जाते हैं ताकि ध्वनि टकरा कर बार-बार न लौटे।

3. फर्श पर मोटे कालीन बिछाए जाते हैं जो ध्वनि तरंगों को सोख लेते हैं।

4. बैठने की सीटें ऐसे पदार्थों से बनाई जाती हैं जिनमें ध्वनि अवशोषण का गुण होता है।

नोट :- 

इन उपायों से ध्वनि के बार-बार परावर्तन को रोका जा सकता है, जिससे अनुरणन कम होता है और आवाज़ स्पष्ट सुनाई देती है।

प्रश्न :- प्रतिध्वनि तथा अनुरणन में क्या अंतर होता है? समझाइए।

उत्तर :- प्रतिध्वनि और अनुरणन में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं :-

 

बिंदु

प्रतिध्वनि

अनुरणन

परिभाषा

ध्वनि तरंग के परावर्तन से उत्पन्न ध्वनि के दोहराव को प्रतिध्वनि कहते हैं।

बार-बार परावर्तन के कारण ध्वनि के बने रहने को अनुरणन कहते हैं।

स्थान

यह आमतौर पर खुले स्थानों या बड़े खाली हॉल में होता है।

यह किसी बड़े बंद हॉल या सभागार में होता है।

परावर्तन की बारंबारता

इसमें ध्वनि एक बार परावर्तित होकर सुनाई देती है।

इसमें ध्वनि बार-बार परावर्तित होती है और स्थायित्व प्राप्त करती है।

ध्वनि की गुणवत्ता

ध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है।

ध्वनि धुँधली, विकृत और भ्रामक हो सकती है अगर यह अधिक देर तक बनी रहे।

उद्देश्य

इसका प्रयोग दूरी मापने या प्रभाव दिखाने के लिए किया जाता है।

इसे सभागारों में नियंत्रित करना पड़ता है ताकि ध्वनि स्पष्ट बनी रहे।

उदाहरण :- 
1. जब आप किसी पहाड़ी पर चिल्लाते हैं और कुछ समय बाद वही आवाज़ सुनाई देती है — वह प्रतिध्वनि है।
2. जब किसी बड़े सभागार में बोलने पर आवाज़ लंबे समय तक बनी रहती है — वह अनुरणन है।

प्रश्न :- स्टेथोस्कोप क्या है? यह कैसे कार्य करता है?

उत्तर :- स्टेथोस्कोप :- एक चिकित्सा यंत्र है जिसका उपयोग डॉक्टर शरीर के अंदर की ध्वनियों को सुनने के लिए करते हैं। इसका मुख्य उपयोग हृदय की धड़कन और फेफड़ों की ध्वनि को सुनने में होता है। 

इसके कार्य करने का सिद्धांत  निम्नलिखित है :-

1. स्टेथोस्कोप की रबर की नली ध्वनि को परावर्तित करती है।

2. यह परावर्तित ध्वनि नली के माध्यम से डॉक्टर के कानों तक पहुँचती है।

3. बार-बार परावर्तन से ध्वनि का आयाम (प्रबलता) बढ़ता है, जिससे वह स्पष्ट सुनाई देती है।
उदाहरण :-

जब डॉक्टर स्टेथोस्कोप को मरीज के सीने पर रखते हैं, तो वे हृदय की “धड़कन” या फेफड़ों की “साँस की आवाज़” सुन सकते हैं — यह उसी यंत्र के माध्यम से संभव होता है।

प्रश्न :- मनुष्य में श्रव्यता का परिसर क्या होता है? समझाइए।

उत्तर :- मनुष्य में श्रव्यता का परिसर :- उस सीमा को कहते हैं, जिसमें आने वाली ध्वनि को मनुष्य सुन सकता है।

सामान्यतः मनुष्य 20 Hz से 20,000 Hz (या 20 kHz) तक की ध्वनि तरंगों को सुन सकता है। इसे ही श्रव्य (audible) ध्वनि कहा जाता है। 

श्रव्यता से संबंधित मुख्य बातें निम्नलिखित है :- 

1. 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कभी-कभी 25 kHz तक की ध्वनि सुन सकते हैं।

2. कुत्ते भी 25 kHz तक की उच्च आवृत्ति की ध्वनि को सुनने में सक्षम होते हैं।

उदाहरण :-

100 Hz की ध्वनि (जैसे पंखे की आवाज़) मनुष्य सुन सकता है, लेकिन 30,000 Hz की आवाज़ (जैसे चमगादड़ की आवाज़) नहीं सुन सकता।

प्रश्न :- अवश्रव्य ध्वनि क्या होती है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- अवश्रव्य ध्वनि :- जिन ध्वनियों की आवृत्ति 20 Hz से कम होती है, उन्हें अवश्रव्य ध्वनि (Infrasonic sound) कहते हैं।  मनुष्य इन ध्वनियों को नहीं सुन सकता, क्योंकि ये उसकी श्रव्यता की सीमा से बाहर होती हैं।

अवश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले स्रोत निम्नलिखित है :- 

1. कम्पन करता हुआ सरल लोलक

2. गैण्डा (लगभग 5 Hz की ध्वनि से संपर्क करता है)

3. हाथी और व्हेल भी अवश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

उदाहरण :-

जब हाथी बहुत दूर दूसरे हाथी को बुलाता है, तो वह इतनी कम आवृत्ति की ध्वनि निकालता है कि मनुष्य नहीं सुन पाता, पर दूसरा हाथी सुन लेता है।

नोट :- 

भूकंप आने से पहले पृथ्वी के अंदर से अवश्रव्य तरंगें निकलती हैं जिन्हें कुछ जानवर (जैसे कुत्ते, सांप, पक्षी) महसूस कर सकते हैं, इसलिए वे भूकंप से पहले बेचैन हो जाते हैं।

प्रश्न :- पराश्रव्य ध्वनि क्या होती है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर :- पराश्रव्य ध्वनि :- जिन ध्वनियों की आवृत्ति 20,000 Hz (20 KHz) से अधिक होती है, उन्हें पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic sound) या पराध्वनि कहते हैं। मनुष्य ऐसी ध्वनियों को नहीं सुन सकता, क्योंकि ये उसकी श्रव्यता सीमा से बाहर होती हैं।

पराध्वनि सुनने वाले जीव निम्नलिखित है :- 

कुत्ते, चमगादड़, डॉलफिन, शिंशुमार (पॉरपॉइज़), चूहे
पराध्वनि उत्पन्न करने वाले जीव :- 

कुत्ते, चूहे
उदाहरण :-

चमगादड़ अंधेरे में उड़ते समय पराध्वनि निकालते हैं, जो दीवारों या वस्तुओं से टकराकर वापस आती है। इस परावर्तित ध्वनि से उन्हें रास्ते का पता चल जाता है। इसे प्रतिध्वनि पद्धति (Echo-location) कहते हैं।

प्रश्न :- श्रवण सहायक युक्ति क्या होती है? समझाइए।

उत्तर :- श्रवण सहायक युक्ति :- एक बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रॉनिक मशीन होती है, जिसका प्रयोग कम सुनने वाले व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। इसका कार्य ध्वनि को प्रवर्धित (अर्थात् तेज़) करके कान तक पहुँचाना होता है। इससे उपयोगकर्ता को धीमी आवाजें भी स्पष्ट रूप से सुनाई देती हैं।

इसमें मुख्यतः तीन निम्नलिखित घटक होते हैं :- 

1. माइक्रोफोन – यह आसपास की ध्वनियों को पकड़कर उन्हें विद्युत संकेतों में बदलता है।

2. एंप्लीफायर (प्रवर्धक) – यह विद्युत संकेतों को प्रवर्धित (बढ़ाता) करता है।

3. स्पीकर – यह प्रवर्धित संकेतों को दोबारा ध्वनि तरंगों में बदलकर कान में भेजता है।
उदाहरण :-

जिन लोगों की सुनने की शक्ति कमजोर होती है, वे अपने कान में छोटी श्रवण युक्ति लगाते हैं जिससे वे रोज़मर्रा की बातों को आसानी से सुन पाते हैं।

प्रश्न :- पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के अनुप्रयोग क्या हैं? समझाइए।

उत्तर :- पराध्वनि :- वह ध्वनि होती है जिसकी आवृत्ति 20,000 Hz (20 kHz) से अधिक होती है। यह मनुष्य द्वारा नहीं सुनी जा सकती, लेकिन इसका कई क्षेत्रों में उपयोग होता है।

 

पराध्वनि के प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं :-

1. उद्योगों में दोष पता लगाने में :- पराध्वनि का प्रयोग धातु की वस्तुओं में अन्दरूनी दरारों या दोषों को बिना नुकसान पहुँचाए पता लगाने के लिए किया जाता है।

2. कठिन स्थानों की सफाई में :- मशीनों के उन भागों की सफाई में पराध्वनि का उपयोग होता है जहाँ पहुँचना कठिन होता है,

जैसे :- (i) सर्पिल नली (spiral tube)

(ii) विषम आकार की मशीनें

3. चिकित्सा के क्षेत्र में :- पराध्वनि का उपयोग शरीर के आंतरिक अंगों की जाँच के लिए किया जाता है,

जैसे :-

(i) यकृत (liver)

(ii) पित्ताशय (gall bladder)

(iii) गर्भाशय (uterus)

(iv) गुर्दे (kidney)

(v) हृदय (heart)

उदाहरण :-

1. डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच में पराध्वनि का प्रयोग करते हैं जिससे गर्भ में पल रहे शिशु या किसी अंग की स्थिति देखी जा सकती है।

2. फैक्ट्रियों में पराध्वनि से मशीन के टूटे हिस्से पता लगाए जाते हैं।

प्रश्न :- इकोकार्डियोग्राफी क्या है? समझाइए।

उत्तर :- इकोकार्डियोग्राफी :- एक चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें पराध्वनि तरंगों (Ultrasound waves) का उपयोग किया जाता है।

इकोकार्डियोग्राफी की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है :-

1. इसमें पराध्वनि तरंगें हृदय पर डाली जाती हैं, जो हृदय से टकराकर वापस आती हैं।

2. लौटने वाली तरंगों की सहायता से हृदय c गतिविधियों का चित्र (प्रतिबिम्ब) बनाया जाता है।

3. इससे हृदय की गति, वाल्व की स्थिति, रक्त प्रवाह आदि का अध्ययन किया जा सकता है।
उदाहरण :-

जब डॉक्टर को हृदय में कोई समस्या जैसे कि वाल्व का ठीक से न खुलना या बंद न होना जानना होता है, तो वे इकोकार्डियोग्राफी की सहायता लेते हैं। यह एक गर्भवती महिला के हृदय की जाँच में भी किया जा सकता है।

प्रश्न :- अल्ट्रासोनोग्राफी क्या है?

उत्तर :- अल्ट्रासोनोग्राफी :- एक ऐसी चिकित्सा तकनीक है जिसमें पराध्वनि तरंगों (20 kHz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि) का प्रयोग किया जाता है। ये तरंगें शरीर के भीतर भेजी जाती हैं, और जब वे विभिन्न अंगों से टकराकर लौटती हैं, तो उनकी प्रतिध्वनियों का विश्लेषण करके शरीर के आंतरिक अंगों का प्रतिबिम्ब (image) तैयार किया जाता है।

उदाहरण :-

गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति और विकास को देखने के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग यकृत, गुर्दा, पित्ताशय आदि की जाँच में भी होता है।

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