Notes Mine

CLASS 9 HISTORY NOTES IN HINDI CHAPTER 1

फ्रांसीसी क्रांति (The French Revolution)

TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectHistory
ChapterChapter 1
Chapter Nameफ्रांसीसी क्रांति
MediumHindi

1.1 क्रांति की शुरुआत और उसके कारण

फ्रांसीसी क्रांति:-

1789 में फ्रांस में हुई एक ऐतिहासिक क्रांति, जिसमें जनता ने राजा के निरंकुश शासन के खिलाफ विद्रोह कर स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों को आगे बढ़ाया।

  1. क्रांति की शुरुआत 14 जुलाई 1789 को बास्तील किले पर जनता के हमले से हुई।
  2. बास्तील किला राजशाही की निरंकुश शक्तियों का प्रतीक माना जाता था, इसलिए जनता ने इसे तोड़कर राजनीतिक कैदियों को मुक्त कर दिया।
  3. इस क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को जन्म दिया, जिससे राजशाही की नींव हिल गई और लोकतांत्रिक विचारों का प्रसार हुआ।
नोट:- 14 जुलाई का दिन आज भी फ्रांस में "राष्ट्रीय दिवस" (Bastille Day) के रूप में मनाया जाता है।

सामाजिक कारण:-

फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों (एस्टेट्स) में बँटा था, जिनमें अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ असमान थीं।

  1. प्रथम एस्टेट में चर्च के पादरी, द्वितीय एस्टेट में कुलीन वर्ग और तृतीय एस्टेट में व्यवसायी, वकील, किसान, कारीगर तथा भूमिहीन मजदूर शामिल थे।
  2. लगभग 60% भूमि पर कुलीनों, चर्च और अमीर वर्ग का अधिकार था, जबकि तृतीय एस्टेट भूमि पर मेहनत करने के बावजूद स्वामित्वहीन था।
  3. टाइद (चर्च को दिया जाने वाला धार्मिक कर) और टाइल (सरकार को दिया जाने वाला प्रत्यक्ष कर) केवल तृतीय एस्टेट से वसूले जाते थे; पहले दो एस्टेट कर से पूरी तरह मुक्त थे।
  4. प्रथम और द्वितीय एस्टेट को कर-छूट व सरकारी पदों पर विशेषाधिकार प्राप्त था, जबकि सारी आर्थिक ज़िम्मेदारी तृतीय एस्टेट पर थी।

आर्थिक कारण:-

  1. जनसंख्या 1715 में लगभग 2.3 करोड़ से बढ़कर 1789 में 2.8 करोड़ हो गई, जिससे भोजन की माँग बढ़ी, पर अनाज उत्पादन उसी अनुपात में नहीं बढ़ा।
  2. रोटी जैसी मुख्य खाद्य वस्तुओं की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, जबकि मजदूरी महँगाई के अनुसार नहीं बढ़ी।
  3. सूखे और ओलों जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसलें बार-बार नष्ट हुईं, जिससे जीविका संकट (Subsistence Crisis) गहराता गया।
  4. राजकोष खाली था और राज्य पर भारी कर्ज था, जिससे जनता पर करों का बोझ और बढ़ गया।
नोट:- अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटेन के विरुद्ध फ्रांस की सहायता से राजकोष लगभग खाली हो गया — यह आर्थिक संकट का एक बड़ा कारण बना।

राजनीतिक कारण:-

  1. राजा लुई सोलहवाँ (Louis XVI) का शासन अयोग्य और निरंकुश था; वह बिना जनता की सहमति के कर लगाता और निर्णय लेता था।
  2. पादरी और कुलीन वर्ग को जन्म से विशेषाधिकार प्राप्त थे, जैसे कर-छूट और ऊँचे पदों पर अधिकार, जिससे सामान्य जनता में रोष बढ़ा।
  3. शिक्षित मध्यम वर्ग (वकील, शिक्षक, व्यापारी, लेखक) का उदय हुआ, जिसने जन्म-आधारित भेदभाव का विरोध कर समानता व स्वतंत्रता की माँग उठाई।
नोट:- रूसो, मोंतेस्क्यू और वोल्टेयर जैसे विचारकों ने निरंकुश राजशाही की आलोचना करते हुए जनसंप्रभुता और समानता के विचार फैलाए, जो आगे चलकर क्रांति की वैचारिक नींव बने।

लुई XVI के शासनकाल में आर्थिक संकट:-

  1. 1774 में लुई XVI फ्रांस के बूर्बन राजवंश का राजा बना; उसका विवाह ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मेरी एन्तोनेत से हुआ था।
  2. शासन की शुरुआत में ही राजकोष खाली था, और पूर्ववर्ती राजाओं की शानो-शौकत पर फिज़ूलखर्ची भी एक कारण थी।
  3. आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लुई XVI ने नए कर लगाने का प्रस्ताव रखा, जिससे जनता में असंतोष फैल गया।

क्रांति की शुरुआत का घटनाचक्र:-

  1. 5 मई 1789 को लुई XVI ने नए करों के प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए एस्टेट्स जनरल की बैठक बुलाई; किसानों, महिलाओं और कारीगरों को इसमें प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
  2. एस्टेट्स जनरल में प्रत्येक एस्टेट को केवल एक वोट का अधिकार था, जिससे तृतीय एस्टेट के लोगों को अन्यायपूर्ण मतदान व्यवस्था का सामना करना पड़ा।
  3. कड़ाके की ठंड और खराब फसलों के कारण रोटी की कीमतें बहुत बढ़ गईं; बेकरी दुकानों पर जमाखोरी से जनता में गुस्सा बढ़ गया।
  4. 14 जुलाई 1789 को भीड़ ने बास्तील किले पर धावा बोलकर उसे नष्ट कर दिया, जो क्रांति की शुरुआत का प्रतीक बना।
  5. ग्रामीण क्षेत्रों में अफवाह फैली कि ज़मींदारों ने लुटेरे भेजे हैं जो फसलें बर्बाद करेंगे; किसानों ने ग्रामीण किलों पर हमला कर अन्न-भंडार लूटे और लगान संबंधी दस्तावेज़ जला दिए।

1.1.1 फ्रांस में संवैधानिक राजतंत्र

नेशनल असेंबली:-

20 जून 1789 को तृतीय एस्टेट के प्रतिनिधि वर्साय के एक टेनिस कोर्ट में एकत्र हुए और स्वयं को नेशनल असेंबली घोषित किया।

  1. असेंबली ने फ्रांस के लिए संविधान बनाने का संकल्प लिया, और राजा लुई XVI को अंततः इसे मान्यता देनी पड़ी।
  2. 4 अगस्त 1789 को नेशनल असेंबली ने करों, कर्तव्यों और बंधनों वाली सामंती व्यवस्था को समाप्त कर दिया।

1791 का संविधान:-

1791 में लागू संविधान ने फ्रांस में संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy) की नींव रखी और राजा की शक्तियाँ सीमित कर दीं।

  1. शक्तियों को तीन भागों में बाँटा गया — विधायिका (कानून बनाना), कार्यपालिका (कानून लागू करना) और न्यायपालिका (न्याय देना)।
  2. मतदान का अधिकार केवल सक्रिय नागरिकों को दिया गया — वे पुरुष जिनकी उम्र 25 वर्ष से अधिक थी और जो कम-से-कम तीन दिन की मजदूरी के बराबर कर चुकाते थे।
  3. महिलाएँ और शर्तें पूरी न करने वाले पुरुष निष्क्रिय नागरिक कहलाए और उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिला।

राजनीतिक प्रतीक:-

18वीं सदी में अधिकतर लोग अनपढ़ थे, इसलिए क्रांतिकारी विचारों को शब्दों की जगह आकृतियों और प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त किया जाता था।

  1. टूटी हुई जंजीर — स्वतंत्रता और आज़ादी का प्रतीक।
  2. छड़ों का गट्ठर — एकता में बल का प्रतीक।
  3. त्रिभुज के अंदर सर्वदर्शी आँख — ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक।
  4. राजदंड — शाही सत्ता और अधिकार का प्रतीक।
  5. अपनी पूँछ मुँह में लिए साँप — समानता और एकता का प्रतीक, क्योंकि इसकी आकृति का कोई आरंभ या अंत नहीं होता।

1.2 राजतंत्र का उन्मूलन और गणतंत्र की स्थापना

1.2.1 आतंक का राज

आतंक का युग (1793-1794):-

सन् 1793 से 1794 तक का समय फ्रांस में "आतंक का युग" कहलाता है, जब रोबेस्प्येर ने शासन संभाला और अत्यंत कठोर नीतियाँ लागू कीं।

  1. गणतंत्र के शत्रुओं — कुलीनों, पादरियों और असहमत व्यक्तियों — को गिरफ्तार कर क्रांतिकारी न्यायालय में मुकदमे चलाए गए।
  2. दोषी पाए जाने पर लोगों को गिलोटिन पर चढ़ाकर सिर कलम कर दिया जाता था।
  3. किसानों को सरकार-निर्धारित कीमत पर ही अनाज शहरों में बेचने के लिए मजबूर किया गया।
नोट:- रोबेस्प्येर की नीतियाँ इतनी कठोर थीं कि उसके अपने समर्थक भी विरोधी हो गए; जुलाई 1794 में उसे गिरफ्तार कर गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया।

गिलोटिन:-

एक ऐसी मशीन, जिसका उपयोग अपराधियों या दोषियों का सिर धड़ से अलग करने के लिए किया जाता था; इसका नाम इसके आविष्कारक डॉ. गिलोटिन के नाम पर रखा गया।

1.2.2 डायरेक्टरी शासन और नेपोलियन का उदय

डायरेक्टरी शासन:-

रोबेस्प्येर के पतन (1794) के बाद आतंक का युग समाप्त हो गया, और शासन की बागडोर मध्यम वर्ग के संपन्न लोगों के हाथ में आ गई।

  1. मध्यम वर्ग के संपन्न लोगों ने पाँच सदस्यों वाली एक कार्यपालिका "डायरेक्टरी" का गठन किया, जो शासन की देखरेख करती थी।
  2. डायरेक्टरी और विधान परिषद के बीच सत्ता के टकराव से देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई।

नेपोलियन बोनापार्ट:-

राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर नेपोलियन बोनापार्ट ने 1799 में डायरेक्टरी को समाप्त कर दिया और 1804 में स्वयं को फ्रांस का सम्राट घोषित किया।

  1. विस्तारवादी नीति के तहत उसने पड़ोसी यूरोपीय देशों पर विजय पाने के लिए अनेक युद्ध किए और वहाँ के पुराने राजवंशों को हटाकर अपने परिवार के सदस्यों को शासक बनाया।
  2. स्वयं को यूरोप का आधुनिकीकरणकर्ता मानते हुए उसने प्रशासन, कानून और शिक्षा में कई सुधार किए।
  3. 1815 में "वाटरलू" के युद्ध में नेपोलियन की पराजय के बाद उसका शासन समाप्त हो गया।

1.3 महिलाएँ और क्रांति

क्रांति में महिलाओं की भागीदारी:-

महिलाएँ फ्रांस में आरंभ से ही समाज में परिवर्तन लाने वाली गतिविधियों में शामिल रहीं और प्रदर्शनों, सभाओं व क्रांतिकारी आंदोलनों में भाग लेती थीं।

  1. अधिकांश महिलाएँ सिलाई-बुनाई, कपड़े धोना, फल-सब्ज़ी बेचना जैसे कार्यों से जीविका चलाती थीं और उन्हें पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी दी जाती थी।
  2. शिक्षा के अवसर सीमित थे — यह अवसर मुख्यतः कुलीन या धनी परिवारों की लड़कियों को ही मिलते थे।
  3. महिलाओं की प्रमुख माँग थी कि उन्हें पुरुषों के समान राजनीतिक अधिकार दिए जाएँ, जैसे मतदान का अधिकार और सार्वजनिक पदों पर समान अवसर।
नोट:- क्रांति के दौरान ओलंप द गूज ने "महिलाओं और नागरिक महिला अधिकारों की घोषणा" (1791) प्रकाशित की, जिसमें उसने महिलाओं के लिए समान अधिकारों की माँग रखी।

महिलाओं के जीवन में सुधार हेतु उठाए गए कदम:-

  1. क्रांतिकारी सरकार ने सरकारी विद्यालयों की स्थापना कर सभी लड़कियों के लिए शिक्षा को अनिवार्य किया।
  2. माता-पिता अब अपनी बेटियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध विवाह के लिए बाध्य नहीं कर सकते थे।
  3. महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने, कलाकार बनने और छोटे व्यवसाय चलाने की अनुमति दी गई।
  4. समान वेतन और मताधिकार के लिए संघर्ष अगली सदी तक कई देशों में जारी रहा।
नोट:- फ्रांस की महिलाओं को मतदान का अधिकार (मताधिकार) अंततः सन् 1946 में मिला।

1.4 दास-प्रथा का उन्मूलन

दास व्यापार और उसका उन्मूलन:-

17वीं सदी में फ्रांसीसी सौदागर अफ्रीका से दास खरीदकर उन्हें कैरिबियाई देशों में बेचने लगे; दासों को हथकड़ियों में बाँधकर जहाज़ों में ठूँसा जाता था।

  1. बोर्दो और नान्ते जैसे बंदरगाह दास व्यापार के कारण अत्यधिक समृद्ध हुए, जबकि 18वीं सदी तक फ्रांस में दास प्रथा की खुलकर निंदा नहीं की गई।
  2. सन् 1794 में नेशनल कन्वेंशन ने फ्रांसीसी उपनिवेशों में दासों की मुक्ति का कानून पारित किया।
  3. 10 वर्ष बाद नेपोलियन ने दास प्रथा पुनः शुरू कर दी, परंतु 1848 में इसे अंततः समाप्त कर दिया गया।
नोट:- कैरिबियाई द्वीप सेंट डोमिंग में दासों ने विद्रोह कर स्वतंत्र गणराज्य "हैती" की स्थापना की, जिससे फ्रांसीसी दास प्रथा के अंत की नींव पड़ी।

1.5 क्रांति और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में परिवर्तन

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बदलाव:-

1789 की क्रांति के बाद फ्रांस के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के जीवन में कई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन आए।

  1. क्रांतिकारी सरकार ने नए कानून बनाकर स्वतंत्रता एवं समानता के सिद्धांतों को लोगों के दैनिक जीवन में लागू करने का प्रयास किया।
  2. फ्रांस के शहरों में अखबार, पुस्तकें और चित्रों की संख्या बहुत बढ़ गई, जिनके माध्यम से लोगों को घटनाओं और सुधारों की जानकारी मिलने लगी।
  3. इन छपी हुई सामग्रियों के ज़रिए क्रांति के विचार गाँव-गाँव तक फैल गए और आम जनता में नई सोच व चेतना का विकास हुआ।
Scroll to Top