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Class 10 Science Notes in hindI Chapter - 1

Chapter 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण / Chemical Reactions and Equations 
Chapter Introduction: 
इस अध्याय में आप रासायनिक अभिक्रियाओं की मूल अवधारणाओं को समझेंगे। साथ ही विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ, रासायनिक समीकरण लिखने की विधि तथा उन्हें संतुलित करने के तरीके के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

नीचे अध्याय 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण के सभी महत्वपूर्ण topics को सरल भाषा में विस्तार से समझाया गया है जो NCERT syllabus पर आधारित हैं, तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय की सहायता से आप रासायनिक अभिक्रियाओं एवं समीकरणों को सरल भाषा में आसानी से समझ पाएँगे और Chemistry की मजबूत नींव तैयार कर सकेंगे।

CLASS 10 SCIENCE NOTES IN HINDI
CHAPTER 1 : रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

DETAILS

INFORMATION

Textbook

NCERT

Class

Class 10

Subject

Science

Chapter

Chapter 1

Chapter Name

रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

Medium

Hindi

 

क्या आप Class 10 Science Chapter 1 Notes in Hindi  ढूँढ रहे हैं?
यहाँ आपको रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण अध्याय के आसान और सरल नोट्स मिलेंगे। इस अध्याय में आप रासायनिक अभिक्रियाएँ, रासायनिक समीकरण संतुलन, ऑक्सीकरण-अपचयन तथा विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझेंगे।

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?
1.1 रासायनिक समीकरण क्या हैं?
  1.1.1 रासायनिक समीकरण कैसे लिखे जाते हैं?
  1.1.2 संतुलित रासायनिक समीकरण का क्या महत्व है?
1.2 रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार कौन-कौन से हैं?
  1.2.1 संयोजन अभिक्रिया क्या होती है?
  1.2.2 वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया क्या है?
  1.2.3 विस्थापन अभिक्रिया किसे कहते हैं?
  1.2.4 द्विविस्थापन अभिक्रिया क्या होती है?
  1.2.5 उपचयन एवं अपचयन क्या हैं?
1.3 क्या आपने दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं के प्रभावों को देखा है?
  1.3.1 संक्षारण क्या है?
  1.3.2 विकृतगंधिता क्या होती है?

Chapter Summary
इस अध्याय में आप रासायनिक अभिक्रियाओं और रासायनिक समीकरणों के बारे में सरल भाषा में समझेंगे। आप जानेंगे कि रासायनिक समीकरण किसी अभिक्रिया को प्रतीकों और रासायनिक सूत्रों की सहायता से कैसे दर्शाते हैं। साथ ही यह भी समझेंगे कि किसी रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक होता है और अभिकारकों तथा उत्पादों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान कैसे रखी जाती है।
आप संयोजन अभिक्रिया के बारे में पढ़ेंगे, जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं। इसके विपरीत वियोजन अभिक्रिया में एक पदार्थ टूटकर दो या अधिक पदार्थों में बदल जाता है।
इस अध्याय में आप ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं को भी समझेंगे। आप जानेंगे कि कुछ अभिक्रियाओं में ऊष्मा निकलती है, जबकि कुछ में ऊष्मा का अवशोषण होता है।
इसके अलावा आप विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाओं के बारे में पढ़ेंगे, जिनमें तत्व या आयनों का स्थान परिवर्तन होता है। अवक्षेपण अभिक्रिया के माध्यम से बनने वाले अविलेय लवणों की जानकारी भी प्राप्त करेंगे।
अंत में आप ऑक्सीकरण और अपचयन जैसी महत्वपूर्ण रासायनिक प्रक्रियाओं को समझेंगे, जिनमें ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का योग या हटना शामिल होता है। ये सभी अभिक्रियाएँ विज्ञान तथा दैनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

1.1 रासायनिक समीकरण क्या हैं?

रासायनिक अभिक्रिया क्या है :-

रासायनिक अभिक्रिया वे अभिक्रियाएँ होती हैं, जिनमें परिवर्तन के साथ नए गुणधर्म वाले पदार्थों का निर्माण होता है।

उदाहरण :- 

1. भोजन का पकना या पचना। 

2. श्वसन (साँस लेना और छोड़ना)।

3. किसी लोहे पर जंग का लगना।

4. दूध से दही का जमना।

रासायनिक अभिक्रिया की पहचान क्या है :-

“रासायनिक अभिक्रिया होने पर कुछ परिवर्तन दिखाई देते हैं जिनसे उसकी पहचान की जा सकती है।” रासायनिक अभिक्रिया अपने होने की पहचान छोड़ जाता है, कुछ ऐसी स्थितियाँ या कुछ ऐसे कारक हैं, जो कि ये बताते हैं, कि वहाँ पर रासायनिक अभिक्रिया हुई हैं

निम्नलिखित कारकों से यह पता चलता है, कि वहाँ रासायनिक अभिक्रिया हुई है :-

1. किसी पदार्थ का रंग बदलना

2. किसी पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन होना

3. तापमान में परिवर्तन होना 

4. किसी वस्तु में से सुगंध या दुर्गंध का आना

5. प्रकाश में परिवर्तन होना

6. गैस में परिवर्तन होना 

अभिकारक/अभिक्रमक किसे कहा जाता है :-

किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों को अभिकारक/अभिक्रमक कहा जाता है?

नोट :-

रासायनिक समीकरण में इन्हे बायीं ओर लिखा जाता है।

उत्पाद किसे कहा जाता है :-

वे सभी पदार्थ जिनका निर्माण किसी रासायनिक अभिक्रिया के द्वारा होता है उन्हे उत्पाद कहा जाता है। 

नोट :-

रासायनिक समीकरण में इन्हे दायीं ओर लिखा जाता है।

1.1.1 रासायनिक समीकरण कैसे लिखे जाते हैं?

रासायनिक समीकरण किसे कहते है :-

जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले सभी पदार्थों को जिसमें (अभिकारक और उप्ताद) दोनो शामिल होते हैं, इनको सूत्रों तथा प्रतीको के माध्यम से छोटा करके प्रदर्शित किया जाता है, तब इसे रासायनिक समीकरण कहा जाता है। 

नोट :- 

1. रासायनिक अभिक्रियाओं को ही रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है।

जैसे :- कार्बन + ऑक्सीजन = कार्बन डाइऑक्साइड (रासायनिक अभिक्रिया)

C     +   O2         →       O2  (रासायनिक समीकरण)

2. रासायनिक समीकरण में अभिकारक और उत्पादों के रासायनिक सूत्रों को उनकी भौतिक अवस्था के साथ और तत्वों को प्रतीकों के रूप में लिखा जाता है।

जैसे :- ठोस(s), द्रव(l), गैस(g)

3. रासायनिक समीकरण में आने वाली आवश्यक परिस्थितियाँ जैसे कि ताप दाब या उत्प्रेरक आदि को हम तीर के निशान के ऊपर या नीचे कहीं भी दर्शा सकते हैं। 

इन आवश्यक परिस्थितियों को हम रासायनिक अभिक्रिया की दशा भी कहते हैं।

सन्तुलित रासायनिक समीकरण किसे कहते है :-

सन्तुलित रासायनिक समीकरण उस समीकरण को कहते हैं, जिसमें बायीं तथा दायीं ओर दोनों पक्षों में  प्रत्येक तत्त्वों के परमाणुओं की संख्या बराबर होती है।

उदाहरण :- 

C + O2 ⟶ CO2

असन्तुलित रासायनिक समीकरण किसे कहते हैं :-

अथवा

कंकाली रासायनिक समीकरण किसे कहते हैं :-

असन्तुलित रासायनिक समीकरण अथवा कंकाली रासायनिक समीकरण उस समीकरण को कहते हैं, जिसमें दायीं तथा बायीं ओर दोनों पक्षों में  प्रत्येक तत्त्वों के परमाणुओं की संख्या बराबर नहीं होती है।

उदाहरण :- 

Mg + O2 ⟶ MgO

FeCl3  +  NaOH  →  Fe (OH)3  +  NaCl असंतुलित अभिक्रिया 

FeCl3  +  3NaOH  →  Fe (OH)3  +  3NaCl संतुलित अभिक्रिया

1.1.2 संतुलित रासायनिक समीकरण का क्या महत्व है?

संतुलित रासायनिक समीकरण के महत्त्व को समझाइए :-

संतुलित रासायनिक समीकरण निम्नलिखित दो कारणों से महत्वपूर्ण है :-

1. संतुलित रासायनिक समीकरण द्रव्यमान संरक्षण के नियम पर कार्य करता है।

2. संतुलित रासायनिक समीकरण में रासायनिक अभिक्रिया के बायें (अभिकारक) तथा दायीं ओर (उत्पाद) में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है।

द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या है :-

अथवा

संतुलित रासायनिक समीकरण में द्रव्यमान संरक्षण के नियम को समझाइए :-

द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार किसी भी संतुलित रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश होता है।

अर्थात द्रव्यमान संरक्षण का नियम यह कहता है कि एक संतुलित रासायनिक समीकरण में अभिक्रिया होने से पहले के तत्व जो कि अभिकारक होते हैं, और बाद के तत्व जिन्हे हम उत्पाद कहते हैं, इन प्रत्येक तत्वों के परमाणुओं की संख्या एक समान होनी चाहिए।

रासायनिक समीकरणों को संतुलित करने की विधियाँ बताइए :-

रासायनिक समीकरण को निम्नलिखित दो विधियों से संतुलित किया जाता है :-

1. अनुमान विधि (Hit and Trial Method)

2. आंशिक समीकरण विधि (Partial Equation Method)

अनुमान विधि (Hit and Trial Method) को विस्तार से समझाइए :-

अनुमान विधि (Hit and Trial Method):- इस विधि से संतुलित करते समय हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हम नीचे दिए गए क्रम के अनुसार समीकरण को संतुलित करें-

1. धातु – सबसे पहले हमें समीकरण में धातुओं को संतुलित करना चाहिए।

2. अधातु – धातुओं के बाद हमें समीकरण मेें अधातुओं को संतुलित करना चाहिए।

3. हाईड्रोजन – धातु और अधातु को संतुलित करने के बाद हमें हाई़ड्रोजन को संतुलित करना चाहिए।

4. ऑक्सीजन – और सबसे आखिर में हमें ऑक्सीजन को संतुलित करना चाहिए। 

यदि समीकरण में धातु या अधातु न हो या आप उनकी पहचान नही कर पा रहे हों तब हम जिस भी तत्व की अणुओं की संख्या अधिक हो उस तत्व को सबसे पहले संतुलित करते हैं।

 

नोट:-

हम कभी भी अणुओं की संख्या को तत्वों के नीचे की ओर बढ़ाकर नहीं लिखते हैं बल्कि तत्वों के आगे की ओर लिखते हैं।

 

आइए अब हम रासायनिक समीकरणों को हिट एंड ट्रायल विधि से चरणबद्ध तरीके से संतुलित करना सीखते हैं:-

 

चरण 1:- रासायनिक समीकरण के प्रत्येक सूत्र को एक बॉक्स में बंद कर लीजिए। 

NaCl + H2O ⟶ NaOH + Cl2 + H2 

1. और ध्यान रहें कि अभी समीकरण में कोई परिवर्तन नहीं करना है।   

चरण 2:-  समीकरण में विद्यमान सभी तत्वों और उनके परमाणुओं की संख्या की एक सूची बना लीजिए।

 

तत्व

परमाणुओं की संख्या (अभिकारकों में) (LHS)

परमाणुओं की संख्या (उत्पादों में) (RHS) 

Na

1

1

Cl

1

2

H

2

3

O

1

1

चरण 3:-  जैसा कि ऊपर बताया गया है सबसे पहले सभी धातुओं के अभिकारक अथवा उत्पाद में उचित संख्या से गुणा करके संतुलित कीजिए। यदि धातु के परमाणुओं की संख्या एक समान है तो वही प्रक्रिया अधातुओं के साथ शुरू कीजिए। 

2NaCl + H2O ⟶ NaOH + Cl2 + H2 

 

चरण 4:- चरण 3 की तरह पहले सभी अधातुओं को और फिर जैसा कि ऊपर बताया गया है, उसी तरह पूरी समीकरण को संतुलित कीजिए।

2NaCl + 2H2O ⟶ 2NaOH + Cl2 + H2

1. अब आप पाएंगे की समीकरण के दोनों और सभी तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान है।

 

तत्व

परमाणुओं की संख्या (अभिकारकों में) (LHS)

परमाणुओं की संख्या (उत्पादों में) (RHS) 

Na

2

2

Cl

2

2

H

4

4

O

2

2

चरण 5:- समीकरण में अभिकारकों एवं उत्पादों की भौतिक अवस्थाओं को लिखना:- 

भौतिक अवस्थाएँ:-

1. ठोस(s)

2. जलीय(aq)

3. गैस(g)

4. द्रव(l)

2NaCl(aq) + 2H2O(l) ⟶ 2NaOH(aq) + Cl2(g) + H2(g)

 

चरण 6:- समीकरण में दाब, ताप, उत्प्रेरक  या विलेकण आदि को तीर के निशान के नीचे या ऊपर लिखना चाहिए।

              विलेकण

2NaCl(aq) + 2H2O(l)    ⟶   2NaOH(aq) + Cl2(g) + H2(g)

1. अब जैसा कि आप देख सकते हैं, समीकरण में अभिकारक और उत्पाद दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या बराबर है, इसलिए यह समीकरण एक संतुलित समीकरण है।
2. किसी समीकरण को संतुलित करने की इस विधि को हिट एंड ट्रायल विधि कहा जाता है।

उत्प्रेरक क्या होते हैं :-

उत्प्रेरक रासायनिक प्रतिक्रिया को प्रवर्तित करने में मदद करता है।

उदाहरण:- 

1. ऊष्मा 

2. प्रकाश 

3. ध्वनि 

4. इलेक्ट्रामाग्नेटिक तरंगें

5. कठोरता 

6. एन्जाइम

7. उच्च या निम्न तापमान 

विलेकण क्या होते हैं :-

विलेकण (Catalyst) एक तरह का पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रियाओं को बिना खुद में परिवर्तित किए प्रेरित करने में सक्षम होता है। इसका मतलब है कि विलेकण स्वयं को रासायनिक अभिक्रिया में घोलता या नष्ट नहीं करता है वह अभिक्रिया के अंत के समय तक बदलता नहीं है। 

उदाहरण:- 

2H2O2 → 2H2O + O2

यह विलेकण का एक उदाहरण है, जिसमें हाइड्रोजन परोक्साइड एक विलेकण है।

आंशिक समीकरण विधि (Partial Equation Method) को विस्तार से समझाइए :-

आंशिक समीकरण विधि:- इस विधि से हम निम्नलिखित प्रक्रिया से रासायनिक समीकरण को संतुलित करते है:-

1. समीकरण को तोड़ना

2. समीकरण को संतुलित करना

3. समीकरण को जोड़ना

 

आइए इसे समझते है:- 

सबसे पहले एक समीकरण लीजिए

Cu + H2SO4 ⟶ CuSO4 + SO2 + H2O

1. समीकरण को तोड़ना और संतुलित करना:- पहले समीकरण को तोड़कर उन्हे संतुलित कर लें

2. सबसे पहले तीर के दाएं तरफ के पहले पदार्थ को लिखे फिर उस पदार्थ में शामिल सभी अभिकारकों को तीर के बायीं तरफ लिख लें और फिर इस समीकरण को संतुलित कर लें।

Cu + H2SO4 ⟶ CuSO4 + 2H  

3. उपरोक्त प्रक्रिया को जारी रखे और यही प्रक्रिया तीर के दायीं तरफ के दूसरे पदार्थ के साथ भी करें। 

H2SO4 ⟶ SO2 + H2O + O

4. अब तीर के दायीं तरफ के सभी पदार्थ के साथ यही प्रक्रिया जारी रखें।

2H + O  ⟶   H2O

5. समीकरण को जोड़ना:- अब इन्हे जोड़कर लिख लें।

Cu + H2SO4 ⟶ CuSO4 + 2H      …..(1

         H2SO4 ⟶ SO2 + H2O + O  …..(2)

                    2H + O ⟶  H2O       …..(3

_________________________________________

Cu + 2H2SO4 ⟶ CuSO4 + SO2 + 2H2O

_________________________________________ 

नोट :-

समीकरण को जोड़ते समय तीर के दोनों तरफ के समान सूत्र को हम एक दूसरे से काट सकते हैं। 

उदाहरण:- (1) में तीर के दायीं तरफ के 2H को हम समीकरण (3) के तीर के बायीं तरफ के 2H से काट देंगे। इसी तरह समीकरण (2) में तीर के दायीं तरफ के O को समीकरण (3) के तीर के बायीं तरफ के O से काट देंगे। इसके बाद हम समीकरण को जोड़ देंगे।

 

इस प्रकार हमें Cu + 2H2SO4 ⟶ CuSO2 + SO2 + 2H2O प्राप्त होगा।

1. जैसा कि अब आप देख सकते हैं, कि यह समीकरण संतुलित है।

2. किसी समीकरण को संतुलित करने की इस विधि को आंशिक समीकरण विधि कहते हैं।

1.2 रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार कौन-कौन से हैं?

रासायनिक अभिक्रियाएँ कितने प्रकार की होती है :-

रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित पाँच प्रकार की होती है :-

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

4. द्वी-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

5. उपचयन एवं अपचयन अभिक्रिया (Oxidation and Reduction Reaction)

1.2.1 संयोजन अभिक्रिया क्या होती है?

संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) किसे कहते हैं :-

संयोजन अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिस अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ (अब चाहे वो तत्व हों या यौगिक) संयोग करके एक एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, तब ऐसी अभिक्रियाओ को हम संयोजन अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

1. जल का निर्माण:-  2H2(g) + O2(g) → 2H2O(l)

2. कोयले का जलना:- C(s) + O2(g) → CO2(g)

नोट:-

संयोजन अभिक्रिया में कभी भी सह उत्पाद नहीं बनता है।

सह उत्पाद किसे कहते है :-

सह-उत्पाद (byproduct) उस पदार्थ को कहते है जिसका निर्माण एक रासायनिक अभिक्रिया के दौरान प्राथमिक रूप से नहीं होता है, लेकिन वह पदार्थ अभिक्रिया के प्रमुख उत्पाद के साथ संयोजित होता है। इसका अर्थ यह है कि सह-उत्पाद एक रासायनिक अभिक्रिया के उत्पाद में या प्रतिक्रिया में होता तो जरूर है, लेकिन यह पदार्थ रासायनिक अभिक्रिया के प्राथमिक माध्यम के द्वारा नहीं बनता है।

उदाहरण:-

प्राथमिक रासायनिक अभिक्रिया: 2H2(g) + O2(g) → 2H2O(g)

यहाँ, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस को विद्युतीकरण के द्वारा जल में बदला गया हैं और पानी का निर्माण किया गया है। यहां पर, मात्र पानी ही प्राथमिक उत्पाद है।

 

परन्तु, आइए अब हम इस रासायनिक अभिक्रिया को आंशिक रूप से देखते हैं:-

2H2(g) + O2(g) → 2H2O(g) + X

यहां ‘X’ एक सह-उत्पाद है जो कि इस रासायनिक अभिक्रिया के दौरान विद्युतीकरण के रूप में उत्पन्न होने वाली एक ऊष्मा हो सकती है। इसलिए, ‘X’ को सह-उत्पाद कहा जाएगा।

इस तरह, सह-उत्पाद एक रासायनिक अभिक्रिया के उत्पाद में उस अनुपस्थित पदार्थ को कहते है जो रासायनिक अभिक्रिया के प्राथमिक माध्यम के द्वारा उत्पन्न नहीं होता है, लेकिन अभिक्रिया के साथ संयोजित जरूर होता है। 

ऊष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रिया क्या होती है :-

ऊष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रियाएँ वे अभिक्रियाएँ होती है, जो किसी उत्पाद का निर्माण तो करती ही है साथ ही साथ वह उष्मा का भी निर्माण करती है। ऊष्मा का निर्माण करने के कारण ही इन्हे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहा जाता है।

उदाहरण:- 

1. श्वसन प्रक्रिया:- C6H12O6(aq) + 6O2(aq) → 6CO2(aq) + 6H2O(l) + ऊर्जा

2. प्राकृतिक गैसों का दहन:- CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(g) + ऊर्जा

1.2.2 वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया क्या है?

वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) क्या होती है :-

वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) वे अभिक्रियाएँ होती हैं, जिसमेें एक अभिकारक टूट कर दो या दो से अधिक उत्पादों का निर्माण करते हैं।

वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) कितने प्रकार की होती है :-

वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) तीन प्रकार की होती है:-

1. ऊष्मीय वियोजन

2. विद्युत/वैद्युत वियोजन

3. प्रकाशीय वियोजन

ऊष्मीय वियोजन किसे कहते हैं :-

किसी रासायनिक अभिक्रिया में ऊष्मा द्वारा किए गए वियोजन को ऊष्मीय वियोजन कहते हैं।

विद्युत/वैद्युत वियोजन किसे कहते हैं :-

किसी रासायनिक अभिक्रिया में विद्युत की धारा के द्वारा किए गए वियोजन को विद्युत वियोजन कहते हैं।

प्रकाशीय वियोजन किसे कहते हैं :-

किसी रासायनिक अभिक्रिया में सूर्य के प्रकाश की ऊष्मा द्वारा किए गए वियोजन को प्रकाशीय वियोजन कहते हैं।

उष्माशोषी अभिक्रिया किसे कहते हैं :-

वे अभिक्रियाएं जो उष्मा का शोषण करती है, उष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

अथवा

वे अभिक्रियाएँ जो रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों को तोड़ने के लिए सूर्य के प्रकाश, विद्युत की ऊर्जा या ऊष्मा को ऊर्जा के रूप में प्रयोग करते हैं उष्माशोषी अभिक्रिया कहलाते हैं।

उदाहरण:-

1. CaCO3(s) → CaO(s) + CO2(g)

2. 2H2O2(l) → 2H2O(l) + O2(g)

1.2.3 विस्थापन अभिक्रिया किसे कहते हैं?

विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) क्या होती है :-

जब किसी अभिक्रिया मे अधिक क्रियाशील वाला एक तत्व कम क्रियाशील वाले दूसरे तत्व को उसके ही  यौगिक से विस्थापित कर देता है, तब वह अभिक्रिया विस्थापन अभिक्रिया कहलती है।

उदाहरण:-

CuSO4(aq) (कॉपर सल्फ़ेट) + Fe(s) → FeSO4(aq) (आयरन सल्फ़ेट) + Cu(s)

यहाँ आयरन कॉपर से अधिक क्रियाशील तत्व है।

 

कॉपर सल्फेट के विलयन में लोहे की कील रखने पर कॉपर सल्फेट का नीला रंग हल्का हरा हो जाता है। ऐसा फेरस सल्फेट के निर्माण होने के कारण होता है, और लोहे की कील पर भूरे रंग की परत के रूप में कॉपर प्राप्त होता है।

Pb(s) + CuCl2(aq)(कॉपर क्लोराइड) → PbCl2(aq)(लेड क्लोराइड) + Cu(s)

यहाँ लेड, कॉपर से अधिक क्रियाशील तत्व है।

1.2.4 द्विविस्थापन अभिक्रिया क्या होती है?

द्वी-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) क्या होती है :-

जिस अभिक्रिया में दो यौगिकों के बीच आयनों के आदान प्रदान से उत्पादों का निर्माण होता है, वह अभिक्रिया द्वी-विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

उदाहरण:-

Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)

नोट:-

उपरोक्त अभिक्रिया में BaSO2(s) बेरियम सल्फेट नामक सफेद रंग के पदार्थ का निर्माण होता है। जो कि जल में अघुलनशील होता है। इस अघुलनशील पदार्थ को अवक्षेप कहते हैं। 

अवक्षेप किसे कहते है :-

रासायनिक अभिक्रिया में निर्मित वह पदार्थ जो कि जल में अघुलनशील हो अवक्षेप कहलाते हैं। 

उदाहरण:- 

Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)

यहाँ BaSO4(s) बेरियम सल्फेट अवक्षेप है।

अवक्षेपण अभिक्रिया किस अभिक्रिया को कहते है :-

जिस अभिक्रिया में अवक्षेप का निर्माण हो उस अभिक्रिया को अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)

1.2.5 उपचयन एवं अपचयन क्या हैं?

उपचयन क्या है :-

जब किसी अभिक्रिया में पदार्थ के ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन का ह्रास होता है तब हम कहते है, कि उस पदार्थ का उपचयन हुआ है।

उदाहरण:- 

1. 2Mg + O2 → 2MgO

2. 2H2 + O2 → 2H2O

अपचयन क्या है :-

उपचयन के ठीक विपरीत किसी भी पदार्थ का अपचयन तब होता है जब उसमें ऑक्सीजन का ह्रास अथवा हाइड्रोजन की वृद्धि होती है।

उदाहरण:- 

1. CaCO3 → CaO + CO2

2. CuO + H2 → Cu + H2O

रेडॉक्स क्या है :-

उत्तर :- जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में एक अभिकारक अपचयित हो रहा हो तथा दूसरा अभिकारक उपचयित हो रहा  हो तो उन अभिक्रियाओं को अपचयन-उपचयन अथवा रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण:- 

1. CuO + H2 → Cu + H2O

2. NH4NO3 → N2O + 2H2O

1.3 क्या आपने दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं के प्रभावों को देखा है?

दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाओं के क्या प्रभाव है? समझाइए :-

हमारे दैनिक जीवन में उपचयन अभिक्रियाएँ हमें मुख्य रूप से दो प्रकार से प्रभावित करती हैं-

1. संक्षारण

2. विकृतगंधिता

1.3.1 संक्षारण क्या है?

संक्षारण क्या  है :-

जब कोई धातु अपने आस-पास के वातावरण में अम्ल, ऑक्सीजन या आद्रर्ता आदि के संपर्क में आती है तब ये संक्षारित होने लगती हैं और इसी प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। 

उदाहरण:- 

1. ताँबे के ऊपर हरी पर्त चढ़ना 

2. चाँदी के ऊपर काली पर्त चढ़ना 

3. लोहे पर जंग लगना

संक्षारण से बचाव के उपाय क्या-क्या  है :-

निम्नलिखित तरीकों से संक्षारण से बचा जा सकता है :-

1. धातुओं पर पेन्ट करके

2. धातुओं पर विद्युत लेपन करके

3. यशदलेपन के द्वारा

1.3.2 विकृतगंधिता क्या होती है?

विकृतगंधिता क्या  है :-

तैलीय खाद्य पदार्थ तथा वसायुक्त पदार्थ वायु से संपर्क होने से उपचयित हो जाते हैं, जिसके कारण उनके गंध और स्वाद में परिवर्तन हो जाता है, इस प्रक्रिया को ही विकृगंधिता कहते हैं।

विकृतगंधिता को कैसे रोका जा सकता है? उपाय बताइए :-

विकृतगंधिता की प्रक्रिया को निम्नलिखित तरीको से रोका जा सकता है :-

1. खाद्य सामग्री को वायुरोधी बर्तनों में रखें

2. ऑक्सीजन के स्थान पर नाईट्रोजन का इस्तेमाल करके 

3. शीतलन की मदद से 

4. प्रति ऑक्सीकारक का प्रयोग करके

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